बिहार नतीजों पर असम के मंत्री की पोस्ट को भागलपुर दंगे से क्यों जोड़ा जा रहा है?

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ अशोक सिंघल (बाएं)

इमेज स्रोत, AVIK

इमेज कैप्शन, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ अशोक सिंघल (बाएं)
    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

14 नवंबर को दोपहर होते होते यह लगभग साफ हो गया था कि बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए शानदार जीत दर्ज कर रही है.

इसी बीच दोपहर एक बजकर 48 मिनट पर असम के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 'फूलगोभी खेती' की एक तस्वीर के साथ लिखा, 'बिहार ने गोभी खेती को मंजूरी दे दी है.'

इस पोस्ट को साझा किए हुए तीन दिन हो चुके हैं लेकिन इसको लेकर राजनीतिक स्तर पर एक विवाद खड़ा हो गया है.

दरअसल बीजेपी मंत्री के इस पोस्ट को साल 1989 में बिहार के भागलपुर दंगों और उस दौरान हुए क्रूर जनसंहार के साथ जोड़कर देखा जा रहा है.

बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

सोशल मीडिया पर मंत्री के पक्ष और विपक्ष में लोग लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं और मंत्री सिंघल की काफ़ी आलोचना भी हो रही है.

36 साल पहले 14 नवंबर की यह वही तारीख है जब भागलपुर में सांप्रदायिक दंगे हो रहे थे. भागलपुर शहर और तत्कालीन भागलपुर जिले के 18 प्रखंडों के 194 गांवों में हुए सांप्रदायिक दंगों में 1100 से ज्यादा लोगों की जान गई थी.

इन दंगों में मरने वाले ज्यादातर मुसलमान थे. इस हादसे के दौरान स्थानीय पुलिस ने एक गांव से 116 मुसलमानों के शवों को उस खेत से बरामद किया था, जहां फूलगोभी के पौधे लगाए गए थे. ताकि शवों को छुपाया जा सके.

असम के एक कैबिनेट मंत्री के तौर पर अशोक सिंघल द्वारा किए गए फूलगोभी खेती वाले पोस्ट को 66 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा.

आम तौर पर उनके किसी भी पोस्ट पर अब तक इतनी तादाद में प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है. मंत्री सिंघल की इस पोस्ट पर सैकड़ों लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेहद 'अपमानजनक और अमानवीय' भी बताया है.

'राजनीतिक चर्चा में एक नया निचला स्तर'

गौरव गोगोई
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

सिंघल के पोस्ट को शर्मनाक बताते हुए असम प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और लोकसभा में पार्टी के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा, "बिहार चुनाव परिणामों के मद्देनज़र असम के एक मौजूदा कैबिनेट मंत्री द्वारा 'गोभी खेती' की कल्पना का उपयोग राजनीतिक चर्चा में एक चौंकाने वाली नई गिरावट का प्रतीक है. यह अश्लील भी है और शर्मनाक भी."

कांग्रेस नेता ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में लिखा, "यह छवि व्यापक रूप से 1989 के जनसंहार से जुड़ी हुई है, जहां भागलपुर हिंसा के दौरान 116 मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी और उनके शवों को फूलगोभी के खेतों में छिपा दिया गया था. इस तरह से ऐसी त्रासदी का आह्वान करना दर्शाता है कि कुछ लोग सार्वजनिक जीवन में किस हद तक उतरने को तैयार हैं."

गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि इस मानसिकता को उनके बॉस मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बढ़ावा दिया है.

उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री को भारतीय अल्पसंख्यकों से नफ़रत है. असम ऐसा नहीं है. असम महापुरुष शंकरदेव, लाचित बोरफुकन और अज़ान पीर की भूमि है. और अगले साल असम के लोग नफ़रत और लालच के शासन को ख़त्म कर देंगे."

कांग्रेस नेता शशि थरूर, सांसद साकेत गोखले ने क्या कहा?

शशि थरूर

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, शशि थरूर ने इस टिप्पणी को 'अनुचित' बताया है.

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने निंदा करते हुए रविवार को कहा कि 'न तो हिंदू आस्था और न ही राष्ट्रवाद ऐसे जनसंहार को उचित ठहराता है और इसकी निंदा करता है. उनकी सराहना तो दूर की बात है.'

एक एक्स यूजर ने सिंघल के पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि, "एक कैबिनेट मंत्री चुनावी जीत का जश्न मनाने के लिए 116 मुसलमानों के जनसंहार का महिमामंडन कर रहे हैं."

इसी यूज़र ने शशि थरूर को टैग करते हुए पूछा कि क्या वो प्रभावशाली हिंदू नेताओं से कहेंगे कि ऐसे बयान की निंदा करें.

इसका जवाब देते हुए थरूर ने लिखा, "...समावेशी भारत के एक उत्साही समर्थक और एक गौरवान्वित हिंदू के रूप में, मैं अपने लिए और अपने जानने वाले अधिकांश हिंदुओं के लिए यह कह सकता हूं कि न तो हमारे विश्वास और न ही हमारे राष्ट्रवाद को ऐसे जनसंहार की ज़रूरत है, न ही उसे उचित ठहराया जाता है या उनकी सराहना की जाती है."

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने एक्स पर लिखा कि ऐसे पोस्ट को 'प्रधानमंत्री की मंजूरी' है, "गोबी खेती" का तात्पर्य 1989 में बिहार के भागलपुर में मुस्लिमों की सामूहिक हत्या का महिमामंडन करना है. सबूत छिपाने के लिए कब्रों पर फूलगोभी का खेत लगाया गया था."

डायस्पोरा इन एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए असम के स्वास्थ्य और कल्याण कैबिनेट मंत्री अशोक सिंघल की पोस्ट को भयावह इतिहास वाला 'नफ़रत भरा भाषण' बताया है.

डायस्पोरा इन एक्शन फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा,""गोभी (फूलगोभी) की खेती" 1989 के भागलपुर जनसंहार को याद दिलाती है, जिसमें 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे, कुछ जांचों से पता चलता है कि मरने वालों की संख्या 2,000 से अधिक हो सकती है. लोगैन गांव में पुलिस ने बाद में सामूहिक कब्रों में दफ़नाए गए 116 मुसलमानों के शवों को बरामद किया था, जिनके ऊपर हत्याओं को छिपाने के लिए फूलगोभी उगाई गई थी."

असम बीजेपी ने क्या कहा

अशोक सिंघल

इमेज स्रोत, Facebook

इमेज कैप्शन, अशोक सिंघल अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं.

असम प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता विजय कुमार गुप्ता ने अपनी पार्टी के मंत्री के बयान से खड़े हुए विवाद पर बीबीसी से कहा, "मुझे नहीं मालूम कि मंत्री जी ने किस संदर्भ में यह बात कही है. या फिर उनके कहने का क्या मतलब निकाला जा रहा है? लेकिन अगर कोई उनकी बात को किसी दंगे या फिर जनसंहार से जोड़कर देख रहा है तो यह ग़लत है."

उन्होंने कहा, "क्योंकि हमारी पार्टी कभी भी इस तरह अमर्यादित अपमानजनक भाषा के साथ खड़ी नहीं होती है. ना ही पार्टी किसी अनुचित बात का समर्थन करती है."

एक सवाल के जवाब में बीजेपी नेता ने यह माना कि किसी भी ज़िम्मेदार व्यक्ति को ऐसी अनुचित और अमर्यादित भाषा का उपयोग करने से बचना चाहिए.

उन्होंने कहा, "राजनीति करने वाले हर व्यक्ति को अपनी बात संयम के साथ कहने की आवश्यकता है. ऐसी कोई भी बात नहीं करनी चाहिए जो हमारे हिंदू समाज को विभाजित करती हो. एक भारत और सर्वश्रेष्ठ भारत के लिए सबको एकत्रित रहने की ज़रूरत है."

असम की राजनीति को तीन दशकों से कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार नव कुमार ठाकुरिया का भी यह मानना है कि मंत्री सिंघल की टिप्पणी पूरी तरह अनुचित है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "मंत्री को सोशल मीडिया पर इस तरह की अनुचित बात नहीं करनी चाहिए. बिहार का चुनाव कोई मुसलमानों के ख़िलाफ़ जीत नहीं थी. बिहार की महिलाओं ने एनडीए को इस चुनाव में जीत दिलाई है."

"बिहार की महिलाओं ने धर्म जाति पंथ को दरकिनार कर महिला सशक्तिकरण के लिए वोट किया था. लिहाजा मंत्री अशोक सिंघल को जनसंहार से संबंधित यह पोस्ट करने के बजाए बिहार की महिलाओं की प्रशंसा वाली बात करनी चाहिए थी. उन्होंने बहुत ही निचले स्तर की राजनीति की है."

पहले भी विवादों में रहे

सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक स्तर पर हो रही कड़ी आलोचनाओं के बाद सिंघल ने न तो अपनी उस पोस्ट को हटाया है और ना ही अब तक इसको लेकर पैदा हुए विवाद पर किसी तरह का कोई स्पष्टीकरण दिया है.

इस संदर्भ में बीबीसी ने फ़ोन पर जब उनसे संपर्क करने की कोशिश की तो उनके एक निजी अधिकारी ने कहा कि मंत्री जी इस मसले पर मीडिया से कोई बात नहीं करेंगे.

साल 2021 में पहली बार मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा के मंत्रिमंडल में शामिल किए गए अशोक सिंघल अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में रहे हैं.

इससे पहले बीते मार्च महीने में सिंघल ने अपने विधानसभा क्षेत्र ढेकियाजुली में बंगाली मूल के मुसलमानों पर टिप्पणी करते हुए एक सभा में कहा था, "क्या आपने इस बार (भावना मंचन पर) मियां लोगों को दुकान लगाने की इजाज़त दे दी है? मियां लोगों को दुकानें मत लगाने दीजिए. हमारे लड़कों को दुकानें दे दीजिए. हमारे त्योहार में मियां की क्या भूमिका है? हमारे लड़के ईद में नहीं जाते."

असमिया समुदाय में भावना एक पारंपरिक नाटक है जिसकी रचना यहां के प्रसिद्ध वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव ने की थी.

मंत्री सिंघल ने कहा था, "...मैं उनके (मियां) साथ नहीं हूं. अगर आप उनके साथ घुल-मिल जाते हैं, तो मैं आप सबके साथ नहीं हूं. मैं एक युद्ध लड़ रहा हूं. अगर आप मेरा साथ नहीं देंगे, तो मैं कैसे लड़ सकता हूं?"

बाद में उनके इस बयान को लेकर विधानसभा में विपक्षी एआईयूडीएफ़ विधायकों ने विरोध किया था और सदन में काफ़ी हंगामा हुआ था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)