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झारखंडः 18 नाबालिग़ों पर शादी से लौट रही तीन नाबालिग़ लड़कियों से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप
- Author, आनंद दत्त
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए रांची से
झारखंड की राजधानी रांची से सटे खूंटी ज़िले में तीन नाबालिग़ लड़कियों के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है. पुलिस के मुताबिक़ इसकी घटना की शिकायत दर्ज़ कराई गई, जिसके बाद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया.
पुलिस के पास दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक पीड़ित लड़कियां एक वैवाहिक समारोह से लौट रही थीं, तभी रास्ते में उनके साथ ये घटना हुई.
घटना 21 फरवरी की है, परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने 23 फरवरी को मामला दर्ज कर सभी अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक़, इस मामले में 12 से 17 साल की उम्र के 18 नाबालिग़ों के शामिल होने का आरोप है. पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान अभियुक्तों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है.
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घटना के बारे में पुलिस ने क्या बताया?
अभियुक्तों के ख़िलाफ़ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. सभी अभियुक्तों को बाल सुधार गृह भेज दिया गया है.
दर्ज शिकायत के आधार पर खूंटी एसपी अमन कुमार ने पूरे घटनाक्रम के बारे में बीबीसी हिंदी से विस्तार से बात की.
उन्होंने बताया, "खूंटी ज़िले के एक गांव में लोटा पानी (सगाई) का कार्यक्रम था. सभी लड़कियां अपने परिजनों के साथ इस समारोह में शामिल होने गई थीं. अभियुक्त लड़के भी इसी समारोह में मौजूद थे."
एसपी ने कहा, "देर रात लगभग 10 बजे, जब पांच लड़कियां एक साथ अपने गांव लौट रही थीं, तब यह घटना हुई. कुछ लड़कों ने उनका पीछा किया. नदी पार करने के दौरान लड़कों ने छेड़छाड़ शुरू कर दी और पांचों को जबरन पास के जंगल की ओर ले जाने की कोशिश की."
पांच लड़कियों में सबसे बड़ी लड़की ने अपनी सहेलियों को बचाने की कोशिश. जब वह असफल रही, तो उसने खुद को छुड़ाने के लिए एक लड़के के हाथ पर दांत से काटा और भागने में सफल रही. इसी दौरान, एक और लड़की भी वहां से निकलने में कामयाब रही.
भागने में सफल रही दोनों लड़कियां समारोह वाली जगह पर पहुंचीं और अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी.
किन धाराओं के तहत दर्ज़ किया गया है मामला?
पुलिस के अनुसार, घटना की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर लिया गया.
पुलिस के मुताबिक़, हिरासत में लिए गए लड़कों में सबसे कम उम्र का अभियुक्त 13 साल का है, जबकि सबसे अधिक उम्र का अभियुक्त 17 साल का है.
वहीं, पीड़ित लड़कियों की उम्र 10, 13, 15 और 16 वर्ष बताई जा रही है. सभी अलग-अलग स्कूलों में पढ़ती हैं.
खूंटी एसपी अमन कुमार ने बताया, ''पीड़िताओं का बयान लेने के बाद उन्हें मेडिकल जांच के लिए भेज दिया गया. सोमवार 24 फरवरी की देर शाम तक उनका मेडिकल कराया गया.''
अभियुक्तों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126(2), 115(2), 109, 127(2), 70 (2), 4/8 पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
झारखंड हाईकोर्ट के वकील सोनल तिवारी के मुताबिक़, बीएनएस की धारा126(2) यानी कोई किसी को गलत तरीके से कहीं जाने से रोक रहा हो. इसके तहत एक महीने की जेल और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है. वहीं धारा 115(2), स्वेच्छा से चोट पहुंचाना. इसमें एक साल तक की सजा और दस हजार जुर्माने का प्रावधान है.
बीएनएस की धारा 109 यानी हत्या की कोशिश के तहत दस साल तक की जेल या आजीवन कारावास हो सकती है. धारा 127(2) यानी किसी भी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद करना. इसमें एक साल तक की जेल की सजा या पांच हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों हो सकता है.
बीएनएस की धारा 70 (2), सामूहिक बलात्कार, इसके तहत आजीवन कारावास के साथ मौत की सजा भी दी जा सकती है.
4/8 पोक्सो एक्ट तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके तहत कम से कम दस साल, या आजीवन कारावास. अगर अपराध 16 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ होता है, तो कम से कम सजा 20 साल, या आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा सकती है.
झारखंड हाईकोर्ट के वकील शैलेष पोद्दार के मुताबिक, सोलह वर्ष की आयु पूरी कर चुके या उससे अधिक उम्र के किसी बच्चे द्वारा किए गए कथित जघन्य अपराध के मामले में, जूविनाइल बोर्ड ऐसे अपराध करने की उसकी मानसिक और शारीरिक क्षमता, अपराध के परिणामों को समझने की क्षमता और उन परिस्थितियों के संबंध में प्रारंभिक मूल्यांकन करेगा. फिर जेजे एक्ट (जूविनाइल जस्टिस एक्ट) की धारा 18 की उप-धारा (3) के प्रावधानों के अनुसार एक आदेश पारित कर सकता है.
वो आगे कहते हैं, बोर्ड धारा 15 के तहत प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद आदेश पारित करता है कि उक्त बच्चे पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने की आवश्यकता है या नहीं.
बोर्ड मामले की सुनवाई को ऐसे अपराधों की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र वाले बाल न्यायालय में स्थानांतरित करने का आदेश दे सकता है.
एसपी ने बताया कि पीड़िताओं को हर तरह की जरूरी मदद के अलावा कानूनी मदद भी मुहैया कराई जाएगी.
मिली जानकारी के मुताबिक़, घटना में शामिल एक अभियुक्त दसवीं की परीक्षा दे रहा है. युवक के परिजनों ने पुलिस से अनुरोध किया है कि उसे परीक्षा देने की अनुमित दी जाए. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि कोर्ट से आदेश मिलने के बाद ही वो इसकी अनुमति दे पाएंगे.
झारखंड में दुष्कर्म के मामले
पूरे मामले में खूंटी डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) की सचिव राजश्री अपर्णा कुजूर ने पीड़िताओं से मुलाकात की है.
अपर्णा कुजूर ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''मैं सोमवार को बच्चियों से मिली. वो बहुत डरी हुई हैं. मंगलवार को कोर्ट में 164 के तहत उनका बयान दर्ज कराया गया है. डीएलएसए की तरफ से सभी पीड़िताओं को तत्काल 10-10 हजार रुपए का चेक दिया गया है.''
वो आगे कहती हैं, ''हमें जागरुकता के स्तर पर अभी बहुत काम करना होगा. घटना में जो सबसे कम उम्र का लड़का शामिल है, वो छठवीं क्लास का छात्र है.''
झारखंड पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक साल 2023 से 2024 तक पूरे राज्य में रेप की कुल 3,177 घटनाएं दर्ज़ की गई हैं. इसमें साल 2024 में कुल 1,552 घटनाएं दर्ज़ हुईं. वहीं साल 2023 में 1625 घटनाएं दर्ज़ की गईं.
राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''राज्य भर में रेप की घटनाओं और उसकी संख्या को लेकर फिलहाल मैं कोई बयान नहीं दे पाऊंगा.''
''हालांकि खूंटी जिले में जो घटना हुई है, उस मामले में हम ये कोशिश कर रहे हैं कि जो अभियुक्त 16 या इससे अधिक उम्र के हैं, उन्हें जेजे एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) के तहत एडल्ट के तौर पर देखा जाए. साथ ही उसे अधिक से अधिक सजा मिल पाए, पुलिस इसके लिए प्रयास कर रही है. हालांकि यह सब कोर्ट पर निर्भर करता है.''
उन्होंने यह भी बताया, ''घटना के तत्काल बाद झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (झालसा) और डीएलएसए से संपर्क किया गया. पीड़िताओं को न्याय सम्मत कंपनशेसन के लिए प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया है. ''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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