ईरानी मीडिया ने नया सुप्रीम लीडर चुने जाने का किया दावा, जानिए कौन हो सकता है?

आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई

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इमेज कैप्शन, इसराइल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हो गई थी
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ईरान की राजधानी तेहरान में एक तेल डिपो पर हुए हमले के बाद भीषण आग लगी हुई है और शहर में घना धुआं छा गया है.

इसी बीच ईरानी मीडिया में ख़बर आ रही है कि देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की जगह नए सर्वोच्च नेता पर फ़ैसला लगभग हो चुका है.

बीबीसी फ़ारसी ने मेहर समाचार एजेंसी के हवाले से बताया कि ईरान की असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स के सदस्य अहमद आलमोलहोदा ने कहा है कि अगले नेता के चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और नए नेता का चयन कर लिया गया है.

आलमोलहोदा ने कहा कि अब सब कुछ असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स के सचिवालय के प्रमुख हुसैनी बुशेहरी पर निर्भर है, जो इस फ़ैसले की सार्वजनिक घोषणा करेंगे.

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ईरान की सरकार समर्थित मेहर समाचार एजेंसी की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में एक वरिष्ठ धर्मगुरु कहते दिखाई दे रहे हैं कि ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स लगभग इस निर्णय पर पहुंच गई है कि दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की जगह कौन लेगा.

ख़ामेनेई की पिछले शनिवार अमेरिका-इसराइल के हमलों में मौत हो गई थी.

एजेंसी के मुताबिक़ आयतुल्लाह मोहम्मद मेहदी मीरबाग़ेरी ने कहा कि "बहुमत का फ़ैसला" हो चुका है, लेकिन कुछ प्रक्रियागत अड़चनों को अभी दूर करना बाकी है. उम्मीद है कि असेंबली जल्द बैठक करेगी.

हालांकि अभी तक नाम नहीं ज़ाहिर किया गया है लेकिन समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दो ईरानी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि अली ख़ामेनेई के बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है. हालांकि ऐसे दावों की पुष्टि करना मुश्किल है.

इसराइल की धमकी

वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह मीरबाघेरी

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इमेज कैप्शन, वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह मीरबाघेरी का एक वीडियो मेहर न्यूज़ एजेंसी ने साझा किया है, जिसमें उन्होंने फ़ैसले की जानकारी दी.

इसराइली सेना ने धमकी दी है कि वह "किसी भी उत्तराधिकारी और उसका चुनाव करने वाले व्यक्तियों का पीछा करेगी."

इसराइली सेना ने असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्यों को चेतावनी दी है कि 'हम आपको और किसी भी उत्तराधिकारी को निशाना बनाएंगे.'

इसराइली सेना ने एक्स पर फ़ारसी भाषा में एक पोस्ट जारी कर असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स के सदस्यों को चेतावनी दी है कि अगर वे नया नेता चुनने के लिए बैठक करते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा.

इसराइली सेना ने पोस्ट में लिखा, "ईरान की असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स, जिसने दशकों से बैठक नहीं की है, जल्द क़ुम शहर में बैठक करेगी. इसराइल हर उत्तराधिकारी और हर उस व्यक्ति का पीछा करता रहेगा जो उत्तराधिकारी नियुक्त करने की कोशिश करेगा."

"हम उन सभी लोगों को चेतावनी देते हैं जो उत्तराधिकारी चुनने की बैठक में शामिल होने का इरादा रखते हैं. हम आपको भी निशाना बनाने में हिचकेंगे नहीं."

कैसे चुना जाता है सर्वोच्च नेता?

असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स

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इमेज कैप्शन, असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स, 88 धर्मगुरुओं की एक सभा होती है, जो सर्वोच्च नेता का चुनाव करती है
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ईरान इस समय दुनिया का सबसे शक्तिशाली शिया बहुल देश है. देश के संविधान के अनुसार केवल आयतुल्लाह, जो शिया मुसलमानों के धार्मिक नेता हों, सर्वोच्च नेता बन सकते हैं.

हालांकि जब अली ख़ामेनेई को चुना गया था, तब वह आयतुल्लाह नहीं थे. उन्हें यह पद देने के लिए क़ानून में बदलाव किया गया था.

ईरान में 88 धर्मगुरुओं की एक संस्था होती है, जिसे असेंबली ऑफ़ एक्सपर्ट्स कहा जाता है. हर आठ साल में लाखों ईरानी नागरिक इस संस्था के सदस्यों को चुनते हैं. असेंबली का चुनाव लड़ने से पहले उम्मीदवार को एक समिति से मंज़ूरी लेनी होती है, जिसे गार्जियन काउंसिल कहा जाता है.

इस काउंसिल के सदस्य सीधे या परोक्ष रूप से मौजूदा सर्वोच्च नेता के प्रभाव में चुने जाते हैं.

2024 में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के समर्थकों ने इस परिषद की सभी सीटें जीत ली थीं, जबकि सदस्यों की मौत के बाद खाली हुई चार सीटें, जिनमें इब्राहिम रईसी की सीट भी शामिल है, मई 2026 में होने वाले उपचुनाव में भरी जाएंगी.

इस असेंबली के मौजूदा अध्यक्ष मोहम्मद अली मोहिदी केरमानी हैं, जबकि हाशिम हुसैनी बुशेहरी और अली रज़ा अराफ़ी उपाध्यक्ष हैं.

नियमों के अनुसार, सुप्रीम काउंसिल की बैठक तब वैध मानी जाती है जब उसके कम से कम दो-तिहाई सदस्य, यानी 59 लोग, मौजूद हों. नए नेता के चुनाव के लिए बैठक में मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई वोट की ज़रूरत होती है.

इसका मतलब है कि अगर केवल 59 सदस्य मौजूद हों, तो 40 वोट नए नेता को चुनने के लिए काफ़ी होंगे.

तेहरानः दिन में अंधेरा छाया

इसराइल और अमेरिका ने तेहरान के एक तेल डिपो पर हमला किया

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इमेज कैप्शन, इसराइल ने तेहरान के एक तेल डिपो पर हमला किया, जिसके बाद सड़कों पर आग लग गई और शहर में घना धुआं छा गया

शनिवार-रविवार की दरमियानी रात को इसराइल ने तेहरान के कई इलाक़ों में धमाके सुनाई दिए.

इन्हीं में से एक हमला एक तेल डिपो पर हुआ जिसके बाद सड़कों और आसपास के इलाक़े में आग फैल गई. घटना के 10 घंटे बाद भी इलाक़े में आग लगी हुई थी.

कुछ फुटेज में दिखाई दे रहा है कि सड़कों पर आग फैल गई है.

बीबीसी ने इस वीडियो की पुष्टि की है, जिसे तेहरान की सड़कों पर रिकॉर्ड किया गया है. इसमें इसराइल के हमले के बाद राजधानी के उत्तर-पश्चिम में स्थित शहरान ऑयल डिपो पर हमले के बाद आग कूहसर बुलेवार्ड तक फैलती दिखाई दे रही है.

ईरान में तेल उत्पाद वितरण के सीईओ ने कहा है कि हमलों के बाद इन सुविधाओं पर काम कर रहे चार टैंकर ट्रक ड्राइवरों की मौत हो गई. उन्होंने यह भी कहा कि तेल डिपो में ईंधन "पर्याप्त मात्रा में जमा" है, लेकिन लोगों से अपील की कि वे पेट्रोल पंप पर "सिर्फ ज़रूरत होने पर ही" जाएं.

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक़, इस हमले में छह लोगों की मौत हो गई जबकि 21 लोग घायल हुए हैं.

बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, तेल डिपो में आग लगने से शहर में घना धुआं छा गया है.

तेहरान वासियों का कहना है कि 'धुआं इतना घना है कि लगता है जैसे दिन में अंधेरा छा गया है.'

'एसिड रेन' की चेतावनी

तेहरान में धुएं से सांस लेने में भी परेशानी होने लगी है

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इमेज कैप्शन, तेहरान में धुएं से सांस लेने में भी परेशानी होने लगी है

बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, पर्यावरण संरक्षण संगठन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचें और "मौजूदा हालात और तेहरान में प्रदूषण के हालात" को देखते हुए जितना संभव हो घरों के अंदर रहें.

इस बीच, ईरान की रेड क्रेसेंट ने आग के कारण एसिड रेन की संभावना को लेकर चेतावनी जारी की है.

रेड क्रेसेंट के बयान के अनुसार, "तेल डिपो में हुए विस्फोट से हाइड्रोकार्बन और सल्फ़र और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे ज़हरीले तत्व बड़ी मात्रा में वातावरण और बादलों में पहुंच जाते हैं. अगर बारिश होती है तो होने वाली बारिश बहुत ख़तरनाक होती है और उसमें तेज़ एसिड वाले गुण होते हैं."

रेड क्रेसेंट ने कहा कि इससे त्वचा पर रासायनिक जलन और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है.

रेड क्रेसेंट ने नागरिकों से अपील की, "अगर ऐसी बारिश त्वचा के संपर्क में आए तो किसी भी हालत में उस जगह को रगड़ें नहीं और सिर्फ ठंडे पानी की लगातार धारा से धोएं. ऐसी बारिश में भीग चुके कपड़ों को तुरंत बदलें और उन्हें एक सीलबंद बैग में बंद कर दें."

बीते 24 घंटे में क्या क्या हुआ

कुवैत

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ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने उत्तरी कुवैत में 'अमेरिकी हेलिकॉप्टर बेस अल-अदीरी' पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए हैं.

जारी किए गए बयान के मुताबिक़, "इस हमले में हेलिकॉप्टर तैयार करने और मरम्मत करने वाले केंद्र, हेलिकॉप्टर और जहाज़ों के ईंधन टैंक और बेस की कमांड बिल्डिंग को भारी नुकसान हुआ है. इसके बाद यहां पर भीषण आग लग गई."

कुवैत के गृह मंत्रालय ने एक्स न्यूज़ को बताया कि दो फायरफाइटर ड्यूटी के दौरान मारे गए.

उधर, आईआरजीसी का कहना है कि ईरान की सशस्त्र सेनाएं मौजूदा रफ़्तार से कम से कम छह महीने तक चलने वाले भीषण युद्ध को जारी रखने में काबिल हैं.

कुवैत की राजधानी में एक बहुमंज़िला इमारत ईरानी ड्रोन के हमले का शिकार हो गई और उसमें आग लग गई. इस इमारत में सरकारी सोशल सिक्युरिटी संस्था का हेडक्वार्टर था.

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के प्रमुख अली लारीजानी ने दावा किया है कि 'कई अमेरिकी सैनिक ईरानी कै़द' में हैं.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "मेरे पास यह जानकारी आई है कि कई अमेरिकी सैनिकों को बंदी बना लिया गया है. लेकिन अमेरिका का दावा है कि वे युद्ध में मारे गए हैं."

लारीजानी ने कहा कि ईरान पर हुए अमेरिकी-इसराइली हमलों के लिए अमेरिका को 'क़ीमत चुकानी पड़ेगी'.

इस पर ट्रंप ने कहा, "मुझे नहीं पता वह किस बारे में बात कर रहे हैं, वह कौन हैं. मुझे इससे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ता. वह पहले ही हार चुके हैं."

ट्रंप ने दावा किया, "उनकी नौसेना ख़त्म हो चुकी है. छह दिनों में 42 जहाज़ डूब गए. वायुसेना ख़त्म हो गई है. उनकी सेना का हर हिस्सा ख़त्म हो चुका है. उनका नेतृत्व ख़त्म हो चुका है. ऐसा कुछ भी नहीं बचा जो ख़त्म न हुआ हो."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.