न्यायपालिका का काम सरकार और विपक्ष को मज़बूत या कमज़ोर करने का नहीं है: जस्टिस संजय किशन कौल- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, ANI
सुप्रीम कोर्ट में जज पद से रिटायर हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा है कि न्यायपालिका का काम सरकार और विपक्ष को मज़बूत या कमज़ोर करना नहीं है.
उन्होंने द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में कहा, " संविधान के तहत न्यायाधीशों को संरक्षण प्राप्त है और उन्हें बोल्ड होना चाहिए."
समलैंगिक विवाह और अनुच्छेद 370 जैसे कई अहम फ़ैसले देने वाली पीठ का हिस्सा रहे जस्टिस संजय किशन कौल ने कहा कि न्यायपालिका को निश्चित तौर पर सरकार का राजनीतिक विपक्षी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. सरकार या विपक्ष को मज़बूत और कमज़ोर करने का काम न्यायपालिका का नहीं है.
वहीं, सरकार के रुख़ वाले कुछ मामलों को प्राथमिकता या कुछ मामलों में हस्तक्षेप या स्थगन या फिर सप्ताहांत में सुनवाई को लेकर न्यायपालिका के बारे में पूछे गए सवाल का भी जवाब उन्होंने दिया.
उन्होंने कहा, "जब आप मामले को लेने, उन्हें किस तरह लेना चाहिए और किस तरह की प्राथमिकता देनी चाहिए के बारे में बात करते हैं तो मेरा मानना है कि न्यायपालिका को बराबरी से काम लेना चाहिए. ये धारणा नहीं बननी चाहिए कि हम मामलों को इसलिए ले रहे हैं कि हम सरकार को मज़बूत करना चाहते हैं. ये न्यायपालिका का काम नहीं है कि वो विपक्ष और सरकार को मज़बूत या कमज़ोर करने का काम करे."
आर्टिकल 370 लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने कहा, "आर्टिकल 370 का मामला सुनवाई के लिए लिया गया था. ये रोजाना चल रहा था लेकिन वकीलों के बीच मतभेद हुए कि इस मामले को पांच जजों की बेंच या सात जजों की बेंच के पास भेजें. हां कुछ मामलों में देरी हुई लेकिन अगर आप मामलों की संख्या देखें तो किसको प्राथमिकता दी जानी चाहिए ये भारत के मुख्य न्यायाधीश के विशेषाधिकार के अंतर्गत आता है.''
''जब आप देखते हैं कि वो मास्टर ऑफ रोस्टर हैं तो ये भी जानिए कि वो मास्टर ऑफ़ लिस्टिंग हैं. ये फ़ैसले वही ले सकते हैं कि किस मामले को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.''
जब बहुमत वाली सरकार आती है तो क्या न्यायपालिका पर किसी किस्म का दबाव आता है?
दरअसल समस्या न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन का है. जब कभी बहुमत वाली सरकार आती है, न्यायपालिका पर थोड़ा दबाव तो होता है लेकिन न्यायपालिका का काम चेक एंड बैलेंस का है. ये संवैधानिक व्यवस्था है.

इमेज स्रोत, ANI
'नागरिकों का दिल जीतें'
पुंछ में चार सैनिकों की मौत और सेना के कथित टॉर्चर में तीन नागरिकों की मौत के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश पहुंचे.
राजौरी में उन्होंने सेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि वो लोगों का दिल जीतें.
उन्होंने कहा, “भारतीय सेना को दुनिया में कोई आम ताकत नहीं माना जाता है. लोग स्वीकार करते हैं कि सेना पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली है. आप देश के संरक्षक हैं लेकिन देश की रक्षा के साथ-साथ आपको नागरिकों का दिल भी जीतना है. यह आपके कंधों पर ये जिम्मेदारी एक बड़ी है.”
21 दिसंबर को पुंछ में सेना के दो वाहनों पर घात लगाकर हमला किया गया था जिसमें सेना के चार जवान मारे गए थे और दो घायल हुए.
इसके बाद 22 दिसंबर को पुंछ के एक आर्मी कैंप में आठ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. इस पूछताछ में कथित टॉर्चर के दौरान तीन लोगों की मौत हो गई. इन सब के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार को जम्मू पहुंचे थे.
सिंह ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हार्ड इंटेलिजेंस के आधार पर तय अभियान प्रक्रिया के तहत ही काम करें.

इमेज स्रोत, Getty Images
इंडिया के लिए पीएम का चेहरा घोषित करना अनिवार्य नहीं
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार ने दोहराया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया के लिए चुनाव से पहले पीएम मोदी के बनाम प्रधानमंत्री चेहरे की घोषणा करना अनिवार्य नहीं है.
दरअसल कुछ समय पहले एनसीपी में बगावत करने वाले शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने कहा था कि मौजूदा समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है.
पवार ने कहा कि पीएम मोदी से मुकाबला करने के लिए इंडिया गठबंधन के पास पीएम चेहरा होना अनिवार्य नहीं है. उन्होंने कहा, " इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर करने के लिए बने गठबंधन ने 1977 आम चुनाव से पहले पीएम का चेहरा तय नहीं किया था. जब जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी को हरा दिया इसके बाद मोरारजी देसाई के नाम की घोषणा हुई."
उन्होंने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के परिणामों के बारे में कहा कि ये रिजल्ट इंडिया गठबंधन के अनुमान के मुताबिक नहीं रहे लेकिन इसका मतलब नहीं है कि ये गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है.
वहीं, इंडिया गठबंधन में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी बसपा को शामिल करने के बारे में उन्होंने कहा कि मायावती की भूमिका उत्तर प्रदेश तक सीमित है.
उन्होंने कहा, " राज्य में हमारी मुख्य सहयोगी समाजवादी पार्टी है. इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच हुई बैठक में सपा ने बसपा को शामिल कराने के बारे में अलग तरीके के बयान दिए. हमारा इरादा कोई भी ऐसा निर्णय लेने का नहीं है जिससे समाजवादी पार्टी को चोट पहुंचे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















