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निर्मला सीतारमण ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार क्यों किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि उन्होंने लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया है.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए उनके पास पैसों की कमी है और आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु जैसे दक्षिण के राज्यों में जीत के लिए जो मानदंड होते हैं, उन पर वह खरी नहीं उतरती हैं.
ऐसी अटकलें थीं कि निर्मला सीतारमण आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु से चुनाव लड़ सकती हैं. अभी वह राज्यसभा सांसद हैं.
निर्मला सीतारमण नरेंद्र मोदी के दोनों कार्यकाल में मंत्री रही हैं और दोनों बार राज्यसभा के ज़रिए ही संसद में पहुँचीं.
बीजेपी इस बार राज्यसभा के ज़रिए संसद पहुँचे अपने मंत्रियों को लोकसभा चुनाव लड़ा रही है.
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अलावा पर्यावरण और श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. अभी दोनों राज्यसभा सांसद हैं.
लोकसभा चुनाव 19 अप्रैल से शुरू हो रहा है. निर्मला सीतारमण से न्यूज़ चैनल टाइम्स नाउ के एक कार्यक्रम में सवाल पूछा गया कि क्या वह चुनाव लड़ेंगी?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''नहीं. पार्टी ने मुझसे कहा था लेकिन इस बारे में हफ़्ते-दस दिन सोचने के बाद कहा कि शायद नहीं. पार्टी अध्यक्ष ने मुझसे कहा था कि क्या मैं दक्षिण के राज्य तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश से चुनाव लड़ना पसंद करूंगी?''
निर्मला सीतारमण ने कहा, ''चुनाव लड़ने लायक मेरे पास पैसे नहीं हैं. मेरे साथ एक और समस्या है. आंध्र प्रदेश या तमिलनाडु में चुनाव जीतने के मानदंडों पर मैं खरी नहीं उतरती हूँ. किसी ख़ास समुदाय, किसी ख़ास धर्म का समीकरण भी होता है. ऐसे में मैंने ना कहा क्योंकि मैं इन मानदंडो पर फिट नहीं बैठती हूँ. मैं एहसानमंद हूं कि पार्टी ने मेरी दलील को मान लिया. पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि चलो, आपका मन नहीं है. कोई बात नहीं. मैं चुनाव नहीं लड़ रही हूँ.''
निर्मला सीतारमण के राज्यसभा का कार्यकाल 2028 तक है.
देश की पहली महिला वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण के पास दो अहम मंत्रालय हैं- वित्त और कॉर्पोरेट अफेयर्स.
निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं.
इससे पहले इंदिरा गांधी जब प्रधानमंत्री थीं तो कुछ समय के लिए उनके पास वित्त मंत्रालय भी था. निर्मला सीतारमण मोदी के पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्री थीं.
सक्रिय राजनीति में आने से पहले निर्मला सीतारमण जेएनयू में पढ़ाई के बाद कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए काम कर रही थीं. इसके बाद वह अपने पति के साथ लंदन चली गई थीं और वहाँ उन्होंने बीबीसी जॉइन किया था.
निर्मला सीतारमण 1990 के दशक में वापस भारत आई थीं और अध्यापन के क्षेत्र में लग गई थीं. बाद में उन्होंने हैदराबाद में प्रानवा स्कूल की स्थापना की थी.
साल 2008 में निर्मला सीतारमण का बीजेपी में प्रवेश हुआ, जब नेशनल एग्ज़िक्यूटिव में इन्हें बुलाया गया था और इन्होंने भाषण दिया था. उनके भाषण का विषय सुरक्षा और आर्थिक मामलों पर था. तब वरिष्ठ नेताओं का ध्यान उन पर गया.
जब राजनाथ सिंह अध्यक्ष बने, उन्हें फिर नेशनल एग्ज़िक्यूटिव में फिर भाषण देने का मौक़ा मिला. उस समय अरुण जेटली मंच पर थे. उन्होंने राजनाथ सिंह से कहा कि भाषण सुनिए, इनमें बहुत संभावनाएं हैं.
नितिन गडकरी जब अध्यक्ष बने तब उन्हें प्रवक्ता बनाया गया. खास बात यह है कि निर्मला तमिलनाडु से हैं मगर आंध्र से भी इनका रिश्ता रहा है.
वह ग़ैर-हिंदी भाषी क्षेत्र से थीं और हिंदी में बोलने में उन्हें कठिनाई होती थी. मगर पार्टी में तय हुआ कि वह हिन्दी ठीक न भी बोलें, वह प्रभावी रहती हैं. इनकी इंग्लिश में भी ताज़ापन था.
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में निर्मला सीतारमण को राष्ट्रीय महिला आयोग में नामांकित किया गया था. 2009 उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था.
निर्मला सीतारमण को 2014 में बीजेपी ने राज्यसभा सांसद बनाया. रक्षा मंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी सरकार पर विपक्ष ने फ्रांस के साथ रफ़ाल लड़ाकू विमान सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.
निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों को ख़ारिज किया था और अपनी सरकार का खुलकर बचाव किया था.
निर्मला सीतारमण के पति मोदी सरकार के आलोचक
निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर आंध्र प्रदेश सरकार संचार सलाहाकार रहे थे. वह जाने-माने अर्थशास्त्री भी हैं.
प्रभाकर अक्सर मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हैं. बुधवार को ही प्रभाकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था, जिसमें वह कह रहे हैं कि बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड की क़ीमत चुकानी होगी.
प्रभाकर ने टीवी रिपोर्टर से कहा, ''इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा आने वाले समय में बीजेपी के लिए मुश्किल साबित होगा. अब हर कोई समझ रहा है कि इलेक्टोरल बॉन्ड न केवल भारत का सबसे बड़ा घपला है बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा स्कैम है. इस मुद्दे के कारण बीजेपी को मतदाता ज़रूर सज़ा देंगे.''
बीजेपी को इलेक्टोरल बॉन्ड के ज़रिए सबसे बड़ा चंदा मिला है. बीजेपी को 12 अप्रैल 2019 से 15 फ़रवरी 2024 तक इलेक्टोरल बॉन्ड से 6 हज़ार 986 करोड़ रुपए से अधिक का चंदा मिला है. इसके बाद टीएमसी और कांग्रेस हैं.
बीजेपी अक्सर मनमोहन सिंह और पीवी नरसिम्हा राव की आर्थिक नीतियों को लेकर कांग्रेस को निशाने पर लेती रहती है. परकला प्रभाकर ने बीजेपी के इस रुख़ की भी आलोचना की थी.
उन्होंने अंग्रेज़ी अख़बार हर हिन्दू में एक लेख के ज़रिए कहा था कि बीजेपी आर्थिक नीतियों को लेकर मनमोहन सिंह और पीवी नरसिम्हा राव को राजनीति के कारण निशाने पर लेती है न कि आर्थिक समझ के कारण.
निर्मला सीतारमण पार्टी के लिए विभिन्न मामलों पर रिसर्च करती रही हैं. पॉलिसी के मामले में भी पार्टी ने इन्हें रिसर्च करने के लिए कहा था. इस तरह धीरे-धीरे इनके काम ने शीर्ष नेतृत्व को प्रभावित किया.
पार्टी के सम्मेलनों में इन्होंने भाषण से प्रभावित किया था. तब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन्हें अपने राज्य में बुलाया था. वहां उन्होंने महिला समूहों, खासकर स्वंय सहायता समूहों में बीजेपी के लिए प्रचार किया था.
कहा जाता है कि मोदी भी इनके काम से प्रभावित हुए थे. पिछले गुजरात चुनाव में भी निर्मला वहां सक्रिय रही थीं जबकि न तो गुजराती उन्हें आती थी न हिंदी ठीक से आती थी.
ख़ास बात यह है कि आज जब दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर विवाद चल रहा है, उस समय में वह राजनीतिक हस्ती होकर भी अपनी टूटी-फूटी हिंदी से प्रभावित करती हैं.
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