मोहनलाल की नई फ़िल्म एमपुरान का क्यों कर रहे हैं कुछ लोग विरोध? क्या है पूरा विवाद

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- Author, निकिता यादव
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली
अपनी नई फ़िल्म की हिंदू राष्ट्रवादी ग्रुपों की ओर से की जा रही तीखी आलोचना पर दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के सुपरस्टार मोहनलाल ने खेद जताया है. अब उन्होंने कहा है कि फ़िल्म से कुछ सीन हटा दिए जाएंगे.
मलयालम फ़िल्म 'एल2: एमपुरान' बीते गुरुवार को रिलीज़ हुई थी और बॉक्स ऑफ़िस पर उसका प्रदर्शन अच्छा जा रहा है.
हालांकि इस फ़िल्म को हिंदू संगठनों के विरोध का सामना करना पड़ा है. विरोध करने वालों में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य भी शामिल हैं.
फ़िल्म के आलोचकों को कुछ दृश्यों पर आपत्ति है जिसमें गुजरात में 2002 के दौरान मुस्लिम विरोधी दंगों का हवाला भी शामिल है.

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मोहनलाल ने क्या कहा?

मोहनलाल ने फ़ेसबुक ने लिखा, "एक कलाकार के रूम में, ये सुनिश्चित करना मेरी ज़िम्मेदारी है कि मेरी कोई भी फ़िल्म किसी राजनीतिक आंदोलन, विचारधारा या धार्मिक ग्रुप के प्रति शत्रुतापूर्ण न हो."
उन्होंने लिखा, "मेरे प्यारे लोगों को हुए दुख के लिए एमपुरान की टीम और मैं ईमानदारी से खेद व्यक्त करते हैं. हमने मिलकर तय किया है कि फ़िल्म से इस तरह के विषयों को हटा दिया जाएगा."
केरल में मोहनलाल की ख्याति एक सुपरस्टार की है.
इस ताज़ा विवाद ने रचनात्मक स्वतंत्रता की बहस को फिर से पैदा कर दिया है. राज्य में विपक्षी दल कांग्रेस और सत्तारूढ़ वामपंथी पार्टियों ने बीजेपी पर फ़िल्म निर्माताओं पर दबाव डालने का आरोप लगाया है.
हालांकि बीजेपी के नेताओं ने कहा कि उनकी पार्टी ने फ़िल्म के ख़िलाफ़ कोई सार्वजनिक अभियान नहीं शुरू किया और लोगों को सोशल मीडिया पर अपने विचार ज़ाहिर करने का आधिकार है.
क्या है एमपुरान फ़िल्म की कहानी?

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एल2: एमपुरान, 2019 में बनी मलयालम पॉलिटिकल थ्रिलर 'लूसीफ़र' का सीक्वल है, जिसमें मोहनलाल ने स्टीफेन नेदुम्पल्ली का क़िरदार निभाया था.
लूसिफ़र का निर्देशन मलयालम स्टार पृथ्वीराज ने किया था. वो फ़िल्म बहुत सफल रही और उसे समीक्षकों ने भी सराहा.
इसलिए 'एल2: एमपुरान' को लेकर काफ़ी उम्मीदें थीं.
यह फ़िल्म भ्रष्ट और बुरे लोगों के हाथ में चली गई केरल की राजनीति के उद्धारक के रूप में मोहनलाल के क़िरदार की वापसी पर केंद्रित है.
रिलीज़ से पहले ही ये फ़िल्म अपने बजट और सितारों से सजे प्रमोशनों की वजह से सुर्ख़ियों में आ चुकी थी.
एक अनुमान के अनुसार फ़िल्म में अपने पहले वीकेंड में 150 करोड़ रुपये का कारोबार किया था. लेकिन फ़िल्म समीक्षकों की ओर से मिलीजुली प्रतिक्रिया रही.
हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने इसे एक ऐसी फ़िल्म बताया जो 'पहचान के संकट और पटकथा में झोल' से जूझती है.
इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि 'जिस भावनात्मक गहराई और नाटकीयता के वज़न ने 'लूसीफ़र' को सफलता दिलाई थी, वह एमपुरान में कमोबेश ग़ायब है' लेकिन अख़बार ने मोहनलाल के असरदार प्रदर्शन और कुछ अन्य पहलुओं की तारीफ़ की है.
एमपुरान में किस बात से विवाद पैदा हुआ?

'एल2: एमपुरान' की शुरुआत निर्देशक पृथ्वीराज द्वारा निभाए गए क़िरदार जायद मसूद की पिछली कहानी से होती है, जो भारत में एक जगह पर हुए दंगों के दौरान अनाथ हो गया था.
इसमें कुछ दृश्य गुजरात में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल के दौरान 2002 में हुई साप्रदायिक हिंसा से मेल खाते हैं.
लंबे फ्लैशबैक सीक्वेंस में कुछ ग्राफ़िक दृश्य हैं, जिनमें हिंसा के दौरान हिंदुओं को मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसक अपराध करते हुए दिखाया गया है.
फ़िल्म में दिखाया गया है कि हिंसा में शामिल में से एक व्यक्ति, बाद में और अधिक ताक़तवर हो गया.
इन सभी दृश्यों पर हंगामा खड़ा हो गया.
प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने रिलीज़ से पहले फ़िल्म की सफलता के लिए टीम के सदस्यों को शुभकामनाएं दी थीं.
विवाद के बाद चंद्रशेखर ने कहा, "पता चला है कि फ़िल्म में ऐसे विषय थे जिनसे मोहनलाल के प्रशंसकों और अन्य दर्शकों को परेशान किया है."
उन्होंने कहा कि वह इस फ़िल्म को नहीं देखेंगे, "एक फ़िल्म को फ़िल्म की तरह देखा जाना चाहिए. इसे एक इतिहास के रूप में नहीं देखना चाहिए. और, कोई भी फ़िल्म जो सच्चाई को तोड़मरोड़ कर एक कहानी खड़ा करना चाहती है, उसका फ़्लॉप होना तय है."
केरल के कुछ बीजेपी नेताओं इन इस विचार से सहमति जताई है लेकिन कुछ ने फ़िल्म निर्माताओं की आलोचना की. उन्होंने निर्माताओं पर फ़िल्म में 'एंटी नेशनल थीम' को शामिल किए जाने का आरोप लगाया.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से प्रकाशित पत्रिका 'आर्गनाइज़र वीकली' में इस फ़िल्म को सिनेमा के रूप में छिपी 'परेशान करने वाली और विभाजनकारी' कहानी क़रार दिया है.
पत्रिका के रिव्यू में लिखा गया है, "एमपुरान एक ख़राब फ़िल्म है; यह धर्म, राजनीतिक बहुलता और संतुलित तरीक़े से कहानी कहने की आत्मा पर एक हमला है."
सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने इस फ़िल्म के बायकॉट करने का भी आह्वान किया, लेकिन कोई बड़ा ऑनलाइन अभियान या फ़िल्म के ख़िलाफ़ कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ है.
फ़िल्म में क्या क्या बदलाव हो सकते हैं?

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पिछले वीकेंड फ़िल्म के निर्माताओं में से एक गोकुलम गोपालन ने कहा कि एमपुरान के किसी डायलॉग या सीन से कोई आहत होता है तो इसमें बदलाव करने के लिए उन्होंने पृथ्वीराज को बोला है.
इससे पहले रविवार को मोहनलाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि फ़िल्म से कुछ दृश्य हटाए जाएंगे.
पृथ्वीराज ने फ़ेसबुक पर यह पोस्ट साझा तो की लेकिन कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की.
कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि फ़िल्म में कम से कम 17 कट लग सकते हैं. कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि फ़िल्म का तीन मिनट लंबा सीन हटा दिया जाएगा और कुछ डायलॉग भी म्यूट कर दिए जाएंगे.
फ़िल्म को सेंसर बोर्ड (सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन) की ओर से मंज़ूरी मिली थी, लेकिन निर्माताओं के पास अधिक कट के साथ फ़िल्म को फिर से बोर्ड में भेजने का विकल्प है.
लेकिन इस विवाद के बीच 'एल2: एमपुरान' को केरल की सत्तारूढ़ पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) और विपक्षी कांग्रेस पार्टी की ओर से समर्थन मिला है.
इन दोनों ही पार्टियों का केरल में मजबूत जनाधार है जबकि केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी यहां अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि 'एमपुरान और इसके बनाने वालों के ख़िलाफ़ सांप्रदायिक नफ़रती अभियान बहुत परेशान करने वाला है.'
उन्होंने कहा, "डर और धमकी के माध्यम से रचनात्मक आज़ादी को कमज़ोर करना लोकतंत्र के मूल पर हमला है."
कांग्रेस के नेता वीडी सतीसन ने लिखा, "सिनेमा कलाकारों का काम है. सोशल मीडिया पर धमकी देकर, अपमानित करके एक कृति के कंटेंट को बदलवाना, कोई जीत की बात नहीं है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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