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रियल स्लमडॉग मिलियनेयर की रिएलिटी

अपूर्व कृष्णअपूर्व कृष्ण|गुरुवार, 17 नवम्बर 2011, 21:07 IST

ब्रिटेन के 190 साल पुराने अख़बार गार्डियन के तीसरे पन्ने पर, भारत की कोई ख़बर छपे, ऐसा अक्सर नहीं होता, मगर पिछले महीने की 28 तारीख़ को ऐसा हुआ.

इस दिन ये पूरे का पूरा पन्ना ही भारत की एक ख़बर को समर्पित था. हेडलाइन थी - रियल स्लमडॉग मिलियनेयर. बड़ी सी तस्वीर भी थी साथ में, हॉट सीट से नीचे उतरकर, खड़े होकर, दोनों हाथ जोड़कर, अमिताभ बच्चन को नमस्कार करते, मुस्कुराते, सुशील कुमार की तस्वीर.

संभवतः ये स्लमडॉग मिलियनेयर फ़िल्म का प्रभाव था कि इस ख़बर को ब्रिटेन की मीडिया में ख़ूब स्थान मिला, कि कैसे एक सिनेमाई अफ़साना हक़ीक़त में बदल गया.

जीते रूपयों से पिता का कर्ज़ चुकाने, बड़े भाईयों की मदद करने, घर की टूटी छत बनवाने, गाँव के बच्चों के लिए लाइब्रेरी बनाने, और आगे सिविल सेवा की तैयारी करने की सुशील की योजना का भी ज़िक्र था.

सुशील कुमार की इस ख़बर से ठीक दो सप्ताह पहले, ब्रिटेन में ऐसी ही एक और ख़बर आई थी, दो आम लोगों के अरबपति बनने की.

केम्ब्रिज के पास रहनेवाले दो साधारण लोग, 47 वर्षीय डेव डॉस और उनकी मेहबूबा, 43 वर्षीया एंजेला डॉस एक लॉटरी जीतकर अरबपति बन गए.

दोनों ने पूरे 101 मिलियन पाउंड यानी दस करोड़ पाउंड यानी कोई लगभग आठ अरब रूपए जीते.

खबरों के साथ की तस्वीरों में वे कहीं हाथों में महँगी शराब के जाम थामे, कहीं हेलिकॉप्टर के सामने, तो कहीं महँगी डिज़ाइनर दूकानों के आगे, ब्रांडेड बैग लटकाए दिखाई दिए.

जीती रकम ख़र्च करने की उनकी योजना में शामिल था - लंदन के एक महँगे इलाक़े में घर लेना, चेल्सी फ़ुटबॉल क्लब के मैचों के सीज़न टिकट ख़रीदना, पुर्तगाल में घर ख़रीदकर वहाँ शादी करना, और इसके साथ-साथ अपने 20 दोस्तों में पैसे बाँट उन्हें करोड़पति बना देना.

साथ-साथ एक और ख़बर थी, विजेता महिला एंजेला के पूर्व पति जॉन लीमैन और बेटे स्टीवन लीमैन की.

जॉन और स्टीवन ने एंजेला के बारे में कहा - वो एक मतलबी और भौतिकतावादी महिला थी, उसके लिए जीवन में पति और बेटा ही सबकुछ नहीं था, इसलिए उसने अपनी सुख-सुविधा के लिए उन्हें छोड़ दिया.

उनकी बताई कहानी के अनुसार - हमेशा बाहर रहनेवाला ट्रक ड्राईवर जॉन अचानक एक दिन घर लौटा तो उसने देखा, उसका सारा सामान फेंका हुआ है. तीन दिन बाद स्कूल की छुट्टी बिताकर बाहर लौटे स्टीव ने जब माँ से पिता के बारे में पूछा, तो उसने उसे भी जॉन के पास जाने के लिए कह दिया. स्टीव तब 12 साल का था.

अरबपति एंजेला के बेटे स्टीव ने अपनी माँ की कामयाबी पर ये कहा - मेरी माँ मुझे चाहे अपनी लॉटरी की एक-एक पाई दे दे, वो मेरी माँ नहीं बन सकती, वो अपने किए को नहीं बदल सकती, ये ऐसी चीज़ है जिसे ख़रीदा नहीं जा सकता.

भारत के रियल स्लमडॉग मिलियनेयर की रिएलिटी केवल उसका मिलियनेयर बन जाना भर नहीं है, साधारण सुशील कुमार के पास क्या असाधारण दौलत है, ये समझने में ब्रिटेन के बिलियनेयर विजेताओं की रिएलिटी जानने से मदद मिल सकती है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 23:10 IST, 17 नवम्बर 2011 आशीष सुमन:

    यदि किसी व्यक्ति में ये गुण हो कि वो जानता हो कि कैसे रहना चाहिए और परिवार, सहयोगी और सारी मानवता के लिए उसकी क्या ज़िम्मेदारियाँ हैं, वही व्यक्ति एक असली मिलियनेयर हो सकता है.

  • 2. 00:39 IST, 18 नवम्बर 2011 अनन्त सिँह:

    अपूर्व जी,ब्रिटेन के अख़बार मेँ एक साधारण भारतीय की ख़बर पूरे पेज़ पर असाधारण बात है लेकिन, सुशील कुमार ने अब तक जो भी अपनी भावी योजनाओँ को बताया है वे काफी रचनात्मक व सराहनीय हैं, हाँ उन पर अमल जितना जल्दी हो उतनी अच्छी बात होगी.

  • 3. 05:45 IST, 18 नवम्बर 2011 शबनम कुरैशी:

    अपूर्व कृष्ण जी आपने बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दे पर ब्लॉग लिखा है,लेकिन इस विषय के दो पहलुओं का जिस तरह आपने विश्लेषण किया है इससे सहमत होना कठिन है, हो सकता है कि आपकी बात सही हो लेकिन सुशील कुमार और एंजिला की सोच का अन्तर महत्वपूर्ण नहीं है वास्तविकता का पता 5-10 वर्षों बाद पता चलेगा जब सुशील कुमार से फिर कोई पूछेगें कि अब आपकी क्या प्राथमिकतायें हैं. सवाल यह नहीं है कि ऐंजेला और सुशील कुमार ने पैसा मिलने के बाद अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया क्यों दी ,सवाल यह है कि सुशील कुमार और ऐंजेला अलग-अलग पृष्ठभूमि से आये थे जिसे हम दो इंसानों का अन्तर समझ रहे हैं हो सकता है कि वह दो पृष्ठभूमियों का अन्तर हो,लेकिन कुछ समय बाद जब सुशील कुमार नई परिस्थिति में रह लेगें तब उनकी वास्तविक प्रतिक्रिया सामने आ पायेगी आज सुशील कुमार के लिए इससे अलग प्रतिक्रिया देना सम्भव ही नहीं था. इसके बाद नई परिस्थिति जब अपना असर दिखाने लगेगी तब ही सुशील से पूछना बेहतर होगा. ऐजेला ने अपने चारों ओर जो कुछ भी बचपन से देखा वे ऐसा कर सकती थी इसमें कुछ भी अमानवीय नहीं है यह उनके समाज की विसंगति है,लेकिन हम सुशील कुमार के मार्फत इतना ही कह सकते हैं जैसा कि उन्होंने कहा लेकिन इसके बाद सुशील कुमार और ऐंजेला की परिस्थितियां एक समान होती जाऐगी इसलिए भविष्य में सुशील के बयान पर आश्वस्त होने का कोई कारण नहीं है.

  • 4. 08:08 IST, 18 नवम्बर 2011 डा० उत्सव कुमार चतुर्वेदी, क्लीवलैंड, :

    गांव का एक मालदार बूढ़ा ठेकेदार अचानक एक दिन बदल गया. आसाम से घर आया और फिर वहां कमाने नहीं गया. जेठ की दुपहरी में सड़क के किनारे बैठकर आने जाने वाले राहगीरों को लड्डू खिलाकर पानी पिलाता और असहायों को साईकिल पर बैठा कर उनके गन्तव्य स्थान तक पहुँचाता . पूछने पर बोला, " अब वह नोट कमाना है जो वहां भी चले, यहाँ की कमाई तो वहां जाएगी नहीं." जिस देस में गंवार भी जनता हैं कि कौन नोट कहाँ नहीं चलेगा , उस देश के लोग ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करें तो कोई आश्चर्य नहीं.

  • 5. 12:39 IST, 18 नवम्बर 2011 तान्या जोशी:

    अपूर्व जी करोडों रूपये जीतने वाले सुशील कुमार और अरबपति ऐजेंला की तुलना करके दरअसल हम अपने को सन्तोष ही दिला रहे हैं इससे अधिक इस चर्चा का कोई मूल्य नहीं है. व्यक्ति के तौर पर सुशील कुमार भले आदमी हो सकते हैं लेकिन अचानक इतना पैसा आने के बाद भी अच्छे आदमी बनें रहें इसकी कोई गांरटी नहीं दी जा सकती है.पैसे के असर से सुशील कुमार भविष्य में भी अपने इन्हीं मूल्यों की हिफाजत कर सकेगें या पैसों के दुष्प्रभाव से उनके मूल्य, उनको कितना बचा कर रखेगें यह कहना कठिन है. लेकिन इस तरह करोडपति या अरबपति होने की कठिनाईयाँ भी हैं और इससे जीवन की सारी प्रक्रिया के ही छिन्न भिन्न हो जाने का ख़तरा भी है. पैसों के आभाव के बावजूद भी सुशील कुमार के व्यक्तित्व में वह आकर्षण है जिसकी लोग चर्चा कर रहे हैं. लेकिन अचानक इतना धन मिलने के बाद सुशील कुमार के जीवन में निश्चित ही अधिकांश जगह पैसा ले लेगा फिर वे अपने मूल्यों ,आदर्शों और दायित्वों का निर्वहन कैसे करते हैं यह देखना दिलचस्प भी हो सकता है और त्रासद भी हो सकता है.


  • 6. 20:39 IST, 18 नवम्बर 2011 haarriss:

    सुशील कुमार के पाँच करोड़ जीतने की ख़बर से इतनी प्रेरणा लेने की कोई गुंजाइश नहीं है. तेरह सवाल औऱ तीन हेल्पलाईन, ऐसा क्या है जिससे प्रेरणा ली जाए. वास्तव में ये एक व्यक्ति को एक या पाँच करोड़ देकर सैकड़ों करोड़ कमाने का गोरखधंधा है. 11 साल में कितने करोड़पति बने और केबीसी वाले कितने करोड़ के मालिक बन गए, कम से कम बीबीसी को ये बात बतानी चाहिए.

  • 7. 23:18 IST, 18 नवम्बर 2011 कृष्णा:

    सामयिक विषयों पर अपनी भावनाएँ प्रकट करना अच्छा है, मगर स्लमडॉग शब्द भारतीय संदर्भ में अच्छा नहीं लगता. कृपया इस तरह के शब्दों का प्रयोग ना करें. सुशील एक साधारण आदमी है और ग़रीब परिवार से आता है और ग़रीब परिवार से बननेवाले करोड़पति को स्लमडॉग मिलियनेयर नहीं कहा जाना चाहिए.

  • 8. 06:33 IST, 19 नवम्बर 2011 Dr.Lal Ratnakar:

    अपूर्व जी आपके आलेख में स्वप्न लोक की भारतीय और वैश्विक चर्चा है, इस चर्चा में 'अकूत' धन के खर्च के तरीकों पर जोर दिया गया है.दोनों तरीके उद्वेलित करते हैं. आमजन कों ख़ास तरीक़े से प्राप्त किये हुए धन से. अगर आप पढ़ रहे हों तो आगे किसी ब्लॉग में इस पर चिंता या विचार अवश्य दें की 'लॉटरी' या 'करोड़पति' बनने के ये तरीके कितने लोगों को अवसर देते हैं या हॉट सीट पर बैठा हुआ बंदा कितने सरल सवालों के जवाब भी नहीं जान रहा होता है जबकि टीवी के सामने बैठे लोग अनायास उस उत्तर कों चिल्ला चिल्ला कर कह रहे होते हैं. अब दो बातें - गार्डियन में जब कोई खबर छपे तो अतिशय महत्व की होगी निश्चित रूप से, पर उन्हें कभी चिंता नहीं होती कि कितने लोगों का समय टीवी के सामने बैठे बरबाद कर रहे होते हैं.यह है भारतीय मनोरंजन की महत्ता.

  • 9. 07:43 IST, 19 नवम्बर 2011 सुशील:

    मुझे जानकर बड़ी हैरानी हो रही है कि बीबीसी उन लोगों की तारीफ़ कर रहा है जो भाग्य से जीते हैं.

  • 10. 11:02 IST, 19 नवम्बर 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    जो औरत अपनी औलाद की नहीं हो सकती, मैं उसके बेटे को सलाम करता हूँ जिसका जज़्बात ये है कि वो कभी भी उसकी माँ नहीं बन सकती. लेकिन आप कृपया बाक़ी गरीबों पर लिखने का प्रयास करें ना कि करोड़पतियों पर.

  • 11. 19:50 IST, 19 नवम्बर 2011 सौरभ सिंह:

    भारतीय सांस्कृतिक विशेषताओं को ब्लॉग में जगह देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. पश्चिम में चाहे दौलत कितनी भी हो लेकिन वो मानवीय मूल्यों में भारत की बराबरी कभी नहीं कर सकते. यही हमारी ख़ासियत है.

  • 12. 20:37 IST, 19 नवम्बर 2011 संतोष मिश्रा:

    सुशील कुमार की जीत में 90% किस्मत और केवल 10% उनका ज्ञान है. मुझे लगता नहीं कि इस ख़बर को इतनी लोकप्रियता मिलनी चाहिए.

  • 13. 11:08 IST, 21 नवम्बर 2011 ashish gautam:

    आप को तो कुछ कहना नही आता है हमसे सीखे. क्या लेख लिखा हैं. किसी को कुछ भी कह दो आप भी कभी कुछ नही थे.

  • 14. 13:16 IST, 22 नवम्बर 2011 chandan jha:

    अपनी ज़िंदगी के साथ-साथ बदल दो कुछ बच्चों का ज़िंदगी.

  • 15. 09:38 IST, 24 नवम्बर 2011 BHEEMAL Dildarnagar:


    क्या कहें श्री अपूर्व जी , बात कुछ हज़म नही हुई.ध्यान हो कोई विषय ही नही मिलता आपको.

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