पश्चिम बंगाल: संदेशखाली पर कथित स्टिंग वीडियो, बीजेपी-टीएमसी नेता भिड़े

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पश्चिम बंगाल में बीते दो दिनों से एक कथित स्टिंग वीडियो पर बीजेपी और टीएमसी नेता आमने-सामने आ गए हैं.
ये वीडियो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के यू-ट्यूब चैनल पर भी अपलोड किया गया है. टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चार मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस कथित स्टिंग वीडियो के कुछ हिस्सों को दिखाया था.
टीएमसी ने इस कथित स्टिंग वीडियो का क्रेडिट एक ऐसे यू-ट्यूब चैनल (WILLIAMS-XY8YO) को दिया है, जिस पर सिर्फ़ यही एक वीडियो है, जो दो दिन पहले पोस्ट किया गया है. हालांकि ये वीडियो किसने शूट किया, किसने जारी किया? इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है.
बीबीसी इस वीडियो की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं करता है.
मगर इस कथित स्टिंग वीडियो के मसले पर बीजेपी और टीएमसी नेता एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं.
टीएमसी का दावा है कि इस वीडियो में दिखाई दे रहा शख़्स, बीजेपी नेता गंगाधर कयाल हैं.
वहीं बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कयाल का एक वीडियो साझा किया, जिसमें वो इस कथित स्टिंग वीडियो में अपनी आवाज़ को एडिट कर पेश किए जाने का दावा कर रहे हैं.
आख़िर इस कथित स्टिंग वीडियो में ऐसा क्या है? जिसके बारे में टीएमसी दावा कर रही है और बीजेपी उसे ख़ारिज कर रही है.

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संदेशखाली मामले पर किए दावे
टीएमसी के यू-ट्यूब चैनल पर पब्लिश किए वीडियो में एक व्यक्ति दिख रहा है.
वीडियो में व्यक्ति को ये दावा करते हुए देखा और सुना जा सकता है कि- ''संदेशखाली की कोई भी महिला बलात्कार का शिकार नहीं हुई है और वहां की महिलाएं इतने लंबे समय से जो आंदोलन कर रही हैं, उसके पीछे बीजेपी नेताओं का हाथ है. उन्होंने ही महिलाओं को यह सब कहने के लिए सिखा-पढ़ा कर तैयार किया था.''
कथित स्टिंग वीडियो में सुनाई देती बातचीत में दावा किया जाता है- ''संदेशखाली में टीएमसी नेताओं की ओर से महिलाओं के बलात्कार की घटना पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है. इसके पीछे राज्य के प्रमुख बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी का हाथ है.''
वीडियो में दिख रहे शख़्स को बीजेपी नेता गंगाधर कयाल बताया जा रहा है.
गंगाधर संदेशखाली दो नंबर ब्लॉक के बीजेपी के मंडल अध्यक्ष हैं. इसी ब्लॉक की महिलाओं ने कथित यौन उत्पीड़न के ख़िलाफ़ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया था.
इस कथित स्टिंग में सवाल पूछने वाले शख़्स के बारे में पता नहीं चल पाता है.
टीएमसी के यू-ट्यूब पर पब्लिश किए वीडियो में सवाल पूछने वाला कहता है, "दादा, आपको पता है कि आप लोगों ने किस स्तर पर काम किया है? बलात्कार नहीं हुआ, लेकिन उसे बलात्कार कह कर प्रचारित किया है. क्या आप अपने घर की बहू से यह काम करा सकते थे? हम तो ऐसा नहीं कर सकते. दादा, बाहरी व्यक्ति होकर उन महिलाओं से यह काम कैसे कराया है? उनका ब्रेनवाश कैसे किया था?"

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कथित स्टिंग वीडियो में सुनाई क्या दिया
इसके जवाब में वीडियो में दिख रहे गंगाधर के साथ ये सुना जा सकता है- "शुभेंदु दा के निर्देश पर ही हमने यह काम किया है. उन्होंने हमारी सहायता की है. शुभेंदु दा का कहना था कि ऐसा नहीं करने की स्थिति में बड़े-बड़े लोगों को गिरफ्तार नहीं कराया जा सकेगा. हम लोग भी वहां खड़े नहीं हो सकेंगे."
इसके बाद सवाल पूछने वाला कहता है, "क्या पूरे मामले को शुभेंदु ही नियंत्रित कर रहे थे?''
जवाब में दावा किया जाता है-"हां, उन्होंने सब कुछ नियंत्रित किया है.''
इस कथित स्टिंग वीडियो में कयाल को कहते सुना जा सकता है कि- ''संदेशखाली की महिलाओं से किस तरह बलात्कार और यौन उत्पीड़न के फर्जी आरोप दायर करवाए गए थे. उनको कैसे सिखाया गया था?''
कयाल ने वीडियो में कथित तौर पर बताया कि ''एक बार सिखाने के बावजूद कई महिलाएं आख़िर में कैसे डरकर फर्जी शिकायत करने से पीछे हट गईं. वीडियो में कुछ महिलाओं के नाम भी बताए गए हैं.''
वीडियो में कयाल को कथित तौर पर कहते सुना जा सकता है, "पहले रेखा ने शिकायत दर्ज कराई थी. उसे देख कर दूसरी महिलाओं ने भी शिकायत करने की हिम्मत जुटाई थी."
बीजेपी बार-बार यह कहती रही है कि बशीरहाट लोकसभा सीट से पार्टी उम्मीदवार रेखा पात्रा खुद भी यौन उत्पीड़न की शिकार हुई थीं. संदेशखाली इसी लोकसभा क्षेत्र के तहत है.
रेखा ने बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू में भी इस घटना का ज़िक्र किया था.
यौन उत्पीड़न के ये आरोप तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेता शाहजहां शेख, शिव प्रसाद हाजरा और उत्तम सर्दार पर लगाए गए.
इस कथित स्टिंग में एक महिला का वीडियो भी जारी किया गया है.
इस वीडियो में महिला कहती सुनाई देती हैं- "मुझे गलत समझाया गया था. मेरे पास अब भी वह कागज है. मुझे तो इतनी अंग्रेजी नहीं आती. मैंने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है. उस कागज पर शाहजहां शेख और शिबू हाजरा की बात लिखी थी. मुझे समझ में नहीं आया. उसमें लिखा था कि शाहजहां, शिबू हाजरा और उत्तम सर्दार ने मेरे साथ बलात्कार किया है. यह बात मुझे अच्छे तरीके से नहीं समझाई गई थी."
इस कथित स्टिंग में एक और व्यक्ति है. इस व्यक्ति को बीजेपी के संदेशखाली एक नंबर ब्लॉक का अध्यक्ष बताया जा रहा है.

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टीएमसी और बीजेपी क्या कुछ कह रहे हैं?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी दो चुनावी सभाओं में इस वीडियो का मुद्दा उठाया है.
ममता बनर्जी ने नदिया की जनसभा में कहा, "उन लोगों ने संदेशखाली के मुद्दे पर एक नाटक किया है. अब सच सामने आ गया है. मैं तो लंबे समय से कहती रही हूं कि यह बीजेपी की साजिश है."
अभिषेक बनर्जी ने कहा, "इस साजिश ने बंगाल और पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. महज 2000 रुपये के लिए बंगाल की महिलाओं की इज़्ज़त बेच दी गई है. अगर बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बंगाल की जनता से माफ़ी नहीं मांगता है तो यह साफ़ हो जाएगा कि यह साजिश उसकी सहायता से ही रची गई थी."
वहीं बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि जो वीडियो सामने आया है, वह एडिटेड है. बीजेपी नेता गंगाधर कयाल ने सीबीआई के निदेशक को ईमेल भेजकर शिकायत की है.
पश्चिम बंगाल में बीजेपी प्रवक्ता शमीक भट्टाचार्य ने कहा, "संदेशखाली के आंदोलन से गंगाधर कयाल का कोई संबंध नहीं था. एक वीडियो से राजनीति को बदलना संभव नहीं है. विपक्ष के नेता शुभेंदु को कलंकित करने के लिए ही ऐसा किया गया है. दरअसल, तृणमूल कांग्रेस ने इस स्टिंग वीडियो के ज़रिए संदेशखाली में यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं का ही अपमान किया है."

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बीजेपी ने बनाया यौन उत्पीड़न को चुनावी मुद्दा
संदेशखाली में महिलाओं के कथित यौन उत्पीड़न की ख़बरें आने के बाद से ही बीजेपी इस मुद्दे पर सक्रिय है.
पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से पार्टी के बड़े नेता संदेशखाली का मुद्दा लगातार उठाते रहे हैं.
बीजेपी संदेशखाली की महिलाओं को चुनाव प्रचार के लिए राज्य के दूसरे ज़िलों में ले जाती रही है.
हालांकि, स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान यह बात देखने को मिली थी कि शाहजहां शेख समेत तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के ख़िलाफ़ ज़मीन पर जबरन क़ब्ज़े के आरोप तो लग रहे थे, लेकिन महिलाओं के उत्पीड़न के मुद्दे पर लोग चुप थे.
इसके अलावा शुरुआत में आंचल से चेहरे छिपा कर अखबारों और टीवी चैनलों से बात करती महिलाएं साफ-साफ यह नहीं बता पा रही थीं कि कौन सी महिला बलात्कार या यौन उत्पीड़न की शिकार हुई हैं.
चुनाव शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस समर्थक कुछ महिलाओं ने बीबीसी संवाददाता से कहा था कि वहां बलात्कार या महिलाओं के यौन उत्पीड़न की कोई घटना ही नहीं हुई है.
इलाके के कुछ पुरुषों ने उस समय कहा था कि शाहजहां शेख और उसके गुर्गों ने ज़मीन पर जबरन क़ब्ज़ा ज़रूर किया था, लेकिन महिलाओं के यौन उत्पीड़न के आरोप सही नहीं हैं.
हालांकि बीजेपी आरोप लगाती है कि ममता सरकार ने यौन उत्पीड़न करने वालों को संरक्षण दिया.
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