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पुतिन से मिलने के बाद किम जोंग उन की कुर्सी क्यों साफ़ की गई?
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
चीन की राजधानी बीजिंग में एक ऐसी हाई-प्रोफ़ाइल मुलाक़ात हुई, जिसे लेकर ख़ासी चर्चा है. ये मीटिंग थी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन की.
दोनों नेताओं की मीटिंग में जो बातें हुईं, उनकी तो चर्चा है ही, लेकिन उससे ज़्यादा सुर्खियां बटोर रही है वो घटना, जो इस मीटिंग के बाद हुई. जैसे ही दोनों नेता मिलने के बाद वहां से रवाना हुए, उत्तर कोरिया के स्टाफ़र उस कुर्सी के पास पहुंचे, जिस पर मीटिंग के वक़्त किम जोंग उन बैठे थे.
हाथ में कपड़ा था और मक़सद - हर वो चीज़ बड़े करीने से साफ़ करना, जिसे किम जोंग उन ने छुआ था. जिस कुर्सी पर वो बैठे थे, उसे भी बड़ी सतर्कता से साफ़ किया गया. लेकिन क्यों?
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ विश्लेषकों का कहना है कि ये उत्तर कोरिया के नेता से जुड़े सुरक्षा उपायों का हिस्सा है, ताकि विदेशी या दुश्मन देशों के जासूसों के मंसूबों पर पानी फेरा जा सके.
हालांकि, किम जोंग उन और व्लादिमीर पुतिन के बीच दोस्ताना रिश्ते हैं, और ये मुलाक़ात भी चीन में थी, जो उत्तर कोरिया के साथ संबंध रखने वाले गिने-चुने देशों में शामिल है.
टेलीग्राम पर की गई एक पोस्ट में क्रेमलिन के रिपोर्टर एलेग्ज़ेंडर युनाशेव ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उत्तर कोरिया के दो स्टाफ़ मेंबर किम जोंग उन और पुतिन की मेज़बानी करने वाले रूम को साफ़ करते दिख रहे हैं. जिस कुर्सी पर वो बैठे थे, उसका बैकरेस्ट और आर्मरेस्ट साफ़ किया गया.
किम जोंग उन की कुर्सी के क़रीब रखी गई टेबल साफ़ की गई. और उस टेबल पर रखा गिलास भी वहां से हटा लिया गया.
इस रिपोर्टर ने कहा, ''जब सारी बातचीत ख़त्म हो गई, उत्तर कोरिया के प्रमुख के साथ आए स्टाफ़ ने बहुत सावधानी से किम जोंग उन की मौजूदगी से जुड़े सारे सुराग़ नष्ट कर दिए.''
किम जोंग उन की ख़ास ट्रेन में टॉयलेट भी आया था?
जापान के निक्केई अख़बार ने दक्षिण कोरियाई और जापानी इंटेलीजेंस एजेंसी के हवाले से बताया है कि अपने पिछले विदेशी दौरों की तरह इस बार भी हरी रेलगाड़ी में किम जोंग उन का ख़ास टॉयलेट पैक होकर चीन पहुंचा था.
अमेरिका के स्टिमसन सेंटर में उत्तर कोरियाई लीडरशिप के एक्सपर्ट माइकल मैडन का कहना है कि किम जोंग उन के पिता किम जोंग इल के ज़माने से ही इस तरह के सुरक्षा उपाय, उत्तर कोरिया के स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल हैं.
उन्होंने रॉयटर्स से कहा, ''ये स्पेशल टॉयलेट, मल, कचरे और सिगरेट बट को रखने वाले गारबेज बैग इसलिए रखे जाते हैं ताकि कोई भी विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी इनका सैम्पल लेकर इनकी जांच ना कर सके. इन सभी चीज़ों से किम जोंग उन की मेडिकल कंडीशन के बारे में कोई ना कोई जानकारी मिल सकती है. इनमें बाल या त्वचा के अंश भी शामिल हैं.''
लेकिन उत्तर कोरिया अपने नेताओं से जुड़ी किसी भी जानकारी को सामने क्यों नहीं लाना चाहता, इसके जवाब में दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में कोरियन लैंग्वेज और स्टडीज़ में प्रोफ़ेसर पद से रिटायर वैजयंती राघवन का कहना है कि उत्तर कोरिया बहुत गोपनीय देश है. वो अपने और अपने शीर्ष नेता के बारे में कोई जानकारी नहीं देना चाहता.
वैजयंती ने बीबीसी से कहा, ''ज़ाहिर है, उत्तर कोरिया के सबसे बड़े नेता से जुड़ी सूचना उसके लिए सबसे अहम है. उनके खाने से लेकर मल-मूत्र तक की जानकारी वो किसी के हाथ नहीं लगने देना चाहते हैं. जिस तरह की राजनीति किम जोंग उन करते हैं, जिस तरह की उनके देश की नीतियां हैं, उसे लेकर देश के बाहर और भीतर से कुछ ख़तरों का डर तो लगा ही रहता होगा. इसलिए वो दूसरे देश भी अपनी ही ख़ास रेलगाड़ी से जाते हैं.''
डीएनए क्या होता है, जिसकी इतनी चर्चा हो रही है?
अब लौटते हैं किम जोंग उन की कुर्सी साफ़ करने से जुड़े सवाल पर. उनके स्टाफ़र असल में क्या साफ़ कर रहे थे और क्यों? मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि ऐसा इसलिए किया गया, ताकि किम जोंग उन के डीएनए का कोई सैम्पल वहां से ना लिया जा सके. इस जवाब में से एक और सवाल निकलता है कि डीएनए क्या होता है और वो इतना ज़रूरी क्यों है?
डीएनए का फुल फॉर्म है डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड. ये एक जेनेटिक कोड है, जो जीन बनाता है और यही जीन किसी भी ऑर्गेनिज़्म को ख़ास पहचान देते हैं. ये एक केमिकल है, जो दो लंबे स्ट्रैंड्स से बनता है और इसकी शेप स्पाइरल की तरह होती है.
ये डबल-हेलिक्स स्ट्रक्चर होता है. इसी में जेनेटिक इंफॉर्मेशन होती है, जिसे जेनेटिक कोड कहा जाता है. और फर्टिलाइजे़शन के दौरान ये डीएनए माता-पिता से बच्चों में ट्रांसफ़र होता है.
जानकार डीएनए को 'लाइफ़ का ब्लूप्रिंट' भी कहते हैं. जिस तरह इंसान की उंगलियों के निशान अलग-अलग होते हैं, ठीक उसी तरह हर इंसान का डीएनए अलग-अलग होता है. हर व्यक्ति में तीन अरब से ज़्यादा अलग-अलग डीएनए बेस पेयर होते हैं. और हर डीएनए अलग होता है. आइडेंटिकल टि्वन को छोड़ दिया जाए तो. उस सूरत में उसका डीएनए अपने टि्वन जैसा ही होता है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी में बायोटेक्नोलॉजी पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉक्टर हरेन राम सियारी का कहना है कि साधारण भाषा में कहें तो डीएनए कुछ करेक्टरस्टिक्स या विशेषताओं को एक जनरेशन से दूसरी जनरेशन तक ले जाता है.
आसान भाषा में कहा जाए तो डीएनए हमारे शरीर के लिए इंस्ट्रक्शन मैनुअल की तरह है, जो शरीर के विकास, रिप्रोडक्शन और हर एक काम के लिए ज़रूरी है. हमारी आंखों का रंग, बालों का रंग, ये सब कुछ यही तय करता है.
हमारा शरीर करोड़ों सेल से बना है और हर सेल के न्यूक्लियस में ये डीएनए मौजूद रहता है. ये A ,T,C,G जैसे चार करेक्टर से बनता है और ये सभी जोड़ी बनाकर रहते हैं, जैसे A-T या G-C की जोड़ी. इन्हीं को बेस पेयर कहा जाता है.
अगर उत्तर कोरिया के नेता डीएनए सुरक्षित रखने के लिए वो कुर्सी और बाकी चीज़ें साफ़ की जा रही थीं तो सवाल ज़हन में आता है कि वहां डीएनए था कहां?
दरअसल, हेयर फोलिकल, स्किन सेल, सलाइवा, इन सभी से किसी का डीएनए हासिल किया जा सकता है. हेयर फोलिकल बाल का वो हिस्सा है, जो उसके सबसे नीचे होता है, जड़ की तरह.
जब बाल टूटते हैं तो यो भी उसके साथ ही निकल जाता है.
डॉक्टर हरेन राम सियारी बताते हैं, ''अगर आपके बाल का कोई भी हिस्सा कुर्सी पर रह जाता है तो उसमें से डीएनए हासिल किया जा सकता है. इसके अलावा हमारे शरीर की त्वचा के कुछ बहुत बारीक़ अंश अगर गिरते हैं तो उनसे भी डीएनए तक पहुंचा जा सकता है. इन दो चीज़ों के अलावा जब कोई इंसान बात करता है तो बोलते समय लार या थूक के कुछ हिस्से बाहर गिरते हैं. इनसे भी डीएनए तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है.''
डीएनए बचाने के लिए जद्दोजहद क्यों ?
इसके जवाब में डॉक्टर सियारी कहते हैं कि अगर किसी के पास किसी भी व्यक्ति का डीएनए है, तो ये पता लगाया जा सकता है कि क्या उस व्यक्ति को कोई जेनेटिक बीमारी है. अगर परिवार में कोई बीमारी है और वो पीढ़ी दर पीढ़ी ट्रांसफ़र हो रही है तो उसका भी पता लगाया जा सकता है.
डॉक्टर सियारी ने कहा, 'इसके अलावा, क्या शरीर में कोई रेसिस्टेंस है, किसी दवा या एंटीबायोटिक को लेकर, इसकी भी जानकारी मिल सकती है. पता लगाने के लिए डीएनए से काफ़ी कुछ पता लगाया जा सकता है, लेकिन जेनेटिक बीमारियां सबसे पहले पकड़ में आ सकती हैं. डीएनए से फैमिली के बारे में पता लगाया जा सकता है, फैमिली में चली आ रही जेनेटिक बीमारियों और दोषों का या फिर दूसरी जेनेटिक कमी की जानकारी हासिल की जा सकती है.'
क्या डीएनए ये भी बता सकता है कि किसी व्यक्ति की सेहत अभी कैसी है, इसके जवाब में वो कहते हैं, 'सटीक रूप से ये अनुमान लगाना मुश्किल है कि अभी व्यक्ति स्वस्थ है या अस्वस्थ. डीएनए बनते-बिगड़ते रहते हैं, इसलिए हेल्थ कंडीशन सटीक तौर पर पता लगाना मुश्किल होगा. लेकिन बीमारियों का ज़रूर पता लगाया जा सकता है.'
किम जोंग उन की टीम ना केवल बाद में बल्कि उनके इस्तेमाल करने से पहले भी सारी चीज़ों को बहुत गौर से साफ़ करती है.
साल 2018 में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से मुलाकात हो या फिर 2023 में रूसी राष्ट्रपति से, उनकी टीम चेयर को स्प्रे कर साफ़ करती दिखी थी और मेटल डिटेक्टर से स्कैन करते हुए भी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित