पृथ्वी शॉ रणजी ट्रॉफ़ी में चमके, टीम में वापसी की कितनी उम्मीद?

    • Author, जसविंदर सिद्धू
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

कहानी पूरी तरह से फ़िल्मी है. एक किरदार हीरो जैसा है लेकिन उसके साथ विवाद, संकट और चिंताएं जुड़ी हुई हैं.

मुंबई के मैदान से जब युवा पृथ्वी शॉ ने आग़ाज़ किया तो सब ने कहा कि यह बल्लेबाज़ आकाश को छू सकता है.

लेकिन देखिए कि हाल ही में जिस दिन इस बल्लेबाज़ ने महाराष्ट्र के लिए चंडीगढ़ के ख़िलाफ़ सेक्टर-16 के मैदान पर देश की घरेलू क्रिकेट स्पर्धा रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड 222 रनों की पारी खेली तो भी उन्हें मैन ऑफ़ द मैच नहीं दिया गया.

यह सम्मान दिया गया महाराष्ट्र के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ को. हालांकि बाद में खेल भावना को दिखाते हुए गायकवाड़ ने यह अवॉर्ड पृथ्वी शॉ के साथ शेयर किया.

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रणजी ट्रॉफ़ी का तीसरा सबसे तेज़ शतक

यहां यह बताना ज़रूरी है की मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र की टीम के लिए खेलने के फ़ैसले के बाद यह उनका पहला शतक था. यह भी ज़िक्र करने लायक है कि उन्होंने सीज़न का अपना पहला शतक सिर्फ़ 72 गेंद पर बनाया जिसमें 14 चौके शामिल थे.

वहीं कप्तान गायकवाड़ ने पहली पारी में 116 रन जबकि दूसरी पारी में 36 रन बनाए.

25 से 28 अक्तूबर के बीच खेले गए इस मैच की पहली पारी में महाराष्ट्र की ओर से पृथ्वी शॉ ने 8 रन बनाए थे जबकि दूसरी पारी में उन्होंने 156 गेंदों में 222 रन बनाए.

उन्होंने 141 गेंदों में दोहरा शतक बनाया जो कि रणजी ट्रॉफ़ी के इतिहास में तीसरा सबसे तेज़ दोहरा शतक है.

सबसे तेज़ दोहरे शतक के मामले में उनसे आगे सिर्फ़ हैदराबाद के तन्मय अग्रवाल (119 गेंदों में) और मुंबई के रवि शास्त्री (123 गेंदों में) ही हैं.

'ग़लतियां सभी से होती हैं'

बेहद कम उम्र से पृथ्वी शॉ के कोच रहे प्रशांत शेट्टी ने बीबीसी हिंदी को बताया, "मैं सभी को बोलता हूं कि ग़लतियां सभी से होती हैं. आपको बताना चाहता हूं कि अभी कुछ महीने पहले उसने एक पॉडकास्ट किया था. उस पॉडकास्ट में इस क्रिकेटर ने माना है कि उससे क्या ग़लतियां हुई हैं और उसने इस पर काफ़ी काम किया है."

प्रशांत शेट्टी बताते हैं कि शॉ ने स्वीकार किया है कि उनसे दोस्त चुनने में ग़लतियां हुई हैं और इसके लिए वह अभी तक ख़ुद को ज़िम्मेदार मानते हैं, लेकिन उन्होंने इससे काफ़ी कुछ सीखा है.

उन्होंने बताया कि पृथ्वी शॉ ने अपने खेल और बर्ताव में काफ़ी बदलाव किया है और यह बल्लेबाज़ अभी ख़त्म नहीं हुआ है.

उनके अनुसार शॉ सात साल की उम्र में उनके पास कोचिंग के लिए आए थे और तब से वह उनके साथ काम कर रहे हैं. बकौल शेट्टी, शाह को किसी भी तरह से ख़ारिज नहीं किया जा सकता है.

'ओपनर की ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं'

शॉ के बारे में ऐसी धारणा है कि उनका वज़न ज़्यादा है, लेकिन उनको क़रीब से देखने वाले जानकारों के मुताबिक़ उन्होंने इस दिशा में काफ़ी काम किया है.

महाराष्ट्र के लिए रिकॉर्ड पारी खेलने के बाद पृथ्वी शॉ ने कहा भी कि इस सत्र से दो-तीन महीने पहले से उनके ट्रेनर उनके साथ काम कर रहे हैं. इसके अलावा डाइटिशियन भी उनके साथ काम कर रहे हैं. पिछले तीन-चार महीनों में उन्होंने कई जिस्मानी बदलाव देखे हैं जिन्होंने उनके खेल को बेहतर करने में काफ़ी मदद की है.

मुंबई के नामचीन क्रिकेट कोचों में से एक दिनेश लाड पृथ्वी शॉ के बारे में कुछ इस तरह से आंकलन करते हैं, "मेरा मानना है कि शॉ आज भी इंडिया टीम के लिए बतौर ओपनर ज़िम्मेदारी उठा सकते हैं."

वो कहते हैं, "आपने शॉ के बर्ताव के बारे में मीडिया की कई ख़बरों को सुना होगा लेकिन इस सबसे अलग आप उसके खेल को देखिए. उसकी बल्लेबाज़ी बहुत ही उम्दा है." लाड पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के भी कोच रहे हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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