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अयोध्या को अयोध्या की पहचान दिलानी है: योगी
- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अयोध्या से
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'अयोध्या को अयोध्या की पहचान' दिलाने की बात कही है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार दोपहर बाद अयोध्या में कहा, "अयोध्या की पहचान दिलाने के लिए हम सब इस बारे में कह सकते हैं कि दुनिया के तमाम सनातन धर्म को माननेवालों के लिए अयोध्या की पहचान उसी रूप में है जैसे अन्य मतावलंबियों के लिए अपने-अपने पवित्र स्थलों की पहचान है."
योगी के बयान के बाद चर्चा इस बात पर होगी कि उनका इशारा किस तरफ़ था. पिछले दीपोत्सव में उनके 'मंदिर था, मंदिर है और रहेगा' वाला बयान इस दफ़ा क्या इस रूप में पेश किया गया है या वो दूसरे पक्ष यानी मुसलमानों को संकेतों में विवादित स्थल पर दावा छोड़ने को कह रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ज़मीन के मालिकाना हक़ पर किसी दिन भी फ़ैसला सुना सकती है.
योगी आदित्यनाथ ने मोदी काल में भारत के फिर से विश्वगुरु बनने की तरफ़ उठते क़दम सरकारी योजनाओं की बात की और कहा कि 'पहले की सरकारें अयोध्या नाम से डरती थीं, यहां आना भी नहीं चाहती थीं, लेकिन पिछले ढाई साल से मैं कम से कम डेढ़ दर्जन बार अयोध्या आ चुका हूं.'
दीपोत्सव के अवसर पर उन्होंने अयोध्या के लिए 226 करोड़ रुपये की अलग-अलग योजनाओं का भी ऐलान किया जिसमें राम की पौड़ी के विकास का काम भी शामिल है.
योगी सरकार ने पिछली दीवाली पर राजा दशरथ के नाम पर मेडिकल कालेज और राम की विशाल प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा भी की थी. साथ ही एक एयरपोर्ट बनाने की बात की गई थी जिसे राम के नाम से जाना जाएगा.
शनिवार के कार्यक्रम में राम-सीता-लक्ष्मण की वनवास से अयोध्या वापसी (झांकी) दरअसल हेलीकॉप्टर से हुई.
सरयू किनारे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पधारे, गेरुए लिबास में नीले रंग की हेलीकॉप्टर पर सवार; फिर आए राम, सीता और लक्ष्मण. केंद्रीय और प्रदेश के मंत्रियों की मौजूदगी में आर्टिस्टों ने भरत मिलाप के सीन का पार्ट अदा किया.
जय-जय श्रीराम के नारों के बीच राम-सीता का रथ स्टेज तक पहुंचा जहां उन्हें कुर्सियों पर बिठा दिया गया. फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष स्टैंप जारी किया और उनका भाषण हुआ.
दीपोत्सव 2019 की मुख्य अतिथि फ़िजी की मंत्री वीणा भटनागर ने यूं तो बड़ी मीठी बातें की लेकिन उनके भाषण में महात्मा गांधी और फ़िजी की धर्म-निरपेक्ष किरदार का भी ज़िक्र हुआ.
इन सबके बीच आरती और द्वीप प्रज्जवलन का समय आ पहुंचा था औ जब दियों के जलने के बाद बत्तियां धीमी की गईं तो राम की पौड़ी दियों की रोशनी में नहा सी गई.
इस दीपोत्सव में साढ़े पांच लाख दीपों को प्रज्वलित किया गया था, इस आशय से कि ये गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो सके और इसके लिए गिनीज़ की टीम भी अयोध्या में मौजूद थी.
पिछली दीवाली राम की नगरी कही जानेवाली अयोध्या में तीन लाख दिये रोशन हुए थे और वो भी एक रिकॉर्ड था.
एक ही कार्यक्रम में सबसे अधिक, ढेढ़ लाख, दिये जलाने का रिकॉर्ड सबसे पहले हरियाणा के सिरसा में गुरु राम रहीम के डेरे में क़ायम किया गया था. राम रहीम बलात्कार के मुक़दमों में फिलहाल जेल में हैं.
आतिशबाज़ी के बाद मुख्यमंत्री, हिंदू संतों, सरकारी अमलों का क़ाफ़िला और मीडिया की भीड़ एक बार फिर राम कथा पार्क पहुंची जहां विदेश से आए रामलीला ट्रूप्स शो की तैयारियां पूरी कर चुके थे.
फ़िलीपींस से आई मंडली की बैले शैली में तैयार रामलीला की कोरियोग्राफ़ी ने इसे बिल्कुल आधुनिक रूप दे दिया था और दर्शक उसमें खो से गए.
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