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विधानसभा या कुटुंबसभा? महाराष्ट्र में चुने गए कई विधायकों के बीच हैं पारिवारिक रिश्ते
- Author, प्रियंका जगताप
- पदनाम, बीबीसी मराठी
पिछले कुछ साल में केंद्र के साथ ही महाराष्ट्र राज्य की राजनीति कई मायनों में बदल गई है, जिसमें स्पष्ट तौर पर वंशवाद पहले से भी ज़्यादा गहरा होता दिखता है.
भले ही भारत में राजनीति लोकतंत्र के सिद्धांतों पर होती है, लेकिन राष्ट्रीय और स्थानीय राजनीति पर कुछ परिवारों का ही वर्चस्व दिखता है.
महाराष्ट्र में हुए ताज़ा विधानसभा चुनावों के बाद कई ऐसे विधायक जीतकर आए हैं, जिसने भाई-भाई, भाई-बहन, बाप-बेटे, ससुर-दामाद जैसी कई जोड़ियों के सदन में पहुँचा दिया है.
इन रिश्तों की वजह से महाराष्ट्र की नई विधानसभा की तस्वीर भी काफ़ी अलग दिखने वाली है.
महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित करने वाले आंदोलनों से जुड़े तथाकथित प्रगतिशील परिवारों को अक्सर राजनीति में अहम पदों पर देखा गया है.
राज्य में एक ही परिवार की कई पीढ़ियां या कई भाई-बहन सत्ता के क़रीब भी दिखते रहे हैं.
अगर हम महाराष्ट्र में इस साल के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों की सूची पर नज़र डालें तो हम देख सकते हैं कि कई ऐसे राजनीतिक परिवार हैं, जिनके पास एक से ज़्यादा पद हैं.
महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनाव में जनता ने महायुति गठबंधन को भारी बहुमत से वोट दिया है. इन चुनावों में महाविकास अघाड़ी को तगड़ा झटका लगा है.
राज्य की 288 सीटों में से महायुति ने 230 सीटें और महाविकास अघाड़ी ने 50 सीटें जीतीं, जबकि अन्य को 8 सीटें मिली हैं.
इन आंकड़ों के पीछे किसी राजनीतिक परिवार के पास कितने राजनीतिक पद हैं; कौन, किसके रिश्तेदार हैं, यह सब हम इस ख़बर में जानने की कोशिश करेंगे.
सांसद सुनील तटकरे-विधायक अदिति तटकरे
अजित पवार के गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे रायगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद हैं, जबकि उनकी बेटी अदिति तटकरे श्रीवर्धन विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के लिए चुनी गई हैं. इस तरह से तटकरे के एक ही घर में दो पद हैं, पिता सांसद और बेटी विधायक.
दानवे भाई-बहन
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री रावसाहब दानवे भले ही लोकसभा में हार गए, लेकिन उनके दो बच्चे विधानसभा में जीत हासिल कर चुके हैं.
रावसाहब की बेटी संजना जाधव, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना से छत्रपति संभाजीनगर ज़िले के कन्नड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनी गई हैं.
जबकि, बेटे संतोष दानवे भोकरदन विधानसभा क्षेत्र से तीसरी बार निर्वाचित हुए हैं. यानी दानवे परिवार के पास एक ही सदन में दो-दो विधायक पद हैं.
किरण सामंत-उदय सामंत
शिवसेना के शिंदे गुट के उदय सामंत रत्नागिरी निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के लिए फिर से चुने गए हैं.
इसके अलावा, उनके भाई किरण सामंत भी राजापुर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए हैं. लिहाजा, सामंत बंधुओं की यह जोड़ी अब विधानसभा में एक साथ नजर आएगी.
राणे परिवार में एक सांसद, दो विधायक
बीजेपी सांसद नारायण राणे के दोनों बेटे इस साल चुनाव मैदान में खड़े थे. कणकावली विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर नितेश राणे ने चुनाव जीत लिया है.
जबकि, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के नीलेश राणे ने कुडाल-मालवन विधानसभा सीट से जीत हासिल की है. इस परिवार में पिता सांसद और दो बेटे विधायक हैं.
भाइयों की जोड़ी
शिवसेना के ठाकरे गुट के आदित्य ठाकरे वर्ली विधानसभा सीट से विधायक बने हैं. जबकि उनके मौसेरे भाई वरुण सरदेसाई बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए. वरुण ने ज़ीशान सिद्दीक़ी को हराया है, जो बाबा सिद्दीक़ी के बेटे हैं.
वहीं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे एक बार फिर कोपरी-पचपखाड़ी विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं, जबकि उनके बेटे श्रीकांत शिंदे ठाणे ज़िले के कल्याण-डोंबिवली लोकसभा सीट से सांसद हैं.
इसलिए एक परिवार में पिता विधायक और पुत्र सांसद हैं.
पवार 'पावर'
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार पिछले छह दशकों से राज्य और देश की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता रहे हैं.
फ़िलहाल शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती लोकसभा सीट से पवार परिवार से सांसद हैं और उनके भतीजे अजीत पवार बारामती से विधानसभा के लिए चुने गए हैं.
जबकि शरद पवार के पोते रोहित पवार ने कर्जत जामखेड सीट से विधानसभा चुनाव जीता है. इस तरह से पवार परिवार के पास एक ही सदन में दो विधायक और एक सांसद का पद है.
जयंत पाटिल-सत्यजीत देशमुख
राकांपा के शरद चंद्र पवार गुट के जयंत पाटिल इस्लामपुर वालवा निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा के लिए चुने गए हैं, जबकि उनके क़रीबी रिश्तेदार सत्यजीत देशमुख बीजेपी के टिकट पर शिराला निर्वाचन क्षेत्र से चुने गए.
जयंत पाटिल की पत्नी शैलजा और सत्यजीत की पत्नी रेणुका आपस में बहने हैं. ये दोनों मैसल से पूर्व विधायक रहे मोहनराव शिंदे की बेटियां हैं.
यानी एक ही घर के दो दामाद विधानसभा में नज़र आएंगे.
संदीपन भुमरे-विलास भुमरे
छत्रपति संभाजीनगर ज़िले के पैठण विधानसभा क्षेत्र से शिवसेना के शिंदे गुट के विलास भुमरे ने इस बार का विधानसभा चुनाव जीता है.
विलास भूमरे शिवसेना के छत्रपति संभाजीनगर के सांसद संदीपन भुमरे के बेटे हैं. इस तरह से बाप और बेटे को सांसद और विधायक का पद मिला है.
इस बार के विधानसभा चुनाव में राहुरी सीट से बीजेपी के शिवाजीराव कार्डिले ने चुनाव जीता है.
उनके दामाद संग्राम जगताप, जो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अजीत पवार गुट में हैं, अहमदनगर शहर से विधानसभा के लिए चुने गए हैं.
मुंडे भाई-बहन
विधानसभा चुनाव में भोकर सीट से बीजेपी की श्रीजया चव्हाण चुनी गई हैं. बीजेपी सांसद अशोक चव्हाण उनके पिता हैं.
राज्य की सतारा सीट से बीजेपी विधायक शिवेंद्र राजे और बीजेपी सांसद उदयनराजे भोसले आपस में चचेरे भाई हैं.
उदयनराजे भोसले, किसी दौर में सतारा की राजनीति में दबदबा रखने वाले प्रतापसिंह राजे भोसले के बेटे हैं.
अभयसिंह राजे भोसले सतारा के विधायक और सांसद दोनों पदों पर रहे हैं, वो प्रतापसिंह के भाई थे. जबकि शिवेंद्रराजे भोसले अभय सिंह के बेटे हैं.
एनसीपी अजित पवार गुट के धनंजय मुंडे परली विधानसभा सीट से चुनाव जीते हैं. बीजेपी विधायक पंकजा मुंडे और धनंजय मुंडे चचेरे भाई-बहन हैं.
एनसीपी अजित पवार ग्रुप के विधायक छगन भुजबल येवला विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं. उनके बेटे पंकज भुजबल भी विधान परिषद के सदस्य हैं.
बीबीसी मराठी ने महाराष्ट्र की राजनीति में इस परिवारवाद के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता और जानकार हेरंब कुलकर्णी से बात की.
उन्होंने वंशवाद पर अध्ययन कर 'महाराष्ट्र में राजनीतिक राजवंश' नाम से एक रिपोर्ट भी तैयार की है.
हेरंब कुलकर्णी , "हज़ारों कार्यकर्ता जीवन भर एक निर्वाचन क्षेत्र के लिए काम करते हैं. लेकिन लोकतंत्र में यह अनुचित है कि वंशवाद की राजनीति के कारण उनका राजनीतिक करियर आगे नहीं बढ़ पाता है."
नई विधानसभा में अब एक ही परिवार के दो लोग हॉल में एक साथ बैठेंगे.
वंशवाद के बढ़ने का कारण बताते हुए हेरंब कुलकर्णी कहते हैं कि जब कोई नई पीढ़ी का नेता आता है तो कार्यकर्ता उसके क़रीब जाने और उनकी नज़रों में अपनी जगह पक्की करने की होड़ में लग जाते हैं.
"क्योंकि कार्यकर्ता नेताओं के सहारे जीते हैं. इसलिए, वे असुरक्षित महसूस करते हैं कि यदि वो टिकट के लिए विद्रोह करते हैं या संघर्ष करते हैं, तो उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा और नेताओं की मान्यता से मिलने वाले कई तरह के लाभ या पद खो देंगे."
इस बीच एक ओर जहाँ ऊंचे पदों पर अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर एक ही राजनीतिक परिवार के व्यक्ति को प्रतिनिधित्व मिल रहा है और ऐसा 'प्रगतिशील' कहे जाने वाले महाराष्ट्र में हो रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.