लुप्तप्राय गैंडों का बसेरा है पटना का चिड़ियाघर

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- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, बीबीसी हिंदीडॉटकॉम के लिए
पटना का संजय गांधी जैविक उद्यान लुप्तप्राय जानवरों की श्रेणी में शामिल एक सींग वाले गैंडों का बसेरा बना हुआ है. यहां ऐसे दस गैंडे हैं.
चिड़ियाघर के निदेशक नंद किशोर के मुताबिक़ अमरीका के कैलिफोर्निया स्थित सैन डिएगो चिड़ियाघर में इस प्रजाति के सबसे अधिक ग्यारह गैंडे हैं.

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पटना के चिड़ियाघर में मौजूद दस में से पांच नर और पांच मादा गैंडे हैं. इनमें से दो अभी शावक हैं. पिछले साल यहां एक गैंडे की मौत एंथ्रेक्स से हो गई थी.
इस चिड़ियाघर में भारतीय गैंडों के अलावा गैंडों की दूसरी प्रजातियां भी मौजूद हैं.

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पटना चिड़ियाघर में मई 1979 में एक जोड़ा गैंडा लाया गया था और अगस्त 1988 में यहां पहले गैंडे हड़ताली का जन्म हुआ था.
मादा गैंडे हड़ताली ने 2012 तक कुल आठ बच्चों को जन्म दिया है, हड़ताली अभी भी जैविक उद्यान का हिस्सा है.

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साल 2007 में ''नस्ल सुधार" को बढ़ावा देने वाले 'एक्सचेंज प्रोग्राम' के तहत सैन डिएगो चिड़ियाघर से एक मादा गैंडा गैरी पटना जू लाई गई थी. साल 2009 में गैरी ने एक नर गैंडे एलेक्शन को जन्म दिया. ये दोनों भी अभी जू का हिस्सा हैं.

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ज़ू के पास अब गैंडों की 'चार ब्लड लाइन' मौजूद है. ज़ू के मुताबिक़ ऐसा शायद ही किसी दूसरे चिड़ियाघर में उपलब्ध हो. ज़ू प्रशासन की योजना आने वाले दिनों में यहां पर गैंडों का 'कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर' शुरु करने की है.

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22 सितंबर को विश्व गैंडा दिवस मनाया जाता है. इस मौक़े पर पटना ज़ू में भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.

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