नूंह हिंसाः बृजमंडल धार्मिक यात्रा फिर से निकालने को लेकर हिंदू समूहों की महापंचायत - प्रेस रिव्यू

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ नूंह में हिंदूवादी समूहों ने महापंचायत का आह्वान किया है.

सर्व हिंदू समाज नाम के सामाजिक संगठन ने ये पंचायत नूंह और पलवल बॉर्डर के पास एक गांव में बुलाई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ आयोजकों का कहना है कि इस पंचायत में 15 हज़ार तक लोग इकट्ठा हो सकते हैं.

वहीं पुलिस का कहना है कि पंचायत की अनुमति नहीं दी गई है.

इस पंचायत में बृजमंडल धार्मिक यात्रा को फिर से निकालने की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी.

31 अगस्त को इस धार्मिक यात्रा के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों में टकराव हो गया था जिसमें दो होमगार्ड समेत छह लोग मारे गए थे और बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी.

सर्व हिंदू समाज के नेताओं का कहना है कि धार्मिक यात्रा को 28 अगस्त को फिर से नूंह के नल्हड़ गांव से निकालने की तैयारियां की जा रही हैं.

ये महापंचायत रविवार को पोंडरी-कीरा सीमावर्ती गांव में हो रही है. पोंडरी पलवल ज़िले में है और कीरा नूंह ज़िले में है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ दोनों ही ज़िलों के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस पंचायत के लिए अनुमति नहीं दी गई है.

वहीं आयोजकों का कहना है कि इसमें बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के नेता भी शामिल होंगे.

आयोजकों ने पंचायत को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्टर भी जारी किए हैं जिनमें कहा गया है कि ‘हिंदुओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए यात्रा को फिर से निकाला जा रहा है.’

जारी किए गए पोस्टरों में 31 जुलाई को हुई सांप्रदायिक हिंसा का भी ज़िक्र है.

अख़बार से बात करते हुए नूंह के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया ने कहा है, “ज़िले में स्थिति नियंत्रण में है और जगह-जगह पुलिस बल तैनात हैं. क़ानून व्यवस्था के मद्देनज़र हम किसी को भी कोई बैठक करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं.”

वहीं पलवल के पुलिस अधीक्षक का भी कहना है कि उन्होंने पंचायत के लिए अनुमति नहीं दी है.

उन्होंने कहा कि पुलिस ज़िले के सुरक्षा हालात का आंकलन कर रही है और ये सुनिश्चित कर रही है कि सुरक्षा को कोई ख़तरा ना हो.

बजरंग दल से जुड़े कुलभूषण भारद्वाज ने अख़बार से बात करते हुए कहा कि आसपास के 50 ज़िलों से बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को पंचायत में आमंत्रित किया गया है. इनमें हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के ज़िले शामिल हैं.

भारद्वाज का कहना है कि इस पंचायत में पंद्रह हज़ार तक लोग शामिल हो सकते हैं.

मोदी-जिनपिंग के आमने-सामने आने से पहले भारत-चीन की सैन्य वार्ता

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव को कम करने के प्रयासों के तहत सोमवार को 19वीं सैन्य वार्ता करेंगे. भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में चार साल से सैन्य तनाव चल रहा है.

लगभग एक सप्ताह बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दक्षिण अफ़्रीका में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. दोनों नेताओं के इस सम्मेलन में शामिल होने से पहले ये सैन्य वार्ता होने जा रही है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत की तरफ़ से इसमें 14वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राशिम बाली प्रतिनिधित्व करेंगे. इससे पहले 23 अप्रैल को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक से पहले पिछले दौर की वार्ता हुई थी.

अख़बार को अधिकारियों ने बताया है कि इस दौर की वार्ता में विश्वास बहाल करने के प्रयासों, सीमा के प्रोटोकॉल को लागू करने, झड़प से बचने के लिए गश्त दलों के बारे में जानकारी साझा करने और ज़मीन पर मौजूद दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच पर्याप्त संचार सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.

ख़ुफ़िया एजेंसियों को डर, लाल क़िले पर प्रदर्शन कर सकते हैं कूकी या मैतेई समूह

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले पर मणिपुर के समूहों के संभावित प्रदर्शन को लेकर चेतावनी दी है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा है कि इससे पहले भी समूह अपने मुद्दों की तरफ़ ध्यान खींचने के लिए ऐसा करते रहे हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस के दिन कूकी या मैतेई समूह लाल किले पर प्रदर्शन कर सकते हैं.

सरकार विरोधी तत्वों के नारेबाज़ी करने की आशंका भी ज़ाहिर की गई है.

हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय एजेंसियों की बैठक में स्वतंत्रता दिवस को लेकर सुरक्षा हालात पर चर्चा की गई.

स्वतंत्रता दिवस भारत में होने जा रहे जी-20 शिखर सम्मेलन से क़रीब एक महीना पहले है.

ऐसे में ये आशंका भी है कि अगर स्वतंत्रता दिवस पर कोई घटना होती है तो वो दुनिया का ध्यान खींच सकती है और भारत की छवि पर नकारात्मक असर डाल सकती है.

मुझसे लोकसभा में ना बोलने के लिए कहा गया- मणिपुर के सांसद

नगा पिपुल्स फ्रंट के सांसद लोरहो एस फोज़े का कहना है कि उन्होंने लोकसभा में अध्यक्ष से बोलने का आग्रह इसलिए नहीं किया क्योंकि वो जानते थे कि अगर वो ऐसा करते तब भी उन्हें अनुमति नहीं मिलती.

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ आउटर मणिपुर से सांसद लोरहो एस फोज़े का कहना है कि वो अविश्वास प्रस्ताव के दौरान लोकसभा में मणिपुर पर बात करना चाहते थे लेकिन उनके दोस्तों और एनपीएफ़ की गठबंधन सहयोगी बीजेपी के साथियों ने उनसे इस मुद्दे पर बात ना रखने के लिए कहा था.

मणिपुर में हिंसाग्रस्त इलाक़ा उनके संसदीय क्षेत्र में भी आता है. अख़बार से बात करते हुए एनपीएफ़ के सांसद ने कहा कि वो अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों और भारत के लोगों को बताना चाहते थे कि इस हिंसा को रोका जा सकता था और सरकार हालात को सामान्य करने के लिए गंभीर है.

उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा प्रभावित कूकी-ज़ो समुदाय के लोग उनके संसदीय क्षेत्र में रहते हैं. इसके अलावा उनके क्षेत्र में तीन और ज़िले भी हैं जहां मैतेई आबादी रहती है.

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