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एक क़ैदी की रिहाई

वुसतुल्लाह ख़ानवुसतुल्लाह ख़ान|मंगलवार, 15 नवम्बर 2011, 20:03 IST

मजीद 17 वर्ष का था जब वो रास्ता भूल कर कसूर से सीमा पार चला गया और भारत के सीमा सुरक्षा बल के हाथ चढ़ गया.

जाँचकर्ताओं ने कई दिनों की जाँच के बाद पाया कि मजीद जासूस या आतंकवादी नहीं है तो उन्होंने उसे अवैध रुप से सीमा पार करने के आरोप में जेल भेज दिया गया.

मजीद को पंजाब और राजस्थान की चार जेलों में रखा गया और दो बार जज के समक्ष पेश किया गया.

साल 2001 में मजीद को मुशर्रफ़ और वाजपेयी की आगरा में हुई मुलाक़ात के कुछ दिनों बाद मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं के दबाव पर मजीद को रिहा करने का आदेश दिया गया था.

लेकिन जुलाई 2010 तक अदालती फ़ैसले पर अमल नहीं हो सका.

आख़िरकार मजीद को जेल से निकाल कर अमृतसर पहुँचाया गया और विभिन्न जेलों से रिहा किए गए दूसरी पाकिस्तानी क़ैदियों के साथ वाघा सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों के हवाले किया गया.

मजीद को उनका भाँजा और छोटी मौसी किराए की गाड़ी में पाक-भारत सीमा पर लेने आए.

मजीद को बताया गया कि उनके पिता का 1994 में और माता का 2004 में निधन हो गया.

बड़ी बहन के चार और छोटी के दो बच्चे हैं. यह लोग कसूर से लाहौर आ चुके हैं और कसूर वाला घर बेच दिया गया है.

मगर मजीद ये सब कुछ नहीं सुन रहा था, उनका ध्यान कहीं ओर था और वह हर व्यक्ति को आँखे फाड़ फाड़ कर देख रहा था. 31 साल में दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी थी.

जैसे ही गाड़ी लाहौर के सज़बाज़ार इलाक़े में पहुंची तो मोटर साइकल पर सवार चार लोगों ने आगे आकर उसे रोकने की कोशिश की.

लेकिन गाड़ी के ड्राईवर ने रोकने के बजाए गाड़ी ओर तेज़ कर दी जिस पर मोटर साइकल पर सवार लोग आक्रोश में आ गए और उन्होंने गाड़ी पर सीधी फ़ायरिंग की.

ड्राइवर उसी समय मर गया और गाड़ी खंबे से टकरा गई. मजीद, उनकी मौसी और भाँजे को घायल स्थिति में अस्पताल पहुँचाया गया.

अगली सुबह मजीद मर गया.

अस्पताल प्रबंधन ने शव मजीद की बड़ी बहन के हवाले करते हुए एक फॉर्म भरने को कहा.

मजीद की बहन ने फॉर्म में लिखा.

नाम: अब्दुल मजीद
जन्म तिथि: 05 नवंबर 1962
मृत्यु तिथि: 29 जुलाई 2010
आयु: 17 वर्ष

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 21:11 IST, 15 नवम्बर 2011 naran:

    मार्मिक और सटीक

  • 2. 21:50 IST, 15 नवम्बर 2011 Kapil Batra:

    मैंने अब तक इतना मार्मिक लेख नहीं पढ़ा. क्या दोनों सरकारें इस पर ध्यान देंगी. मैं उम्मीद करता हूं कि वो बीबीसी पढ़ते होंगे.

  • 3. 23:23 IST, 15 नवम्बर 2011 ravesh:

    एक इनसान कि ज़िंदगी बर्बाद हो गई. क्यों हम लोग यूरोप की तरह एक दूसरे के यहां रोड़ से आ-जा नहीं सकते. एशिया रहने के लिहाज़ से सबसे बदतर जगह है. मजीद साहब हमेशा यही चाहेंगे कि उन्हें अगले जनम में कहीं भी जनम मिले लेकिन भारत या पाकिस्तान में नहीं. भगवान उनकी आत्मा को शांति दे.

  • 4. 07:00 IST, 16 नवम्बर 2011 Mohammad Saleem:

    दुःखद है, पता नहीं वो हत्यारे कौन थे उन्होंने क्यों एक ग़रीब इंसान को मार डाला जिसने पहले ही कितना कुछ बिना किसी कारण के सहा.

  • 5. 10:58 IST, 16 नवम्बर 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    खां साहब, लिखने को शब्द नहीं कि जुलाई 2010 तक फ़ैसले पर अमल नहीं हुआ, क्या यही महान भारत की पहचान है. दोनों तरफ़ के नेताओं का कुछ भी नहीं जाता है. बेचारी जनता का सबकुछ बिगड़ जाता है.

  • 6. 12:18 IST, 16 नवम्बर 2011 नवल जोशी:

    वुसतुल्लाह खान साहब, मजीद के सीमा पार करने और फिर अपने देश में लौटने पर मारे जाने का जो विवरण आपने लिखा है वह समाज की एक प्रतिनिधि घटना है. मृत मजीद की बडी बहन ने शव प्राप्त करने के लिए फार्म में उसकी उम्र 17 वर्ष लिखी, बड़ी बहन की स्मृति में मजीद 17 वर्ष की उम्र में सीमा पार करते ही मर गया लेकिन सच्चाई उतनी ही नहीं होती है जितना हम जानते हैं. मजीद 17 वर्ष से अधिक जिया यह सच है, एक बहन कह सकती है कि सीमा पार करने के साथ ही मेरा भाई मजीद मारा गया, लेकिन अपने ही देश में मोटरसाईकिल सवारों ने जिसे मारा फिर वह कौन था? यदि सीमा पार करते ही मजीद मारा गया था तो शव के लिए इतने दिनों बाद फार्म क्यों भरा गया आदि-आदि. लेकिन इस बात का कोई मतलब ही नहीं है. मजीद की घटना से जो सवाल उठते हैं उनमें महत्वपूर्ण यह है कि जैसे ही यह निश्चित हो गया था कि यह बच्चा आंतकवादियों का मोहरा या जासूस नहीं है तो फिर बिना देरी के उसे तुरन्त अपने घर क्यों नहीं जाने दिया गया? यदि किसी कारण घर भेजने में देरी होनी ही थी तो फिर उसे जेल में क्यों रखा गया? जेल से अलग उसके रहने की कोई व्यवस्था क्यों नहीं की गयी? अभी कुछ समय पहले भारतीय वायुसेना का एक हेलिकॉप्टर भटककर पाकिस्तान चला गया था तुरन्त ही भूल सुधार कर उसे लौटा दिया गया ऐसी तत्परता मजीद के बारे में क्यों नहीं दिखाई गयी? कारण साफ है कि प्रशासन कुछ मामलों में अति संवेदनशील और कुछ मामलों में आपराधिक स्तर तक संवेदनहीन है.

  • 7. 17:04 IST, 16 नवम्बर 2011 harsh maurya:

    लोगों ने सुरक्षा के नाम पर सरहद बना दी लेकिन भारत-पाकिस्तान के मामले में एकमात्र भूमिका बस अहम की ही रह जाती है.

  • 8. 19:04 IST, 16 नवम्बर 2011 raj guru:

    इंसानियत मर चुकी है, सिर्फ़ लाशें ज़िन्दा हैं.

  • 9. 19:52 IST, 16 नवम्बर 2011 rahul ranjan tyagi:

    क्या हम फिर से नए सिरे से शुरूआत नहीं कर सकते?

  • 10. 21:40 IST, 16 नवम्बर 2011 ghanshyam tailor:

    बड़ा अफ़सोस हुआ. दोनों देशों की सरकारें कब निर्दोष लोगों को रिहा करेंगी. काश मैंने ये लेख ना पढ़ा होता, तो दिलो दिमाग को इतनी ठेस ना पहुँचती.

  • 11. 23:40 IST, 16 नवम्बर 2011 Mohammad Athar Khan Faizabad Bharat:

    सरहद पर करना इतना बड़ा जुर्म है? आखिर कब सुधरेगे रिश्ते? कब तक लोगो को जाने देनी होंगी? क्या हम यूरोप की तरह अमन के साथ नहीं रह सकते? अमरीका तो अपने पडोसी मुल्कों से नहीं लड़ता! आखि़र भारत और पाकिस्तान ही क्यों लड़ते है? सरहद पार करने वालों के साथ घर वालों जैसा न हो तो कम से कम महमान जैसा बर्ताव तो होना ही चाहिए.
    जब नेपाल और भूटान वाले बिना पासपोर्ट और वीजा के आ सकते है तो पाकिस्तान वाले क्यों नहीं ?

  • 12. 08:26 IST, 17 नवम्बर 2011 Saptarshi:

    बेहद अच्छा लेख

  • 13. 10:59 IST, 17 नवम्बर 2011 MUKESH KUMAR MEENA:

    दिल को छू गया ये लेख.

  • 14. 11:08 IST, 17 नवम्बर 2011 anand:

    जिस दुश्मन देश ने 30 साल ज़िंदा रखा, उसी देश के लोंगों ने कार ओवरटेक करने के ज़ुर्म में मार डाला , इंसानियत की दुहाई है. ये क़ानून व्यवस्था की बदहाली है.

  • 15. 12:30 IST, 17 नवम्बर 2011 अनन्त सिँह:

    वुसतुल्लाह जी,
    आँखे भर आयी.

  • 16. 13:14 IST, 17 नवम्बर 2011 lalit:

    बड़ी दुखद बात है वसतुल्लाह साब और उससे भी दुखद है कि मज़ीद ही आपको याद रहा. सरबजीत नही याद आया जो अभी तक पाकिस्तानी जेलों में बंद है. भूल गया था मैं, आप लोग सेक्युलर लोग हैं भाई.... ग़लती हो गयी, माफ़ कीजिए. बँटवारा भी आप हीं करें, आतंकवाद भी आप ही लोग फैलायें और कहें कि ग़लती तो ..बढ़िया है.... वसतुल्लाह साब बढ़िया है...

  • 17. 07:28 IST, 22 नवम्बर 2011 Sanjeev Kumar:

    लेख बहुत ही करूणास्पद और वास्तविक भारत पाकिस्तान के सीमा के निकट का जीवन स्तर की याद दिलाता है.

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