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सचिन देश के लिए एक बाम हैं

रेहान फ़ज़लरेहान फ़ज़ल|शुक्रवार, 25 नवम्बर 2011, 13:04 IST

एक बार फिर 120 करोड़ भारतवासियों का दिल टूट गया. सचिन 100 वाँ सैकड़ा नहीं मार पाए.

उनको शतक लगाए हुए 10 मैच बीत चुके हैं. उनके ऐसा न कर पाने पर कई मज़ाक भी चल निकले हैं. 'सचिन से पहले पेट्रोल का दाम 100 को छू लेगा.'

इस तरह की फ़ब्तियाँ उनके साथ बेइंसाफ़ी है और एक तरह की एहसान फ़रामोशी भी.

अगर ख़ुदा न ख़ास्ता सचिन सौंवा शतक नहीं भी मार पाते तो उससे उनकी महानता कम नहीं हो जाएगी.

100 शतक बनाना एक क्रिकेटीय रिकॉर्ड ज़रूर हो सकता है लेकिन मेरा मानना है कि उनका सबसे बड़ा योगदान है 120 करोड़ भारतवासियों की ख़ुशी का बार बार कारण बनना.

पहली बार उनके बारे में मैंने जाना था 1987 में. हम अपने हीरो गावस्कर के रिटायर होने का ग़म मना रहे थे. बेशक वैंगसरकर बेहतरीन फ़ॉर्म में थे, माँजरेकर की तकनीक की हर जगह चर्चा थी ...... अज़हरउद्दीन की जादुई कलाइयों पर पूरा भारत कुर्बान था. लेकिन इनमें से कोई भी गावस्कर के समकक्ष या उनसे बेहतर नहीं था.

तभी तेंदुलकर का उदय हुआ. जब उन्हें भारतीय टीम में चुना गया तो सिर्फ़ इस बात पर रोमाँच हो आया कि 16 साल का यह लड़का उस समय दुनिया के तीव्रतम गेंदबाज़ों इमरान ख़ाँ, वसीम अकरम और वकार यूनुस का सामना किस तरह करेगा.

यह आशंका सच भी हो गई जब सियालकोट के एक मैच में वकार यूनुस की एक गेंद उनकी नाक पर लगी और उनका पूरा चेहरा ख़ून से सराबोर हो गया.

दूसरे छोर पर खड़े नवजोत सिंह सिध्दू दौड़ कर उनके पास पहुँचते, इससे पहले ही सचिन बोल पड़े, 'मैं खेलेगा.'

वकार की दूसरी ही गेंद जिस तरह से उन्होंने चार रनों के लिए कवर ड्राइव किया उससे ही क्रिकेट दुनिया को संदेश चला गया कि एक क्रिकेट सुपर स्टार का जन्म हो चुका है.

उसी दौरे में पेशावर के एक मैच में जब अपने करियर के पीक पर चल रहे अब्दुल कादिर की गेंद पर सचिन ने छक्का लगाया तो इमरान ने कादिर को छेड़ा, 'एक स्कूल का लड़का आपको ठोक रहा है.'

अब्दुल कादिर ने आँख मारते हुए यह इशारा देने की कोशिश की कि वह लड़के के लिए जाल बिछा रहे हैं. अगली ही गेंद पर सचिन ने एक छक्का और जड़ दिया.

उस ओवर में कादिर की गेंद पर दो छक्के और लगे और चौथे छक्के के बाद अब्दुल कादिर की कुटिल मुस्कान हमेशा के लिए जाती रही.

1998 में शारजाह में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हुए मैच को भी याद करिए. वहाँ मैच के दौरान इतनी ज़बरदस्त आँधी आई कि सारे खिलाड़ी ज़मीन पर लेट गए.

थोड़ी देर बाद जब आँधी रुकी तो ऑस्ट्रेलिया को एक दूसरी ही आँधी का स्वाद चखना पड़ा. सचिन ने न सिर्फ़ यह मैच जितवाया, बल्कि दो दिन बाद एक शतक और जड़ कर भारत को एक जीत और दिलवाई.

इसी मैच के बाद शेन वार्न ने स्वीकार किया कि उन्हें सचिन की वजह से डरावने सपने आते हैं.

एक और मैच ज़हन में आता है.... 1999 का चेन्नई टेस्ट. सचिन की पीठ में इतना दर्द था कि उन्हें लगने लगा कि उन्हें मैदान छोड़ना पड़ेगा.

मैच जल्दी ख़त्म करने की कोशिश में उन्होंने सकलैन मुश्ताक की चार गेंदों पर चार लगातार चौके लगाए. पाँचवा चौका मारने की कोशिश में वह सकलैन की गेंद पर वसीम अकरम को कैच दे बैठे और भारत वह मैच हार गया.

पूरा ड्रेसिंग रूम आँसुओं से भीग गया. गावस्कर ने टिप्पणी की, 'अगर तुम किसी चीज़ को ख़ुद कर सकते हो तो उसे दूसरे के लिए कभी मत छोड़ो.'

सचिन इस समय शायद भारत के सबसे मशहूर जीवित व्यक्ति हैं. हाल ही में स्वर्गवासी हुए मशहूर क्रिकेट लेखक पीटर रोबक ने उनके बारे में लिखा था,'तेंदुलकर एक देश की अवस्था और उसके क्रमिक विकास को बयान करते हैं.'

सचिन का सौंवा शतक बने या न बने भारतवासियों को अपने आप को इस बात के लिए भाग्यशाली मानना चाहिए कि साढ़े पाँच फ़िट का यह इंसान अपने बल्ले को हिलाने भर से पूरे देश के संघर्ष और आपाधापी को भुलाने के लिए मजबूर कर देता है.

रामचंद्र गुहा की मानी जाए तो सचिन तेंदुलकर देश के लिए एक बाम का काम करते हैं.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 14:20 IST, 25 नवम्बर 2011 नवल जोशी:

    रेहान जी आपने लिखा है कि सचिन के 100वॉ शतक न लगा पाने से 120 करोड लोगों का दिल टूट गया यह थोडा ज्य़ादती है, बहुत से लोग हैं जिनको इन बातों से कोई मतलब ही नहीं है इसका ये भी अभिप्राय नहीं है कि ये लोग अंहकारवश किसी की खुशी के जश्न को कमतर बनाना चाहते हैं, हमारे पास और भी गम हैं मोहब्बत के सिवा . आपको यदि क्रिकेट और सचिन से बहुत लगाव है तो यह आपका निजी मामला है देश के सभी 120 करोड लोगों को इसमें सम्मिलित करने से पहले उनसे पूछ भी लेना चाहिए। बुन्देलखण्ड से आजकल आपके ही संवाददाता राजेश जोशी की रिपोर्टे लगातार आ रही हैं आपको कैसे लगता है कि वहॉ के लोग भी सचिन के सौंवे शतक के इंतजार में ही जी रहे हैं। यदि सचिन का शतक लग भी गया तो बुन्देलखण्ड के अभिशप्त बना दिये गये लोगों के लिए यह बाम का काम कैसे करेगा? लोग अपना आपा खोते जा रहे हैं, मंत्री खुलेआम लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं ,देश में हाहाकार मच रहा है और आप सचिन के गम में डूबे हैं । खेल को खेल से अधिक महत्व देना ठीक नहीं है। लगता है आपने इसे दिल से ले लिया है। इस देश में 100 एम्स जैसे अस्पताल या विश्वविद्यालयों के लिए आप चिंतित होते तो यह बात 120 करोड लोगों की समझ में आ जाती।

  • 2. 16:03 IST, 25 नवम्बर 2011 ashish yadav:

    रेहान जी सचिन सैकड़ा बनाने से चुके ज़रूर हैं लेकिन इसमें मातम मानाने कि ज़रुरत नहीं है. देर सवेर सच शतकों का शतक बना ही लेंगे. मैंने आपकी कई तथ्यपरक रिपोर्टे रेडियो पर सुनी हैं. हम आपसे विवेचना जैसी लेखनी कि उम्मीद करते हैं. सचिन पर बात करने के लिए और भी लोग हैं.

  • 3. 20:06 IST, 25 नवम्बर 2011 ganga dhar dwivedi:

    वह रेहान जी,
    यह केवल 120 करोड़ भारतीयों की बात नहीं बल्कि यह दुनिया के सभी क्रिकेट प्रेमियों के दिल की बात है चाहे वो कहीं भी रहते हों. सचिन महज़ क्रिकेट के आदर्श नहीं हैं बल्कि वो क्रिकेट के ब्रांड हैं. क्रिकेट ही वो चीज़ है जो हम सबकों एक सूत्र में बांधती है.


  • 4. 20:49 IST, 25 नवम्बर 2011 vikas kushwaha,kanpur.:

    बहुत अच्छा ब्लॉग है.

  • 5. 00:03 IST, 26 नवम्बर 2011 अनन्त सिंह:

    रेहान जी, इतनी वेहतरीन यादें हमसे शेयर करने के लिए शुक्रिया, रही बात शतक की तो थोड़ा और इन्तजार सही.

  • 6. 06:49 IST, 26 नवम्बर 2011 Intezar Hussain:

    रेहान साहब आप ने जो सचिन की तारीफ की है वह बिलाशक व एक महान क्रिर्केटर हैं और रहेंगे, रही उनके शतक की बात तो मेरा मानना है कि इन महान खिलाड़ी को और साथ ही साथ पूरे टीम को थोड़े दिन के लिये विश्राम की जरुरत है क्यों की टीम इंडिया के खिलाड़ीयों की टीम की संस्था को कोई फिक्र नहीं है. मशीन को भी रेस्ट नहीं दी जाय तो वह भी बराबर नहीं चल पाती इसी तरह इंसानों की बात है. बीसीसीआइ को चाहीए कि हमारे खिलाड़ीयों को कुछ आराम मिल सके, और जब दूसरी बार खेल के मैदान मे उतरें तो हमारे महान खिलाड़ी का हौसला बुलंद रहे और वह शतक लगा कर ही दम लें!

  • 7. 12:00 IST, 26 नवम्बर 2011 sanjay verma:

    अरे बाम तो अपने देश में एक ही है , झंडू बाम. कुछ ज़्यादा ही सचिन परस्त ब्लॉग है आपका फज़ल साहब.

  • 8. 16:41 IST, 26 नवम्बर 2011 pramodkumar:

    99 का चक्कर लग गया है हमारे आंखों के नूर सचिन को. रेहान भाई 99 का फेर जल्दी पीछा नहीं छोड़ता.

  • 9. 22:23 IST, 26 नवम्बर 2011 sameer:

    रेहान जी, क्या कहूं. हमेशा की तरह आपका एक और बेहतरीन लेख. क्या सटीक विश्लेषण है जैसे एक दौर का सच अपनी पूरी आत्मा के साथ उतर आया हो. आपको और आपकी लेखनी को दिल से सलाम. पर आपने 1998 के शारजाह के जिस तूफ़ानी मैच का ज़िक़्र किया है जिसमें सचिन ने 143 रन बनाए थे, उस मैच में भारत जीता नहीं था बल्कि फ़ाइनल मैच में पहुंचने के लिए ज़रूरी लक्ष्य पूरा कर लिया था. कृपया अपने इस अच्छे लेख में हुई एक ग़लती को सुधार लें.

  • 10. 17:55 IST, 28 नवम्बर 2011 saty:

    रेहान साहब, मैं अभी भी हैरान हूं कि कांबली को मैच फ़िक्सिंग की सच्चाई मालूम थी लेकिन सचिन को ये बात कैसे नहीं पता थी. जबकि वो एक ही टीम का हिस्सा थे और एक ही ड्रेसिंग रूम शेयर कर रहे थे. और अगर सचिन को पता था कि कुछ फ़िक्सिंग चल रही है तो उन्होंने उसका विरोध क्यों नहीं किया. सचिन की दूसरी महानता ये है कि वो आईपीएल में तो खेल सकते हैं लेकिन जब भारत के लिए खेलने की ज़रूरत हो तो उन्हें आराम चाहिए. सचिन वाक़ई महान हैं, क्यों?

  • 11. 00:11 IST, 05 दिसम्बर 2011 Bharatkumar Sheth:

    कृपया करके किसी महत्वपूर्ण मामले पर लिखा करें.Please write on some useful matters

  • 12. 17:02 IST, 11 दिसम्बर 2011 निशांत झा:

    आपने सही वक्त में इस विषय पर अपना लेख प्रकाशित किया है. सचिन के क्षमता पर किसी को कोई शक नहीं. सचिन एक बड़े काम को अंजाम देने वाले हैं और इससे सभी क्रिकेट प्रेमी और शायद सभी भारतीय गौरवान्वित होंगे.

  • 13. 22:30 IST, 31 दिसम्बर 2011 ashutosh:

    रेहान जी, बहुत अच्छा लिखा है आपने.

  • 14. 10:59 IST, 08 अप्रैल 2012 अभिषेक कुमार:

    आपका ब्लॉग अच्छा लगा. सचिन हमारे देश के क्रमिक विकास को दर्शाते हैं.

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