अफ़ग़ानिस्तान में सिलसिलेवार तरीक़े से ढहाए जा रहे हैं ऐतिहासिक स्थल

    • Author, कावून ख़ामूश
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

अमेरिका की शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के दर्जनों पुरातात्विक स्थल ‘व्यवस्थित लूट’ के ज़रिए तहस-नहस कर दिए गए हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि लूट की प्रवृत्ति का पहला पुख़्ता सबूत सैटेलाइट फोटो के विश्लेषण से मिला. उनके अनुसार, लूट की ये घटनाएं पिछली सरकारों के समय शुरू हुईं, जो अगस्त 2021 में सत्ता में तालिबान के आने के बाद भी जारी हैं.

जिन स्थानों को तोड़ा गया, उनमें उत्तर कांस्य और लौह युग के समय यानी 1,000 ईसा पूर्व बसी पुरानी बसावटें भी शामिल हैं. तोड़े गए ज़्यादातर स्थल उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के बल्ख़ इलाक़े में हैं. दो हज़ार साल पहले यह जगह बैक्ट्रिया सभ्यता का ‘हृदय स्थल’ मानी जाती थी.

छठी सदी पूर्व हख़मनी साम्राज्य के दौरान यह प्राचीन अफ़ग़ानिस्तान का सबसे समृद्ध और सबसे सघन आबादी वाला इलाक़ा था.

327 ईसा पूर्व सिकंदर ने हख़मनी शासक को हराकर इस इलाक़े को जीत लिया और बैक्ट्रिया की महिला रोक्साना से विवाह कर लिया.

पूर्व-पश्चिम सिल्क रूट पर इस प्रदेश का मुख्य शहर बैक्ट्रा (आज का बल्ख़) बसा हुआ था. यह पारसी और बौद्ध धर्मों को मानने वालों का अहम केंद्र हुआ करता था. बाद में जाकर यह इस्लाम का प्रमुख केंद्र बना.

सबसे ज़्यादा बर्बादी बल्ख़ में

शिकागो यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर कल्चरल हेरिटेज प्रिज़र्वेशन ने सैटेलाइट और अन्य उपकरणों की मदद से पूरे अफ़ग़ानिस्तान में 29,000 से ज़्यादा पुरातात्विक स्थानों की पहचान की है.

लेकिन बल्ख़ इलाक़े की सैटेलाइट तस्वीरों में 2018 के बाद एक नया पैटर्न देखने को मिला है.

शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इन तस्वीरों में कुछ धब्बों की पहचान की है. उन्हें पूरा भरोसा है कि ये बुलडोज़र हैं, क्योंकि ये कभी दिखते हैं तो कभी गायब हो जाते हैं और ये अपने आने-जाने के निशान भी छोड़ जाते हैं.

सेंटर फॉर कल्चरल हेरिटेज प्रिज़र्वेशन के निदेशक प्रोफ़ेसर जिल स्टीन ने समझाया कि बाद में लिए गए फोटो में ताज़ा ढहाए गए हिस्से दिखाई पड़ते हैं, जिसमें लुटेरों के किए हुए गड्ढे हैं.

उन्होंने मुझे बताया, “असल में, लोग बड़े हिस्से को साफ कर रहे हैं ताकि उस जगह को धीरे-धीरे लूटना आसान हो जाए.”

उनकी टीम का कहना है कि 2018 और 2021 के बीच की अवधि में ‘हर हफ़्ते एक बसावट की आश्चर्यजनक दर’ से 162 प्राचीन बसावटें तबाह की गईं.

उनके अनुसार, तालिबान के आने के बाद भी यह सिलसिला जारी है और तब से अब तक 37 जगहों को तहस-नहस कर दिया गया है.

शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता लुटेरों को पुरातात्विक जगहों की जानकारी देने से बचना चाहते हैं, इसलिए वे इन जगहों की सटीक जानकारी प्रकाशित नहीं कर रहे हैं.

कई स्थानों के बारे में जानकारी को दस्तावेज़ का रूप देने का काम अभी शुरुआती चरण में है.

सभ्यता छिपी है यहाँ

शोध करने वालों को बिल्कुल नहीं मालूम कि इन पुरातात्विक जगहों की ज़मीन के भीतर क्या है? इन जगहों पर टीले, क़िले, सड़क किनारे स्थित सराय (कारवां सराय) और नहर हैं.

केवल 97 किलोमीटर दूर टिला टेपे स्थित है, जहां 1978 में बैक्ट्रिया सभ्यता के समय का 2,000 साल पुराना सोने का भंडार मिला था.

उस ‘सोने की पहाड़ी’ में 20 हज़ार दुर्लभ वस्तुएं मिली थीं. उनमें सोने के गहने, सोने का एक मुकुट और सोने के सिक्के थे. उस भंडार को अफ़ग़ानिस्तान का खोया हुआ खज़ाना भी कहा गया.

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के रिसर्च फैलो रज़ा हुसैनी कहते हैं, “आप हर टीले में किसी सभ्यता के कई स्तरों को खोज सकते हैं.

बल्ख़ में पैदा हुए हुसैनी ने अपनी ज़िंदगी के 20 साल बाद के कुछ साल उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के कई पुरातात्विक स्थलों पर वॉलिंटियर के रूप में सर्वे करते हुए गुजारे हैं. आज उनमें से कई स्थान तोड़ दिए गए हैं. वे शिकागो यूनिवर्सिटी की तस्वीरों को देखकर हैरान हैं.

उन्होंने कहा, “मैंने जब ये सुना तो ऐसा लगा कि मेरी रूह मर रही है.”

साफतौर पर दिख रही इस बर्बादी के पीछे कौन है, इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है.

प्रो. स्टीन कहते हैं कि यह स्पष्ट है कि इन जगहों को ध्वस्त किए जाने का पैटर्न पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के दौर में शुरू हुआ था और ये तालिबान के शासन में भी जारी है.

ग़नी की सरकार कमज़ोर थी और उनका पूरे देश पर नियंत्रण नहीं था. बल्ख़ और उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान का सबसे बड़ा शहर मज़ार-ए-शरीफ़, उन शुरुआती इलाक़ों में था, जो अगस्त 2021 में तालिबान के नियंत्रण में आया था.

दबंगों की भूमिका

प्रोफ़ेसर स्टीन का मानना है कि इन जगहों को लूटने में वे लोग शामिल हैं, जो इतने धनी और शक्तिशाली हैं कि वे बुलडोज़र जैसी चलने वाले मशीन को ख़रीद या किराए पर ले सकते हैं. वे ग्रामीण इलाक़ों में अपना काम कर रहे हैं ताकि उनके काम में कोई दख़ल न दे सके.

हुसैनी बताते हैं कि 2009 में उनके देश छोड़ने के पहले ही कई पुरातात्विक स्थल लूट लिए गए थे.

उन्होंने मुझे बताया, “स्थानीय दबंगों और लड़ाकों की अनुमति के बिना कोई भी उत्खनन और खुदाई नहीं कर सकता.”

“उनके लिए, ऐतिहासिक मूल्य के कोई मायने नहीं हैं. उन्हें जो मिल सकता है, उसके लिए वे कुछ भी खोद और तहस-नहस कर सकते हैं. मैंने ख़ुद अपनी आँखों से देखा है कि वे चलनी से मिट्टी चालकर चीज़ें खोजते हैं.”

उन्होंने बताया कि वे कभी एक प्राचीन स्थल की पुरातात्विक देखरेख सुनिश्चित करने की मुहिम का हिस्सा थे, जहां लड़ाकों का एक कमांडर अफ़ीम पैदा कर रहा था.

तालिबान ने पहली बार के शासनकाल के दौरान 2001 में बामियान में 1,500 साल पुरानी बुद्ध की मूर्तियों को उड़ा दिया था. ये प्रतिमाएं दुनिया की कभी सबसे बड़ी खड़ी बुद्ध प्रतिमाएं थीं.

हालांकि दो दशक बाद 2021 में जब वे फिर सत्ता में लौटे तो उन्होंने कहा कि वे देश की प्राचीन विरासत का सम्मान करेंगे.

तालिबान का साफ़ इनकार

तालिबान के सूचना और संस्कृति मामलों के उपमंत्री अतीक़ुल्लाह अज़ीज़ी ने इन जगहों पर लूटपाट होने के दावों को ख़ारिज किया है. उन्होंने कहा कि देश के ऐतिहासिक स्थलों की देखभाल करने के लिए 800 मजबूत यूनिट तैनात किए गए हैं.

बीबीसी को उन्होंने बताया कि कुछ संगठनों ने मंत्रालय को ‘बुलडोजर के मूवमेंट और मिट्टी हटाते लोगों’ की तस्वीरें भेजी थीं, लेकिन उन्होंने उन जगहों की जांच करने के लिए विभिन्न टीमों को वहां भेजा है.

मंत्री ने कहा कि वे भरोसा देते हैं कि इनमें से किसी भी जगह ऐसी घटना नहीं हुई है.

वहीं तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि सितंबर में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था. उन पर मूर्तियों, ममी, सोने का एक मुकुट, किताब और तलवार सहित लगभग 2.7 करोड़ डॉलर की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी करने का आरोप था.

मंत्रालय ने बताया कि उन सामानों को नेशनल म्यूज़ियम को सौंप दिया गया है और इस मामले की पड़ताल की जा रही है.

मैंने मंत्री अज़ीज़ी के जवाब से प्रोफ़ेसर स्टीन को अवगत कराया. इस पर प्रो स्टीन बोले, "मैं नहीं समझ पाता कि आख़िर लोग इसे नकार क्यों रहे हैं, जबकि सबूत देखने पर ये शर्मनाक लगता है. हम दिखा सकते हैं कि दो अलग-अलग शासन में भी एक निरंतरता है."

प्रो स्टीन का कहना है कि लूटी गई कलाकृतियों को अफ़ग़ानिस्तान से ईरान, पाकिस्तान और अन्य देशों के ज़रिए तस्करी कर के उसे यूरोप, उत्तरी अमेरिका और सुदूर पूर्व में भेजी जा रही हैं.

ये भी हो सकता है कि दुनिया में होने वाली नीलामियों और संग्रहालयों में कुछ चीज़ें बिना किसी शीर्षक और तिथि के पेश की जाएं.

वे बताते हैं कि यदि उन्हें कभी लिस्ट न किया जाए तो उन्हें ट्रैक करना कठिन है, लेकिन इसके लिए प्रयास होने चाहिए.

प्रो स्टीन कहते हैं, "अफ़ग़ानिस्तान की विरासत असल में विश्व धरोहर का हिस्सा हैं और हम सभी की हैं."

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