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पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान ख़ान के पास गिरफ़्तारी के बाद अब ये विकल्प हैं
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को इस्लामाबाद की जिला और सेशन कोर्ट ने तोशाखाना मामले में दोषी पाया है.
उन्हें तीन साल की जेल और एक लाख रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया.
इमरान ख़ान पर आरोप हैं कि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्हें जो भी तोहफ़े दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिले थे उन्हें उन्होंने बेच दिया लेकिन इससे मिले धन को उन्होंने अपने दस्तावेज़ों में नहीं दिखाया.
पाकिस्तान में क़ानूनी मामलों की जानकार ज़ैनब समन्ताश ने बीबीसी संवाददाता शुमायला जाफ़री को बताया कि इलेक्शन ऐक्ट के तहत हर उम्मीदवार को अपने आय और व्यय की रिपोर्ट चुनाव आयोग को देनी होती है.
वो कहती हैं, "2018 से 19, 2020-21, 2021-22 की जो आय-व्यय रिपोर्ट चुनाव आयोग में दी है उसमें उन्होंने (इमरान ख़ान ने) तथ्यों को छिपाया है और ये नहीं बताया है कि तोहफ़े बेचने से उन्हें कितना लाभ हुआ. यही इस केस का आधार है."
इमरान ख़ान आगे क्या कर सकते हैं?
लेकिन अब गिरफ्तार होने के बाद इमरान ख़ान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक़-ए इंसाफ़ (पीटीआई) के पास क्या क़ानूनी विकल्प मौजूद हैं?
ज़ैनब समन्ताश कहती हैं "उनके पास सज़ा के ख़िलाफ़ अपील करने का अधिकार है, वो ज़मानत के लिए भी अपील कर सकते थे लेकिन इसके लिए वो अदालत में मौजूद नहीं थे."
अपील का अधिकार
जिस वक्त इस्लामाबाद कोर्ट इमरान ख़ान से जुड़े तोशाखाना मामले की सुनवाई कर रही थी, उस वक्त वो लाहौर में ज़मान पार्क में अपने घर पर थे.
ज़ैनब कहती हैं, "कोर्ट जब जेल की सज़ा देती है तो वो साथ में वारंट भी जारी कर देती है, ये सामान्य प्रक्रिया है. लेकिन अगर सुनवाई के दौरान इमरान ख़ान अदालत में मौजूद होते तो वो क्रिमिनल प्रोसिड्योर कोड के सेक्शन 426 2(ए) के तहत कोर्ट से कह सकते थे कि अपील करने तक उन्हें ज़मानत दी जाए. ऐसे में उन्हें 30 दिनों तक गिरफ्तारी से राहत मिल सकती थी."
"अगर उनके लीड काउन्सिल (मुख्य वकील) भी कोर्ट में मौजूद होते तो वो ये दरख़्वास्त कर सकते थे, लेकिन वो भी कोर्ट में नहीं थे, शायद इसलिए वो इस विकल्प का फायदा नहीं ले सके."
"हालांकि उनके पास अभी भी हाई कोर्ट में अपील फाइल करने का अधिकार है. ये अपील कोर्ट की दो जजों की डिविशनल बेंच के पास जाएगी. अपील सुनने वाले जज के पास निचले कोर्ट के फ़ैसले को रोकने की ताकत होती है. उसके बाद ज़रूरत पड़ी तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट का रुख़ करना पड़ सकता है."
लेकिन क्या अपील के दौरान इमरान ख़ान जेल में ही रहेंगे?
इसके उत्तर में ज़ैनब कहती हैं "डिविशनल बेंच को अगर लगा कि इस मामले में ऐसे आधार मौजूद हैं कि फ़ैसले को पलटा जा सके तो वो फ़ैसले को रोक सकती है."
इमरान की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश
इस्लामाबाद कोर्ट अपने फ़ैसले में इमरान ख़ान की तुरंत गिरफ्तारी के आदेश दिए, जिसके बाद लाहौर के ज़मान पार्क स्थित इमरान के घर से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है.
मामले की सुनवाई से पहले इस्लामाबाद में हाई अलर्ट जारी किया गया है और सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. इमरान ने उन पर लगे आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वो इसके ख़िलाफ़ अपील करेंगे
इमरान ख़ान की गिरफ्तारी के बाद उनका पहले से रिकॉर्ड किया हुआ एक वीडियो सोशल मीडिया पर उनके हैंडल पर पोस्ट किया गया.
इमरान की पार्टी तहरीक़-ए-इंसाफ़ ने कोर्ट के फ़ैसले को पक्षपातपूर्ण बताया है और कहा है कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.
शनिवार शाम पार्टी की एक आपात बैठक हुई जिसमें इमरान ख़ान की गिरफ्तारी के़ ख़िलाफ़ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने का फ़ैसला लिया गया है.
सरकार में सूचना मंत्री मरियम औरंगज़ेब ने कहा कि इमरान को राजनीतिक बदले के लिए निशाना नहीं बनाया जा रहा.
क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग ने इमरान ख़ान पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए तोशाखाना से जो तोहफ़े लिए थे, उसके बारे में अधिकारियों को उन्होंने सही जानकारी नहीं दी. इमरान ख़ान इन आरोपों को ग़लत बताते हैं.
उन पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए क़ीमती तोहफ़े अपने फ़ायदे के लिए बेचे और चुनाव आयोग के सामने अपनी संपत्ति की घोषणा में उसका ब्योरा नहीं दिया था.
चुनाव आयोग ने ज़िला अदालत में शिकायत दर्ज की और इमरान ख़ान को आपराधिक क़ानूनों के ज़रिए सज़ा देने की गुहार लगाई.
बाद में अक्तूबर 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने तोशाखाना मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को अगले पांच साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य क़रार दिया था.
1974 में पाकिस्तान में तोशाखाना स्थापित किया गया. ये कैबिनेट डिवीज़न के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक सरकारी विभाग है जहां देश के प्रमुखों, मंत्रियों, नौकरशाहों, सासंदों को विदेशी सरकार या अधिकारियों की ओर से मिले मंहगे गिफ़्ट रखे जाते हैं.
यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या दूसरे बड़े अधिकारियों को किसी यात्रा के दौरान मिलने वाले क़ीमती तोहफों को रखा जाता है.
तोशाखाना में रखी गई चीज़ों को स्मृति चिन्ह की तरह देखा जाता है. यहां रखी हुई चीज़ों को कैबिनेट की मंज़ूरी के बाद ही बेचा जा सकता है. अगर मिलने वाले उपहार की क़ीमत 30 हज़ार रुपये से कम है तो उसे व्यक्ति मुफ़्त में अपने पास रख सकता है.
लेकिन अगर गिफ़्ट की क़ीमत 30 हज़ार रुपये से ज़्यादा है तो उस क़ीमत का 50 प्रतिशत जमा करके उसे ख़रीदा जा सकता है.
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