सऊदी अरब को पीछे छोड़ रूस, इराक आगे हुए और फ़ायदा भारत को पहुंचा- प्रेस रिव्यू

अगस्त में गिरावट के बाद सितंबर महीने में रूस और इराक से भारत आने वाले कच्चे तेल की मात्रा में इजाफ़ा देखने को मिला है.

सऊदी अरब के मुकाबले कम कीमत पर कच्चे तेल का मिलना इसकी एक वजह हो सकता है.

इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपने यहां जगह दी है.

अखबार के मुताबिक, अगस्त महीने में रूस से भारत आने वाला कच्चा तेल, सात महीने के निचले स्तर पर गिरकर 10.55 लाख बैरल प्रति दिन हो गया था.

हालांकि सितंबर में 18.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत ने हर दिन रूस से 18.3 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा.

वहीं इराक से आने वाले कच्चे तेल की बात करें, तो अगस्त के मुकाबले सितंबर महीने में 7.4 प्रतिशत की बढ़त दिखती है, जो करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन था.

भारत ने सितंबर महीने में अपने कुल तेल आयात का 43 प्रतिशत रूस से और 22 प्रतिशत इराक से खरीदा, वहीं अगस्त में रूस की हिस्सेदारी 35.4 फीसद और इराक की हिस्सेदारी 19.4 फीसद थी.

दूसरी तरफ सऊदी अरब से कच्चा तेल के आयात में गिरावट आई है. खबर के मुताबिक अगस्त महीने में सऊदी अरब की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत थी, जो सितंबर महीने में घटकर 13 प्रतिशत पर आ गई है.

सितंबर महीने में भारत ने सऊदी अरब से करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है. गिरावट को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि जनवरी 2022 से लेकर अगस्त 2023 तक भारत ने सऊदी अरब से 7 लाख 50 हजार बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया है.

अखबार के मुताबिक, मौजूदा समय में सऊदी अरब, भारत को कच्चा तेल देने के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है. अगर पहले नंबर की बात की जाए, तो वह रूस है और उसके बाद नंबर इराक का आता है.

परंपरागत रूप से कच्चे तेल खरीदने के मामले में भारत के लिए इराक के बाद सऊदी अरब का दूसरा नंबर हुआ करता था, लेकिन यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस, सस्ती दरों पर कच्चा तेल बेच रहा है, जिसने भारत के लिए इराक और सऊदी अरब को पीछे धकेल दिया है.

युद्ध से पहले कच्चे तेल के आयात में रूस, भारत के लिए एक छोटा खिलाड़ी था

अखबार ने केप्लर में क्रूड एनालिस्ट के प्रमुख विक्टर कटोना के हवाले से लिखा है कि सस्ती कीमतों की वजह से रूस के साथ भारत का आयात बढ़ा है और अगर भारत, मध्य पूर्व के देशों से कच्चा तेल खरीदना चाहते हैं, तो वे इराक को तवज्जो देते हैं, क्योंकि वहां का तेल सऊदी अरब के मुकाबले करीब दो डॉलर प्रति बैरल सस्ता है.

जानकारों का मानना है कि अगस्त महीने में रूस ने कच्चे तेल की कीमतों को थोड़ा बढ़ा दिया था, जिसके बाद आयात घट गया था. कीमतों को कम करने के बाद ही सितंबर में तेल का आयात बढ़ा है.

बेटी की फोटो खींचने से मना करने पर पिता की हत्या

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में बेटी के साथ छेड़छाड़ का विरोध करने पर पड़ोसियों ने कथित तौर पर पिता की पिटाई की, जिससे रविवार को उनकी मौत हो गई.

यह खबर हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने छापी है. अखबार ने पुलिस के हवाले से बताया है कि शनिवार रथगवां गांव में लड़की छत पर झाड़ू लगा रही थी, तभी पड़ोस के घर के कुछ लोग उसकी तस्वीरें लेने और छेड़छाड़ करने लगे.

खबर के मुताबिक, जब पिता ने इसका विरोध करने के लिए अपने बेटे को पड़ोसियों के घर भेजा, तो वे माफी मांगने के बजाय लाठी डंडे लेकर उनके घर आ गए और मारपीट करने लगे.

पुलिस के मुताबिक पड़ोसियों ने पिता को घर से बाहर निकाला और बेरहमी से पिटाई की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां रविवार को उनकी मौत हो गई.

पीड़ित परिवार ने अपने पड़ोसी और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है.

अखबार ने सर्कल ऑफिसर संजय जायसवाल के हवाले से बताया है कि इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने अभियुक्त पड़ोसी को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं दो अन्य की तलाश जारी है.

असम के चार जिलों में ‘अफस्पा’ को बढ़ाया

असम के चार जिलों में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम(अफस्पा) को और छह महीनों के लिए बढ़ा दिया गया है.

इस खबर को द हिंदू अखबार ने पहले पन्ने पर जगह दी है. खबर के मुताबिक असम पुलिस के पुलिस महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने यह जानकारी दी है.

उन्होंने कहा कि 4 अन्य जिलों से अशांत क्षेत्र का दर्जा हटा लिया है, जिसके कारण अफस्पा लगाया जाता है.

ज्ञानेंद्र प्रताप ने कहा कि अब सिर्फ चार जिलों में ही अफस्पा रहेगा, जिसमें डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, शिव सागर और चराइदेव शामिल हैं.

सिंह ने कहा कि 1 अक्टूबर से जोरहाट, गोलाघाट, कार्बी आंगलोंग और दीमा हसाओ से अफस्पा हटा लिया गया है.

खबर के मुताबिक, असम सरकार ने इससे पहले इन आठ जिलों में एक अप्रैल को छह महीने के लिए अफस्पा को बढ़ाया था.

अफस्पा के तहत बिना किसी पूर्व वारंट के सुरक्षाबलों के अभियान चलाने और किसी को भी गिरफ्तार करने का अधिकार होता है.

सिंह का कहना है कि मुश्किल भरे 30 से 40 साल बीत जाने के बाद आज असम में शांतिपूर्ण माहौल है.

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