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लीबिया की विदेश मंत्री से मुलाक़ात सार्वजनिक होने पर क्यों घिरा इसराइल
इसराइल के अचानक लीबिया सरकार के साथ पर्दे के पीछे चल रही बातचीत को सार्वजनिक करने के बाद लीबिया की सरकार संकट में आ गई है.
अरब देशों के मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ प्रधानमंत्री अब्दुल हमीद दबाबे निजी विमान से देश छोड़ गए हैं. हालांकि स्वतंत्र रूप से इस ख़बर की पुष्टि अभी नहीं हुई है.
इसराइल की लीबिया के साथ बातचीत को स्वीकार करने के बाद लीबिया में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं और देश के विदेश मंत्री को निलंबित कर दिया गया है.
रिपोर्टों के मुताबिक़ विदेश मंत्री नजला मंगूश देश छोड़ गई हैं. अबु धाबी से प्रकाशित अख़बार द नेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नजला मंगूश तुर्की गई हैं.
इसी बीच लीबिया की त्रिपोली से संचालित सरकार के प्रधानमंत्री अब्दुल हमीद दबीबे ने कहा है कि विदेश मंत्री नजला मंगूश के ख़िलाफ़ ‘इसराइल के विदेश मंत्री से मुलाक़ात करने की प्रशासनिक जांच चल रही है.’
लीबिया में दो परस्पर विरोधी सरकारे हैं. नजला त्रिपोली से संचालित सरकार की विदेश मंत्री हैं.
इसराइल के विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर लीबिया के साथ ‘ऐतिहासिक’ मुलाक़ात की जानकारी देते हुए इसे इसराइल और लीबिया के बीच ‘संबंधों को स्थापित करने की दिशा में पहला क़दम’ बताया था.
विदेश मंत्री एली कोहेन ने एक प्रेस नोट में बताया था कि इसराइल और लीबिया के विदेश मंत्रियों के बीच रोम में मुलाक़ात हुई है.
ये जानकारी सार्वजनिक होने के बाद लीबिया के पश्चिमी हिस्से में संचालित सरकार के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं. रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री दबीबे के घर को भी आग लगा दी गई है.
इसराइल के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
इसी बीच इसराइल के विदेश मंत्री एली कोहेन ने सोमवार देर रात एक बयान में कहा है कि इसराइल का विदेश मंत्रालय गुप्त माध्यमों से देश की विदेश नीति को मज़बूत करने के लिए काम करता रहा है.
एली कोहेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए अपने बयान में कहा है, “विदेश मंत्रालय दुनिया में इसराइल के संबंधों को मज़बूत करने के लिए प्रत्यक्ष और गुप्त चैनलों के माध्यम से और विभिन्न गुप्त तरीक़ों से नियमित रूप से काम करता है.”
पिछले कुछ सालों की उपलब्धियां गिनाते हुए एली कोहेन ने कहा, “हाल के वर्षों में मंत्रालय की कई उपलब्धियां हैं, जिनमें ओमान के आसमान को इसराइल की उड़ानों के लिए खोलना, संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक व्यापार समझौता, मुस्लिम देशों में दो नए दूतावास स्थापित करना,इसराइल में तीन दूतावासों का यरूशलम आना और इसके अलावा और भी बहुत कुछ शामिल हैं.”
इसराइल के विदेश मंत्री एली कोहेन के लीबिया के साथ बातचीत के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने पर इसराइल में भी प्रतिक्रिया हो रही है.
कोहेन ने इसराइल में हो रही आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, “विपक्षियों को पूरी जानकारी लिए बिना प्रतिक्रिया देने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए.”
अमेरिका ने जताई नाराज़गी?
वहीं इसराइली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक़ अमेरिका भी इसराइल से मुलाक़ात के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने से नाराज़ है.
इसराइल के चैनल 12 और चैनल 13 ने अपनी रिपोर्टों में कहा है कि इसराइल में अमेरिका की कार्यवाहक राजदूत स्टेफ़नी हेलेट ने सोमवार शाम विदेश मंत्री एली कोहेन से कहा है कि उनकी ‘अभूतपूर्व मुलाक़ात के बारे में जानकारी सार्वजनिक करना चिंताजनक है.’
इसराइल के हिब्रू मीडिया ने एक रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा है कि इसराइल के बैठक को प्रचारित करने से ‘लीबिया के साथ संबंध सामान्य करने की उम्मीदें ख़त्म हो गई हैं.’
इसराइल के विदेश मंत्रालय ने एक स्पष्टीकरण में कहा है कि उसे आशंका थी कि बैठक के बारे में जानकारी लीक हो सकती है और इसलिए ही उसने सार्वजनिक तौर पर इसे स्वीकार किया.
द टाइम्स ऑफ़ इसराइल की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ ‘अमेरिकी अधिकारी इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और उनका मानना है कि इसराइल लीक से होने वाले नुक़सान को इस पर टिप्पणी ना करके कुछ कम कर सकता था.’
न्यूज़ वेबसाइट एक्सियोस ने अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों के हवाले से कहा है कि बाइडन प्रशासन ने गुप्त बैठक के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर इसराइल से विरोध जताया है.
अभी तक इसराइल में अमेरिकी दूतावास या इसराइल के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की नाराज़गी की रिपोर्टों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
अमेरिका चिंतित क्यों?
बैठक के बारे में जानकारी सार्वजनिक होते ही लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की मान्यता प्राप्त सरकार के ख़िलाफ़ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए हैं.
बाइडन प्रशासन को चिंता है कि इस बैठक के बारे में जानकारी सार्वजनिक होने पर जो उथल-पुथल हो रही है, उससे सिर्फ़ लीबिया और इसराइल के बीच संबंध सामान्य करने की कोशिशों को ही झटका नहीं पहुँचेगा बल्कि हाल के सालों में अन्य अरब और इस्लामी देशों के साथ इसराइल की जो नज़दीकिया बढ़ी हैं उन्हें भी चोट पहुंच सकती है.
इसराइल कई अरब देशों के साथ संबंध सामान्य करने का प्रयास कर रहा है.
एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा है कि ताज़ा घटनाक्रम से अमेरिका के सुरक्षा हित भी प्रभावित हो सकते हैं.
पहले भी इसराइल लीबिया के बीच बातचीत?
इसराइल के बयान में लीबिया के साथ संपर्क को ‘ऐतिहासिक और अभूतपूर्व’ कहा गया है.
लेकिन वाईनेट न्यूज़ में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रोम में इसराइल और लीबिया के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात से पहले भी दोनों देशों के बीच संपर्क के प्रयास हुए हैं.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल और लीबिया के बीच पहले भी मोसाद, दूसरे देशों की सरकारों और ख़ुफ़िया एजेंसियों के प्रयासों से मुलाक़ातें हुई हैं.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इसराइल के विदेश मंत्रालय में लीबिया मामलों के प्रमुख रहे रोनेन लेवी भी रोम में हुई मुलाक़ात के दौरान शामिल थे.
लीबिया में विद्रोही सरकार के नेता जनरल ख़लीफ़ा हफ़्तार ने साल 2021 में एक बयान में कहा था कि अगर वो आम चुनाव जीत जाते हैं और राष्ट्रपति बन जाते हैं (हालांकि ये चुनाव नहीं हो सके थे) तो वो इसाइल के साथ संबंध सामान्य करने में रूची लेंगे. इसी साल इसराइल के अख़बार हारेट्ज़ ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि हफ़्तार के बेटे एक निजी विमान से गुप्त यात्रा पर इसराइल के बेन गुरियोन एयरपोर्ट पहुंचे थे.
कैसे हैं लीबिया और इसराइल के संबंध?
लीबिया और इसराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं है. लीबिया फ़लस्तीन का समर्थन करता है और इसराइल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं देता है.
इसराइल के विदेश मंत्री के साथ मुलाक़ात के बाद लीबिया के प्रधानमंत्री ने देश में फ़लस्तीनी राजदूत से मुलाक़ात की है और भरोसा दिया है कि लीबिया फ़लस्तीनी मक़सद का समर्थन करता रहेगा.
पूर्व शासक मुअम्मार गद्दाफ़ी के शासनकाल के दौरान लीबिया फ़लस्तीनी मक़सद का खुला समर्थक और इसराइल का कट्टर विरोधी था.
साल 2011 में लीबिया में सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए थे जिनके बाद गद्दाफ़ी की सरकार गिर गई थी और हिंसक भीड़ ने गद्दाफ़ी को मार दिया था.
इस घटनाक्रम के बाद से ही लीबिया अस्थिर है और गृहयुद्ध में घिरा है.
गद्दाफ़ी ने कई फ़लस्तीनी समूहों को समर्थन और मदद दी थी.
साल 1973 में इसराइल ने अपने हवाई क्षेत्र में आये लीबिया के एक यात्री विमान को मार गिराया था. इस विमान में सवार सभी 108 यात्रियों की मौत हो गई थी.
उस समय लीबिया के शासक रहे मुअम्मार गद्दाफ़ी ने इसके बदले में हैफ़ा में अभियान की योजना बनाई थी लेकिन इसे अमल में नहीं लाया जा सका था.
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