यूपी के अलीगढ़ में गोमांस के शक़ में भीड़ ने युवकों को पीटा, अब तक क्या पता है

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- Author, सैयद मोज़िज इमाम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 24 मई को गोमांस ले जाने के शक़ में चार लोगों पर स्थानीय भीड़ ने हमला कर उनके साथ मारपीट की.
जिन युवकों के साथ मारपीट की गई, उनका अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है.
अलीगढ़ पुलिस ने इस मामले में अब तक चार अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है.
अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन के मुताबिक़, ''हरदुआगंज पुलिस टीम ने भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या के प्रयास और अन्य अपराधों में 38 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.''
इसमें विजय कुमार गुप्ता, विजय बजरंगी, लवकुश और एक अन्य अभियुक्त को गिरफ़्तार किया गया है.
अमृत जैन ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''पुलिस इस मामले में सख़्त कार्रवाई कर रही है. जब ये घटना हो रही थी तभी हमारी पीआरवी (पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल) मौके से गुज़र रही थी. उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर मुझे बताया, तो मैं पुलिस बल के साथ मौक़े पर पहुंचा. उसके बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया. दोनों पक्षों की तरफ़ से एफ़आईआर दर्ज कराई गई है."
जिनसे मारपीट हुई उनका परिवार क्या कह रहा है?

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इस मामले में जिन चार युवकों को मारा-पीटा गया है, उनके परिवारवालों का दावा है कि भीड़ को ज़रूरी काग़ज़ात भी दिखाए गए थे.
परिवार का कहना है, "शनिवार रात को हरदुआगंज थाना क्षेत्र में मैक्स पिकअप वाहन को कुछ लोगों ने रोका और गाड़ी की तलाशी लेने लगे. काग़ज़ भी दिखाया गया कि मीट फैक्ट्री से मीट लेकर जा रहे हैं. लेकिन भीड़ बढ़ती गई."
पुलिस के मुताबिक़, ''गोमांस के शक़ में भीड़ ने इन लोगों की पिटाई कर दी. हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप के बाद घायलों को भीड़ से निकाला गया.''
इस मामले में घायल अकील जो कि अलीगढ़ में अतरौली के रहने वाले हैं, उनके पिता सलीम ख़ान ने पुलिस में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है, ''मेरा बेटा अकील, भतीजा अरबाज़ और दो अन्य लोग अल अम्बर मीट फैक्ट्री से मीट लेकर अतरौली आ रहे थे. जब गाड़ी पनैठी से साधु आश्रम वाली सड़क पर पहुंची, तभी रामकुमार आर्य और 20–25 अज्ञात लोगों ने गाड़ी रोककर 50 हज़ार रुपये की चौथ (रंगदारी) मांगी."
सलीम ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जब पैसे देने से इनकार किया गया, तभी मारपीट शुरू कर दी गई और गाड़ी में आग लगा दी. इससे पहले सभी के मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए थे. इसी रास्ते पर 15 दिन पहले भी गाड़ी को रोका गया था और पैसे मांगे गए थे. हालांकि उस वक्त पुलिस ने गाड़ी को छुड़वाया था."
सलीम ने यह भी कहा, "उनके पास फैक्ट्री के काग़ज़ भी थे, लाइसेंस भी दिखाया गया, लेकिन हमला करने वाले मानने को तैयार नहीं थे. हालांकि यह पता नहीं चल पाया है कि वे किसी दल से जुड़े थे या नहीं."
''किसी भी संगठन का हाथ सामने नहीं आया''

मामले में एक अभियुक्त रामकुमार आर्य को विश्व हिंदू परिषद का पूर्व कार्यकर्ता बताया जाता है. बीबीसी हिंदी ने उनसे फोन पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई.
पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन ने कहा, "पूछताछ में पता चला है कि विश्व हिंदू परिषद ने इस व्यक्ति को कई साल पहले ही निकाल दिया था क्योंकि उनकी गतिविधियां संदिग्ध थीं."
अलीगढ़ पुलिस का कहना है, "इस मामले में अभी तक किसी संगठन की संलिप्तता सामने नहीं आई है, हालांकि मामले की जांच जारी है."
घायलों पर गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुक़दमा
घायल हुए चार लोगों के ख़िलाफ़ हरदुआगंज निवासी विजय बजरंगी ने मुक़दमा दर्ज कराया है.
तहरीर में कहा गया है, ''शनिवार को पनैठी पुल से प्रतिबंधित पशु के मांस की सूचना पर मैक्स लोडर गाड़ी का पीछा किया गया. जिसे साधु आश्रम पनैठी रोड पर अलहदादपुर स्टेडियम के निकट रोकने का प्रयास किया गया. मैक्स ड्राइवर ने उन्हें कुचलने की कोशिश की, जिससे उनकी बाइक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई. मैक्स गाड़ी भी अनियंत्रित होकर पलट गई.''
तहरीर में यह भी कहा गया है कि खेतों में काम कर रहे किसान-मज़दूर दौड़े तो मैक्स में सवार चार लोगों ने उन पर हमला कर दिया.
इस पर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अमृत जैन ने कहा, "दूसरे पक्ष का दावा था कि ये गोमांस है, इसलिए मांस के सैंपल ले लिए गए हैं. बिना एफ़आईआर के वह सैंपल मथुरा की लैब नहीं भेजा जा सकता है. इसलिए गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुक़दमा लिखा गया है. लैब के रिज़ल्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. हालांकि पीड़ितों ने पूछताछ में बताया है कि ये लोग रजिस्टर्ड स्लॉटर हाउस से ही मांस ले जा रहे थे."
विपक्षी पार्टियों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

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समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने पूरी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है. कई नेताओं ने अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात भी की है.
कांग्रेस के सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने एक्स पर राज्य सरकार से सवाल किया है, "क्या यूपी की क़ानून व्यवस्था यही है? क्या प्रशासन इन गुंडों पर कोई नियंत्रण नहीं रखता, या फिर यह माना जाए कि मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा को मौन समर्थन प्राप्त है? क्या प्रशासन इस मामले में ऐसी कार्रवाई करेगा कि नज़ीर बन सके?"
समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता नाहिद लारी ने कहा, "ये घटना बेहद निंदनीय है. ये तो पूरा देश जानता है कि मीट एक्सपोर्ट्स कौन हैं और उनके बीजेपी से क्या रिश्ते हैं. बीजेपी के गुंडों के गिरोह ने बेगुनाहों की मॉब लिंचिंग की है. मेरी अदालत से अपील है कि इस पर सख़्त कार्रवाई करे क्योंकि सरकार कुछ नहीं करेगी."
हालांकि पुलिस ने इस मसले में अब तक किसी संगठन या पार्टी के लोगों की संलिप्तता से इनकार किया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















