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बीजेपी बहुमत से चूकी पर नीतीश-नायडू के सहारे एनडीए को बहुमत, इंडिया गठबंधन फ़ायदे में
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाला सत्तारूढ़ गठबंधन 'एनडीए' 18वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में बहुमत की तरफ़ बढ़ता हुआ दिख रहा है.
बीजेपी और सरकार के बड़े नेताओं की ओर से किए जा रहे '400 पार' के दावों और एग़्जिट पोल के क़यासों के विपरीत आए चुनावी नतीजो को पीएम मोदी के लिए बड़े झटके की तरह देखा जा रहा है.
पीएम मोदी की पार्टी बीजेपी रुझानों और नतीजों में अपने बूते बहुमत के जादुई आंकड़े 272 से पीछे छूट गई है. साल 2014 और 2019 के, दोनों ही चुनावों में बीजेपी ने अपने बूते बहुमत हासिल किया था लेकिन इस बार ऐसा होता हुआ नहीं दिख रहा है.
बीजेपी 240 सीटों पर जीती है और एनडीए के पास 293 सीटें हैं. वहीं इँडिया ब्लॉक के पास 234 सीटें हैं.
पीएम मोदी की प्रतिक्रिया
लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर देखने को मिली.
पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, "देश की जनता-जनार्दन ने एनडीए पर लगातार तीसरी बार अपना विश्वास जताया है. भारत के इतिहास में ये एक अभूतपूर्व पल है. मैं इस स्नेह और आशीर्वाद के लिए अपने परिवारजनों को नमन करता हूं."
वो बोले, "मैं देशवासियों को विश्वास दिलाता हूं कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हम नई ऊर्जा, नई उमंग, नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ेंगे. सभी कार्यकर्ताओं ने जिस समर्पण भाव से अथक मेहनत की है, मैं इसके लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं."
मंगलवार शाम नरेंद्र मोदी दिल्ली के बीजेपी दफ़्तर पहुंचे. पीएम मोदी के साथ बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के अलावा राजनाथ सिंह भी मौजूद थे
इस दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा, "इस आशीर्वाद के लिए मैं देश के सभी लोगों का आभारी हूं. आज बड़ा मंगल है और इस पावन दिन एनडीए की लगातार तीसरी बार सरकार बननी तय है. देशवासियों ने बीजेपी, एनडीए पर पूर्ण विश्वास जताया है. आज की जीत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की जीत है."
पीएम मोदी ने कहा, "मैं देश के चुनाव आयोग का भी अभिनंदन करूंगा. चुनाव आयोग ने दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव इतनी कुशलता के साथ संपन्न करवाया."
"सभी उम्मीदवारों, बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं का बहुत आभार. सालों बाद कोई सरकार अपने दो कार्यकाल पूरे करने के बाद तीसरी बार वापसी आई है. बीजेपी ओडिशा में सरकार बनाने जा रही है. लोकसभा चुनाव में ओडिशा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है. ये पहली बार होगा, जब महाप्रभु जगन्नाथ की धरती पर बीजेपी का सीएम होगा."
"बीजेपी ने केरल में भी सीट जीती है. केरल के कार्यकर्ताओं ने बहुत बलिदान दिए हैं. कई पीढ़ियों से वो संघर्ष भी करते रहे और आम लोगों की सेवा करते रहे. पीढ़ियों से जिस क्षण का इंतज़ार किया, आज वो सफलता को चूमने लगी है."
सहयोगियों पर निर्भरता
बीजेपी ने लोकसभा चुनावों से पहले देश भर के कई राजनीतिक दलों से गठबंधन या सीट शेयरिंग की रणनीति अपनाई थी.
इस रणनीति के तहत बीजेपी ने बिहार में नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति (रामविलास) पार्टी, महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी, आंध्र प्रदेश में तेलुगूदेशम पार्टी (टीडीपी) जैसे कई गठबंधन किए.
हालांकि टीडीपी और जेडीयू के अलावा एनडीए में बीजेपी की ज़्यादातर सहयोगी पार्टियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा है.
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी 16 सीटों पर आगे चल रही है तो नीतीश कुमार की जेडीयू 12 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
केंद्र में सरकार गठन के लिए ज़रूरी 272 के जादुई आंकड़े की कुंजी इन्हीं राजनीतिक दलों के पास चली गई है. सरकार बनाने और उसे चलाने के लिए बीजेपी को सत्ता का संतुलन साधना होगा. प्रेक्षकों के मुताबिक़, बीजेपी के मौजूदा केंद्रीय नेतृत्व को इसका अनुभव नहीं है.
तेलुगू देशम पार्टी की जीत के मायने
बीबीसी तेलुगू सेवा के संपादकर जीएस राममोहन का विश्लेषण
आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर ने पूरा माहौल बदल दिया है. राज्य में तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) को उम्मीद से ज्यादा सफलता मिलते हुए दिखाई दे रही है.
चुनाव आयोग के मुताबिक आंध्र प्रदेश की कुल 25 सीटों में से टीडीपी 16 पर, वाईएसआरसीपी 4 पर, बीजेपी 3 पर और जनसेना पार्टी 2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.
वहीं विधानसभा की कुल 175 सीटों में से 26 पर चुनाव आयोग ने नतीजे घोषित कर दिए हैं. इन 26 सीटों में 20 पर टीडीपी, 5 पर जनसेना पार्टी और 1 सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है.
इसके अलावा 115 सीटों पर टीडीपी, 16 पर जनसेना और 11 सीटों पर बीजेपी ने बढ़त बनाई हुई है. मतगणना के रुझानों ने न सिर्फ तेलुगू देशम पार्टी को पुनर्जीवित किया है बल्कि पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू को राष्ट्रीय फलक पर ला दिया है.
अगर इन चुनावों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं करती तो उसका अस्तित्व संकट में फंस सकता था. तेलुगू देशम की सीटें महत्वपूर्ण होने वाली हैं क्योंकि बीजेपी को केंद्र में अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें मिलती हुई नहीं दिख रही हैं. यह बिल्कुल वही स्थिति है जिसकी चंद्रबाबू को उम्मीद रही होगी.
वे एक अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं. पहले भी ऐसे मौके आए हैं जब उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की स्थिति में अहम भूमिका निभाई है. साल 1984 के चुनावों के बाद टीडीपी लोकसभा में मुख्य विपक्ष की भूमिका निभा रही थी. उस समय पार्टी ने दावा किया था कि उसने पीएम और राष्ट्रपति के नाम का फैसला किया था. शायद ऐसी ही भूमिका इस बार भी पार्टी चाहती है.
अब सबकी निगाहें चंद्रबाबू नायडू और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हैं. दोनों समय-समय पर साझेदार और रणनीति बदलने के लिए जाने जाते हैं.
इससे पहले चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि आंध्र प्रदेश को स्पेशल स्टेटस न मिलने की वजह से उन्होंने साझेदार बदल लिए थे. ऐसा माना जाता है कि यह वह कारण था जिसकी वजह से उन्होंने बीजेपी छोड़ कांग्रेस का साथ पकड़ लिया था.
हालांकि हाल ही में उन्होंने बीजेपी के साथ हाथ मिलाया है लेकिन उसके बारे में साफ तौर पर अब तक नहीं बताया है. आंध्र प्रदेश में बीजेपी के पास एक प्रतिशत भी वोट बैंक नहीं है, बावजूद उसके उन्हें छह सांसद और दस विधानसभा की सीटें दी गई थी. शायद ऐसा कर चंद्रबाबू नायडू केंद्र और बीजेपी के संसाधनों का इस्तेमाल कर सत्तारूढ़ वाईएस कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ सकते थे.
चंद्रबाबू नायडू का भाजपा के साथ कोई वैचारिक या भावनात्मक संबंध नहीं है. उनका व्यवहार मौजूदा स्थितियों के हिसाब से बदलता है, इसलिए स्थिति बदलने पर कुछ भी हो सकता है.
हालांकि टीडीपी और बीजेपी ने चुनाव से पहले गठबंधन किया था. इसलिए ऐसा तो नहीं कहा जा सकता कि तुरंत कोई बदलाव देखने को मिलेगा, लेकिन एनडीए सरकार के गठन में कई बड़ी मांगे रखी जा सकती हैं. इससे पहले जब टीडीपी, एनडीए का हिस्सा थी, तब तेलुगू देशम के नेता कहते थे कि राम जन्मभूमि, धारा 370 और सामान्य नागरिक संहिता को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है. वे इस बार भी इसी तरह की बात कर सकते हैं.
इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन पर क्या बोले राहुल गांधी
लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया.
राहुल गांधी ने कहा, "हमारी लड़ाई संविधान बचाने की थी. मैं हिंदुस्तान की जनता, इंडिया के सहयोगियों, कांग्रेस पार्टी के नेताओं और बब्बर शेर कार्यकर्ताओं का दिल से धन्यवाद करना चाहता हूं."
राहुल बोले, "अदानी के स्टॉक्स तो आपने देखे होंगे. जनता मोदी को अदानी से सीधा जोड़कर देखती है. सीधा रिश्ता है. भ्रष्टाचार का रिश्ता है. चुनाव ने कह दिया है कि नरेंद्र मोदी हम आपको नहीं चाहते हैं. शाह को नहीं चाहते हैं."
राहुल गांधी बोले, "यूपी की जनता ने कमाल करके दिखाया. हिंदुस्तान की जनता ने खतरा समझकर संविधान की रक्षा की है. आपका बहुत धन्यवाद. यूपी के बारे में एक बात और बोलूंगा कि इसमें मेरी बहन का भी हाथ है. जो यहां पीछे छिपी हुई है."
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी से सवाल किया गया कि क्या वे अपने पूर्व सहयोगियों के साथ दोबारा जुड़ेंगे? इसके जवाब में राहुल गांधी ने कहा, "हम अपने सहयोगियों के साथ बात किए बगैर इस पर बात नहीं करेंगे. कल इंडिया गठबंधन की बैठक है. जो इंडिया तय करेगा, हम उसी पर एक्शन लेंगे."
ममता बनर्जी ने मांगा पीएम मोदी का इस्तीफ़ा
लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की.
ममता बनर्जी ने मीडिया से कहा, "एक तरफ सीबीआई, एक तरफ ईडी के बावजूद भी मोदी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. उन्होंने अपनी विश्वसनीयता को खोया है. उन्हें (पीएम मोदी) को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि उन्होंने इस बार 400 पार का नारा दिया था."
ममता ने कहा, "अभी उन्हें टीडीपी और नीतीश कुमार का पैर पकड़ना पड़ रहा है. मोदी जी को मैं अच्छे से जानती हूं. ये इंडिया गठबंधन को नहीं तोड़ पाएंगे."
उन्होंने कहा, "मैंने अखिलेश को बधाई दी है. बहुत बढ़िया किया है. आने वाले चुनाव में अखिलेश यादव की यूपी में जीत होगी. बिहार में जो नतीजे अभी तक सामने आए हैं, वो सच नहीं हैं. मेरी तेजस्वी यादव से बात हुई है. उन्होंने कहा कि दीदी अभी बहुत काउंटिंग बाकी है. ये झूठ बोलते हैं."
बाज़ार की प्रतिक्रिया
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नरेंद्र मोदी को सरकार चलाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर होना होगा. ये बात बाज़ार को रास नहीं आई.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों वाले संवेदी सूचकांक निफ़्टी में मंगलवार के कारोबारी सत्र में 5.9 फ़ीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज भी पीछे नहीं था. 30 शेयरों वाले संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 5.7 फ़ीसदी गिर गया.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2004 में जब बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने सत्ता गंवाई थी, तब से लेकर आज तक बाज़ार ने किसी चुनावी नतीजे पर ऐसी नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दिखाई थी.
एक जून को जब एग़्जिट पोल के अनुमानों में मोदी सरकार की दो तिहाई बहुमत से जीत का दावा किया गया था तो सोमवार को बाज़ार ने इसके स्वागत में तेज़ छलांग लगाई थी.