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डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिका में जिन लोगों ने कमला हैरिस से ज़्यादा किया पसंद
- Author, एंथनी ज़र्चर
- पदनाम, नॉर्थ अमेरिकन संवाददाता
डोनाल्ड ट्रंप ख़ुद को विजेता घोषित कर चुके हैं. चुनावी नतीजे भी उनकी इस घोषणा से मेल खाते दिख रहे हैं.
अभी जो चुनावी नतीजे आ रहे हैं, उससे 2016 जैसी तस्वीर बनती दिख रही है, जब ट्रंप जीत गए थे. ये 2020 जैसा नहीं है, जब वो हार गए थे.
पूरे अमेरिका में जिन काउंटीज के नतीजे आए हैं, उनके मुताबिक़ ट्रंप ने गौर करने लायक बढ़त बना ली है.
डोनाल्ड ट्रंप सात बैटलग्राउंड स्टेट साबित होने वाले चुनावी मैदान में से दो नॉर्थ कैरोलाइना और जॉर्जिया में जीत चुके हैं.
ट्रंप को ये जीत रिपब्लिकन पार्टी के उन ग्रामीण इलाकों के बेहतर चुनावी प्रदर्शन से मिली है जो पारंपरिक तौर पर रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन रहा है.
कमला हैरिस शहरी और उपनगरीय राज्यों में कमोबेश जो बाइडन की ओर से हासिल की गई सीटों की संख्या तक बढ़ रही हैं लेकिन ट्रंप की बढ़त को पाटने से काफ़ी दूर हैं. फ्लोरिडा और दूसरे दक्षिणी राज्यों में जीत अभी हैरिस से काफ़ी दूर है.
हैरिस के कैंप में मायूसी का माहौल
2020 में ट्रंप ने बैटलग्राउंड स्टेट्स में से एक नॉर्थ कैरोलाइना में जीत हासिल की थी. इस बार भी वो उनके खाते में गया है. जॉर्जिया में भी वो भी जीत गए हैं.
पिछली बार वो यहां 11 हजार से अधिक वोटों से हार गए थे.
अब सबकी निगाहें ग्रेट लेक्स से लगे डेमोक्रेटिक समर्थक बहुल राज्यों की ओर मुड़ रही हैं. लेकिन यहां भी वो हल्की बढ़त ले चुके हैं.
ये इस बात का संकेत है कि कमला हैरिस इन राज्यों के शहरी और उपनगरीय इलाक़ों में रहने वाले डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों की उम्मीदें पूरी नहीं कर पाई हैं. ये पहलू हार और जीत का फ़र्क़ तय करेगा.
हैरिस का चुनावी प्रचार अब भी ग्रेट लेक राज्यों में उनकी जीत की ओर इशारा कर रहा है लेकिन लहर उनके पक्ष में दिखती है तो भी जब तक बड़े शहरों के आंकड़े नहीं आ जाते तब तक ये बदलाव नहीं होगा.
अगर इसमें कई दिन नहीं लगेंगे तो कई घंटे तो जरूर लेंगे. कांटे के टक्कर वाले राष्ट्रपति चुनावों में प्रमुख बैटलग्राउंड स्टेटस के एक तरह जाने की प्रवृति दिखती रही है.
अब तक मूवमेंट रिपब्लिकन पार्टी की ओर दिख रहा है. यानी लहर डोनाल्ड ट्रंप और सीनेट के कई शीर्ष उम्मीदवारों की ओर बढ़ रही है.
मार-अ-लागो में ट्रंप के इलेक्शन-वॉच पार्टी में माहौल जश्न का है.
वहीं हैरिस समर्थक हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में जमा हैं और वहां माहौल में तनाव दिख रहा है. अगर चुनाव नतीजों का मौजूदा रुझान रहा तो ट्रंप राष्ट्रपति बनने की ओर बढ़ सकते हैं.
एग्जिट पोल से अब तक क्या पता चला है?
एग्जिट पोल से जुड़े आंकड़ों का एक सेट से पता चलता है अमेरिकी मतदाताओं ने कैसे वोट दिया है. ये वोटिंग को लेकर पुरुषों और महिलाओं के विभाजन को दिखाता है.
ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि महिलाओं में ज्यादातर ने कमला हैरिस को वोट दिया है जबकि पुरुष अपना समर्थन ट्रंप को देते दिखे.
इन आंकड़ों से एक चीज़ थोड़ी आश्चर्य में डालने वाली लगी कि हैरिस को वोट देने वाली महिला मतदाताएं 54 फीसदी थीं. वहीं 2020 में जो बाइडन को वोट देने वाली महिला वोटरों की संख्या 57 फ़ीसदी थी.
एग्जिट पोल के नतीजे अक्सर समय बीतने के साथ बदल जाते हैं. इन्हें सामान्य रुझान के तौर पर पर देखना चाहिए. ये अंतिम नतीजे नहीं हैं.
लेकिन अगर चार साल पहले की तुलना में महिला वोटरों का रुझान हैरिस की ओर कम हुआ है तो ये डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए काफी चिंता की बात होगी.
अमेरिका के आधुनिक इतिहास में वोटिंग टर्नआउट अब तक सबसे ऊंचे स्तर पर जाता दिख रहा है.
ये 2020 के वोटिंग फ़ीसदी 65.9 फीसदी को भी पार कर सकता है.
ट्रंप और हैरिस दोनों ने बार-बार कहा है कि इस चुनाव में लगे दांव काफ़ी ऊंचे हैं. और लगता है कि अमेरीकियों ने उनकी ये बात ठीक से सुन ली है.
डोनाल्ड ट्रंप का मज़बूत पक्ष क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप कब क्या कर देंगे किसी को नहीं पता. ट्रंप इसे अपना मज़बूत पक्ष मानते हैं. वो कहते हैं कि मेरे राष्ट्रपति रहते हुए दुनिया में कोई बड़ा युद्ध शुरू नहीं हुआ.
कई अमेरिकी अलग-अलग कारणों से ग़ुस्से में हैं. इसका कारण यूक्रेन और इसराइल को अरबों की मदद भेजना है. कई अमेरिकी सोचते हैं कि देश बाइडन की सरकार में कमज़ोर हुआ है.
अधिकतर मतदाता ख़ासकर पुरुष वोटर कमला हैरिस की तुलना में ट्रंप को मज़बूत नेता मानते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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