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'ट्विटर' को उबारने के लिए चीन की ओर क्यों देख रहे हैं एलन मस्क
- Author, पीटर हॉसकिन्स और फान वेंग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस सप्ताह एलन मस्क ने ट्विटर को एक्स (X) नाम से री-ब्रांड किया. इसे चीनी मेगा ऐप वीचैट की राह की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा.
मस्क ने कहा था कि वो अपनी सोशल मीडिया कंपनी को एक बड़े प्लेटफॉर्म में बदलना चाहते हैं.
उन्होंने पिछले साल ट्विटर (जो अब एक्स है) को 44 अरब डॉलर में खरीदा था.
मस्क वीचैट के प्रशंसक रहे हैं. वो ‘एवरीथिंग ऐप’ वीचैट की तारीफ कर चुके हैं. ‘वी-चैट’ ऐप एक ही प्लेटफॉर्म पर चैट, डेटिंग, पेमेंट और सोशल मीडिया की सुविधा देता है.
उन्होंने कहा था कि वो ट्विटर को भी वीचैट जैसा बनाना चाहते हैं. ये काफी बड़ी सफलता होगी.
इस सप्ताह एक्स पर लिखे एक पोस्ट में मस्क ने कहा कि आने वाले महीनों में वो इस प्लेटफॉर्म में ऐसे फीचर जोड़ेंगे. इनसे यूज़र अपने सभी फाइनैंशियल ट्रांजेक्शन कर पाएगा.
मस्क को उम्मीद है कि इससे एक्स के रेवेन्यू में काफी इजाफा होगा और कंपनी की आर्थिक स्थिति सुधरेगी.
मस्क की ओर से खरीदे जाने के बाद से एक्स (पहले ट्विटर) की विज्ञापन की कमाई घट कर आधी रह गई है. एक्स भारी-भरकम कर्ज से लदा है और उसकी अदायगी नहीं हो पा रही है.
वीचैट को दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनी टेन्सेंट ने 2011 में लॉन्च किया था.
चीन की 1.40 अरब की आबादी में लगभग हर कोई इस ऐप का इस्तेमाल करता है.
इसे सुपर-ऐप कहना इसको कम करके आंकना है.
चीन का एवरीथिंग ऐप जिससे प्रेरणा ले रहे हैं मस्क
वी-चैट एक साथ मैसेजिंग, वॉयस-वीडियो कॉल, सोशल मीडिया, फूड डिलीवरी, मोबाइल पेमेंट, गेम्स , न्यूज़ और डेटिंग सर्विस तक देता है.
ये एक ऐसा ऐप है जिसमें मानो व्हॉट्सऐप, फेसबुक, ऐपल पे, अमेजन, टिंडर सब एक साथ डाल दिया गया हो.
वी-चैट चीनी समाज में इस हद तक समा गया है कि इसके बिना वहां जिंदगी की कल्पना मुश्किल लगती है.
यहां इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि इसके अलग-अलग हिस्सों के इंटरफेस कितने खास हैं.
‘वी-चैट’ व्हॉट्सऐप या आईमैसेज प्लेटफॉर्म की तरह शुरू हुआ था.
इसके सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले फीचर हैं ‘’चैट्स’’ और ‘’मोमेंट्स’’.
चैट्स व्हॉट्सऐप की तरह चैटिंग प्लेटफॉर्म है जबकि ‘मोमेंट्स’ फेसबुक की तरह काम करता है.
वी-चैट के वॉलेट फीचर का खूब इस्तेमाल होता है. इसे डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लिंक किया जा सकता है. चीन में ज्यादातर दुकानें और ऑनलाइन रिटेलर्स ‘वी चैट’ से पेमेंट ले लेते हैं.
यूजर्स क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर इस ऐप के जरिये पेमेंट कर सकते हैं. लोग इससे घरेलू बिल जमा करने में इस्तेमाल करते हैं. वी चैट के जरिये लोन भी लिया जा सकता है और निवेश भी किया जा सकता है.
वी-चैट पर सरकारी सुविधाएं भी मौजूद हैं. यूज़र सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां हासिल करने के साथ ही टिकट बुक कराने और अस्पताल के अप्वॉयंटमेंट भी इससे ले सकते हैं.
कोविड महामारी के दौरान जब चीन में जीरो-कोविड प्रतिबंध लगे तो मानो ये लोगों के लिए अनिवार्य बन गया. इस ऐप के जरिये जेनरेट होने वाले हेल्थ कोड के बगैर आप कहीं बाहर नहीं निकल सकते थे.
लेकिन एक साथ इस ऐप में इतने सारे फीचर होने के कई नुकसान भी हैं.
इतने सारे फीचर होने की वजह से ये फोन की मेमोरी का बड़ा हिस्सा ले लेता है. ये डेटा स्टोरेज के कई गीगावाट्स की जगह ले लेता है.
वीचैट और सेंसर का संकट
चीन में लोगों की ज़िंदगी के हर हिस्से में वीचैट की मौजूदगी ने सरकार की ओर लागू की जाने वाली सेंसरशिप की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं. इससे सरकार की निगरानी और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं.
चीन ने कई विदेशी वेबसाइटों की एक्सेस ब्लॉक कर रखी है. बीबीसी जैसी न्यूज़ वेबसाइट से लेकर फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी प्रतिबंध है.
मस्क एक्स को वीचैट बनाना चाहते हैं. लेकिन विडंबना ये है कि एक्स (ट्विटर ) भी यहां प्रतिबंधित है.
इंटरनेट पर सरकार का इस हद तक नियंत्रण उन लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है जो वी-चैट पर उसके खिलाफ बोलते हैं.
इसलिए सरकार से असहमति रखने वालों के अकाउंट कई दिनों और हफ्तों के लिए बंद हो जाना आम बात है. ‘’चैट’’ या ‘’मोमेंट्स’’ पर सरकार के ख़िलाफ़ कुछ लिखने या बोलने से ऐसा हो सकता है.
यहां तक कि लोगों की ओर से विवादास्पद न दिखने वाली जानकारियां शेयर करना भी सरकारी सेंसर की ज़द में आने का खतरा बना रहता है.
अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल चाइना हब में असिस्टेंट डायरेक्टर किश लियाओ का कहना है कि वीचैट जैसे सुपर-ऐप लोगों के जिंदगी पर नियंत्रण रखने के सरकार के मकसद को साधने में मददगार हैं.
वो कहते हैं, ‘’एक तरह से ये राजनीतिक जोखिम से खुद को बचाने का सरकार का तरीका है. यानी एक ऐसा तरीका है जिससे सरकार और अंतत: चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सत्ता को चुनौती न मिल सके.’’
क्या पश्चिमी देशों में कामयाब होगा?
हॉन्गकॉन्ग की चाइनीज यूनिवर्सिटी की कचेंग फांग बीबीसी से कहते हैं कि चीन में वी-चैट की कामयाबी में दो चीजों का हाथ है.
वो कहते हैं कि चीन में ज्यादातर लोग वी -चैट को डेस्कटॉप कम्प्यूटरों की तुलना में स्मार्टफोन पर एक्सेस करते हैं.
वह कहते हैं, "दरअसल वो ओपन वेब के बदले ऐप्स के वॉल गार्डन में रहते हैं. कंप्यूटरों की तुलना में स्मार्टफोन में एवरीथिंग बनाना ज्यादा आसान होता है.’’
फांग कहते हैं कि चीन में प्रतिस्पर्धा से जुड़े नियमन कमज़ोर हैं. जबकि पश्चिमी देशों में ऐसा नहीं है. चीन में इन नियमों के कमजोर होने की वजह से ‘वी-चैट’ के लिए शॉपिंग प्लेटफॉर्म ताओबाओ और वीडियो ऐप डूयूइन जैसे प्रतिद्वंद्वी प्लेफॉर्म्स को ब्लॉक करना आसान है.
क्या मस्क चीन के बाहर काम करने वाला ऐसा ही ऐप बना सकते हैं? इसका पता तो आने वाले दिनों में चलेगा. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है ये सब डिजिटल पेमेंट्स पर निर्भर करेगा.
पॉलिसी रिसर्च फर्म ट्रिवियम चाइना की केंड्रा शैफर का कहना है कि चीन में वी-चैट को सफल बनाने वाली अहम चीजों की पहचान मस्क ने कर ली है.
‘’उन्होंने उन चीजों को समझ लिया है जिनकी वजह से चीन के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में वी चैट बेहद अहम बन गया है. खासकर इसके सोशल मीडिया और डिजिटल पेमेंट्स का पहलू इसे अहम बनाता है.’’
वो कहती हैं कि ये चीजें मस्क के लिए वीचैट जैसा सुपर ऐप बनाने का नुस्खा साबित हो सकती हैं.
इनवेस्टमेंट फर्म रेस कैपिटल की एडिथ येअंग कहती हैं कि चीन और पश्चिमी देशों की ओर से अपनाई गई डिजिटल पेमेंट्स टेक्नोलॉजी में काफी अंतर है.
चीन में ज्यादातर मर्चेंट कैश या क्रेडिट कार्ड नहीं लेते. ये अंतर मस्क की महत्वाकांक्षा के लिए बाधा बन सकता है.
वो कहती हैं, "पश्चिमी देशों को अभी कैश और क्रेडिट कार्ड फ्री सोसाइटी बनने में काफी देर लग सकती है.’’
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