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अजी सुनती हो !

वुसतुल्लाह ख़ानवुसतुल्लाह ख़ान|शनिवार, 26 नवम्बर 2011, 20:57 IST


पाकिस्तान 13 अगस्त 1947 तक अफ़ग़ानिस्तान, चीन या ईरान का हिस्सा नहीं बना था बल्कि हिंदुस्तान का हिस्सा था. सिवाय काबुल दरिया के पाकिस्तान में सब नदियां हिंदुस्तान से दाख़िल होती हैं.

पाकिस्तान की सबसे लंबी सीमा चीन, अफ़ग़ानिस्तान या ईरान के साथ नहीं बल्कि भारत से मिलती हैं.

पाकिस्तानी नागरिक ईरान, चीन और अफ़ग़ानिस्तान भी जाते हैं लेकिन सबसे ज़्यादा भारत जाते हैं. हांलाकि पाकिस्तान में फ़ारसी, पश्तो और चीनी बोली जाती है लेकिन सबसे ज़्यादा उर्दू बोली जाती है जो ईरान, अफ़ग़ानिस्तान या चीन में नहीं बल्कि हिंदुस्तान में पैदा हुई.

चीन, ईरान या अफ़ग़ानिस्तान से पाकिस्तान की कभी जंग नहीं हुई लेकिन भारत से चार बड़ी जंगें और सैकड़ों छोटी-मोटी झड़पें हो चुकीं हैं.

पाकिस्तान के सिनेमाओं में अफ़ग़ान, चीनी या ईरानी फ़िल्में नहीं दिखाई जातीं बल्कि भारतीय फ़िल्में दिखाई जाती हैं.

पाकिस्तान के टीवी दर्शक सबसे ज्यादा जो ग़ैर-मुल्की चैनल देखतें हैं उनमें हिंदुस्तानी चैनल सबसे आगे हैं.

पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसियां चीन, ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से आने-जाने वालों पर उतनी कड़ी नज़र नहीं रखतीं जितनी भारत आने-जाने वालों या भारत से आने-जाने वालों पर रखती हैं.

यही काम भारतीय एजेंसियां भी करती हैं.

पाकिस्तानी चीनी, अफ़ग़ानी और ईरानी खाना भी पसंद करते हैं लेकिन उनके किचन में रोज़ाना जो कुछ पकता है वो उत्तरी भारत के किसी भी घर के किचन मे पकता है.

पाकिस्तान में शायद ही कोई अफ़ग़ानी, चीनी या ईरानी शायर और अदीब इतना मशहूर हो जितने हिंदुस्तानी शायर या अदीब मशहूर हैं.

हर पाकिस्तानी बच्चा शाहरूख़ ख़ान, सलमान ख़ान, सचिन तेंदुल्कर और मनमोहन सिंह को जानता है.

लेकिन बहुत कम पाकिस्तानी बच्चे अफ़ग़ानिस्तान, चीन और ईरान के शीर्ष अदाकारों या खिलाड़ी या नेताओं के बारे में जानते हैं.

पाकिस्तानी एफ़एम चैनल पर बॉलीवुड संगीत चलता है. राहत फ़तह अली ख़ान और आतिफ़ असलम के बारे में ये बताना मुश्किल है कि वो भारत के ज़्यादा हैं या पाकिस्तान के.

इन सबके बावजूद पाकिस्तानी राजनेता, कमेंटेटर, टीवी ऐंकर, फ़नकार जब भी कोई लेख लिखते हैं, कोई बात करते हैं तो अफ़ग़ानिस्तान को अफ़ग़ानिस्तान, ईरान को ईरान, चीन को चीन कहते हैं लेकिन भारत को भारत, इंडिया या हिंदुस्तान नहीं कहते, पड़ोसी मुल्क कहते हैं.

जैसे पारंपरिक पत्नियां और पति एक दूसरे का नाम नहीं लेते, मुन्ने के अब्बा और अजी सुनती हो कह कर गुज़ारा करते हैं.

ऐसा भला क्यों है, क्या भारत में भी पाकिस्तान को पाकिस्तान कहा जाता है या पड़ोसी मुल्क़ कह कर काम चलाया जाता है?

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 21:49 IST, 26 नवम्बर 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    वाह खान साहब.मेरा दावा है आप कितना भी लिखे हक़ीकत यही है कि दोनों देशों की जनता का मन दिल से साफ़ नहीं है और उसी का फ़ायदा दोनों देशों के नेता उठा रहे हैं.

  • 2. 22:03 IST, 26 नवम्बर 2011 Sandeep:

    मैंने अक्सर देखा है कि पाकिस्तान हमेशा भारत से अपने रिश्ते को असुरक्षा की दृष्टि से देखता है.जबकि ऐसा नहीं है.भारत पाकिस्तान से बहुत प्यार करता है.मैंने जब भी इतिहास पढ़ा है है मुझे वहाँ के पुराने शहरों और राज्यों के बारे में अलग करके नहीं पढ़ाया गया जिससे मुझे इतनी सीख ज़रुर मिली है कि हमारे संबंध पुराने है और हम उन्हें चाह कर भी नहीं तोड़ सकते.

  • 3. 22:50 IST, 26 नवम्बर 2011 tanweer:

    शायद उनकी सभी नस्लों को हिदुस्तान से अलग हो जाने का पछतावा है.

  • 4. 09:05 IST, 27 नवम्बर 2011 सौरभ:

    क्या आर्टिकल है सर. हाल वही है जब एक ही मां के दो बेटे घर का बंटवारा कर अलग हो जाते हैं. दिल के कहने के बावजूद एक दूसरे से लड़ते हैं, एक दूसरे में अपना दुश्मन ढूंढते हैं, ग़ैरों से नज़दीकियां बढ़ाते हैं, बार-बार लड़ने (या बात करने) का बहाना ढूंढते हैं, गालियां देते हैं, कहते हैं कि एक दूसरे का चेहरा देखना पसंद नहीं, अपने-अपने चहेतों को घाव गहरा करने का मौक़ा देते हैं, पता नहीं क्या-क्या करते हैं पर दूर नहीं हो पाते. दूरियां अभी भी हैं और कम होनी चाहिए. ख़ासकर तब जबकि ये लकीर दूसरों की खींची हुई है और हम इसे मिटाने की हिम्मत नहीं कर पाते.

  • 5. 10:36 IST, 27 नवम्बर 2011 Aditya:

    जब दो भाई झगड़ा करके अलग हो जाते हैं तो दोनों को एक दूसरे के बारे में जानने की बड़ी उत्सुकता होती है पर वो इसे ज़ाहिर नहीं होने देते. शायद इसी उत्सुकता को छिपाने का एक तरीक़ा ये हो सकता है कि वे नाम लिए बग़ैर एक दूसरे को 'पड़ोसी देश' कह कर पुकारते हैं.

  • 6. 11:48 IST, 27 नवम्बर 2011 anjani kumar:

    ख़ान साहब, पाकिस्तान सरकार और सेना जानती है कि जबतक भारत से दुश्मनी है तभी तक पाकिस्तानी एकजुट हैं. जिस दिन ये दुश्मनी दोस्ती में बदल जाएगी उसी दिन पाकिस्तान कई हिस्सों में टूट जाएगा.

  • 7. 13:13 IST, 27 नवम्बर 2011 Gaurav Singhal:

    आपका ये लेख बहुत अच्छा है.

  • 8. 13:28 IST, 27 नवम्बर 2011 junaid Rizwee:

    सब कुछ एक जैसा ही है क्योंकि पाकिस्तान कहीं विलायत से नहीं आया है. ये तो आख़िर हिन्दुस्तान का ही हिस्सा रहा है. ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि सब कुछ एक जैसा ही होगा.

  • 9. 18:57 IST, 27 नवम्बर 2011 naran gojia rajkot-gujarat:

    बहुत सटीक और सुंदर लिखा साहब. दो भाई अलग हो सकते है पर अपनी मां (संस्कृति) को कभी नहीं बांट सकते. कुछ और कहने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है.

  • 10. 20:07 IST, 27 नवम्बर 2011 नितिन श्रीवास्तव :

    ए मामू रुलाएगा क्या?

  • 11. 00:17 IST, 28 नवम्बर 2011 Chaand Hadiabadi:

    जिस क़ौम के हिफ़ाज़ती शस्त्रों के नाम बाबर, गौरी, गज़नवी,
    शाहीन, और तैमूर, हों. जिस पाक सर ज़मीन पर नफ़रतों की
    काश्त होती हो, जहां हिंदुस्तान को नेस्तनाबूत करना सबाब
    का काम हो वहां से ख़ैर सगाली की उम्मीद करना कैसे मुमकिन है

    चांद हदियाबादी

  • 12. 07:39 IST, 28 नवम्बर 2011 डा० उत्सव कुमार चतुर्वेदी, क्लीवलैंड, :

    जेनेवा, स्विट्ज़रलैंड की एक अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला में साथ काम करते हुए कभी हमारे पाकिस्तानी मित्रों ने कहा था: "कश्मीर लेकर रहेंगे". हम भारतीय वैज्ञानिकों ने जवाब दिया - " कश्मीर तो क्या, खुले दिल से आओ और पूरा भारत ले जाओ. एक मुकम्मल हिंदुस्तान बनाने के लिए !" - क्या कभी ये सपना साकार हो पाएगा?

  • 13. 09:18 IST, 28 नवम्बर 2011 ashish yadav,hyderabad:

    दोनों देशों का इतिहास और संस्कृति एक ही रहे हैं. इतिहास ने जो ग़लतियां की हैं उसका ख़ामियाज़ा वर्तमान भुगत रहा है. हिन्दुस्तान और पाकिस्तान की आम जनता तो भाईचारा बढ़ाना चाहती है लेकिन सियासी लोग नफ़रत का बीज ही बोने की कोशिश में लगे हैं. जिस जिन पाकिस्तान भारत के प्रति असुरक्षा की भावना मन से निकाल देगा उसी दिन सरहदों का फ़ासला मिट जाएगा.

  • 14. 11:15 IST, 28 नवम्बर 2011 Haris Khan:

    सही कहा आपने. दोनों देश हमेशा से एक ही हैं बस दिलों के बीच थोड़ी दूरी है जो एक न एक दिन एक हो ही जाएंगे.

  • 15. 11:30 IST, 28 नवम्बर 2011 wahid jamal:

    बंटवारे का दुख तो सभी को है. हमारी संस्कृति और समानता राजनीति की भेंट चढ़ गई.

  • 16. 20:15 IST, 28 नवम्बर 2011 harjinder:

    हम अमरीका और दूसरे लुटेरों के पीछे लग कर बेवजह बर्बाद हो रहे हैं. वहां नैटो मार रहा है और यहां एफ़डीआई. आख़िर तो एक होना ही पड़ेगा.

  • 17. 02:39 IST, 29 नवम्बर 2011 Rajesh Bhargava:

    इस प्रश्न का उत्तर पाकिस्तानी स्कूली किताबों में लिखा है. जहां हर विचार अथवा बीती बात को अहंकार की दृष्टि से सिखाया गया है. हिंदुओं को कमज़ोर और चालाक बताया गया है. उनसे दोस्ती में नुक़सान और दुश्मनी में ही फ़ायदा बताया गया है. अगर पाकिस्तान समाज को बदलना चाहता है तो इतिहास को नहीं सिलेबस को बदले.

  • 18. 08:41 IST, 29 नवम्बर 2011 gangat.h:

    ख़ान साहब आप हमें हमेशा सोचने पर मजबूर कर देते हैं.
    मजबूर ये हालात इधर भी हैं उधर भी
    तन्हाई की इक रात इधर भी है उधर भी
    कहने को बहुत कुछ है मगर किससे कहें हम.

  • 19. 11:19 IST, 29 नवम्बर 2011 anand:

    मैं आपकी लेखन शैली से बहुत प्रभावित हूं. वाक़ई शानदार लेख है. हां पाकिस्तान को भारत में भी इसी तरह संबोधित किया जाता है. दोनों ओर के कुछ लोगों की दुकान एक-दूसरे को गाली देकर चलती है. वे कभी नहीं चाहेंगे कि ये धंधा बंद हो.

  • 20. 15:32 IST, 29 नवम्बर 2011 BHEEMAL Dildarnagar:

    अर्ध सत्य लेखन है आपका. यानि कि मिला जुला सत्य-असत्य है. इतिहास में राजा महाराजा, नवाब लोग अपनी मूंछ ऊपर रखने के बहाने जनता को ख़ू बहाना सिखाते थे. हमारे चाचा और क़ायदे आज़म ने अपनी टोपी ऊंची दिखाने के लिए करोड़ों लोगों का रक्त बहाया और हम सब लोग टोपी के फेर में एक दूजे को पत्थर मारते हैं.

  • 21. 15:45 IST, 29 नवम्बर 2011 Abhishek Sharma:

    सर आपने बहुत अच्छा लिखा है, मन को छू लिया इस लेख ने. जहां तक मैं समझता हूं, बात दरअसल ये है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश के लोग आज तक बंटवारा नहीं भुला पाए हैं और अंग्रेजों ने जो "बांटो और राज करो" की नीति अपनाई, उसने हमें इतना अलग कर दिया कि आज भी हम मन ही मन एक-दूसरे को पसंद तो करते हैं पर उसे बोलने से डरते हैं. दोनों ही देश एक-दूसरे को ख़तरा मानते हैं और आग में घी डालते हैं दोनों ही देशों के कुछ नेता -
    रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाए,
    टूटे तो फिर ना जुड़े, जुड़े तो गाँठ पढ जाए
    मुझे लगता है कि हमारे बीच प्रेम का धागा सिर्फ़ टूटा नहीं है बल्कि छिन्न-भिन्न हो गया है.

  • 22. 18:53 IST, 29 नवम्बर 2011 samsen:

    वाह बहुत ख़ूब लिखा है आपने ख़ान साहब. सच में दिल के किसी कोने में हम आज भी दो बिछड़े हुए भाई हैं. पर कुछ स्वार्थी या कहें मतलबपरस्त लोग हैं जो नहीं चाहते कि कभी दोनों मुल्क़ों के बीच किसी भी तरह का सद्भाव या मित्रता पनपे. दोनों मुल्क़ों के ये सारे तथाकथित समाज सुधारक हैं और ख़ुद को देशभक्त कहते हैं.

  • 23. 02:32 IST, 30 नवम्बर 2011 Dinesh Singh, Chile:

    वाह वाह वाह. एक ज़बरदस्त लेख. क्या बात कही है आपने. काश हम अपने गिले शिकवे भूलकर फिर से एक हो सकते. एक दूसरे को नीचा दिखाना छोड़कर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते.
    अपने पाक दिल में झांक कर देख एक बार
    बिछड़कर हमसे न तू खुश न हम राज़ी.

  • 24. 05:43 IST, 30 नवम्बर 2011 Pradeep shukla:

    साफ़ लेखनी. जितना समझो उतना कम है.

  • 25. 15:15 IST, 30 नवम्बर 2011 abdul malik nohari:

    वाह वुसतुल्लाह ख़ान!

  • 26. 16:07 IST, 30 नवम्बर 2011 kabIr :

    हिन्दुस्तानी फिल्मों में पाकिस्तान को दुश्मन मुल्क के तौर पर दिखाया जाता है.

  • 27. 23:59 IST, 30 नवम्बर 2011 SUNIL KUMAR SINGH RENUKOOT, UP:

    बीबीसी और पश्चिमी देशो को भारत और पाकिस्तान को एक ही चश्मे से देखने की पुरानी बीमारी है . भारत की तुलना कभी भी पाकिस्तान से नहीं की जा सकती. भारत बहुत आगे जा चुका है जबकि पाकिस्तान की बुनियाद ही भारत विरोध पर टिकी हुई है. पाकिस्तान के विद्यलयों में आज भी भारत-विरोधी इतिहास पढाया जाता है. आज की तारीख में पाकिस्तान पूरी तरह से विफल राष्ट्र है और आतंकवादियो का सबसे सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है. पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली इकाई आईएसआई और सेना अतंकवादियो को प्रशिक्षण एवं धन मुहैया कराने में लगी हुई है.

  • 28. 15:41 IST, 01 दिसम्बर 2011 प्रशांत शर्मा, रायपुर छत्तीसगढ़ :

    ख़ान साहब वाह! क्या लेख लिखा है. हिंदुस्तान की सरज़मी को अंग्रेजों ने भले ही दो हिस्से में बांट दिया है लेकिन दोनों देशों के रगों में बहने वाला खून तो वही है.भले ही आज पाकिस्तान भटक गया है.लेकिन वो हिंदुस्तान को कभी भी अपने से अलग नहीं कर पाएगा. ये मैं नहीं सभी भारतीय कहते हैं.

  • 29. 20:05 IST, 01 दिसम्बर 2011 manoj bhatia:

    बहुत अच्छा लेख है.मेरी ये अपील है कि आप इस लेख को उर्दू की वेवसाइट पर भी डाले ताकि पाकिस्तान के लोग भी इसे पढ़ पाए.

  • 30. 10:50 IST, 02 दिसम्बर 2011 E.A. Khan, Jamshedpur:

    आपने बहुत ही सामयिक मुद्दा उठाया है. आपके इस ब्लॉग पर मैं सोच ही रहा था कि इसे यहाँ यानी जमशेदपुर के एक स्थानीय अख़बार ने भी छाप दिया तो मुझे यक़ीन हो गया कि लोग इस बात को गंभीरता से सोच रहे हैं कि यह बंटवारा वाकई गलत था. इसी संदर्भ में बहुत थोड़ा दिन पहले मैंने हिंदी की जानी-मानी पत्रिका ज्ञानोदय में जाने-माने हिंदी लेखक असग़र वजाहत की एक रिपोर्ताज पढ़ी. असग़र भाई मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ की याद में मनाए जाने वाले एक समारोह में एक आमंत्रित गेस्ट की हैसियत से आमंत्रित थे. मुझे लगता है कि उन्होंने इस बटवारे का दर्द छिपाए हुए पाकिस्तान को नज़दीक से देखने के लिए कई शहरों को नज़दीक से देखने का मन बनाया और देखा भी. यहाँ आकर 'पाकिस्तान होने का मतलब' नाम की एक अनमोल साहित्यिक रिपोर्ताज ज्ञानोदय में प्रकाशित हुई उन्होंने वहां की साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम का जो ब्योरा प्रकाशित किया उससे साफ़ हो जाता है कि पाकिस्तान की आम जनता हिंदुस्तान से कितना करीब है. उनकी सोच कितनी एक है.

  • 31. 12:18 IST, 02 दिसम्बर 2011 Pravin:

    बहुत बढ़िया लेख है,भारत में हम पाकिस्तान को पाकिस्तान कह कर ही बुलाते हैं और हम ये उम्मीद करते है कि एक दिन पाकिस्तान ये समझेगा कि हम दोनों पहले एक थे.

  • 32. 09:18 IST, 03 दिसम्बर 2011 rajeev:

    एक ही मां के बेटे हैं दोनों. एक बिगड़ गया है और ग़लत संगत में फंस गया है. अब दोनों करवट बदलकर लेटे हैं.

  • 33. 11:34 IST, 03 दिसम्बर 2011 KISHAN Singh:

    यह सच है कि अमरीका भारत और पाकिस्तान को लड़ने के लिए उकसाता है. उसको डर है कि अगर भारत-पाक मिल गए तो उसकी चौधराहट ख़त्म हो जाएगी.लेकिन हम सबको यह भी सोचना चाहिए कि भारत और पाकिस्तान लड़ना छोड़ दें तो अमरीका हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता. अभी तक उस दोनों को घुड़की देते रहता है.

  • 34. 19:25 IST, 04 दिसम्बर 2011 RAMAVTAR:

    मुझे यह जानकर बहुत ख़ुशी होती है कि आपकी बेहतरीन लेखनी का असर दोनों देशों के लोगों पर होता है.मुझे पूरी आशा है कि भविष्य में दोनों देश जर्मनी की तरह एक हो जाएंगे क्योंकि दोनों तरफ़ के लोग शांति से रहना चाहते हैं.

  • 35. 22:59 IST, 04 दिसम्बर 2011 Gurpreet:

    फ़ालतू ब्लॉग. भारत में तो कर कोई पाकिस्तान को पाकिस्तान ही कह के बुलाता है, अब पाकिस्तान के लोग भारत को नाम से पुकारने में हिचकें तो इसमें भी भारत का दोष है क्या?

  • 36. 12:46 IST, 05 दिसम्बर 2011 MOHAMMAD KHURSHID ALAM, Uphara, Bihar:

    इससे पहले मैंने आपकी रिपोर्ट सिर्फ़ सुनी थी, पहली बार पढ़ी है. आप इतना अच्छा लिखते हैं, यक़ीन नहीं हो रहा है. आपने अच्छा और सच लिखा है.

  • 37. 13:53 IST, 05 दिसम्बर 2011 PUSHPAK:

    लगता है घंघोर अंधेरे और घने जंगल में वुसत्तुल्लाह ख़ान ने एक दीप जलाय है.

  • 38. 21:21 IST, 05 दिसम्बर 2011 Shashwat Tripathi:

    नहीं, पाकिस्तान को भारत में पाकिस्तान नाम से संबोधित किया जाता है, और दुःख कि बात तो ये है हमारे लगभग सभी पडोसी देश, एक नेपाल और बांग्लादेश को छोडकर, दुश्मन है या ये कहूँ कि समझे जाते है.

  • 39. 09:15 IST, 06 दिसम्बर 2011 Razzaq:

    ख़ान साहब आप और सारी दुनिया जानती है ऐसा क्यूँ क्या आप इस सोंच को बदल ने की ताक़त रखते है .नहीं न आप और न हम ये ताक़त रखते है क्यूँकि हमारे नेता कभी भी जिए सिंध तहरीक को बढावा नहीं देते पर पाकिस्तान कश्मीर में ऐसा क्यूँ कर रहा है समझ में नहीं आ रहा. ऐसा करने से न तो कश्मीरी आज़ाद ज़िन्दगी जी पा रहे है न आप , नाही हम -आप . लगाम चीन के हाथ में है.हम मजबूर है किसी और के हाथ देने को वो रशिया और अमरीका हो सकते है

  • 40. 10:23 IST, 06 दिसम्बर 2011 amit:

    भारत में हम पाकिस्तान बोलते हैं.

  • 41. 16:04 IST, 09 दिसम्बर 2011 अनिल बर्वे:

    पकिस्तान एक महान देश है पहले भारत से दुश्मनी करके उसने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली. अब अमरीका से दुश्मनी मोल ले कर कुल्हाड़ी पर पैर मार रहा है.

  • 42. 13:39 IST, 30 दिसम्बर 2011 Rupesh Prasad:

    वाह ख़ान साहब क्या बात है.

  • 43. 08:17 IST, 09 मार्च 2012 nitin:

    सर आपने बहुत ही उम्दा लिखा है और ये सच भी है.

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