You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
आकाश आनंद: मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी की पहली चुनावी रैली की चर्चा क्यों हो रही है?
बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे और उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी आकाश आनंद ने अपनी पहली ही चुनावी रैली में बिना नाम लिए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद पर हमले किए हैं.
चंद्रशेखर आज़ाद अपनी पार्टी आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नगीना (सुरक्षित) सीट से उम्मीदवार हैं.
2019 के लोकसभा चुनाव में ये सीट बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने जीती थी. इस बार यहां से पार्टी के सुरेंद्र पाल सिंह चुनाव लड़ रहे हैं.
शनिवार को नगीना में एक चुनावी रैली में आकाश आनंद ने चंद्रेशखर आज़ाद का नाम लिए बिना कहा कि वो दलित युवकों को गुमराह करके उनका करियर बर्बाद कर रहे हैं.
आकाश आनंद ने कहा, "वो युवकों को प्रदर्शनों में ले जाते हैं और उनकी वजह से उनके ख़िलाफ़ मुकदमे दर्ज हो रहे हैं."
आकाश आनंद ने क्या कहा?
आकाश आनंद ने रैली में चंद्रशेखर आज़ाद की ओर इशारा करते हुए कहा, ''वो झगड़ा करते हैं. आंदोलन करते हैं और हमारे युवाओं को अपने साथ ले जाते हैं. लेकिन केस दर्ज होने पर जब ये युवा उनके पास मदद के लिए जाते हैं तो वो गायब हो जाते हैं.''
आकाश आनंद ने कहा, ''याद रखिए. अगर आपके ख़िलाफ़ केस दर्ज हो गया तो आपको सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी.''
आकाश आनंद कहा कि बहन जी (मायावती) इस तरह का कल्चर पसंद नहीं करतीं.
उन्होंने कहा, ''अगर आप अपने लोगों को इंसाफ़ दिलाना चाहते हैं तो अपने वोटों का सोच समझ कर इस्तेमाल करें. गलियों में लड़ने के बजाय अपने लोगों को सत्ता में लाने के लिए वोट दीजिए.''
आकाश आनंद ने कहा, ''अपना वोट सोच-समझ कर दीजिए क्योंकि भावना में बह जाने से अक्सर गलतियां हो जाती हैं.''
आकाश आनंद ने कहा, ''विपक्षी पार्टियों ने यहां हमारी पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए हमारे बीच हर तरह के लोगों को लगा दिया है. मैं किसी का नाम लेकर किसी को अहमियत नहीं देना चाहता. इनमें से कुछ लोग खुद को मसीहा कहते हैं. वो कहते हैं कि समाज के हित के लिए वो सड़कों पर उतर कर लड़ेंगे.''
आकाश आनंद ने चंद्रशेखर आज़ाद पर हमले करते हुए कहा, ''आखिरी कुछ दिनों के दौरान उन्होंने किसी तरह इंडिया गठबंधन में शामिल होने की कोशिश की ताकि किसी तरह एक सीट जीत सकें. वो अकेले चुनाव लड़ने से डरते हैं. और अब वो बीएसपी कैंडिडेट के ख़िलाफ़ ये कह कर अफवाह फैला रहे हैं कि ये बहुत कमजोर हैं.''
उन्होंने कहा, ''ऐसे लोगों से सावधान रहें. ये लोग कांग्रेस, एसपी या बीजेपी के लोगों के जैसे ही नाकारा हैं.''
आकाश आनंद ने चंद्रशेखर का नाम लिए बगैर कहा कि वो किसी तरह एक सीट पाना चाहते थे, किसी तरह वो एक सीट का जुगाड़ करना चाहते थे.
हालांकि कुछ समय पहले आकाश आनंद ने कहा था कि वो किसी भीम आर्मी या चंद्रशेखर आज़ाद को नहीं जानते हैं.
'बीएसपी पूंजीपतियों से चंदा नहीं लेती'
आकाश आनंद ने कहा कि बीएसपी ने अपने कार्यकर्ताओं के दम चलने वाली पार्टी है. ये पूंजीपतियों से चंदा नहीं लेती. ये कार्यकर्ताओं और समर्थकों के चंदा से चलती है. यही वजह है कि इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लेने वाली पार्टियों में बीएसपी का कहीं नाम नहीं है.
आकाश आनंद ने कहा,''देश में जिन 25 पार्टियों का नाम इलेक्टोरल बॉन्ड से चंदा लेने वाली पार्टियों में किसका नाम नहीं है. ये है आपकी अपनी पार्टी बीएसपी. बीएसपी ने इलेक्टोरल बॉन्ड का कोई फ़ायदा नहीं लिया.''
बीएसपी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने कहा कि बीजेपी शिक्षा रोजगार और सुरक्षा के मुद्दे पर फेल रही है. उन्होंने कहा कि यूपी सरकार को खुद बुलडोजर सरकार कहलवाना बहुत अच्छा लगता है. लेकिन जनता ने सरकार को तोड़ने के लिए नहीं जोड़ने के लिए चुना था.
उन्होंने पेपर लीक के सवाल पर भी योगी सरकार को घेरा.
उन्होंने कहा,'' यूपी में पुलिस भर्ती परीक्षा में पेपर लीक से 60 हजार युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ. डिजिटल इंडिया की बात की जाती है लेकिन देश के 65 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर नहीं है और 35 फीसदी में इंटरनेट नहीं है. लेकिन बीजेपी सरकार जनता के पैसे पर अपनी योजनाओं का प्रचार करने में लगी हैं.''
चंद्रशेखर आज़ाद चुनावी मैदान में
चंद्रशेखर आज़ाद पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. बिजनौर ज़िले की नगीना सीट पर उनके चुनाव मैदान में उतरने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति में वर्चस्व की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है.
ये सीट सहारपुर ज़िले से सटी है, जहां चंद्रशेखर आज़ाद की भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय है.
नगीना सीट पर चंद्रशेखर आज़ाद काफी पहले से चुनाव लड़ने का मन बना चुके थे. उन्हें उम्मीद थी कि उनका समाजवादी पार्टी से गठबंधन हो जाएगा और सपा यहां अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी इसलिए उनकी राह आसान हो जाएगी.
लेकिन अब समाजवादी पार्टी ने भी यहां से अपना उम्मीदवार उतार दिया है.
चंद्रेशखर आज़ाद ने आकाश आनंद के बयान पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
लेकिन इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस सीट पर बीएसपी, बीजेपी और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उनसे काफी पीछे हैं.
2008 में परिसीमन के दौरान बिजनौर ज़िले का एक बड़ा हिस्सा नगीना लोकसभा क्षेत्र के तहत आ गया था.
उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती पहली बार 1989 में बिजनौर सीट से ही चुनाव जीत कर लोकसभा पहुंची थीं. 2019 में बीएसपी के गिरीश चंद्र 1,67,000 वोटों से यहां चुनाव जीते थे.
अब यहां चंद्रशेखर आज़ाद, बीएसपी के सुरेंद्र पाल, समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार और बीजेपी के ओम कुमार चुनाव मैदान में हैं.
नगीना सीट इतनी अहम क्यों?
नगीना एक रिज़र्व सीट है और यहां लगभग 50 फीसदी मुस्लिम आबादी है. क़रीब 21 फ़ीसदी दलित वोटर और लगभग 50 फीसदी मुस्लिम मतदाता इस सीट पर हार-जीत का फैसला करते हैं.
नगीना सीट पर नज़र रखने वालों का कहना है कि चंद्रशेखर आज़ाद के नगीना सीट से लड़ने के फैसले से बहुजन समाज पार्टी के वोट बंटने के आसार बढ़ गए हैं. यही वजह है कि बीएसपी उन्हें सीधा निशाना बना रही है.
2019 में समाजवादी पार्टी और बीएसपी का गठबंधन था. इसका फायदा बीएसपी के उम्मीदवार को मिला था. इसलिए बीएसपी के उम्मीदवार गिरीश चंद्र यहां 1,67,000 वोटों के अंतर से जीतने में कामयाब रहे थे.
परिसीमन के बाद नगीना सीट पर तीन लोकसभा चुनाव हो चुके हैं लेकिन अभी तक किसी एक दल को लगातार जीत नहीं मिली है.
2009 में यहां समाजवादी पार्टी के टिकट पर यशवीर सिंह चुनाव जीते थे. लेकिन 2014 में बीजेपी के यशवंत सिंह ने यहां समाजवादी पार्टी के यशवीर सिंह को हरा दिया था. लेकिन 2019 में समाजवादी पार्टी और बीएसपी के गठबंधन की वजह से बीएसपी के उम्मीदवार को जीत मिली थी.
कौन हैं चंद्रशेखर आज़ाद
चंद्रशेखर आज़ाद सहारनपुर के छुटमुलपुर गांव के रहने वाले हैं. वो कानून पढ़े हुए हैं और पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से यूपी समेत कई राज्यों में राजनीतिक तौर पर सक्रिय हैं.
उन्होंने सहारनपुर और आसपास के इलाकों में दलित अधिकारों के लिए सामाजिक आंदोलन चलाने से शुरुआत की थी. इलाके में दलितों के समर्थन में आंदोलन चलाने के लिए उन्होंने भीम आर्मी नाम का संगठन बनाया.
इसके बाद वो राजनीतिक तौर पर सक्रिय हुए. अब उन्होंने आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) नाम की राजनीतिक पार्टी और उसी के बैनर तले नगीना सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.
उनकी पार्टी को उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश के दलित युवाओं में चंद्रशेखर आज़ाद की खासी लोकप्रियता है. चंद्रशेखर आज़ाद राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आए थे जब सीएए के ख़िलाफ़ आंदोलन में संविधान की प्रति लेकर लाल किले पहुंचे थे.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)