नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ से जुड़े इन पाँच सवालों में छिपे हैं कारण

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात हुई भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई है जबकि 13 अन्य घायल हैं.
यह भगदड़ क्यों और कैसे हुई, इसकी जांच के लिए रेलवे ने दो सदस्यीय जांच समिति भी बना दी है.
इस भगदड़ से भीड़ के बीच सुरक्षा के इंतजाम और हादसे के कारणों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

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रेलवे स्टेशन पर हुई इस भगदड़ के पीछे अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदले जाने की ही चर्चा सबसे ज़्यादा है.
कई लोगों ने आरोप लगाया है कि स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार कर रही भारी भीड़ के सामने अंतिम समय में ट्रेन के प्लेटफॉर्म को बदलने की वजह से लोगों में भगदड़ मच गई और इसी की वजह से हादसा हुआ है.
इस हादसे में दिल्ली के संगम विहार इलाक़े की रहने वाली पिंकी शर्मा की भी मौत हो गई है.
उनके रिश्तेदार पिंटू शर्मा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "परिवार के क़रीब 15 सदस्य कुंभ में नहाने के लिए प्रयागराज जा रहे थे. जब सभी लोग नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर उतर रहे थे, उसी समय भगदड़ हुई."
पिंटू शर्मा ने आरोप लगाया है कि अंतिम समय में ट्रेन की लाइन बदल दी, जिसकी वजह से भगदड़ हुई.
हालांकि रेलवे वेबसाइट एनटीईएस जिस पर ट्रेनों के संचालन की संपूर्ण जानकारी दी जाती है, इसके मुताबिक़ आमतौर पर प्रयागराज एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर 14 से ही रवाना होती है. ऐसे में यात्रियों के आरोप से लगता है कि उन्हें ट्रेन के बारे में सूचना में सुनने में भूल हुई या फिर भ्रम हुआ.
इस घटना में अपने एक रिश्तेदार को खो चुकीं पूनम देवी ने बताया, "अचानक से घोषणा की गई कि ट्रेन प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर आ रही है. इसके बाद लोग भागने लगे और भगदड़ मच गई."
उत्तर रेलवे ने प्लेटफॉर्म के बदले जाने से इनकार किया है. उत्तर रेलवे के प्रवक्ता हिमांशु शेखर उपाध्याय ने कहा, "कोई भी ट्रेन रद्द नहीं की गई थी और ना ही किसी ट्रेन का प्लेटफॉर्म बदला गया था."
स्टेशन पर भगदड़ के बाद रविवार को डीसीपी रेलवे केपीएस मल्होत्रा से पत्रकारों ने पूछा कि क्या तीन नंबर प्लेटफॉर्म से 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर आने के लिए यात्रियों को जानकारी दी गई, इस वजह से भगदड़ हुई?'
इस पर डीसीपी ने कहा, "नहीं ऐसा कुछ नहीं था. एक स्पेशल ट्रेन रेलवे की तरफ़ से चलनी थी, उसकी अनाउंसमेंट ज़रूर हुई लेकिन ट्रेन के प्लेटफॉर्म बदलने जैसी कोई बात अभी मेरी जानकारी में नहीं है."


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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 13 से बिहार की तरफ़ जाने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस रात को सवा 12 बजे रवाना हुई थी.
इस ट्रेन का निर्धारित समय सवा नौ बजे रात का था लेकिन यह ट्रेन तीन घंटे की देरी से चली. इसके कारण बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन का प्लेटफार्म नंबर 13 पर इंतजार कर रहे थे.
वहीं भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस, जिसका निर्धारित समय शाम पाँच बजे है, ये ट्रेन भी क़रीब 10 घंटे की देरी से प्लेटफार्म नंबर 11 से रवाना हुई.
ऐसे में घटनास्थल के आसपास के प्लेटफार्म पर लोगों की भारी भीड़ ट्रेनों की देरी की वजह से एकत्रित हो गई थे. ट्रेनों की लेटलतीफ़ी भी इस दुर्घटना का एक कारण है.
जीआरपी के डीसीपी केपीएस मल्होत्रा ने बताया है, "भीड़ का अंदाज़ा हम लोगों ने लगाया था. लेकिन, दो ट्रेनों का लेट हो जाना और वहां ज़्यादा लोगों के इकट्ठा हो जाने के कारण ऐसी स्थिति बनी. तथ्य तलाशने का काम रेलवे करेगा."
केपीएस मल्होत्रा ने कहा, "ये घटना जिस 10 मिनट में हुई, उसमें ज़्यादा लोगों का आना और दो ट्रेनों का लेट होना है. बाक़ी इस घटना के पीछे क्या तथ्य हैं, वो रेलवे तरफ़ से जांच की जाएगी."
इस बात की तस्दीक प्रत्यक्षदर्शी भी कर रहे हैं. घटना के वक्त नई दिल्ली स्टेशन पर मौजूद रवि ने बताया, "रात क़रीब साढ़े नौ बजे भगदड़ हुई थी. कुछ गाड़ियां भी लेट थीं. उसी समय ज़्यादा भीड़ हुई. 13 नंबर प्लेटफॉर्म पर भी बहुत भीड़ थी."


नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ की जांच के लिए रेलवे ने दो सदस्यीय समिति गठित की है. इसके सदस्य और आरपीएफ अधिकारी पंकज गंगवार से बार-बार यह सवाल किया गया कि घटना के समय स्टेशन पर कितने सुरक्षाकर्मी मौजूद थे.
उन्होंने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और जांच पूरी होने का इंतज़ार करने के लिए कहा.
हालांकि इस घटना में दिल्ली के किराड़ी इलाके के रहने वाले उमेश गिरी अपनी 45 वर्षीय पत्नी शीलम देवी को खो चुके हैं. उन्होंने बीबीसी से कहा, "मदद तो कुछ नहीं मिली. बाद में बहुत देर हो गई थी. मैंने कई पुलिस वाले, आरपीएफ़ वालों को कहा लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं था."
घटना के वक्त मौजूद कुछ अन्य प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि पुलिस अपनी तरफ़ से काफ़ी कोशिश कर रही थी लेकिन भीड़ ज़्यादा होने के कारण रुक ही नहीं रही थी. कोई किसी की सुन ही नहीं रहा था.
घटना के वक़्त नई दिल्ली स्टेशन पर मौजूद रवि ने बताया, "लोगों ने जैसे ही गाड़ी देखी, उधर के लोग (दूसरे प्लेटफॉर्म के) यहीं पर आ गए और भगदड़ मच गई. ऊपर भी ज़्यादा लोग खड़े थे. भीड़ बहुत ज़्यादा थी. पुलिस सारी चीज़ें देख रही थी फिर भी भीड़ नहीं रुक पाई."
एक अन्य चश्मदीद ने बताया, "रात 9 बजे के आसपास यह घटना हुई थी. पुलिस ने बहुत कंट्रोल किया लेकिन पब्लिक लिमिट से ज़्यादा हो गई थी."
घटना के वक़्त नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मौजूद भारतीय वायु सेना के अधिकारी अजीत ने कहा, "जहां पर 5-10 हज़ार लोग एकसाथ एक ही जगह पर इकट्ठा हो जाएंगे तो प्रशासन वहां पर कितना ही हो सकता है. इतने लोगों को हैंडल करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है और उन्होंने किया भी. मैं देख रहा था."


नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ का एक कारण और भी है. दरअसल, पूर्वी भारत की तरफ जाने वाली कई ट्रेनें कुछ मिनट के अंतराल पर ही रवाना हो रही थीं.
प्लेटफार्म 11 से भुवनेश्वर राजधानी एक्सप्रेस, 12 से प्रयागराज के लिए कुंभ स्पेशल, 13 से स्वतंत्रता सेनानी और 14 से प्रयागराज एक्सप्रेस रवाना हो रही थी. इन सभी के यात्रियों की वजह से प्लेटफार्म के साथ ही फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) और सीढ़ियों पर भारी दबाव बन गया.
रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि रेलवे प्लेटफॉर्म प्रबंधन तो सिखा देता है लेकिन एफओबी पर हर बार ग़लती कर रहा है. रेलवे स्टेशन पर जितनी भी बड़ी दुर्घटनाएं हुई है, इनमें एफओबी एक बड़ा कारण बनकर उभरता है.
एफओबी पर लोग इस इच्छा से खड़े होते हैं कि जो ट्रेन पहले आएगी. उससे वह सवार होकर चले जाएंगे. कुछ लोग एफओबी पर बैठ भी जाते हैं. ऐसे में भीड़ का रेला एक साथ आता है और एक भी व्यक्ति गिरा तो फिर इस तरह की दुर्घटना होती है.
फिर चाहे वह 2013 में कुंभ के दौरान इलाहाबाद में हुई दुर्घटना हो या फिर 2017 में हुई प्रभादेवी रेलवे स्टेशन की दुर्घटना हो या फिर बात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन दुर्घटना की हो. इन सभी में एक बात कॉमन है और वह है एफओबी.


भगदड़ क्यों हुई? इसका जवाब देते हुए डीसीपी रेलवे केपीएस मल्होत्रा कहते हैं, "जब एक स्पेस पर ज़्यादा लोग होंगे और ट्रेन का इंतज़ार करेंगे, ऐसे में कोई ग़लत सूचना भी फैलेगी तो भगदड़ मच सकती है."
वह कहते हैं कि ऐसा क्यों हुआ है? यह बात पर रेलवे की जांच में सामने आएगी.
दिल्ली फायर सर्विसेज के डायरेक्टर अतुल गर्ग कहते हैं, "भगदड़ का कारण तो अभी तक स्पष्ट नहीं है लेकिन प्राथमिक तौर पर यह बात सामने आई कि प्रयागराज की दो ट्रेनों को रद्द कर दिया गया. इसके कारण प्लेटफार्म पर भीड़ बढ़ गई. दोनों प्लेटफार्म पर अव्यवस्था फैल गई"
समाचार एजेंसी एएनआई को एक प्रत्यक्षदर्शी हीरालाल महतो ने बताया, "लोग 16 से 12 पर आ रहे थे कि इसी दौरान यह अनाउंस सुनकर लोग 12 से 16 पर जाने लगे. इससे भगदड़ मच गई और बीच में टकरा गए लोग और इसके कारण लोग जमीन में गिर गए."
हीरालाल महतो कहते हैं कि जब यह हादसा हुआ तो आसपास कोई प्रशासन नहीं था. झाडू भी लग गई और सफाई भी हो गई.अब यहां कुछ भी नहीं है. लोग पुल पर ही घायल हो गए थे.उन्हें वहीं से अस्पताल पहुंचाया गया. प्रशासन यहां एक घंटे के बाद पहुंचा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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