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क़ानूनी मामलों में फंसे ट्रंप पर क्या राष्ट्रपति रहते भी जेल जाने का ख़तरा बना रहेगा
- Author, मैडलिन हलपर्ट
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं. कई हफ़्तों के चुनावी अभियान और कड़ी टक्कर के बाद रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव जीत लिया है.
ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय पहुँचने वाले ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे, जिनके ख़िलाफ़ कई आपराधिक मामलों में फ़ैसला आना अभी बाकी है.
चूँकि ट्रंप के ख़िलाफ़ कई क़ानूनी मामले दर्ज होने के बावजूद वह एक बार फ़िर अमेरिका के राष्ट्रपति कार्यालय में पहुँचने के लिए तैयार हैं. इसके चलते वहां अनसुलझी स्थिति पैदा हो गई है.
जब ट्रंप व्हाइट हाउस पहुँचेंगे, तो उनके सामने चार चुनौतियाँ होंगी. इनमें हर स्थिति के साथ क्या हो सकता है, उसे समझाने का प्रयास किया गया है
न्यूयॉर्क में भुगतान का मामला
डोनाल्ड ट्रंप को न्यूयॉर्क में 34 गंभीर मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है. यह मामला व्यापार से जुड़े रिकॉर्ड्स में हेराफेरी करने से जुड़ा है.
मई महीने में न्यूयॉर्कर्स की एक ज्यूरी ने ट्रंप को दोषी पाया था. यह मामला एक पॉर्न फ़िल्म स्टार को चुपचाप भुगतान किए जाने से जुड़ा था. ज्यूरी के मुताबिक़, ट्रंप इस भुगतान प्रक्रिया में शामिल थे.
न्यूयॉर्क के जज जुआन मर्चेन ने ट्रंप की सज़ा को सितंबर से 26 नवंबर तक (अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद) के लिए टाल दिया था.
ब्रुकलिन की भूतपूर्व अभियोजनक जूलिया रेंडलमेन ने कहा कि ट्रंप के चुनाव जीतने के बावजूद जज मर्चेन अपनी योजना के अनुसार सज़ा पर आगे बढ़ सकते हैं.
क़ानूनी जानकार मानते हैं कि ऐसी संभावनाएं बेहद कम हैं कि ट्रंप को पहली बार उम्रदराज़ अपराधी के तौर पर सज़ा सुनाई जाएगी.
सुश्री रेंडलमेन कहती हैं कि यदि ऐसा होता है तो ट्रंप के वकील तुरंत सज़ा के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं कि यदि ट्रंप को जेल भेजा जाता है, तो वो अपने आधिकारिक काम नहीं कर पाएंगे. ऐसे में उनको आज़ाद रखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "अपील करने की यह प्रक्रिया कई साल आगे बढ़ाई जा सकती है."
नतीजा पलटने का मामला
स्पेशल काउंसिल जैक स्मिथ ने पिछले साल ट्रंप के ख़िलाफ़ आपराधिक आरोप तय किए थे.
यह मामला जो बाइडन के ख़िलाफ़ साल 2020 का राष्ट्रपति चुनाव हारने के बाद, चुनाव के नतीजे को पलटने के लिए की गई कोशिशों से जुड़ा था. ट्रंप ने इस मामले में ख़ुद को निर्दोष बताया था.
यह केस तब से क़ानूनी अधर में लटका हुआ है. दरअसल, जब गर्मियों में सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया था कि ट्रंप के पद पर रहते हुए किए गए आधिकारिक कामकाज़ों पर आपराधिक मामले दर्ज करने से आंशिक राहत मिली हुई थी.
हालांकि, स्मिथ ने अपने तर्क को फ़िर से दोहराते हुए कहा था कि ट्रंप ने चुनाव के नतीजे पलटने की जो कोशिश की थी, ये उनके आधिकारिक कर्तव्यों में नहीं आता है.
भूतपूर्व फ़ेडरल प्रॉसिक्यूटर नीम रहमानी के मुताबिक़, जब से ट्रंप चुनाव जीते हैं, आपराधिक मुक़दमों से जुड़ी उनकी समस्याएं "दूर हो चुकी हैं".
उन्होंने कहा, "यह बहुत अच्छे तरह से स्थापित हो चुका है कि मौजूदा राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ मुक़दमा नहीं चलाया जा सकता है. ऐसे में वॉशिंगटन डीसी की ज़िला अदालत में चल रहा चुनावी धोखाधड़ी से जुड़ा मामला ख़ारिज हो जाएगा."
रहमानी ने कहा कि यदि स्मिथ इस मामले को निरस्त करने से इनकार करते हैं, तो ट्रंप उनसे बड़ी आसानी से पीछा छुड़ा सकते हैं. वह तो पहले ही ऐसा करने का बोल भी चुके हैं.
ट्रंप ने अक्तूबर में दिए रेडियो इंटरव्यू में कहा था, "मैं उनको दो सेकंड में बर्खास्त कर दूंगा."
गोपनीय दस्तावेज़ मामला
स्मिथ एक और मामले में ट्रंप के ख़िलाफ़ पैरवी कर रहे हैं. यह मामला गोपनीय दस्तावेज़ों के दुरुपयोग से जुड़ा है. हालांकि, ट्रंप ने इससे इनकार किया है.
ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने संवेदनशील दस्तावेज़ों को अपने घर ‘मार-ए-लागो’ में रख लिया था और क़ानून विभाग ने जब उन फ़ाइलों को वापस पाने की कोशिश की, तो ट्रंप ने उस काम में बाधा पहुँचाई.
जज ने यह मामला ट्रंप द्वारा नियुक्त किए गए एलीन कैनन को सौंपा था. उन्होंने जुलाई में इसे यह कहकर ख़ारिज कर दिया था कि क़ानून विभाग ने इस मामले की पैरवी करने के लिए स्मिथ की नियुक्ति अनुचित ढंग से की थी.
रहमानी ने कहा, स्मिथ ने फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की है. मगर, चूंकि अब ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यालय पहुंचना तय हो चुका है. ऐसे में गोपनीय दस्तावेज़ों से जुड़े मामले का भी वैसा ही हश्र होगा, जैसा चुनावी धोखाधड़ी से जुड़े मामले में हुआ है.
उन्होंने कहा, "डीओजे गोपनीय दस्तावेज़ मामले को ख़ारिज करने की अपनी ग्यारहवीं सर्किट अपील को छोड़ देगा."
जॉर्जिया चुनाव मामला
ट्रंप को जॉर्जिया में भी आपराधिक आरोपों का सामना करना पड़ रहा है. यह मामला साल 2020 में आए चुनावी नतीजे को पलटने की कोशिश करने से जुड़ा है.
इस मामले में कई बाधाएं आईं. इनमें डिस्ट्रिक्ट एटॉर्नी फैनी विलिस को अयोग्य घोषित करने के प्रयास भी शामिल हैं. उन पर इस केस पर काम करने वाली एक एटॉर्नी के साथ रिश्ता कायम करने का आरोप लगा था.
इस मामले में कोर्ट के सामने एक अपील भी दायर की गई है कि क्या विलिस को इस केस पर रोक लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए.
मगर, अब ट्रंप अगले राष्ट्रपति बनेंगे. इस मुक़दमे में अब और भी ज़्यादा देर हो सकती है, या इसे बर्खास्त ही किया जा सकता है.
क़ानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि राष्ट्रपति कार्यालय में ट्रंप के रहते हुए इस मुक़दमे को रोक दिए जाने की संभावना है.
ट्रंप के एटॉर्नी स्टीव सेडो ने कहा कि जब जज ने पूछा कि यदि ट्रंप चुन लिए जाते हैं, तो क्या फ़िर भी उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाया जा सकता है.
उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अमेरिका के राष्ट्रपति होने के नाते जब तक वो राष्ट्रपति कार्यालय में हैं, तब तक उनके ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा नहीं चलाया जाएगा."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित