कुंभ के लिए उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कैसी है तैयारी?

यूपी के प्रयागराज में होगा महाकुंभ
इमेज कैप्शन, महाकुंभ में 45 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है
    • Author, सैयद मोज़िज़ इमाम
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, प्रयागराज से

प्रयागराज में संगम तट की ओर बढ़ते हुए जगह-जगह 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर' का संदेश देने वाली होर्डिंग्स दिखती हैं.

पीछे छूटते शहर से यहाँ का माहौल बिल्कुल अलग नज़र आता है. संगम में डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ अब जगह-जगह बड़ी संख्या में मज़दूर, इंजीनियर और मशीनें काम करते हुए दिखाई देती हैं.

आम दिनों में शांत दिखने वाले संगम तट पर इन दिनों काफ़ी हलचल है. ये उस आयोजन की तैयारियों की वजह से है, जिसमें क़रीब 45 करोड़ लोगों के आने का अनुमान लगाया गया है.

सदियों से कुंभ मेले को 'पृथ्वी पर लगने वाले सबसे बड़े मेले' के तौर पर जाना जाता रहा है. इस विशाल मेले को देखने के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग आते हैं.

लाल रेखा

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प्रयागराज के संगम तट पर हर 12 साल में कुंभ का आयोजन होता है. ये उन चार पवित्र जगहों में से एक है, जहाँ कुंभ मेले का आयोजन होता है.

ये पवित्र स्थान हैं- हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज. इनमें गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम पर होने वाले कुंभ का अलग धार्मिक महत्व है.

इस मेले के दौरान उत्तर प्रदेश में ज़िलों की संख्या 75 से बढ़कर 76 हो जाती है. इस बार प्रयागराज में कुंभ 13 जनवरी से शुरू हो रहा है.

कुंभ मेला संगम तट पर एक विशाल क्षेत्र में आयोजित होता है. इतने बड़े क्षेत्र में जुटने वाले करोड़ों लोगों के लिए चंद महीनों में सुविधाएँ उपलब्ध कराना, सुरक्षा देना और संगम में स्नान को सुगम और सहज बनाना एक बड़ी चुनौती है.

इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार कुंभ मेला क्षेत्र को एक ज़िले का दर्जा देती है.

इस नए ज़िले को 'महाकुंभनगर' का नाम दिया गया है.

किसी अन्य ज़िले की तरह महाकुंभनगर का भी एक ज़िलाधिकारी होता है, जिसे 'मेलाधिकारी' कहा जाता है. महाकुंभनगर के मेलाधिकारी आईएएस अधिकारी विजय किरन आनंद हैं, जो एसएसपी राजेश द्विवेदी के साथ कुंभ मेले की तैयारियों में जुटे हैं.

अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बीबीसी को बताया कि 2019 के अर्धकुंभ में 24 करोड़ लोग आए थे, जबकि इस बार 45 करोड़ लोगों के आने का अनुमान है.

कुंभ क्षेत्र के एसएसपी राजेश द्विवेदी ने बीबीसी को बताया कि इस विशाल जन सैलाब को सुरक्षा देने के लिए लगभग 50 हज़ार सुरक्षा कर्मी तैनात रहेंगे.

कैसी चल रही है तैयारी?

अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी
इमेज कैप्शन, अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि पिछली बार मेला क्षेत्र 3200 हेक्टेयर था
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अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी बीबीसी से कहते हैं कि इस बार मेले का क्षेत्र बढ़ाया गया है. पिछली बार मेला क्षेत्र 3200 हेक्टेयर था, इस बार ये इलाक़ा 4000 हेक्टेयर रहेगा.

मेलाधिकारियों के मुताबिक़, जल निगम मेला क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए कुल 1250 किलोमीटर की पाइपलाइन बिछा रहा है. विद्युत विभाग 67000 एलईडी लाइटें लगा रहा है और इसके लिए सब-स्टेशन बनाया जा रहा है. एक लाख पचास हज़ार शौचालय बनाए जा रहे हैं, जिनकी सफ़ाई के लिए 10000 कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं.

बीबीसी से बात करते हुए अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया "गंगा नदी की ड्रेजिंग (नदी के तल पर जमी हुई गाद और दूसरी चीज़ों को हटाना) करके पानी को चैनलाइज़ कर अतिरिक्त ज़मीन को फिर से हासिल किया जा रहा है. इसके अलावा, 30 पॉन्टून (अस्थायी) पुल बनाए जा रहे हैं और पूरे मेला क्षेत्र में 488 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाई जा रही हैं. अखाड़ों को ज़मीनें भी आवंटित कर दी गई हैं."

गंगा के पार दूसरी तरफ अखाड़ों के लिए जगह दी गई है. कुंभ में पवित्र स्नान की शुरुआत अखाड़ों के शाही स्नान से होती है. उस रास्ते को ठीक किया जा रहा है, जिससे होकर अखाड़ों के साधू-संन्यासी स्नान के लिए जाएँगे.

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स्वच्छ गंगा जल का मुद्दा

रवींद्र पुरी
इमेज कैप्शन, निरंजनी अखाड़ा के महंत रवींद्र पुरी ने गंगा की सफाई का मुद्दा उठाया

मुख्यमंत्री के साथ अखाड़ा परिषद की बैठक में गंगा के जलस्तर और गंदगी के मुद्दे पर चर्चा हुई. 7 दिसंबर की बैठक में अखाड़ा परिषद के संतों ने गंगा जल की स्वच्छता का मसला उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया.

बीबीसी से बात करते हुए निरंजनी अखाड़ा के महंत रवींद्र पुरी ने कहा, "जो नदी-नाले गंगा जी में जा रहे हैं, उनका ट्रीटमेंट किया जाए, तभी उनको गंगा जी में डाला जाए."

महानिर्वाणी अखाड़े के यमुना पुरी ने भी गंगा जल की स्वच्छता को अहम मुद्दा बताया है.

वहीं प्रशासन की तरफ से कुंभ के दौरान गंगा में जलस्तर बनाए रखने की तैयारी की जा रही है.

अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि उच्च अधिकारी इस संबंध में अन्य राज्यों से बात कर रहे हैं.

यूपी के प्रयागराज में होगा महाकुंभ
इमेज कैप्शन, गंगा की सफाई का मुद्दा उठाया जा रहा है

गंगा की सफाई का मुद्दा कांग्रेस ने भी उठाया है.

कांग्रेस का आरोप है कि गंगा में बिना ट्रीटमेंट के पानी छोड़ा जा रहा है.

कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने 9 दिसंबर को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "एनजीटी ने 6 नवंबर 2024 के आदेश में लिखा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की 30 अक्तूबर 2024 की अनुपालन रिपोर्ट से पता चलता है कि गंगा में कितनी गंदगी जा रही है."

अभय दुबे के मुताबिक़, प्रयागराज नगर निगम में 468.2 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) सीवेज में से सिर्फ़ 340 एमएलडी के लिए ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं, यानी लगभग 12 करोड़ 80 लाख लीटर गटर का पानी सीधे गंगा में जा रहा है.

उन्होंने इसे जघन्य पाप बताया, विशेषकर इसलिए क्योंकि प्रयागराज में कुंभ का आयोजन होने वाला है.

डिजिटल कुंभ की तैयारी

यूपी का प्रयागराज
इमेज कैप्शन, प्रयागराज के संगम तट पर कुंभ का आयोजन हो रहा है

इस बार राज्य सरकार की ओर से डिजिटल कुंभ के आयोजन की तैयारी की जा रही है. तमाम सुविधाओं और सेवाओं को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर कुंभ मेले में आने वाले लोगों की यात्रा को आसान बनाने की योजना है.

महाकुंभ मेला ऐप, एआई चैटबॉट, क्यूआर कोड से जानकारी और डिजिटल लॉस्ट एंड फाउंड सिस्टम जैसी व्यवस्थाएँ डिजिटल कुंभ की तैयारियों का हिस्सा हैं.

इसी कड़ी में पूरे मेला क्षेत्र की मैपिंग के लिए गूगल और प्रशासन के बीच समझौता हुआ है. गूगल मैप के ज़रिए कुंभ में आने वाले लोग मंदिर, संगम तट और अन्य स्थानों पर आसानी से जा सकते हैं.

यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ 2025 होना है
इमेज कैप्शन, कुंभ क्षेत्र में 300 से अधिक एआई-सक्षम कैमरे लगाए गए हैं

कुंभ क्षेत्र में 328 एआई-सक्षम कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी मदद से पूरे कुंभ क्षेत्र की निगरानी की जाएगी.

प्रशासन का कहना है कि कुंभ में आने वाले लोगों के ठहरने के लिए हमेशा की तरह एक टेंट सिटी भी बनाई जा रही है.

इन सबके बीच सवाल ये है कि क्या प्रशासन इतने बड़े पैमाने पर हो रहे इन इंतजामों को समय पर पूरा कर पाएगा.

मेला आयोजकों ने बीबीसी से बातचीत में दावा किया है कि मेला शुरू होने से पहले सभी काम पूरे हो जाएँगे.

सुरक्षा का इंतजाम

राजेश द्विवेदी
इमेज कैप्शन, महाकुंभनगर के एसएसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि 50 हज़ार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं

प्रशासन के लिए कुंभ मेले की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है.

महाकुंभनगर के एसएसपी राजेश द्विवेदी का कहना है कि कुंभ की निगरानी के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.

बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने वालों पर कार्रवाई के लिए पुलिस एंटी-ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रही है, जिससे ऐसे ड्रोन्स को गिराया जा सके.

राजेश द्विवेदी ने बीबीसी को बताया कि पुलिस, अर्धसैनिक बल पीएसी, होमगार्ड और सिविल डिफ़ेंस के 50 हज़ार सुरक्षाकर्मी मेला क्षेत्र में तैनात किए जा रहे हैं.

कुंभ की महत्वपूर्ण तारीख़ें

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 7 दिसंबर को प्रयागराज में संतो और अधिकारियों के साथ बैठक की. मुख्यमंत्री ने कुंभ की तैयारियों का जायज़ा भी लिया है

महाकुंभ

रेल, बस और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी ध्यान

अश्विनी वैष्णव

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि तीन हज़ार स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएँगी

कुंभ की तैयारियों के तहत रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे इस आयोजन पर 5000 करोड़ रुपए ख़र्च कर रहा है और तीन हज़ार स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएँगी.

उन्होंने यह भी बताया कि इस दौरान कुल 13,000 ट्रेनों का संचालन किया जाएगा.

यूपी रोडवेज़ भी लगभग 7000 बसों की सुविधा उपलब्ध कराने जा रहा है.

श्रद्धालुओं और साधु-संतों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए पूरे मेला क्षेत्र में कई अस्पताल तैयार किए जा रहे हैं. इन अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जा रही है.

सेंट्रल हॉस्पिटल की ज़िम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर गौरव दुबे ने आर्मी और मेदांता हॉस्पिटल के साथ मिलकर श्रद्धालुओं की ज़रूरत के हिसाब से कुंभ में स्वास्थ्य सेवाओं का खाका तैयार किया है.

सेंट्रल हॉस्पिटल में आपात स्थितियों के लिए हर तरह की आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी. इसके लिए सभी ज़रूरी मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं.

लोगों की मुश्किलें

सरिता
इमेज कैप्शन, सरिता की सास पिछले 28 दिनों से लापता हैं

कुंभ धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन के साथ बड़ा आर्थिक आयोजन भी है. कुंभ से जुड़े रोज़गार-धंधों में लगे लोगों को भारी कमाई उम्मीद है.

लेकिन फ़िलहाल संगम क्षेत्र में अक्सर होने वाले वीआईपी मूवमेंट से मुश्किलें भी कम नहीं हैं और इसका रोज़गार पर भी असर पड़ रहा है.

मिश्रीलाल और दशरथ नाव चलाकर गुज़ारा करते हैं. दोनों के पास छोटी नाव है, जिसमें एक बार में क़रीब 10 लोग बैठ सकते हैं. लेकिन गुरुवार को वे अपने गाँव वापस जाने की तैयारी करने लगे.

बीबीसी ने जब इसकी वजह पूछी, तो दोनों ने बताया कि प्रधानमंत्री का दौरा है और तीन दिन नाव चलाने की इजाज़त नहीं है.

उन्होंने कहा, "यहाँ रहा भी नहीं जा सकता लिहाजा घर वापस जा रहे हैं. फ़िलहाल धंधा मंदा चल रहा है और कुंभ से पहले श्रद्धालु कम आ रहे हैं."

संगम में डुबकी लगाने के लिए नोएडा से सपरिवार आए विक्रम को भी निराशा हुई. सुरक्षा कारणों से उनकी गाड़ी को मेला क्षेत्र की तरफ़ नहीं जाने दिया गया. सभी लोग पैदल ही संगम की तरफ़ जाने लगे.

हालांकि उनके उत्साह पर कई फ़र्क नहीं पड़ा है, कहते हैं कि कुंभ के दौरान फिर आएँगे और संगम में स्नान भी करेंगे.

विक्रम की तरह ही झारखंड से आए अनिमेष दुबे को भी पैदल ही संगम की तरफ जाने के लिए मजबूर होना पड़ा. वे कई दिनों से प्रयागराज में ही रुके हुए हैं.

मेला क्षेत्र में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि बैरकेडिंग की वजह से गाड़ियां अंदर नहीं जा सकतीं, इसलिए उन्हें रोका जा रहा है.

कुंभ क्षेत्र में 10 खोया-पाया सेंटर भी बनाया गया है, लेकिन अभी ये टेस्टिंग के दौर में ही हैं. हालांकि प्रशासन का दावा है कि डिजिटल तकनीक से लैस यह सेंटर बहुत कारगर साबित होंगे.

लेकिन झारखंड के कोडरमा से आई सरिता देवी अपनी बिछड़ी सास को पिछले 28 दिनों से पोस्टर लेकर ढूढ़ रही हैं.

उनकी सास गीता देवी 70 साल की हैं. सरिता कहती हैं कि कई लोगों ने कुंभ क्षेत्र में ही उन्हें देखने का दावा किया है लेकिन वो उनसे नहीं मिल पा रहीं हैं.

सरिता ने बताया कि जहाँ भी कैमरे लगे हुए हैं, वहाँ से वे अपनी सास का पता लगाने की कोशिश करती हैं. हालांकि कोई उनकी मदद नहीं कर रहा.

कुंभ की तैयारियों को लेकर प्रयागराज शहर में भी कम हलचल नहीं है. शहर में जगह-जगह सड़क को चौड़ा करने का काम से लेकर सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है.

स्थानीय निवासी सतीश पाठक कहते हैं, "मुझे ख़ुशी है कि कुंभ की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही है लेकिन वे ख़ुश होते अगर काम समयबद्ध तरीक़े से होता और वक़्त पर पूरा कर लिया जाता. फ़िलहाल शहर में कई जगह हुई खुदाई की वजह से लगने वाले जाम की समस्या से भारी परेशानी है."

यही हाल रायबरेली-प्रयागराज मार्ग का भी है, जो अभी बन ही रहा है.

बाबूगंज निवासी मनोज मिश्रा ने बताया कि उम्मीद थी सड़क का काम कुंभ से पहले ख़त्म हो जाएगा लेकिन अब ऐसा नहीं लगता.

हालांकि सड़क का निर्माण तेज़ी से चल रहा है, लेकिन बीच-बीच में कई अधूरे पैच हैं और कई पुल भी ऐसे हैं, जिनका काम अभी बाक़ी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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