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सर्दियों में गर्म या ठंडा पानी, किससे नहाना बेहतर?
- Author, इफ़्तेख़ार अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ठंड का मौसम आते ही सुबह कई लोग एक सवाल से जूझते हैं कि 'नहाना है भी या नहीं?'
अगर हिम्मत करके नहाने का मन बना भी लिया, तो अगला सवाल सामने होता है- 'गर्म पानी से नहाएँ या ठंडे से?'
कई लोग कहते हैं, ठंड में गर्म पानी से नहाना बेहतर है. उनका कहना है कि इससे शरीर को राहत मिलती है, थकान उतर जाती है और ठंड से बचाव होता है.
लेकिन दूसरी तरफ़ कुछ लोग ये भी मानते हैं कि गर्म पानी से नहाना स्किन को ड्राइ कर देता है, बालों को नुकसान पहुँचाता है और शरीर की नेचुरल ऑयल लेयर ख़त्म कर देता है.
तो आख़िर सच्चाई क्या है? क्या हमें हर मौसम में ठंडे पानी से नहाना चाहिए या ठंड में गर्म पानी से नहाना बेहतर है?
आइए जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ़ साइंटिफिक रिसर्च एंड इंजीनियरिंग डेवलपमेंट में 2022 में छपी एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़ शरीर की बाहरी सतह पर केरेटिन सेल्स होती हैं.
गर्म पानी से नहाने पर इन सेल्स को नुक़सान पहुँचता है. इससे एग्ज़िमा जैसी स्किन की बीमारियाँ और बढ़ सकती हैं.
गर्म पानी से नहाने से क्या होता है?
सर्दी के मौसम में अक्सर लोग गर्म पानी से नहाने को तरजीह देते हैं, लेकिन त्वचा विशेषज्ञ इसे एक बड़ा ख़तरा मानते हैं.
उनका कहना है कि बहुत ज़्यादा गर्म पानी हमारी त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुक़सान पहुँचाता है.
यूपी में नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर अंजू झा बताती हैं कि ठंड में गर्म पानी से नहा सकते हैं, लेकिन पानी गुनगुना होना चाहिए, ज़्यादा गर्म नहीं होना चाहिए.
डॉक्टर अंजू झा ने कहा, "ज़्यादा गर्म पानी से नहाने के बाद स्किन पर ड्राइनेस आ सकती है, जिसे हम 'जे़रोसिस' कहते हैं."
वहीं अपोलो हॉस्पिटल में डर्मेटोलॉजिस्ट डॉक्टर डीएम महाजन कहते हैं कि ठंड में जब आप नहाते हैं तो यह ज़रूरी है कि पानी गर्म हो, लेकिन बस इतना गर्म हो कि आपको ठंड न लगे.
हमारे स्किन की सबसे ऊपर की लेयर पर सेबम और लिपिड्स की एक पतली तैलीय परत होती है, जो शरीर को बैक्टीरिया, धूल और बाहरी संक्रमणों से बचाती है.
यही परत स्किन की नमी बनाए रखने में भी मदद करती है.
डॉक्टर डीएम महाजन कहते हैं, "अगर शरीर पर ज़्यादा गर्म पानी डालेंगे, तो इस पर पहले से मौजूद ज़रूरी तेल धुल जाएगा. जब कोई बहुत गर्म पानी का इस्तेमाल करता है, तो ये लेयर तेज़ी से टूटने लगती है."
उनके मुताबिक़, तेल की लेयर हटने से थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है. गर्म पानी से त्वचा रूखी हो जाती है और शरीर में खुजली होने लगती है.
किन लोगों को ज़्यादा ख़तरा?
अगर पानी बहुत ज़्यादा ही गर्म है, तो ऐसे मामले में किसी भी आम इंसान को इससे नुक़सान पहुँच सकता है. लेकिन कुछ मामलों में अगर पानी सामान्य से ज़्यादा गर्म है, तो इससे कुछ लोगों को ज़्यादा दिक़्क़तें हो सकती हैं.
डॉक्टर अंजू बताती हैं, "अगर स्किन पर पहले से ड्राइनेस है और आप ज़्यादा गर्म पानी से नहा लेते हैं, तो फिर डर्मेटाइटिस और एक्ज़िमा होने की संभावना बढ़ जाती है."
डर्मेटाइटिस त्वचा में सूजन और खुजली पैदा करने वाली एक आम समस्या है. इससे त्वचा लाल भी हो जाती है.
डॉक्टर डीएम महाजन का भी मानना है कि किसी को पहले से एक्ज़िमा (एटोपिक डर्मेटाइटिस) है, तो गर्म पानी से नहाना उनके लिए काफ़ी ख़तरनाक हो सकता है.
एक्ज़िमा एक त्वचा रोग है, जो त्वचा को रूखा और लाल बना देता है. साथ ही, इससे खुजली भी बहुत होती है.
डॉक्टर डीएम महाजन कहते हैं कि अगर आप पॉलिसाइथीमिया वेरा (ये वो बीमारी है जिसमें शरीर ज़रूरत से ज़्यादा लाल रक्त कोशिकाएँ यानी रेड ब्लड सेल्स बनाता है) के मरीज़ हैं, तो आपको गर्म पानी से नहाने के मामले में और ज़्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है.
वह कहते हैं, "इस बीमारी से जूझ रहे लोग अगर ज़्यादा गर्म पानी से नहा लें, तो उनकी स्कीन पर और ज़्यादा लालिमा दिखने लगेगी."
ठंड में अगर अचानक ठंडे पानी से नहाया जाए तो?
अगर कड़ाके की ठंड हो और आप ठंडा पानी अपने शरीर पर डालें, तो यह शायद जानलेवा भी हो सकता है.
हमने इसी पर और ज़्यादा जानकारी के लिए बीएलके-मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली के सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोवेस्कुलर इंटरवेंशन डॉक्टर प्रतीक किशोर से बात की.
उनका कहना है कि जब हमारा शरीर अचानक बहुत ठंडे या बहुत गर्म पानी के संपर्क में आता है, तो ब्लड वेसल्स तुरंत रिएक्ट करती हैं.
डॉक्टर प्रतीक कहते हैं, "बहुत ठंडा पानी पड़ते ही वेसल्स सिकुड़ जाती हैं, इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और हार्ट रेट अचानक तेज़ हो सकती है. बहुत गर्म पानी मिलने पर वेसल्स फैल जाती हैं, इससे ब्लड प्रेशर कम हो सकता है और चक्कर या बेहोशी जैसी स्थिति बन सकती है. इसलिए बहुत ज़्यादा गर्म पानी से बचना ज़रूरी है."
उनके मुताबिक़, जिन लोगों को पहले से हार्ट की बीमारी, ब्लॉक वेसल्स, हाई बीपी या दिल से जुड़ी कोई दूसरी बीमारी है तो उनके लिए अचानक तापमान में परिवर्तन और भी ख़तरनाक हो सकता है.
वह कहते हैं, "बहुत ठंडे पानी से ब्लड प्रेशर तेज़ी से बढ़ सकता है, जो हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का जोख़िम बढ़ा सकता है."
ठंडे पानी से नहाने को लेकर डॉक्टर अंजू बताती हैं, "कड़ाके की ठंड के मौसम में बहुत ठंडे पानी से नहाना शरीर के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकता है."
उन्होंने कहा, "ऐसी स्थिति में चिलब्लेन होने का ख़तरा बढ़ जाता है. चिलब्लेन में हाथों की उंगलियों, उंगलियों के सिरों और पैरों की उंगलियों में नीलापन, सूजन, जलन हो सकती है. यह समस्या ठंड के कारण ख़राब हो चुके ब्लड सर्कुलेशन की वजह से होती है."
वह सलाह देती हैं कि सर्दियों में बहुत ज़्यादा ठंडे पानी से नहाने से बचना चाहिए और शरीर का तापमान संतुलित रखना ज़रूरी है.
डॉक्टर अंजू बताती हैं, "छोटे बच्चों की और बुज़ुर्गों की त्वचा पहले ही संवेदनशील होती है, इसलिए ज़्यादा गर्म पानी से नहाने पर उनमें त्वचा के अधिक रूखेपन, जलन और फटने की परेशानी और बढ़ सकती है."
वह कहती हैं, "सर्दियों में हल्के गुनगुने पानी से नहाना सबसे बेहतर है. इसके अलावा नहाने के बाद त्वचा पर मॉइस्चराइज़र लगाना ज़रूरी है, ताकि ड्राइ स्किन, खुजली से बचाव हो सके."
हैंडपंप या बोरवेल का पानी
ग्रामीण इलाक़ों में अक्सर लोग हैंडपंप या बोरवेल का इस्तेमाल करते हैं. जब ठंड का मौसम आता है तब इसी हैंडपंप या बोरवेल से हल्का गर्म पानी निकलता है.
यही कारण है कि आज भी ग्रामीण इलाक़ों में लोग पानी बिना गर्म किए नहा लेते हैं. लेकिन डॉक्टर कई मामलों में इसके लिए भी चेतावनी देते हैं.
कई ग्रामीण इलाक़ों में जमीन से निकलने वाले पानी में हल्के-फुल्के खनिज तत्व भी मौजूद होते हैं.
तापमान के हिसाब से यह पानी सर्दियों में थोड़ा गर्म और गर्मियों में थोड़ा ठंडा महसूस होता है, इसलिए नहाने के लिए यह पानी लोगों को आरामदायक लगता है.
लेकिन डॉक्टर डीएम महाजन बताते हैं कि यही पानी कभी-कभी त्वचा पर जलन और खुजली जैसी परेशानी भी पैदा कर सकता है.
उनके मुताबिक़, इसकी वजह इसमें मौजूद खनिजों की मात्रा है. अगर इस पानी में क्लोराइड्स, सल्फेट्स या अन्य घुले हुए नमक ज़्यादा मात्रा में हों, तो पानी 'हार्ड वॉटर' की श्रेणी में आ जाता है.
वह कहते हैं, "हार्डनेस बढ़ने पर यही पानी त्वचा की प्राकृतिक तेल परत को ख़त्म कर देता है. इससे त्वचा में रूखापन, खुजली और जलन जैसी समस्या बढ़ जाती है. इसके अलावा ऐसे पानी में ज़्यादा खनिज होने से बालों की बनावट भी खराब हो सकती है और बाल रूखे-बेजान दिखने लगते हैं."
इसलिए भले ही ज़मीन के नीचे से निकलने वाला यह पानी तापमान के हिसाब से अच्छा महसूस हो, लेकिन उसकी गुणवत्ता और उसमें मौजूद खनिजों की मात्रा त्वचा और बालों की सेहत पर बड़ा असर डालती है.
इस पर डॉक्टर प्रतीक कहते हैं, "पहले लाइफ़स्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ इतनी नहीं थीं. गाँव के बुज़ुर्ग ज़्यादातर शारीरिक रूप से सक्रिय रहते थे. खेत-खलिहान में मेहनत करते थे. उनका शरीर ऐसे 'टेम्परेचर शॉक' को ज़्यादा सह सकता था. लेकिन जो लोग पहले से ही दिल या ब्लड प्रेशर के मरीज़ हैं उनके लिए ये जोख़िम अभी भी रहता है."
बालों पर क्या असर पड़ता है?
बहुत गर्म पानी से नहाने का असर सिर्फ़ त्वचा पर ही नहीं, बल्कि बालों पर भी पड़ता है.
विशेषज्ञ बताते हैं कि ज़्यादा गर्म पानी से नहाने पर बालों में प्राकृतिक नमी कम होने लगती है, जिससे बाल रूखे हो सकते हैं. ये उलझ सकते हैं और टूट सकते हैं.
डॉक्टर डीएम महाजन कहते हैं स्किन की तरह हमारे बालों में नेचुरल तेल होता है और जब हम ज़्यादा गर्म पानी अपने बालों पर डालते हैं तो वह निकल जाता है, जिससे हमारे बाल रूखे पड़ जाते हैं.
इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि सर्दी हो या गर्मी नहाने के लिए हमेशा हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करें, बहुत ज़्यादा गर्म पानी से बचें.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित