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इमरान ख़ान ने कहा पाकिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ, उन्हें सत्ता की रेस से बाहर रखने की कोशिश
- Author, केरोलाइन डेविस
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पाकिस्तान
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने जीवन की कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. नौ मई को उन्हें गिरफ़्तार किया गया था और तब समर्थकों ने उनकी रिहाई के लिए जबरदस्त प्रदर्शन किया था.
लेकिन, रिहा होने के बाद वो कई मुश्किलों में घिरे हैं.
उनके कई सहयोगी गिरफ़्तार हैं और कई समर्थक उनका साथ छोड़ रहे हैं. माना जा रहा है कि इसकी वजह सरकार और सेना की ओर से की जा रही सख्ती है.
इस बीच इमरान ख़ान भी अपनी रणनीति पर दोबारा गौर कर रहे हैं. इमरान ख़ान ने बीबीसी से ख़ास बातचीत में ख़ुद पर लग रहे आरोपों और अपनी रणनीति के बारे विस्तार से बात की.
आप पर कई आरोप लगाए जा रहे हैं.
इमरान ख़ान- ये इस बात का सवाल नहीं है कि मैंने क्या गलत किया है. यहां लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.
आपने जो कुछ कहा या कुछ किया, आप उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं ले रहे हैं?
इमरान ख़ान- मैंने एक भी ऐसी चीज़ नहीं कही है, जिसकी वजह से ये सब हो रहा है, ऐसी एक भी बात नहीं.
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पाकिस्तान में इस समय सियासी उठापटक जारी है.
इमरान ख़ान- राजनीतिक विपक्ष होना, सार्वजनिक रैलियां करना, अपने लोगों को जागरूक बनाना, चुनावों के लिए अपने लोगों को एकजुट करना, ये सब कब से विध्वंसकारी होने लगा. कब से ये सभी चीज़ें लोकतंत्र के लिए ख़तरा बनने लगी हैं? हक़ीक़त में जब विपक्ष नहीं होता, तब लोकतंत्र का अंत होता है.
इन सबका लोकतंत्र से लेना-देना नहीं है, बल्कि आपको राजनीतिक सत्ता में दोबारा स्थापित करना है, ऐसा ही है ना?
इमरान ख़ान-इस साल तो चुनाव होने ही थे. तो हमें इस साल तो चुनाव की तैयारियां करनी ही थीं, सार्वजनिक रैलियां करनी ही थीं और पूरे राजनीतिक दल को जेल में डाल दिया गया है.
सारा नेतृत्व सलाखों के पीछे हैं. लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता है. जहां कानून का राज होता है, वहां ऐसा नहीं होता.
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लेकिन आपने भी तो अपने समय में विपक्षी नेताओं को जेल में डाला था?
इमरान ख़ान-जो कुछ हो रहा है, उससे आप कोई तुलना नहीं कर सकते.
आपने भी उसी सिस्टम का इस्तेमाल किया था, जिसका इस्तेमाल वो अब कर रहे हैं.
इमरान ख़ान-बिलकुल नहीं. विपक्ष के खिलाफ दर्ज 95 फीसदी मामले हमारे आने से पहले के थे.
हमें वो विरासत में मिले थे. केस पहले से चल रहे थे. हमने वो केस दर्ज नहीं कराए थे. लेकिन बीते कुछ महीने के दौरान मेरे खिलाफ़ 150 मामले दर्ज किए गए हैं. इस देश में ऐसा कभी नहीं हुआ है.
इस देश में ऐसा ही होता है. जो सत्ता में होता है, वो विपक्ष को जेल में डालता है और फिर दूसरे वाला सत्ता में आने पर यही करता है.
इमरान ख़ान-वो मुझसे क्या कह रहे थे. आपको तथ्य सही कर लेने चाहिए. हमें विरासत में केस मिले थे, भ्रष्टाचार से जुड़े मामले. वो तब दर्ज हुए थे, जब वो सत्ता में थे.
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आप कह रहे हैं कि आप विचार-विमर्श चाहते हैं, बातचीत चाहते हैं. लेकिन आपकी स्थिति एक महीने पहले की तुलना में काफ़ी कमज़ोर नज़र आ रही है. आप अब ऐसा क्या ऑफर कर सकते हैं, जो आपने एक महीने पहले ऑफर नहीं किया था?
इमरान ख़ान-मेरी स्थिति तब कमज़ोर होगी, जब मैं अपना वोटबैंक खो दूंगा.
राजनीतिक दल तब कमज़ोर पड़ता है जब उसका वोट बैंक सिकुड़ने लगता है.
आपको लगता है कि मेरे लिए ये बड़ा संकट है, लेकिन मैं ऐसा नहीं सोचता. ये देश लोकतंत्र से घटकर कहां आ गया है.
हम बुनियादी रूप से मार्शल लॉ का सामना कर रहे हैं.
लेकिन आप बातचीत के समय टेबल पर क्या रखेंगे? क्योंकि मोलभाव में आपको भी कुछ ऑफर करना होगा.
इमरान ख़ान-मुझे हैरानी इस बात की है कि वो लोग इससे हासिल क्या करना चाहते हैं.
मुझे इस बात का डर है कि हर दिन बीतने के साथ देश कमज़ोर पड़ रहा है. पाकिस्तान अपने इतिहास में सबसे ख़राब आर्थिक संकेतों का सामना कर रहा है.
मुझे सरकार से ये जानना है कि मुझे रेस से बाहर करने पर पाकिस्तान को क्या फायदा होगा?
आप क्या ऑफर कर रहे हैं?
इमरान ख़ान-बातचीत, ताकि मैं सोच को समझ सकूं. मैंने बोला है कि आप मुझे इस बात पर राज़ी कर लें कि ये बात पाकिस्तान के हित में है, मैं मान लूंगा.
आपकी पार्टी ने कहा कि इमरान ख़ान हमारी रेड लाइन है, वो महीनों से ये कह रहे हैं, इसका मतलब क्या है?
इमरान ख़ान- इसका मतलब है कि जिस तरह की चीज़ें इस देश में हो रही हैं, कोई कानून व्यवस्था नहीं है, लोगों को उठाया जा रहा है, मेरे खिलाफ़ केस दर्ज किए जा रहे हैं, अगर वो सोच रहे हैं कि वो चुप बैठे रहेंगे, और मुझे जेल में धकेल दिया जाएगा, तो इस पर प्रतिक्रिया होगी.
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आप समझ सकते हैं कि ये एक तरह से धमकी की तरह लग रहा है?
इमरान ख़ान-मैंने कोई धमकी नहीं दी है. ये बात पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कही है.
आप उनसे खुद को अलग नहीं कर सकते क्योंकि आप ही पार्टी हैं.
इमरान ख़ान- तो मुझे क्या कहना चाहिए? अगर वो कहें कि इमरान ख़ान रेड लाइन है, तो मुझे कहना चाहिए कि नहीं मैं रेड लाइन नहीं हूं? मुझे क्या कहना चाहिए?
लेकिन फिर आप ये नहीं कह सकते कि आप उन हालात के लिए ज़रा भी ज़िम्मेदार नहीं है, जिसमें लोग सड़कों पर हिंसक हो उठते हैं.
इमरान ख़ान-आप बहुत अच्छी तरह जानती हैं कि ब्रिटेन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार आपके लोकतंत्र और संविधान का हिस्सा है.
लेकिन ये हमेशा शांतिपूर्ण नहीं था.
इमरान ख़ान-कब शांतिपूर्ण नहीं था, बताइए मुझे.
मैं इस्लामाबाद में थी, जहां लोग भावनात्मक होकर आपके बारे में बात कर रहे थे. लेकिन वही दूसरे लोग भी थे, जिनके हाथों में गुलेल थी, वो पुलिस पर पत्थर फेंक रहे, लाठियों से हमले कर रहे थे. आपके समर्थक उस समूह का हिस्सा थे, जो सेना की बिल्डिंग जला रही थी.
इमरान ख़ान-ये सच नहीं है, इस बारे में स्वतंत्र जांच होनी चाहिए.
मैंने जेल से बाहर आते ही जांच कराने की मांग कही थी. इस बात की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए कि आगजनी में कौन शामिल था.
अब आगे की क्या योजना है? आपके पार्टी नेतृत्व ने आपका साथ छोड़ दिया है. आपके कई पार्टी समर्थक जेल में हैं या फिर डरे हुए हैं. तो आप क्या करेंगे?
इमरान ख़ान- सबसे पहले मेरी ज़िम्मेदारी पार्टी के सारे खाली पद भरने की है. युवा जोश को लाना है. नए लोग आएंगे और शायद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
आप इस तरह से पार्टी को कैसे चला पाएंगे?
इमरान ख़ान- आप डराने के लिए इस तरह की चीज़ें बहुत छोटी अवधि में इस्तेमाल कर सकते हैं.
ये सब ज़्यादा देर तक नहीं चलेगा. आप मुझसे पूछ रही हैं कि मेरी रणनीति क्या है तो मैं अभी इंतज़ार कर रहा हूं और सारी चीज़ें देख रहा हूं.
ये भी संभव है कि मुझे जेल में डाल दिया जाएगा.
हाल में आपने कहा कि पाकिस्तान की राजनीति में सेना का अहम रोल है...
इमरान ख़ान- मैंने ये कहा कि बीते 70 साल से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सेना सशक्त रही है. तो अगर मैं ये सोचूं कि वो अचानक गायब हो जाएंगे तो ये कल्पना मात्र है, सच नहीं है, ऐसा हो नहीं सकता.
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