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लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न, क्या हैं मायने?
- Author, अभिनव गोयल
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन के अगुवा रहे लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित करने का एलान किया है.
पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर लालकृष्ण आडवाणी को बधाई दी. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत के विकास में उनका योगदान बहुमूल्य है.
कुछ दिन पहले ही केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने का फैसला किया था.
भारत रत्न मिलने वालों की सूची में लालकृष्ण आडवाणी का नंबर 50वां हैं. साल 2014 में सत्ता संभालने के बाद बीजेपी ने आडवाणी समेत कुल सात लोगों को भारत रत्न दिया है, जिनमें से पांच लोगों को यह पुरस्कार दिया जा चुका है.
बीजेपी समर्थक लंबे समय से लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने की मांग कर रहे थे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह सम्मान साल 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए दिया गया है? आखिर 10 साल सत्ता में रहने के बाद यह फैसला अब क्यों लिया गया?
आखिर लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के मायने क्या हैं? यह समझने के लिए बीबीसी हिंदी ने वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री, विजय त्रिवेदी और शरद गुप्ता से बात की है.
क्या ये गुरु दक्षिणा है?
जब साल 1991 में लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या तक अपनी रथयात्रा शुरू की तो नरेंद्र मोदी को यात्रा के गुजरात चरण की तैयारी करने की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी कहते हैं कि न सिर्फ रथयात्रा के समय बल्कि पीएम मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने में भी लालकृष्ण आडवाणी की अहम भूमिका रही है और पीएम मोदी उसी सांस्कृतिक और हिंदुत्व वाले राष्ट्रवाद के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जो लालकृष्ण आडवाणी ने शुरू किया था.
ऐसी ही बात वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता करते हैं. वे कहते हैं प्रमोद महाजन, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और नरेंद्र मोदी. इन सबके प्रशिक्षक आडवाणी थे.
गुप्ता कहते हैं, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रत्न देकर अपना आभार प्रकट किया है.”
डैमेज कंट्रोल तो नहीं?
22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहे श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम था.
इस कार्यक्रम में देश विदेश के हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया, लेकिन श्रीराम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले दो प्रमुख चेहरे लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी दिखाई नहीं दिए.
ऐसा नहीं था कि मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें निमंत्रण नहीं भेजा. बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा, “आडवाणी जी का होना अनिवार्य है लेकिन हम उनसे ये भी कहेंगे कि वे न आएं…मैं बार-बार कहता हूं कि आपकी आयु अधिक है, सर्दी है और आपने घुटने भी बदलवाए हैं.”
ट्रस्ट ने बार-बार उनके खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया, लेकिन वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री मानते हैं कि ऐसा जानबूझकर किया गया.
वे कहते हैं, “लोगों को इनवाइट किया जाता है, लेकिन आडवाणी जी को अनइनवाइट किया गया और ये सारे देश ने देखा. चंपत राय ने कहा कि आप मत आओ. जब आप उन्हीं की उम्र के दलाई लामा को बुला सकते हैं, तो आडवाणी को क्यों नहीं? इससे बीजेपी को शर्मिंदगी हुई, उसको कहीं न कहीं डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की गई है.”
अत्री कहते हैं, “बीजेपी दस साल से सत्ता में हैं, अगर चाहती तो पहले भी दिया जा सकता था, लेकिन राम मंदिर कार्यक्रम शायद वह मौका है जिसने भारत रत्न का रास्ता साफ किया.”
क्या संदेश देना चाहती है बीजेपी?
जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने का एलान किया गया तो राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे एक चुनावी स्टंट बताया.
विश्लेषकों का कहना था कि बिहार में अति पिछड़ा वर्ग को अपनी तरफ लाने और बिहार में हुए जातिगत सर्वे की काट के लिए यह फैसला लिया गया.
वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी कहते हैं, “कुछ ही दिन पहले कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिया गया. अगर राजनीतिक शब्दों का इस्तेमाल करें, तो मंडल और कमंडल दोनों को साधने की कोशिश की गई है.”
लेकिन आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के फैसले को वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता चुनाव से नहीं जोड़ते.
वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री कहते हैं, “बीजेपी में एक बड़ा वर्ग है, जिसने अपनी पूरी उम्र जनसंघ और आरएसएस में खपा दी. उन्हें नाराज़गी थी कि आडवाणी जी को उचित सम्मान नहीं दिया गया है.”
अत्री कहते हैं, “भारत रत्न के ज़रिए इस बुज़ुर्ग वर्ग को खुश करने की कोशिश की गई है, कि हम नए लोगों के साथ-साथ पुराने लोगों को भी नहीं भूलते हैं.”
भारत रत्न दिए जाने पर सवाल?
गृह मंत्रालय के मुताबिक भारत रत्न किसे मिलेगा? इसकी सिफारिश खुद प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति से करते हैं.
इसके अलावा किसी अन्य औपचारिकता की ज़रूरत नहीं पड़ती है. एक साल के अंदर अधिक से अधिक तीन भारत रत्न दिए जा सकते हैं.
राजनीति के जानकार लोग भारत रत्न पुरस्कार को राजनीति से प्रेरित सम्मान बताते हैं.
वरिष्ठ पत्रकार शरद गुप्ता कहते हैं, “भारत रत्न किसे दिया जाएगा, इसका कोई मापदंड नहीं है, न ही योग्यता की कोई खास परिभाषा है. लोग लोकसभा चुनाव हार जाते हैं, तो उन्हें राज्यसभा भेज दिया जाता है. कुछ लोगों को खुश करने के लिए राज्यपाल बना दिया जाता है, तो किसी खास वर्ग को संतुष्ट करने के लिए राष्ट्रपति बना दिया जाता है. यही बात भारत रत्न के साथ भी है.”
वे कहते हैं, “जब आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्या तक की यात्रा की, तो उसके चलते जगह-जगह दंगे हुए. उनका राजनीतिक संदेश उनके कार्यकर्ताओं के लिए था, वह कोई देश के लिए राजनीतिक संदेश नहीं है. आडवाणी जी ने जिस विचारधारा को आगे बढ़ाया, उससे देश को क्या लाभ मिला, वो एक बहस का विषय हो सकता है.”
वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी कहते हैं कि लालकृष्ण आडवाणी को भारतीय जनता पार्टी या जनसंघ के नेता के तौर पर देखना उनके राजनीतिक जीवन के प्रति अन्याय होगा.
वे कहते हैं, “मैं समझता हूं कि भारत की राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हैं जो आडवाणी की राजनीतिक सुचिता की बराबरी कर सकते हैं. आज जब हिंदुस्तान में भ्रष्टाचार, ईडी और जेल जाने को लेकर नेताओं की चर्चा हो रही है.”
“जब लालकृष्ण आडवाणी का नाम हवाला कांड में सामने आया, तो तुरंत उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दिया और यह भी एलान किया कि जब तक वे बेदाग नहीं हो जाएंगे, तब तक संसदीय राजनीति नहीं करेंगे. आज राजनेता भ्रष्टाचार के मामले में जेल से सरकार चलाने की बात कर रहे हैं.”
इसके साथ ही वे कहते हैं कि गठबंधन की राजनीति में लालकृष्ण आडवाणी की भूमिका को याद किया जाना चाहिए, क्योंकि आज का दौर फिर से उसी तरफ बढ़ रहा है.
वे कहते हैं, “1996 में समर्थन न मिलने के चलते वाजपेयी जी की सरकार 13 दिन में गिर गई थी. तब आडवाणी जी ने कहा था कि हम सोशल अनटचेबिलिटी को खत्म करने की बात करते हैं, लेकिन पॉलिटिकल अनटचेबिलिटी चला रहे हैं. ये पॉलिटिकल अनटचेबिलिटी खत्म होनी चाहिए.”
“पॉलिटिकल अनटचेबिलिटी, गठबंधन की राजनीति का महत्वपूर्ण शब्द है. उसमें किसी भी राजनीतिक दल को दुश्मन समझना या अछूत समझना ठीक नहीं है और यही वजह है कि उन्होंने एनडीए गठबंधन को बहुत अच्छे से चलाया.”
आडवाणी की बेटी ने क्या कहा?
लालकृष्ण आडवाणी को यह सम्मान दिए जाने के एलान के बाद उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी ने खुशी ज़ाहिर की है.
प्रतिभा आडवाणी ने पत्रकारों से कहा, "मुझे भी और पूरे परिवार को खुशी है कि 'दादा' को इतना बड़ा, देश का सर्वोच्च सम्मान मिला है. निश्चित ही आज मुझे एक व्यक्ति जिसकी सबसे ज़्यादा याद आ रही है, वो मेरी मां हैं. मां का दादा का जीवन में बहुत बड़ा योगदान रहा है. निजी जीवन में भी और राजनीतिक जीवन में भी."
उनके अनुसार, "दादा बहुत खुश हैं. मैंने जब दादा को बताया तो वो बहुत ही खुश थे. वो बोले कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगाया, इसके लिए वो खुश हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करते हैं और देश की जनता का, जिनसे वो असीम प्रेम करते हैं. उनका भी बहुत धन्यवाद करते हैं."
"जीवन भर वे कम शब्दों वाले इंसान रहे लेकिन स्वाभाविक तौर पर उनकी आंखों में आंसू थे. इस बात की संतुष्टि और खुशी दोनों है कि उन्होंने अपना पूरा जीवन देश की सेवा में लगाया. उनके जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा जाना बहुत बड़ी बात है."
बीजेपी नेताओं ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "हम सबके प्रेरणास्रोत एवं देश के वरिष्ठ नेता, श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न दिये जाने के निर्णय से बड़े हर्ष और आनंद की अनुभूति हुई है. वे राजनीति में शुचिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं. आडवाणी जी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अनेक भूमिकाओं में, देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में जो महत्वपूर्ण योगदान किया है, वह अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद है."
"भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने में भी उनकी महती भूमिका रही है. एक राष्ट्रीय नेता के रूप में उन्होंने अपनी विद्वता, संसदीय एवं प्रशासनिक क्षमता से देश और लोकतंत्र को मज़बूत किया है. उन्हें भारत रत्न का सम्मान मिलना हर भारतवासी के लिए हर्ष का विषय है. मैं इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूँ एवं आडवाणी जी का अभिनंदन करता हूँ."
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, असंख्य कार्यकर्ताओं के प्रेरणास्रोत एवं पूर्व उप प्रधानमंत्री आदरणीय श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किए जाने का निर्णय, उनके सार्वजनिक जीवन में दशकों की सेवा, प्रतिबद्धता और राष्ट्र की अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता तथा राजनीतिक जीवन में शुचिता व नैतिकता के उच्च मानक स्थापित करने वाले उनके अद्वितीय प्रयासों को सम्मान प्रदान करने वाला है."
"राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की दिशा में किए गए उनके अथक प्रयास हम सभी के लिए अद्वितीय प्रेरणा के स्रोत हैं. आदरणीय आडवाणी जी को हार्दिक बधाई!"
केंद्रीय मंत्री नीतिन गडकरी ने कहा, “देश के वरिष्ठतम नेता और हमारे मार्गदर्शक आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न की घोषणा अत्यंत सुखद और आनंददायी है."
"आज़ादी के बाद देश के पुनर्निर्माण में आडवाणी जी की अहम भूमिका रही है. आडवाणी जी राजनीति में शुचिता के जीवंत उदाहरण है."
"आडवाणी जी को 'भारत रत्न' घोषित करने के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं तथा आडवाणी जी के स्वस्थ और दीर्घायु की प्रार्थना करता हूं."
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