क्या ईरान परमाणु बम बनाने के क़रीब पहुँच गया था?

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- Author, डेविड ग्रिटन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसराइल ने अपने हमले में ईरान के नतांज़ यूरेनियम संवर्धन संयंत्र समेत कई परमाणु ठिकानों को नुक़सान पहुँचाया है.
इन हमलों में इसराइल ने तेहरान में शीर्ष सैन्य कमांडरों और परमाणु वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी.
गुरुवार रात हुए इन हमलों के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने 'शांतिपूर्ण परमाणु ठिकानों' पर इसराइल के हमलों की निंदा की.
इसके बाद ईरान ने इसराइल पर जवाबी हवाई हमले शुरू कर दिए.
अराग़ची ने कहा कि नतांज़ संयंत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में हो रहा था.
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस संयंत्र पर हमला रेडिएशन के ख़तरे को बढ़ा सकता है.
हालांकि, इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को इसराइल के अस्तित्व के लिए ज़रूरी बताया.
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नेतन्याहू ने कहा कि इसराइल ने यह क़दम इसलिए उठाया है क्योंकि "अगर ईरान को नहीं रोका गया, तो वह बहुत कम समय में परमाणु हथियार बना सकता है."
उन्होंने चेतावनी दी, "ईरान को इसमें एक साल लग सकता है, या यह कुछ महीनों में भी संभव हो सकता है."
आमतौर पर माना जाता है कि इसराइल के पास परमाणु हथियार हैं, हालांकि वह न तो इसकी पुष्टि करता है और न ही इससे इनकार करता है.
क्या इसका कोई सबूत है कि ईरान परमाणु बम बना रहा था?

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इसराइली सेना ने कहा है कि उसके पास ऐसी ख़ुफ़िया जानकारी है जिससे संकेत मिलता है कि "ईरान ने परमाणु बम के लिए आवश्यक चीज़ों के उत्पादन में ठोस प्रगति की है."
इनमें यूरेनियम मेटल कोर और परमाणु विस्फोट को शुरू करने के लिए न्यूट्रॉन सोर्स इनिशिएशन जैसे तत्व शामिल हैं.
अमेरिका स्थित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन में परमाणु अप्रसार नीति की निदेशक केल्सी डेवनपोर्ट ने कहा है कि इसराइल के प्रधानमंत्री ने अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस या स्पष्ट सबूत अब तक पेश नहीं किए हैं.
उनका कहना है, "यह आकलन नया नहीं है कि ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु बम बना सकता है."
डेवनपोर्ट का मानना है कि हालांकि ईरान के कुछ क़दम परमाणु हथियार बनाने की ओर इशारा कर सकते हैं, लेकिन अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का यह निष्कर्ष नहीं है कि ईरान इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है.

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इस साल मार्च में अमेरिका की राष्ट्रीय ख़ुफ़िया निदेशक तुलसी गबार्ड ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया था कि ईरान का "समृद्ध यूरेनियम भंडार" अब तक के अपने उच्चतम स्तर पर है.
उन्होंने कहा था कि यह "किसी भी ग़ैर-परमाणु हथियार संपन्न देश के लिए अभूतपूर्व" है.
हालांकि, गबार्ड ने कांग्रेस को यह भी बताया था कि अमेरिकी ख़ुफ़िया तंत्र के आकलन के अनुसार, ईरान फ़िलहाल परमाणु हथियार नहीं बना रहा है, क्योंकि देश के सर्वोच्च नेता ने इस तरह के कार्यक्रम को अधिकृत नहीं किया है.
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की केल्सी डेवनपोर्ट ने कहा, "अगर नेतन्याहू के पास परमाणु प्रसार से जुड़े किसी वास्तविक ख़तरे की जानकारी होती, तो वे उसे अमेरिका के साथ साझा करते. इसके अलावा, अगर इसराइल के पास ऐसे पुख़्ता साक्ष्य होते, तो वह शुरुआत में ही ईरान के सभी प्रमुख परमाणु ठिकानों को निशाना बनाता."
पिछले सप्ताह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने अपनी ताज़ा तिमाही रिपोर्ट में कहा था कि ईरान ने 60 प्रतिशत शुद्धता तक समृद्ध यूरेनियम जमा कर लिया है.
एजेंसी के अनुसार, अगर यह स्तर 90 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो तकनीकी रूप से इससे नौ परमाणु बम बनाए जा सकते हैं.
आईएईए ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया था और कहा था कि उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण होने पर भरोसा नहीं है.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में हम क्या जानते हैं?

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ईरान का हमेशा कहना रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उसने कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश नहीं की है.
हालांकि, आईएईए ने एक दशक तक की जांच में पाया था कि ईरान ने 1980 के दशक के अंत से लेकर 2003 तक "परमाणु विस्फोट करने वाले उपकरण" पर काम किया था. इस परियोजना को 'प्रोजेक्ट अमाद' नाम दिया गया था.
एजेंसी के अनुसार, ईरान ने 2009 तक कुछ गतिविधियां जारी रखीं. उसी वर्ष पश्चिमी देशों ने जानकारी दी थी कि ईरान फ़ोर्दो में एक गुप्त भूमिगत यूरेनियम संवर्धन केंद्र बना रहा था.
हालांकि, इसके बाद ईरान में परमाणु हथियार निर्माण से जुड़े किसी विश्वसनीय प्रयास के संकेत नहीं मिले हैं.
2015 में ईरान ने दुनिया की छह महाशक्तियों के साथ एक समझौता किया, जिसके तहत उसने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए.
इसके अलावा, उसने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण को भी मंज़ूरी दी ताकि उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जा सके.

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लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका को छह देशों वाले इस समझौते से अलग कर लिया था.
उन्होंने कहा था कि ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकने के लिहाज से ये समझौता काफ़ी नहीं है. इसके बाद ट्रंप ने ईरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया था.
उस समझौते के तहत ईरान को 15 साल तक फ़ॉर्दो में किसी भी तरह के संवर्धन की अनुमति नहीं थी. हालांकि साल 2021 में ईरान ने 20% शुद्धता तक यूरेनियम का संवर्धन फिर से शुरू कर दिया.
इस बीच गुरुवार को आईएईए के 35 देशों के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि ईरान ने 20 साल में पहली बार परमाणु अप्रसार से जुड़ी अपनी ज़िम्मेदारियों का उल्लंघन किया है.
अब ईरान ने कहा कि वह एक 'नए सुरक्षित स्थान' पर अधिक उन्नत, छठी पीढ़ी की मशीनों के सहारे यूरेनियम संवर्धन शुरू करेगा.
इसराइल ने ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे को कितना नुक़सान पहुंचाया है?

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इसराइली सेना ने शुक्रवार को कहा था कि उसके पहले हवाई हमलों में नतांज़ स्थित अंडरग्राउंड सेंट्रीफ्यूज हॉल को नुक़सान पहुंचा है. साथ ही इन हमलों में केंद्र को संचालित करने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी नुक़सान पहुंचा है.
आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि नतांज़ में पायलट फ़्यूल एनरिचमेंट प्लांट (पीएफ़ईपी) और बिजली के बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया गया है.
उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड हॉल पर किसी सीधे हमले का कोई संकेत नहीं मिला है.
अमेरिका स्थित साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट ने कहा कि पीएफ़ईपी को हुआ नुक़सान अहम है, क्योंकि इसका इस्तेमाल 60% संवर्धित यूरेनियम के उत्पादन और उन्नत सेंट्रीफ्यूज विकसित करने के लिए किया गया था.
डेवनपोर्ट ने बताया कि नतांज़ पर हमले से ईरान का 'ब्रेकआउट टाइम' बढ़ जाएगा, लेकिन इसके पूरे प्रभाव का अनुमान लगाना अभी जल्दबाज़ी होगी.
उन्होंने बताया, "जब तक आईएईए उस जगह तक नहीं पहुंच जाता, तब तक हमारे पास इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं होगी कि ईरान वहां कितनी जल्दी अपना काम फिर से शुरू कर सकता है या फिर ईरान यूरेनियम को दूसरी जगह भेजने में सक्षम है या नहीं."

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इसराइल ने फ़ॉर्दो संवर्धन संयंत्र और इस्फ़हान परमाणु प्रौद्योगिकी केंद्र पर भी हमला किया था.
इसराइली सेना ने कहा कि इस्फ़हान में हमले से 'यूरेनियम उत्पादन का एक ठिकाना, संवर्धित यूरेनियम को फिर से परिवर्तित करने का बुनियादी ढांचा और कई प्रयोगशालाएं नष्ट हो गई हैं.'
डेवनपोर्ट का कहना है, "जब तक फ़ॉर्दो चालू रहेगा, ईरान निकट भविष्य में परमाणु प्रसार का जोखिम उठा सकता है. ईरान के पास यह विकल्प है कि वह यहां हथियार बनाने लायक संवर्धन बढ़ा दे या फिर यूरेनियम को किसी गुप्त स्थान पर भेज दे."
उन्होंने कहा, "हमले से ठिकाने नष्ट हो सकते हैं और वैज्ञानिक मारे जा सकते हैं लेकिन ईरान की परमाणु जानकारी को मिटाया नहीं जा सकता. ईरान नष्ट हुई चीज़ों को फिर से बना सकता है और यूरेनियम संवर्धन में अपनी प्रगति के कारण वह अब पहले की तुलना में अधिक तेज़ी से पुनर्निर्माण कर सकता है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















