भारत में होने वाली बैठक पर कनाडा का इनकार, क्या है संदेश? - प्रेस रिव्यू

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भारत और कनाडा में जारी कूटनीतिक तनाव के बीच कनाडाई सीनेट की स्पीकर रेमोंडे गैग्ने भारत में होने वाली जी20 देशों की संसद के अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगी.
द इकनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते सप्ताह कनाडा ने कहा था कि वो भारत में होने वाली जी20 संसदीय अध्यक्ष शिखर सम्मेलन (पी20) की बैठक में शामिल होगा.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने संवाददाताओं से बात करते हुए इसकी पुष्टि भी की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था कि कनाडा की स्पीकर से अनौपाचारिक बातचीत के दौरान वो कई मुद्दों पर उनसे चर्चा करेंगे.
13 अक्तूबर को होने वाले पी20 सम्मेलन में रेमोंडे गैग्ने के शामिल न होने का फ़ैसला ऐसे वक़्त आया है जब भारत और कनाडा के रिश्ते निचले स्तर पर हैं.
बीते महीने कनाडाई संसद में प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा में खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारतीय एजेंटों को ज़िम्मेदार ठहराया था.
भारत ने इसे 'बेबुनियाद' और 'दुर्भावना से प्रेरित' बताते हुए इसका खंडन किया था. भारत ने कहा था कि अगर कनाडा के पास इससे जुड़े ठोस सबूत हैं तो वो भारत के सामने रखे.
भारत के कनाडा में वीज़ा से जुड़ी अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दीं और कनाडा से कहा कि वो भारत में मौजूद अपने 40 राजनयिकों को वापस बुलाए.

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द इकोनॉमिक टाइम्स लिखता है कि केवल कनाडा के प्रतिनिधि पी20 की बैठक में नहीं आ रहे ऐसा नहीं है, अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस की संसद के स्पीकर भी इस बैठक में शामिल नहीं होंगे. अख़बार के अनुसार तीनों ने अब तक बैठक में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है. हालांकि रूस बैठक में शामिल होने वाला है.
फ़िलहाल फ्रांसीसी संसद का बजट सत्र चल रहा है और फ्रांस की तरफ से दूतावास के प्रतिनिधि बैठक में आएंगे. वहीं अमेरिकी संसद में स्पीकर का पद फ़िलहाल ख़ाली है.
इस बीच एक रिपोर्ट ये भी मिल रही है कि कनाडा की विदेश मंत्री मैलानी जोली ने वॉशिंगटन में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से एक 'सीक्रेट मुलाक़ात' की है.
वहीं इस ख़बर पर द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है. अख़बार लिखता है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इसकी पुष्टि की है.
उन्होंने कहा है कि भारत ने जी20 के सभी सदस्यों को निमंत्रण भेजा था लेकिन हिस्सा लेने या न लेने का फ़ैसला लेने के लिए सभी आज़ाद हैं.
अख़बार लिखता है कि अमेरिका में स्पीकर का पद फ़िलहाल ख़ाली होने के कारण वो इसमें शामिल नहीं होगा. जर्मनी और अर्जेंटीना भी "आंतरिक कारणों से" बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.

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इस मुद्दे पर द हिंदू ने अपनी रिपोर्ट में गुरुवार को दिए अरिंदम बागची के बयान को प्रमुखता से जगह है. अख़बार लिखता है कि बागची ने कहा है कि भारत और कनाडा के बीच संबंधों में "मुख्य मुद्दा ये है कि कनाडा आलगाववादी और आपराधिक तत्वों के लिए सुरक्षित" बनता जा रहा है.
उन्होंने कनाडा में भारत के राजनयिकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि, "हम मानते हैं कि मूल मुद्दे का समाधान ज़रूरी है और वो ये है कि कनाडा आलगाववादी और आपराधिक तत्वों के लिए पनाहगाह बनता जा रहा है. हम चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के तहत कनाडा अपने यहां मौजूद भारत के राजनयिकों और भारतीय दूतावासों की सुरक्षा करे."
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन के दौरान कनाडा की विदेश मंत्री की भारत के विदेश मंत्री से मुलाक़ात की पुष्टि तो नहीं की लेकिन कहा कि दोनों पक्ष "अलग-अलग स्तरों पर" एक-दूसरे के साथ संपर्क में हैं.

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इसी साल हो सकती है मोदी और पुतिन की मुलाक़ात
द इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, हो सकता है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाक़ात इसी साल हो सकती है.
अख़बार लिखता है कि अभी न तो इसके लिए जगह की फ़ैसला हुआ है और न ही वक़्त पर ही मुहर लगी है, लेकिन भारत और रूस के बीच इसे लेकर बातचीत चल रही है.
दोनों के बीच इससे पहले 2021 में पुतिन के भारत दौरे के दौरान और फिर 2022 में समरकंद में एससीओ की बैठक के दौरान मुलाक़ात हुई थी.

पैग़ंबर के नाम पर रखा जाएगा अयोध्या मस्जिद का नाम
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद का नाम पैग़ंबर मोहम्मद के नाम पर दिया जाएगा.
मुंबई में गुरुवार को हुई एक बैठक के बाद मस्जिदों के संगठन ऑल इंडिया राब्ता-ए-मस्जिद ने कहा कि प्रस्तावित मस्जिद का नाम "मोहम्मद बिन अब्दुल्ला मस्जिद" रखा जाएगा.
ये मस्जिद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर धन्नीपुर गाँव में आवंटित हुई इंडो-इस्लामिक फाउंडेशन ट्रस्ट की ज़मीन पर बनेगी.
2019 में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद मामले में कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने और शहर से 26 किलोमीटर दूर और बाबरी मस्जिद से 22 क्लोमीटर दूर धन्नीपुर गांव में मस्जिद बनाने का रास्ता साफ़ किया था.
मुबंई में हुई बैठक में क़रीब एक हज़ार मौलाना शामिल हुए, बैठक में प्रस्तावित मस्जिद के डिज़ाइन को लेकर चर्चा हुई.
यूपी सुन्नी सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड के चैयरमैन ज़ुफर फ़ारूक़ी ने अख़बार को बताया, "धन्नीपुर मस्जिद का नाम पैग़बर मोहम्मद बिल अब्दुल्ला पर रखा जाएगा और इसका डिज़ाइन प्राचीन इस्लमिक स्थापत्य कला से प्रेरित होगा. इसके निर्माण कार्य की देखरेख पुणे के आर्किटेक्ट इमरान शेख़ करेंगे."
"इसका डिज़ाइन हम जल्द ही साझा करेंगे. हमें उम्मीद है कि ये दुनिया की अब तक की सबसे खूबसूरत मस्जिदों में से एक होगी. इस मस्जिद की ख़ास बात ये है कि इसका नया डिज़ाइन पारंपरिक कला की परछाई लिए होगा."
उन्होंने कहा कि मस्जिद निर्माण के लिए तीन सौ करोड़ रुपये जमा करने का लक्ष्य रखा गया है. इसमें मस्जिद के अलावा, एक अस्पताल, एक रसोई और एक लाइब्रेरी भी बनाई जाएगी.

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अजन्मे बच्चे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फ़ैसला
गर्भपात से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को सुप्रीम कोर्ट जज, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि "याचिकाकर्ता महिला के बच्चे को जन्म न देने की इच्छा का सम्मान होना चाहिए". वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि "मेरा न्यायिक विवेक मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देता कि मैं याचिकाकर्ता की गुज़ारिश स्वीकार करूं."
जस्टिस हिमा कोहली ने कहा कि "कौन सी अदालत होगी जो उस अजन्मे बच्चे को गिराने की अनुमति दे जिसकी धड़कन सुनाई देने लगी है."
द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक ख़बर के अनुसार इसके एक दिन बाद गुरुवार को एक शादीशुदा महिला याचिकाकर्ता की दरख्वास्त पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, "हम एक बच्चे की जान नहीं ले सकते." बेंच में उनके अलावा जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल थे.
महिला ने कोर्ट में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेन्सी क़ानून के तहत अपने 26 महीने के अजन्मे बच्चे को गिराने की गुज़ारिश की थी. बुधवार को दो जजों की बेंच ने इसकी इजाज़त देने से मना करते हुए मामले को चीफ़ जस्टिस के पास भेज दिया था.
चीफ़ जस्टिस ने महिला से कहा कि अगर वो कुछ और सप्ताह इंतज़ार करें तो वो एक स्वस्थ बचचे को जन्म दे सकती है जिसे बाद में अगर वो चाहें वो किसी को गोद दे सकती हैं.
चीफ़ जस्टिस ने कहा, "इस तरह के मामले में हमें महिला के अधिकारों का सम्मान करने की ज़रूरत है लेकिन हमें अजन्मे बच्चे के हक़ को भी देखना होगा. इस बात में कोई शक़ नहीं कि महिला की इच्छा सर्वोपरि है... संविधान उन्हें इसका हक़ भी देता है लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि कहीं इससे अजन्मे बच्चे के हक़ पर असर तो नहीं पड़ेगा."
मामले पर शुक्रवार को आगे सुनवाई होगी.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 111वें स्थान पर लुढ़का
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार को सरकार और दो अंतरराष्ट्रीय एनजीए के बीच दश में गरीबी के लेकर उस वक्त बहस तेज़ हो गई जब ग्लोबल हंगर इंडेक्स जारी हुआ.
महिला और शिशु विकास मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि "भूख मापने का ग़लत तरीका इस्तेमाल किया गया है जिसमें मेथोडिकल समस्याएं हैं. ये दिखता है कि ये दुर्भावना से प्रेरित है."
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 28.7 अंक के साथ भारत 125 देशों की लिस्ट में 111वें स्थान पर पहुँच गया है. बीते साल इस लिस्ट में 29.1 अंकों के साथ भारत 121 देशों की लिस्ट में 107वें स्थान पर था.
आयरलैंड स्थित कंन्सर्न वर्ल्ड और जर्मनी स्थित वेल्तहंगरलाइफ़ ने इसका बचाव करते हुए कहा कि "कई मुश्किलों के दौर से जूझने वाले समय में, भूख के ख़िलाफ़ प्रगति काफी हद तक रुकी हुई है." वहीं कंसर्न वर्ल्ड ने कहा कि 43 देशों में भूख "गंभीर" स्तर तक पहुंच चुका है.
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