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मुज़फ़्फ़रनगरः छात्र की पिटाई के वायरल वीडियो मामले में मुक़दमा दर्ज लेकिन...
- Author, दिलनवाज पाशा और अमित सैनी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी
उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर के एक निजी स्कूल में मुस्लिम बच्चे की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
वीडियो के वायरल होने के बाद शनिवार को बच्चे के पिता की तहरीर के आधार पर स्कूल की शिक्षिका तृप्ता त्यागी के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 323 और 506 के तहत मुक़दमा दर्ज किया है.
ये धाराएं चोट पहुंचाने और जानबूझकर अपमान करने से जुड़ी हैं.
खतौली के पुलिस क्षेत्राधिकारी डा. रवि शंकर मिश्रा ने बताया, "बच्चे के पिता इरशाद की तहरीर पर मंसूरपुर थाने में नेहा पब्लिक स्कूल की संचालिका तृप्ता त्यागी के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 323 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है."
लेकिन ज़िला पुलिस ने इस मामले में दी गई तहरीर के मुताबिक धर्म विशेष के ख़िलाफ़ टिप्पणी को लेकर धारा 123 ए का इस्तेमाल नहीं किया है, इस बारे में पूछे जाने पर पुलिस क्षेत्राधिकारी ने कहा, "जांच की जा रही है. जांच में आगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के मुताबिक विधिवत कार्रवाई की जाएगी."
क्या कह रही हैं बच्चे की मां
इस पूरे मामले में बच्चे की मां रूबीना कहती हैं, "मैडम ने ग़लत किया है. बच्चों से नहीं पिटवाना चाहिए था, चाहे ख़ुद मार लेती."
रुबीना यहीं नहीं ठहरती हैं, वो कहती हैं, "ऐसा लगता है कि मैडम मुसलमानों के ख़िलाफ़ हैं. इसका मतलब तो ये ही है."
वहीं नेहा पब्लिक स्कूल की संचालिका तृप्ता त्यागी का मानना है कि इस घटना को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है.
तृप्ता कहती हैं, "ये कुछ भी मामला नहीं था. ये बनाया गया है. मुझे साज़िश के तहत फंसाया गया. मैं किसी भी बच्चे को हिंदू-मुस्लिम की दृष्टि से नहीं देखती. मेरे स्कूल में अधिकांश बच्चे मुस्लिम ही हैं. पीटने वाले बच्चों में मुस्लिम बच्चे भी थे."
हालांकि इस मामले में बच्चे के पिता इरशाद ज़रूर ये कहते हैं, "इसमें हिंदू मुस्लिम वाला कोई मामला नहीं है, सिर्फ़ बच्चे की पिटाई का ही मामला है. वो मेरे बच्चे को टॉर्चर कर रहे थे. हमने एफ़आईआर करा दी है. अब जो भी करेगा, वो प्रशासन ही करेगा."
इस मामले को लेकर लखनऊ के मानवाधिकार वकील एसएम हैदर रिज़वी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास शिकायत दर्ज की है.
इस शिकायत में उन्होंने शिक्षिका पर धारा 153A, 295A, 298 के तहत धार्मिक आधार पर घृणा और अपमान को बढ़ावा देने के मामले दर्ज करने की मांग की है.
एसएम हैदर रिज़वी कहते हैं, "मैंने तीनों वीडियो देखे हैं, आप देखिए कि शिक्षिका मुस्लिम महिलाओं के ख़िलाफ़ बोल रही हैं. मुस्लिम लड़के को मारने के लिए छोटे बच्चों को उकसा रही हैं और उसको डिफेंड भी कर रही हैं. इसलिए मैंने संबंधित आयोगों को शिकायती पत्र भेजा है."
हालांकि बच्चे के पिता ने धार्मिक आधार की बात को ख़ारिज़ किया है.
इस बारे में रिज़वी कहते हैं, "यह तो स्वभाविक ही है, इसकी वजह भी स्पष्ट है. पिता का पहले वाला बयान सुन लीजिए, वो तो कोई शिकायत ही दर्ज नहीं करना चाहते थे. जब मामला सुर्खियों में आया है तब प्रशासन ने उनसे तहरीर ली है. लेकिन संबंधित धाराओं में मुक़दमा दर्ज नहीं किया है, यह सुप्रीम कोर्ट के घृणा को बढ़ावा देने वाले हेट स्पीच क़ानून के निर्देशों का भी उल्लंघन है. जिसके मुताबिक ज़िला पुलिस प्रशासन को स्वत: संज्ञान लेना चाहिए था."
मुज़फ़्फ़रनगर के ज़िलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी कहते हैं, "वायरल वीडियो की जांच कराई गई है. वीडियो बच्चे के चचेरे भाई ने वायरल किया था. जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी हिसाब से क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी."
बच्चे का नाम स्कूल से कटा
वैसे इस मामले में बच्चे का नाम नेहा पब्लिक स्कूल से काट दिया गया है. बच्चे के स्कूल से नाम कटाए जाने को लेकर छात्र की मां रुबीना कहती हैं, "हमने अपने आप नाम नहीं कटाया था. बेटे की पिटाई की शिकायत करने गए तो कहा गया कि आप अपने बच्चे को कहीं और पढ़ा लो."
वहीं शिक्षिका तृप्ता त्यागी बच्चे के नाम काटे जाने के आरोप पर कहती है, "उसका नाम नहीं काटा. ये ग़लत आरोप है. परिजनों ने इसी शर्त पर समझौता किया था कि उन्हें छह महीने की फीस वापस दी जाए और उनकी शर्त को मानते हुए उन्हें फीस वापस कर दी गई."
शिक्षिका का दावा है कि ये समझौता पुलिस प्रशासन ने कराया था, हालांकि पुलिस प्रशासन ने अपनी ओर से किसी तरह का समझौता कराए जाने की बात नहीं कही है.
वहीं रूबीना कहती हैं, "मैडम ने अपने आप ही फीस वापस कर दी."
वहीं पीड़ित मुस्लिम छात्र के पिता इरशाद कहते हैं, "बच्चों का मैडम ने आपस में विवाद कराया. हमने आपस में समझौता कर लिया है. मैडम ने हमारी फीस वापस कर दी है. अब अपने बच्चे को उस स्कूल में नहीं पढ़ाना है. चाहे उसे अनपढ़ ही रखना पड़े."
क्या थी घटना?
ये घटना गांव में ही स्थित नेहा पब्लिक स्कूल की थी. वीडियो में दिख रहीं महिला टीचर तृप्ता त्यागी ही इस स्कूल की संचालिका भी हैं. वे पिछले कई सालों अपने घर में ही स्कूल चला रही हैं.
इसी गांव में रहने वाले इरशाद का सबसे छोटा बेटा स्कूल में कक्षा यूकेजी का छात्र है. जो वीडियो वायरल हुआ वो 24 अगस्त को स्कूल में ही रिकॉर्ड किया गया था.
वीडियो में तृप्ता त्यागी क्लास में इरशाद के बच्चे को दूसरे छात्रों से पिटवा रही हैं और 'मोहम्मडन बच्चों को लेकर टिप्पणी' करती दिख रही हैं.
बच्चे के पिता इरशाद कहते है, "मैडम दूसरे बच्चों से मेरे बेटे को पिटवा रही थीं. उस तरफ़ किसी काम से गए मेरे भतीजे ने मेरे बेटे को पिटते हुए देखा तो वीडियो बना ली और हमें दिखाया."
इरशाद कहते है, "उस दिन मैं करीब तीन बजे स्कूल गया, लेकिन मैडम ने अपनी ग़लती नहीं मानी. बल्कि कहा कि यहां तो ये ही रूल चलता है. हम दो बार गए, लेकिन वो तब भी नहीं मानी, जिसके बाद हमने वीडियो वायरल कर दी."
मुद्दे का राजनीतिकरण
इस वीडियो के सामने आने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी, भाजपा सांसद वरुण गांधी और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है.
इन नेताओं ने बीजेपी के शासन के दौरान अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर टिप्पणी भी की है.
हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, "टीचर के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई गई है. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाए जाएंगे."
उधर, मुज़फ़्फ़रनगर के मंसूरपुर थाना क्षेत्र के ख़ब्बूपुर गांव में इरशाद और तृप्ता त्यागी का घर भी हलचल का केंद्र रहा. जहां इरशाद के घर पर स्थानीय राष्ट्रीय लोकदल के स्थानीय विधायक चंदन सिंह चौहान पहुंचे.
वहीं, केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान और किसान नेता नरेश टिकैत ने शिक्षिका तृप्ता त्यागी से मुलाकात की. त्यागी समाज के दबदबे वाले इस गांव में क़रीब 70 फ़ीसदी हिंदू परिवार रहते हैं. हिंदू त्यागी के अलावा इलाके में मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में हैं.
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