जहानाबाद मंदिर हादसा: किसी की बहन की मौत तो कहीं पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए हो रहा घायल पति का इंतज़ार

जूली अपनी बच्ची के साथ
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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जहानाबाद से

ये रविवार और सोमवार की दरमियानी रात थी. बिहार के जहानाबाद, गया, नालंदा, पटना ज़िले में रहने वाले कई लोगों के फ़ोन बजने लगे.

इन बजते फ़ोन में उनके अपनों की मौत या घायल हो जाने की ख़बर थी. इन पीड़ित लोगों में से एक सौरभ कुमार भी हैं. जिन्होंने अपनी बड़ी बहन निशा कुमारी को खोया है.

सौरभ बीबीसी से कहते हैं, “हम लोग 11 अगस्त की शाम को जल चढ़ाने गए थे. जल चढ़ाकर जैसे ही मंदिर से बाहर निकले तो भगदड़ मच गई. मैं आगे था और बहन पीछे थी. भगदड़ जब थमी तो बहन को ढूंढा. बहन दबी हुई मिली. फिर मैं कुछ लोगों की मदद से ख़ुद अपनी बहन को स्ट्रेचर के सहारे पहाड़ी पर से सीढ़ियां उतारकर लाया. प्रशासन ने हमारी कोई मदद नहीं की.”

21 साल की ग्रेजुएट निशा कुमारी इस हादसे की मृतकों में एक थीं. इस हादसे में 7 लोगों की मौत और 22 लोग घायल हुए हैं. मृतकों में छह महिलाएं और एक पुरुष है.

जहानाबाद ज़िला प्रशासन ने 16 लोगों के घायल होने की पुष्टि की है, लेकिन बीबीसी को मिली जानकारी के मुताबिक़ इस घटना के बाद इलाज के लिए कुल 22 लोग सरकारी अस्पतालों में भर्ती हुए.

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कैसे हुआ हादसा?

ये घटना 11 और 12 अगस्त के बीच रात की है.

बिहार के जहानाबाद ज़िले से 25 किलोमीटर दूर वाणावर नाम की जगह है. यहां बराबर की पहाड़ियां है. इस पहाड़ी इलाके़ की चोटी पर बाबा सिद्धेश्वर नाथ शिव मंदिर है. इस मंदिर में सावन महीने के दौरान शिव भक्तों की भीड़ जल चढ़ाने के लिए आती है.

पहाड़ की चोटी पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने का रास्ता बहुत दुर्गम है. स्थानीय पत्रकार रमेश कुमार बीबीसी को बताते हैं, “ये घटना मंदिर के 500 मीटर के अंदर घटी है. 11 अगस्त की रात तक़रीबन 12 बजकर बीस मिनट पर जब लोग जल अर्पित करके निकले तो डाक बम का तक़रीबन 50 लोगों का समूह आया. ये समूह आम भक्तों को हटाने लगा जिसके बाद अफ़रा तफ़री की स्थिति बनी और भगदड़ मची.”

कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्तों की एक टोली को डाक बम कहा जाता है. ये वो लोग होते हैं जो बिना कहीं रुके या आराम किए जल लेकर दौड़ते हुए चलते हैं.

जहानाबाद ज़िला प्रशासन की दी गई जानकारी के मुताबिक़, “कुछ युवा श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों के बीच विवाद के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बनी. ज़िला प्रशासन विवाद में संलिप्त लोगों की पहचान कर रहा है. जांच के लिए कमिटी का गठन किया गया है. जिसके आधार पर दोषियों के ख़िलाफ़ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.”

वीडियो कैप्शन, इस घटना में सात लोगों की मौत हो गई है।
सौरभ कुमार
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पत्नी की मौत, पति अस्पताल में

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11 अगस्त की रात घटी इस घटना के बाद मृतकों और घायलों को सबसे पहले मखदूमपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया.

मखदूमपुर रेफरल अस्पताल में मौजूद फार्मासिस्ट अरविंद कुमार बताते हैं, “रात डेढ़ बजे से ही घायल आने शुरू हो गए थे. सात डेड बॉडी आई थीं. सात बजे सुबह तक यहां हम लोगों ने इलाज किया उसके बाद 18 को सदर अस्पताल जहानाबाद और चार को मगध मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया.”

वहीं सदर अस्पताल के अधीक्षक डा. ए.के.नंदा बताते हैं, “हमारे यहां कुल 18 घायल और 7 डेड बॉडी आई थीं. डेड बॉडी का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंप दिया गया है. घायलों में से तीन को पटना पीएमसीएच रेफर किया गया है. 10 घायलों को इलाज के बाद छुट्टी मिल गई है. अभी इलाजरत घायलों की हालत स्थिर है. भगदड़ में दबने के चलते ज़्यादातर घायलों के शरीर में दर्द है.”

सदर अस्पताल के एक बेड पर पड़े राकेश कुमार अपनी पत्नी किरन देवी की मौत पर ठीक से रो भी नहीं पाए. राकेश पटना ज़िले के मसौढ़ी के शिवशंकर नगर के रहने वाले हैं. उनके तीन और पांच साल के बच्चों के सिर पर से मां का साया उठ गया है.

वो बीबीसी से कहते हैं, “प्रशासन का काम था इंसान की सहायता करना. लेकिन उसने नहीं किया. फूल और पानी बेचने वाले दुकानदारों में कुछ लड़ाई हुई तो पुलिस वालों ने डंडा चला दिया. इसी में हम लोग भीड़ में दब गए. मेरी बीवी मर गई.”

राकेश के पैर में चोट लगी है और सिर पर ज़ख्मों के निशान हैं. वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे. अस्पताल में तीमारदारी के लिए पहुंची उनकी भाभी कहती हैं, “इसी को अपनी पत्नी का क्रियाकर्म करना होगा. बिना इसके तो कुछ काम नहीं हो पाएगा. अस्पताल से इसको ले जाना ही पड़ेगा.”

ममता देवी अपने ससुर की तलाश कर रही हैं
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बेटी दबी पड़ी थी, इसके पापा ने निकाला

जूली कुमारी के दो बच्चे सदर अस्पताल में भर्ती हैं. बच्चों की आंखों के पास चोट और शरीर पर जगह जगह पड़े नीले निशान हादसे की कहानी कह रहे हैं.

जूली बीबीसी से बताती हैं, “पूरा घर आया था बाबा (शिव) के दर्शन को. बच्चों को समझाया लेकिन ये लोग नहीं माने तो हम पति पत्नी अपने पांच बच्चों के साथ आए थे. भीड़ हुई तो हम लोग बेहोश हो गए. ज़रा हवा लगने पर होश आया तो इसके पापा ने बच्चों को ढूंढना शुरू किया. तीन बच्चे तो मिल गए लेकिन ये दोनों बच्चे लोगों के नीचे दबे पड़े थे. आदमी को हटाकर बच्चों को निकाला और एंबुलेंस से अस्पताल लाए.”

सदर अस्पताल में फ़िलहाल चार बच्चे इलाजरत हैं. जिसमें तीन लड़कियां और एक लड़का है. इसके अलावा दो बुजु़र्ग महिलाएं फुलवंती देवी और चरमनिया देवी भी हैं.

फुलवंती देवी के बेटे मनीष कुमार बीबीसी से बताते हैं, “हमको तीन बजे फोन आया कि मेरी मां को चोट आई है. हम भागते हुए साढ़े चार बजे पहाड़ी पर पहुंचे, फिर ऊपर से मां को लाए. हमारे साथ जो लोग मां को लेने आए थे उन्होंने प्रशासन से मदद के लिए रिक्वेस्ट किया लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की.”

चरमनिया देवी
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लोग भटक रहे, प्रशासन ने कोई लिस्ट जारी नहीं की

चरमनिया देवी के चेहरे पर सूजन है. वह कहती हैं, “हमको ख़राब मति ले गई थी. लड़का सब आया और हो हल्ला करने लगा. जिसके बाद हमको धक्का लगा और गिर गए. पुलिस वहां थी ही नहीं. पूरी घटना के बाद पुलिस आई.”

इस घटना के बाद 12 अगस्त की देर शाम तक प्रशासन की तरफ़ से कोई सूची सार्वजनिक नहीं हुई. घटना के दिन शाम साढ़े सात बजे के आसपास जहानाबाद कलेक्ट्रेट में सन्नाटा पसरा था, आपदा प्रबंधन सेल में मौजूद दो कर्मचारी जो दफ्तर बंद कर रहे थे, उन्होंने इस बाद की तसदीक की कि अब तक मृतकों और घायलों की कोई सूची जारी नहीं की गई है.

इस प्रशासनिक लापरवाही के चलते सदर अस्पताल, बराबर की पहाड़ियों के पास और सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम के बाहर कई ऐसी महिलाएं मिलीं जो अपनों की तलाश में भटक रही थीं.

ममता देवी गोद में बच्चा लिए अपने ससुर जोगिन्दर पासवान को सदर अस्पताल में बदहवास ढूंढ रही थीं. वो बताती हैं, “बराबर से देख के आ रहे हैं. वहां लोग बोले कि सदर अस्पताल में जाकर देखो तो वही देखने आए हैं, लेकिन मिले नहीं. उनके पास कोई फोन नहीं है जो उनसे संपर्क किया जा सके और अभी तक वो घर भी नहीं पहुंचे.”

सदर अस्पताल
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क्या थी प्रशासन की व्यवस्था

बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में सावन महीने में हज़ारों भक्त आते हैं.

बिहार के गया, जहानाबाद, नवादा और पटना सहित कई ज़िलों की ग्रामीण आबादी यहां श्रद्धालु के तौर पर आती है.

चूंकि इस मंदिर में जाने का रास्ता बहुत दुर्गम है, इसलिए यहां सुरक्षा बहुत अहम सवाल है.

जहानाबाद ज़िला प्रशासन ने एक बयान जारी किया है जिसके मुताबिक़, “पिछली सोमवारियों की अपेक्षा 12 अगस्त की सोमवारी को ज़िला प्रशासन ने तुलनात्मक रूप से अधिक संख्या में ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की थी.”

जहानाबाद ज़िला प्रशासन का बयान

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लेकिन श्रद्धालु प्रशासनिक दावे को खारिज़ करते हैं. सदर अस्पताल में घायल चरमनिया देवी की बहू विभा देवी कहती हैं, “वहां बहुत भीड़ रहती है. प्रशासन बस ऐसे ही ड्यूटी बजाता है. जनता लोग मरें या बचे कोई परवाह नहीं सरकार को. जब गांव में फ़ोन गया तो हम लोगों ने गांव से आकर मां को पहाड़ी से उतारा.”

घटना के वक्त के वायरल वीडियो में भी दिखता है कि लोग अपने परिजनों को गोद में उठाए पहाड़ पर से उतर रहे हैं. साथ ही घटना के बाद मंदिर में कोई ऐसी हेल्पडेस्क नहीं दिखी जो परेशान परिजनों की मदद के लिए हो.

जहानाबाद के मौजूदा सांसद सुरेंद्र यादव ने इस हादसे पर कहा है, “जांच टीम आई है, जांच होने के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी.”

इस घटना के बाद मृतक के परिवारों को चार लाख रुपये और घायलों को 50 हज़ार का मुआवज़ा देने की घोषणा राज्य सरकार ने की है.

इससे पहले भी 4 अगस्त को बिहार के वैशाली ज़िले में कांवड़ यात्रा के दौरान हादसा हुआ था. हाजीपुर के औद्योगिक थाना क्षेत्र में ये घटना घटी थी. इस हादसे में डीजे ट्राली का एक हिस्सा हाईटेंशन वायर में सट गया था, जिसमें नौ कांवड़ियों की मौत हो गई थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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