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सेबी की माधबी पुरी बुच कौन हैं, जो हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद चर्चा में आईं
अमेरिकी रिसर्च कंपनी हिंडनबर्ग ने बाज़ार नियामक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर रविवार रात एक बार फिर सवाल उठाए हैं.
हिंडनबर्ग ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर दस्तावेज़ों के साथ एक पोस्ट करते हुए कुछ दावे भी किए.
हिंडनबर्ग ने माधबी की सफाई वाले बयान को री-ट्वीट करते हुए लिखा- "हमारी रिपोर्ट पर सेबी चेयरपर्सन माधबी बुच की प्रतिक्रिया में कई ज़रूरी बातें स्वीकार की गई हैं और कई नए महत्वपूर्ण सवाल भी खडे़ हुए हैं."
हिंडनबर्ग ने कहा- माधबी बुच के जवाब से पुष्टि होती है कि उनका बरमूडा/मॉरीशस के फ़ंड में निवेश था. जिसका पैसा विनोद अदानी ने इस्तेमाल किया. उन्होंने (माधबी) पुष्टि की है कि ये फ़ंड उनके पति के बचपन के दोस्त चलाते थे, जो तब अदानी के डायरेक्टर थे.
रविवार शाम सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने दो पन्नों का एक बयान जारी कर हिंडनबर्ग के दावों पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी.
उन्होंने कहा था कि रिपोर्ट में जिस फ़ंड का ज़िक्र किया गया है, उसमें 2015 में निवेश किया गया था और ये माधबी के सेबी का सदस्य बनने से दो साल पहले का मामला है.
इससे पहले अमेरिकी शॉर्ट सेलर फ़ंड ‘हिंडनबर्ग’ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच की उन ऑफ़शोर कंपनियों में हिस्सेदारी रही है, जो अदानी समूह की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी हुई थीं.
हिंडनबर्ग ने ये आरोप व्हिसलब्लोअर दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए लगाया है. बीबीसी ने इन दस्तावेज़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.
कौन हैं माधबी पुरी बुच
माधबी पुरी बुच ने आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की पढ़ाई की है. उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफ़न कॉलेज से मैथ्स में ग्रेजुएशन किया है.
सेबी की वेबसाइट के मुताबिक़- माधबी पुरी बुच 2 मार्च 2022 से सेबी की चेयरपर्सन हैं.
माधबी पुरी ने 4 अक्टूबर 2021 तक सेबी की पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर काम किया.
इस दौरान माधबी के पास बाज़ार विनियमन विभाग, बाज़ार मध्यस्थ विनियमन और पर्यवेक्षण विभाग की ज़िम्मेदारी थी.
पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर माधबी ने एकीकृत निगरानी विभाग, निवेश प्रबंधन विभाग जैसे कई अहम विभागों को संभाला है.
किन ज़िम्मेदारियों को संभाल चुकी हैं माधबी
माधबी बुच ने शंघाई में न्यू डेवलपमेंट बैंक में सलाहकार के तौर पर भी काम किया है.
माधबी बुच ने प्राइवेट इक्विटी फर्म ‘ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल’ के सिंगापुर कार्यालय के प्रमुख के तौर पर भी काम किया.
वो आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज़ लिमिटेड में प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी और आईसीआईसीआई बैंक के बोर्ड में कार्यकारी निदेशक का पद भी संभाल चुकी हैं.
बुच ने विभिन्न कंपनियों के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर भी काम किया है.
माधवी पुरी ने सेबी का चेयरमैन बनने के बाद आईआईएम अहमदाबाद के दीक्षांत समारोह में कहा था, “मैंने पिछले 35 साल को खूब इंजॉय किया. मुझे कई तरह के काम करने का मौक़ा मिला. मैंने नए बिज़नस खड़े किए.”
"मैं कोई भी कोशिश नहीं छोड़ती. मेरे साथी अक्सर कहते थे कि मेरे साथ किसी मुद्दे का समाधान करना प्याज के छिलके उतारने जैसा होता है, इससे हर किसी से आँख में आंसू होता है. लेकिन छिलके को उतारते हुए अंत में आप देखते हैं कि कोई समस्या नहीं बची है."
माधबी पुरी का करियर
अंग्रेज़ी अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़- साल 1966 में जन्मी माधबी पुरी का बचपन मुंबई में गुज़रा है. उन्होंने स्कूल की पढ़ाई मुंबई में पूरी की.
फ़ाइनेंस के क्षेत्र में उनका उनका सफर साल 1989 में शुरू हुआ था, जब वो आईसीआईसीआई बैंक के साथ जुड़ी थीं.
आईसीआईसीआई में बुच ने अपने कार्यकाल में निवेश बैंकिंग से लेकर विपणन और उत्पाद विकास तक में कई भूमिकाएं निभाईं.
उनके नेतृत्व की ख़ासियत उस वक़्त सामने आई जब वो साल 2009 में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और सीईओ बनने पहली महिला बनीं.
माधबी के नेतृत्व में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने बड़ी सफलता हासिल की. जिसमें मार्केट शेयर में इज़ाफ़ा और नए निवेश उत्पादों को लागू करना शामिल था. नेतृत्व को लेकर उनके नज़रिया जोखिम प्रबंधन और संचालन की क्षमता केंद्रित था.
आईसीआईसीआई छोड़ने के बाद बुच ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने काम का विस्तार किया. उन्होंने शंघाई में न्यू डेवलपमेंट बैंक में सलाहकार के तौर पर काम किया और एक निजी इक्विटी फर्म ग्रेटर पैसिफिक कैपिटल’ के सिंगापुर कार्यालय का जिम्मा संभाला.
भारत लौटने पर बुच ने आइडिया सेल्युलर लिमिटेड और एनआईआईटी लिमिटेड सहित कई कंपनियों के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक पद पर काम किया.
उनके इन अनुभवों ने उनको साल 2017 में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य (डब्ल्यूटीएम) बनने में मदद की. जहां उन्होंने निगरानी और म्यूचुअल फंड जैसे प्रमुख पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया.
सेबी का नेतृत्व करने वालीं पहली महिला
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़ तत्कालीन सेबी अध्यक्ष अजय त्यागी के साथ उनके अच्छे सहयोग ने उनके प्रभाव को और मज़बूत किया.
मार्च 2022 में बुच सेबी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं.
अख़बार के मुताबिक़- सेबी में उनका नेतृत्व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (एनआईएसएम) को आगे बढ़ाने और भारत के वित्तीय बाजारों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नीतिगत सुधारों को आगे बढ़ाने में सहायक रहा है.
माधबी के पति धवल बुच का भी करियर ख़ास रहा है.
हालांकि वो सार्वजनिक तौर पर चर्चा में कम रहे हैं.
माधबी की तरह उनकी व्यावसायिक यात्रा को कॉर्पोरेट जगत में ख़ास उपलब्धियों से जाना जाता है. हालाँकि हिंडनबर्ग रिसर्च के हालिया आरोपों ने उन्हें अडानी समूह से जोड़कर सुर्खियों में ला दिया है.
अग्रेज़ी अख़बार बिजनस स्टैंडर्ड के मुताबिक़- धवल बुच आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र रहे हैं.
धवल निजी इक्विटी (पीई) प्रमुख ब्लैकस्टोन और कंसल्टेंसी फर्म अल्वारेज़ एंड मार्सल में वरिष्ठ सलाहकार हैं. वो खिलाड़ियों के लिए कपड़े बनाने वाले ब्रांड गिल्डन में एक गैर-कार्यकारी निदेशक भी हैं.
उनका कॉर्पोरेट करियर तीन दशकों से ज़्यादा पुराना है.
साल 2013 में धवल और माधबी ने सिंगापुर में एक वित्तीय सेवा कंसल्टेंसी ‘अगोरा एडवाइजरी’ की स्थापना की थी.
इसका मक़सद इनक्यूबेशन, निवेश और परामर्श के माध्यम से प्रभावशाली व्यवसायों सपोर्ट करना था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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