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एचएमपीवी की भारत में भी दस्तक, जानिए क्या हैं लक्षण और बचाव
चीन में एचएमपीवी (ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस) के मामलों में वृद्धि की ख़बरों के बाद अब कर्नाटक में भी इससे संक्रमण के दो केस सामने आए हैं.
इसके बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि लोगों को इससे घबराने की ज़रूरत नहीं है.
मंत्रालय ने कहा है कि मीडिया में ऐसी ख़बरें आई हैं कि चीन में एचएमपीवी फैल रहा है लेकिन यहाँ एचएमपीवी सांस से संबंधित एक सामान्य वायरस है जो सर्दी-ज़ुकाम जैसी बीमारियां पैदा करता है.
पीआईबी पर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में मंत्रालय ने कहा है कि एचएमपीवी के मामले पहले से ही भारत सहित विश्व भर में देखने को मिले हैं और एचएमपीवी से जुड़ी सांस संबंधी बीमारियों के मामले कई देशों में सामने आए हैं.
कर्नाटक में संक्रमण के दो मामले
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि एचएमपीवी के जो दो मामले सामने आए हैं, उनमें से एक तीन महीने की बच्ची है और एक आठ महीने का बच्चा है. ये दोनों ही मामले तीन जनवरी को सामने आए हैं.
कर्नाटक में एचएमपीवी का पहला मामला सामने आने के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने बीबीसी हिन्दी को बताया, " इसे एचएमपीवी का पहला मामला बताना ग़लत होगा क्योंकि ये वायरस पहले से ही भारत में है. बच्चे इस वायरस से पीड़ित होते हैं."
राव ने बताया, "बच्ची के परिवार का कहीं यात्रा करने का भी इतिहास नहीं है. हमें अभी ये नहीं पता है कि चीन वाला वायरस का प्रकार अलग है या नहीं. भारत सरकार ने हमें अभी वेरिएशन या म्यूटेशन के बारे में सूचना नहीं दी है."
राव ने बताया कि बच्चे की हालत स्थिर है.
चीन ने इस वायरस के बारे में क्या बताया?
अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट ग्लोबल टाइम्स को चीन की सत्ताधारी पार्टी का मुखपत्र माना जाता है.
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, उत्तरी चीन के इलाक़ों के अलावा बीजिंग, दक्षिण पश्चिमी शहर चोंगकिंग, दक्षिणी चीन के गुआंगदोंग प्रांत में एचएमपीवी के मामले सामने आए हैं.
शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य सवालों के बीच ये सवाल भी उठाया गया था.
इसके जवाब में माओ निंग ने कहा कि उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों के मौसम में सांस की नली में संक्रमण के मामले अधिक सामने आते हैं.
27 दिसंबर 2024 को समाचार एजेंसी रॉयटर्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ चीन की स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा कि सर्दियों में सांस की बीमारी के बढ़ते मामलों को देखते हुए वो पायलट सर्विलांस सिस्टम शुरू कर रहे हैं.
इस सर्विलांस सिस्टम के बारे में चीन के नेशनल डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन के प्रमुख ली जेंगलॉन्ग ने कहा था कि इसके ज़रिए अज्ञात कारणों से होने वाले निमोनिया के मामलों की निगरानी की जाएगी.
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में चीनी सरकार के हवाले से जारी एक बयान के आधार पर कहा कि चीन में दिसंबर महीने के तीसरे सप्ताह में सांस की बीमारी से परेशान लोगों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इस रिपोर्ट के अनुसार, दर्ज किए मामलों में राइनोवायरस और ह्यूमन मेटान्यूमो वाइरस (एचएमपीवी) के संक्रमण के मामले अधिक हैं. संक्रमण के अधिक मामले उत्तर के प्रांतों में दर्ज किए गए हैं और संक्रमितों में 14 साल से कम उम्र के बच्चों की संख्या अधिक है.
रिपोर्ट के अनुसार ह्यूमन मेटान्यूमो वायरस के स्रोत के बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है.
एचएमपीवी के लक्षण
एचएमपीवी फैलता कैसे है?
ये संक्रामक बीमारी है. खांसी और छींक से के दौरान निकलने वाले थूक के कणों से ये वायरस फैलता है और लोगों को संक्रमित करता है.
हाथ मिलाने, गले मिलने या एक दूसरे को छूने से भी ये फैल सकता है.
अगर खांसी और छींक के कारण किसी सतह पर थूक के कण गिरे हैं और उस सतह पर हाथ लगाने के बाद आप उस हाथ से अपने चेहरे, नाक, आंख या मुंह को छूते हैं तो भी ये वायरस को आपको संक्रमित कर सकता है.
क्या करें और क्या न करें
- खांसते-छींकते वक़्त मुंह पर रुमाल या कपड़ा रखें. खांसने और छींकने के लिए अलग रूमाल या तौलिए का इस्तेमाल करें, जिसे कुछ घंटों के बाद साबुन से धो दें.
- अगर आपको सर्दी ज़ुक़ाम है तो मास्क पहन कर रखें. घर पर रहें और आराम करें. बाहर न जाएं.
- पानी पीते रहें और पोषक खाद्य पदार्थ खाएं
- पहले से ही सांस की कोई बीमारी है, तो अपना ख़ास ख़्याल रखें.
- बिना डॉक्टर के परामर्श से दवाएं न लें
एचएमपीवी वायरस क्या है और चिंता की कितनी बात
साइंस डाइरेक्ट के अनुसार इस वायरस की उत्पत्ति आज से 200 से 400 साल पहले चिड़ियों से हुई थी. लेकिन तब से लेकर अब तक ये वायरस खुद को बार-बार बदलता रहा है और अब ये वायरस चिड़ियों को संक्रमित नहीं कर सकता.
अमेरिकी सरकार की सेंटर फ़ॉर डीज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी) के अनुसार इंसानों मे इसकी खोज साल 2001 में हुई, यानी इस साल पता चला कि ये वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है.
द गार्डियन की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया है कि एचएमपीवी कोविड जैसा नहीं है. ये कई दशकों से मौजूद है और लोगों में इसको लेकर एक लेवल का इम्युनिटी है. इसकी तुलना में कोविड-19 एक नई बीमारी थी जिससे मनुष्य पहले कभी नहीं संक्रमित नहीं हुआ था, इसलिए इसने महामारी का रूप ले लिया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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