क्यों अलग है भारत मेरे लिए
भारत हमेशा से ही मेरे लिए अलग रहा है और जब भी मैं भारत आया हूँ हर बार नए अनुभव देखने का अवसर मिला है. मैं करीब एक हफ्ते के लिए विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में हूँ और दो अनुभव आप मित्रों से बाँटना चाहता हूँ.
मुझे लगता है कि आपको इस पर कोई खास अचरज नहीं होगा और शायद आपको यह बातें छोटी सी लगें लेकिन सच मानिए मेरे लिए बहुत बड़ा अचरज है.
मैं वाघा सीमा पार कर लाहौर से अमतृसर पहुँचा और वहाँ से टैक्सी ले कर दिल्ली के लिए रवाना हुआ.
जब हम जालंधर पहुँचे तो देखा कि टोल प्लाजा की जिस लाइन में हम खड़े हुए थे वहाँ ट्रैफिक जाम हो गया था और एक निजी कार जिस पर नीली बत्ती लगी हुई थी, वह टोल प्लाजा के काउंटर पर मौजूद लड़के से बहस कर रहा था.
करीब 20 मिनटों की बहस और टोल प्लाजा प्रसाशन के लोगों के हस्तक्षेप के बाद जब हम काउंटर पर पहुँचे और मैंने काउंटर वाले लड़के से पंजाबी में पूछा कि भाई साहब क्या हुआ? वह क्यों बहस कर रहा था? तो कहने लगा कि वह हमको टोल टैक्स नहीं दे रहा था और कहा रहा था कि वह सेना में है और हमने कहा कि आप चाहें कहीं भी होंगे लेकिन टैक्स तो देना पड़ेगा. उनके मुताबिक उन्होंने 50 रुपय का टैक्स कार वाले से लिया गया.
भारत में इस तरह की घटनाएँ कहीं न कहीं होती होंगी और लोगों का पता भी होगा और उन के लिए कोई नई बात नहीं है लेकिन मेरे लिए सच में यह बहुत बड़ी बात है क्योंकि मैं उस देश का नागरिक हूँ जहाँ सेना ही सब कुछ है. इस्लामाबाद से लेकर कराची तक करीब 1200 किलोमीटर की यात्रा करने वाले व्यक्ति को कई बार टोल टैक्स देना पड़ता है लेकिन सेना के किसी अधिकारी या जवान से कोई टैक्स नहीं लिया जाता है.
पाकिस्तान में जो टैक्स देता है उसको बिल्कुल सुविधा नहीं मिलती बल्कि जो टैक्स नहीं देता है, उसको तमाम सुविधाएँ मिलती हैं. दूसरी बात जिसने मुझे हैरान किया, वह यह है कि भारत में टैक्सी चलाने के लिए परमिट होता और टैक्सी वाले को निजी गाड़ियों की तुलना में अधिक टैक्स देना पड़ता है.
पाकिस्तान में ऐसा संविधान में है लेकिन उस पर कोई अमल नहीं करता है. जिस गाड़ी में दिल्ली पहुँचा उसकी नंबर प्लेट निजी थी और मैंने पूछा कि ऐसा क्यों है तो ड्राइवर मनप्रीत सिंह ने बताया कि कमर्शियल नंबर के लिए अधिक टैक्स देना पड़ता है.
ब्रिटेन और यूरोप में निश्चित रुप से ऐसा होता होगा और नियमों का पालन करना पड़ता होगा लेकिन उस पर हम लोगों को अचरज नहीं होता है क्योंकि वह लोग हम पाकिस्तानियों से बहुत अलग हैं. भारत और भारतीयों को देख कर हमको अचरज इसलिए होता है कि यह देश बिल्कुल हमारे देश जैसा है और यहाँ के लोग बिल्कुल हमारे लोगों जैसे हैं. लेकिन कुछ मामलों में भारत पाकिस्तान से अलग क्यों हैं? इसके कारणों पर आप प्रकाश डाल सकते हैं.

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हफीज साहब, नमस्कार. आपने अपने और हमारे मुल्क की तुलना की बहुत ही नेक तस्वीर पेश की है. लोकतांत्रिक तरीके से चलनेवाले देश और सेना के प्रभाव वाले देश में बहुत फर्क होता है भाई.
हफीज भाई बहुत अच्छा लगा आपका ब्लॉग पढ़ कर. इसलिए नहीं कि इसमें हमारे देश की तारीफ़ है, इसलिए कि आपने इस देश को ऐसे चश्मे से देखा कि वह अच्छा दिखा. धन्यवाद और बधाई.
आप कहना क्या चाहते हैं ये समझ में नहीं आया. थोड़ा विस्तार से लिखते तो बेहतर होता.
हफीज भाई, आपका यह कहना तो सही है कि भारत और पाकिस्तान की एक जैसी भौगोलिक संरचना और एक जैसे लोग होने के बाद भी दोनों देश कुछ मामलों में एक-दूसरे से अलग हैं. पर बात यहीं तक रखें, ये ना सोचें कि अलग होना मतलब बेहतर होना है. जिस टोल वाले वाकये का आपने ज़िक्र किया उसमें आप सेना कि जगह नेता को रख दें . फिर दोनों मुल्कों में आपको कोई फर्क नहीं दिखेगा. आपके यहाँ सेना शक्तिशाली है और हमारे यहाँ नेता. और जहाँ तक दूसरे वाकये की बात है, तो आपने खुद ही देख लिया कि हम हिन्दुस्तानी नियमों को तोड़ने के लिए क्या करते हैं. नियम दोनों मुल्कों में तोड़े जाते हैं, बस तरीकों का फर्क है - हम उसी काम को छुपाकर करते हैं.
भारत वाकई महान है.
हफीज साहब, बहुत अच्छा ब्लॉग लिखा है आपने.
हफीज चाचड़ साहब आपका ब्लॉग पढ़कर अच्छा लगा.
आप दिल्ली से इतर थोड़ा दक्षिण भारत का भी रुख करें तो पाएंगे कि नियमों का पालन दिल्ली, चंडीगढ़ से भी ज्यादा अच्छी तरह हो रहा है.
हफीज भाई, बेवजह परेशान होने से क्या फायदा. जरा विराट दृष्टि से सोच के देखिए भारत और पाकिस्तान दोनों एक ही मां के बेटे हैं. दोनों ही देशों में कमोबेश ये समस्या मौजूद है.
आपने सिर्फ एक घटना देखी और पूरा रिजल्ट निकाल लिया, सैनिक लोग चलती ट्रेनों में से इंसानों को बाहर फ़ेंक देते हैं और जी आर पी या सिविल पुलिस भी सेना का कुछ नहीं कर सकती और पुलिस के बारे में क्या कहना ?
कुछ दिन रह कर अच्छी तरह से देख लीजिये आपकी गलतफहमी दूर हो जायेगी.
बहुत प्रभावशाली और साफ सुथरी तुलना है पाकिस्तान से.
हफीज साहब, भारत एक महासमुद्र है. कभी दिल्ली से आगे भी आइए.
आपके अनुसार टोल नाके पर जो हुआ वो वहाँ नहीं होता. मेरा मानना है कि ये दोनों ही जगहों पर कमोबेश होता है. व्यवस्था-पालन के प्रति दोनों ओर की मानसिकताओं में बहुत अन्तर नहीं हैं. अन्तर जनसंख्या और सांस्कृतिक सोच के अनुपात में ही है. बाकी तो दोनों तरफ एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं.
हफीज जी ब्लॉग लिखने के लिए धन्यवाद. ये जरूर है कि सेना के लोग कई बार अपनी सीमाएं लांघ जाते हैं. लेकिन ये सिर्फ सेना की समस्या नहीं है. एक बार मैं पटना जा रहा था. रास्ते में टैक्स मांगा गया तो ड्राइवर ने मुझसे कहा कि कह दो प्रेस की गाड़ी है.
पाकिस्तान में कोई लोकतांत्रिक परंपरा नहीं है. भारत में लोकतांत्रिक संस्थाओं का अच्छा विकास हुआ है. छह दशकों में कई अच्छे बदलाव हुए हैं. भारत और पाकिस्तान में यही मूल अंतर है. पाकिस्तान में कोशिश ये होनी चाहिए कि सेना सत्ता पर काबिज न हो जाए.
हाफिज़ जी अच्छा लगा अपने देश की कमियों को जानकर. ..
हफीज साहब सबसे पहले आपको ये सोचना है कि किस बात पर भारत और पाकिस्तान अलग है.दोनों देशों में भ्रष्टाचार है लेकिन आय में फर्क है साथ ही फौज की भी ऐसी ही स्थिति है इसलिए आप ये तुलना न करे.
हाफिज़ सर पहली बार आपका ब्लॉग पढ़ा,काफ़ी अच्छा लगा. आपने कहा टैक्स देनेवालों को पकिस्तान में कोई सुविधा नहीं मिलती, पर ज़नाब हमारे देश में कहां टैक्स का फ़ायदा मिलता है. आपने कहा वहां संविधान का कोई पालन नहीं करता..हमारे यहां संविधान को सर्वोपरी माना तो जाता है लेकिन कहां तक पालन किया जाता है यह विचार करने योग्य है. प्रत्येक संविधान की धारा का हर बार कोई न कोई तोड़ निकाल लिया जाता उस पर चर्चा होती है और फिर उसमें सुधार कर दिया जाता है...लूट आपके देश में भी है और लूट हमारे देश में भी लेकिन जहां तक प्रजातंत्र की बात है तो वह आजतक जीवित है और हालांकि प्रजातंत्र का गला घोटने की कोशिश कई बार हुई लेकिन यहां लोकतंत्र की जड़ें यहां काफ़ी मजबूत है...धन्यवाद.
भारत पाकिस्तान में कई समानता है तो कई बाते बहुत अलग भी है. भारत में लोकतंत्र है या पाकिस्तान में भी कभी-कभी रहता है या कभी दम तोड़ देता है.पाकिस्तान में सेना सर्वोपरी है इसलिए उसे सभी छूट ताकत के बल पर ही मिली हुई है.भारत में राजनीतिक पार्टियां चुनाव जीत कर अपनी मन मर्जी चला रही है .
हफीज भाई , ब्लॉग आपका पढ़ा .बहुत अच्छा लगा.आपने भारत पाकिस्तान की तुलना की और कह रहें है कि भारत अलग है .मेरे हिसाब से तो सब कुछ एक सा ही है .
खाना पीना, उठाना, बैठना ,सोना गाना, सब कुछ एक जैसा है. मुझे आपका पाकिस्तान देखने कि बड़ी इच्छा है क्योंकि आज भी मन यही मानता है कि वहां हमारे पुरखे बसा करते थे
सेना के फर्क को हटा दिया जाए तो मुझे नहीं लगता है कि कोई बड़ा फर्क है. बड़े लोगों को सब मिलता है आम आदमी सब सहता है . गरीब भुखा मरता है और अमीरों के यहाँ से दूध घी रिसता है.
हफीज़ भाई हम दोनों ही बेईमान कौम हैं. ईमानदारी तो बस कुछ थोड़े से लोगों का ही आभूषण हैं. हम अपनी लड़कियाँ कोख में मार रहे हैं और आप अपने अल्पसंख्यों को मस्जिदों में मार रहे हैं. दोनों देशों के राजनीतिज्ञ भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हुए हैं. स्त्रियों की स्थिति कमोबेश एक जैसी है. पुलिस भी लगभग एक जैसी है, गरीबी भी दोनों तरफ है, अव्यवस्था का आलम दोनों ही तरफ है. किन्तु एक फर्क बड़ा नज़र आता है और वो है कि हमारा बहुजातीय और बहुधर्मीय समाज आपसे ज्यादा तेज़ी से आर्थिक तरक्की की ओर अग्रसर है. और हाँ, भारत की विदेश नीति ज्यादा स्पष्ट और सही दिशा में चलती दिखती है.
भारतीय राजनेता पाकिस्तानी नेताओं से कम भ्रष्ट हैं.
जनाब हफ़ीज़ साहब, आप वीना मलिक की तरह अपने मुल्क पर फिज़ूल में कीचड़ उछाल रहे हैं। भारत व पाकिस्तान में उन्नीस-बीस का ही फर्क है.
हफीज भाई , किसी भी देश का सही अंदाज़ा तीन चीज़ों से लगाया जा सकता है. ट्रैफिक सेन्स, सिविक सेन्स, और कॉमन सेन्स. न यह भारत में है और न पाकिस्तान में.
भारत और पाकिस्तान की तुलना हो ही नहीं सकती.
हफ़ीज़ साहब, मैं सिर्फ़ इतना ही कहना चाहूँगा की आप के दोनों उदाहरण भ्रष्टाचार के हैं और पाकिस्तान मे भ्रष्टाचार कम नही है. इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नही है.
आपका अवलोकन शायद लोकतंत्र की ताकत की ओर था. और यह सही भी है. घटना छोटी अवश्य है लेकिन सन्देश दूर तक था. लेख के लिए बधाई.
दोनों ही देशों के बारे में अच्छा और पक्षपात रहित लेख. आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा.
हफ़ीज़ जी, हम भारतीय आपको पाकिस्तान में किए जा रहे आपके शानदार काम के लिए आपको सलाम करते हैं.
विश्वास रखिए, आपके यहाँ भी जनता और क़ानून सबसे ऊपर होगी क्योंकि वहाँ आप जैसे लोग जो हैं.
बहुत अच्छा ब्लॉग हफ़ीज़ भाई.
अगर आज भारत और पाकिस्तान में भ्रष्टाचार नहीं होता तो हम सोने की चिड़िया कहे जाते.
agar hum 1947 ko bhool jate hai to hindustan aur pakistan ek jaise hi hai
agar ham 1947 ko yaad rakhte hai tab bhi hum jyada alag nahi hain.
hamara itihas ek hai
hamara bhogol bhi ek he hai
hamare festivals bhi ek jaise hain
hamara pahnava bhi ek sa hai
hamari boli bhi ek hai
agar farak hai to sirf border ka
agar border kee line hata den to ham ek hi mulk hain
हाफ़िज़ भाई, आपने सिर्फ़ लिखने के लिए लिखा है ये लेख. ज़रा पूरा भारत घूमिए, ख़ासकर यूपी, बिहार, तब आपको पता चलेगा.
मेरा भारत महान !
बिल्कुल सही लिखा हफ़ीज़ भाई. सही पहचाना आपने भारत और पाकिस्तान के बीच के अंतर को ...
भ्रष्टाचार भारत में भी है, परन्तु पाकिस्तान से शायद कम. भारत में कानून व्यवस्था ठीक है इसका एक कारण ये भी है कि भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है परन्तु पाकिस्तान नहीं.