शतक एक समर्पित और जुझारू क्रिकेटर का
पिछले साल के अंत और इस साल की शुरुआत में हुए दक्षिण अफ़्रीका के दौरे में राहुल द्रविड़ के बल्ले से रन नहीं बने और तभी ये चर्चा शुरू हो गई थी कि अब शायद द्रविड़ को सम्मानपूर्वक संन्यास ले लेना चाहिए.
छह महीने बाद द्रविड़ एक बार फिर क्रिकेट पिच पर उतरे और पहले ही टेस्ट में उन्होंने जुझारू शतक लगाया.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ इस शतक के बाद उनके संन्यास की माँग करने वाले चुप हो जाएँगे या इसी शतक से द्रविड़ की महानता साबित होगी.
द्रविड़ के इस शतक में उनके पूरे व्यक्तित्व की झलक मिलती है. एक गंभीर, जुझारू और क्रिकेट के प्रति समर्पित खिलाड़ी.
द्रविड़ 39 साल के होने को हैं, लंबे सफ़र के बाद सिर्फ़ तीन दिन पहले वेस्टइंडीज़ पहुँचकर इस उम्र में साढ़े छह घंटे की पारी खेलते हुए शतक जड़ना वास्तव में द्रविड़ या उनके जैसे अनुभवी क्रिकेटर के बल्ले से ही हो सकता था.
ऐसे समय में जबकि विराट कोहली, सुरेश रैना या अभिनव मुकुंद जैसे युवा क्रिकेटर उनके साथ टीम में हैं द्रविड़ की ये पारी उन लोगों के लिए एक केस स्टडी जैसी होगी.
किस तरह गेंद को पैड पर जाने से रोकते हुए, पुल शॉट से बचते हुए उन्होंने ये शतक जड़ा.
द्रविड़, तेंदुलकर या लक्ष्मण का इस उम्र में क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन खेल के प्रति उनका समर्पण दिखाता है और यही वजह है कि उम्र उनके असली खेल को बहुत बुरी तरह प्रभावित नहीं कर पाई है.
इन खिलाड़ियों ने खेल के मैदान से जो सीख दी है वो दरअसल ज़िंदग़ी के किसी भी क्षेत्र में लागू की जा सकती है. आपका समर्पण आपको अपने कार्यक्षेत्र में पारंगत करने की ओर आगे बढ़ाएगा ही.
'वॉल' यानी दीवार कहे जाने वाले द्रविड़ के पिछले प्रदर्शन के बाद जब दीवार में दरारों की बात की जा रही थी तो उससे विचलित हुए बिना द्रविड़ ने ध्यान क्रिकेट पर ही दिया.
उनसे कुछ साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान बंगलौर में हुई मुलाक़ात में उनकी विनम्रता से आमना-सामना हुआ और उस विनम्र खिलाड़ी के इस शतक पर मुझे आश्चर्य नहीं बल्कि ख़ुशी है.

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सही बात है. राहुल द्रविड़ महान खिलाड़ी भी हैं और महान व्यक्ति भी.
सचमुच राहुल द्रविड़ की बराबरी कोई नही कर सकता. ये वो खिलाड़ी है जो दस दिन तक भी मैदान में रुक कर रन बना सकता है, वो भी बिना आउट हुए. राहुल तुझे सलाम.
मुकेश शर्मा जी आपने सटीक,सुगम्य और बहुत ही सरलता से द्रविड़ की इस पारी का चित्रण किया है.आलोचना और प्रशंसा ये दो शब्द महान हस्तियों के साथ खु़द बखु़द जुड़ जाते हैं ,द्रविड़ भी शायद उनमे से एक हैं. इस "द वाल" का मैं बचपन से मुरीद रहा हूँ, द्रविड़ की यह पारी नए खिलाड़ियों के लिए एक ट्रेलर है उनके विडियो फुटेज देखकर उन्हें सीख लेनी चाहिए और मैदान पर ज़्यादा वक्त बिताने की कोशिश करनी चाहिए.|
टेस्ट मैचो में 151 मैचों में 52.65 के औसत के साथ 12,215 के साथ नंबर 3 (रिकी पोटिंग से 148 रन कम), वनडे में 339 मैचो में 39.43 के औसत के साथ 10,765 रनों के साथ सातवे नंबर पर होने के बाद कुछ सिद्ध करने को रह ही नही जाता. अब इंतज़ार है रिकी पोंटिंग से आगे निकलकर टेस्ट मैचो में नंबर 2 बल्लेबाज बनने का. सचिन के बाद राहुल द्रविड ही भारत के महान बल्लेबाज है.
अपने सही कहा है कि द्रविड़ की ये पारी टीम के लिए सीख है.
राहुल द्रविड़ एक महान खिलाडी़ होने के साथ ही एक अच्छे इंसान भी है ,उन्होंनें जो इंडियन क्रिकेट को दिया है वो सराहनीय है .सही बात है कि उनसे नए खिलाडि़यों को सीखने की ज़रुरत है .
वास्तव में राहुल द्रविड़ बहुत ही महान खिलाडी़ हैं . जब वो मैदान पर उतरते है तो बहुत गर्व महसूस होता है .राहुल ,सचिन , लक्ष्मण ,गांगुली पर यदि कोई कमेन्ट करे तो मैं समझता हूँ कि उसे जीने का कोई हक़ नहीं है, क्योंकि वे सब बहुत ही महान खिलाडी़ हैं.
राहुल द्रविड़ बहुत महान खिलाडी़ हैं . वो संसार में टेस्ट के महानतम खिलाडी़ है. यहाँ तक कि वो टेस्ट मैचों में सचिन से भी बेहतर हैं.
इस समय इंडियन टीम में असली टेस्ट खिलाड़ी द्रविड़ , लक्ष्मण और सचिन है. ये तीनों जब सन्यास लेगें तब इंडियन क्रिकेट का बहुत नुकसान होने वाला है क्योंकि इस समय जो युवा खिलाड़ी है , वो सिर्फ़ टी 20 और 50 ओवर के खिलाड़ी है . ये खिलाड़ी 5-6 घंटे क्रीज़ पर नहीं टिक सकते . इनमें वो क़ाबलियत नहीं है जो द्रविड़ में है . इसलिए मेरा मानना है ये कोहोनूर जब सन्यास लेंगें तब टीम इंडिया को बहुत नुकसान होगा जैसे वेस्टंइडीज़ स्त्दिएस को हुआ था जब रिचर्डस , ग्रीनिज , डूजॉन जैसे खिलाड़ियो ने सन्यास लिया था तब से अब तक वेस्टंइडीज़ सभल नहीं पा रही है ? ऐसा ही हमारी टीम के साथ भी होने वाला है. 252 रनों में 112 रन तो द्रविड़ के ही थे बाकी खिला़ड़ियो के रन आप ख़ुद देख सकते है. अगर समय रहते टीम में द्रविड़ जैसे खिलाड़ी नहीं होगें तो टीम इंडिया की टेस्ट मैचों में बहुत दुर्गति होने वाली है.
राहुल जी एक महान खिलाड़ी हैं और उन्होंने फिर एक बार दिखाया.
नए खिलाड़ी कुछ अच्छे रन बना लेते है तो तुरंत ये चर्चा आम हो जाती है कि पुराने को आराम दो और नए से काम लो. अख़बार ,टीवी न्यूज़ चैनल सब पर न जाने कितने शब्द सुनाई देते है कि युवा ने नया जोश दिखाया .अब ज़रा गौर करे कि वेस्टेइंडीज़ के साथ टेस्ट में कहाँ गए युवा और उनका नया जोश. पुराने ही काम आए , इसीलिए लोग कहते है -ओल्ड इज़ गोल्ड
द्रविड़ तुझे सलाम ,मैं चाहता हूँ तुम सदा खेलते रहो.
राहुल महान और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं.
भारतीय क्रिकेट संक्रमण के दौर से गुज़र रहा है. इसलिए द्रविड़, लक्ष्मण और सचिन जैसे खिलाड़ी मिलना बहुत मुश्किल है. टी-20 फ़ॉरमेट क्रिकेट के नकारात्मक पहलु को उजागर कर रहा है.द्रविड़ का ये शतक उनके पिछले 31 शतकों की तरह था लेकिन भारतीया क्रिकेट और विश्व क्रिकेट के लिए वैसा नहीं था.
राहुल द्रविड़ एक महान खिलाड़ी हैं. क्योंकि जब तक वह क्रिज़ पर होते हैं तो हमें भरोसा होता है कि वह इंडिया को जिता सकते हैं. ऐसा भरोसा काफ़ी कम खिलाड़ियों पर होता है.
यदि कोई क्रिकेट का अच्छा जानकार होगा वह कभी भी राहुल द्रविड़ की आलोचना नही करेगा. एक बार टीवी पर विश्व कप देख रहा था. उस समय ब्रेटली का नाम था. मैंने कहा की द्रविड़ को ओपनिंग करनी चहिये, जिससे ब्रेटली की बॉल को अधिक समय तक फेस किया जा सके. बाकी दर्शक तुरंत बोले, अरे अंगद को अभी न भेजे. बहुत बॉल खा जाएगा. और वही हुआ जिसकी कल्पना कर रहा था. द्रविड़ को नही भेजेने और ब्रेटली ने सभी ओपनर को आउट कर दिए और वर्ल्ड कप हाथ से गया. द्रविड़ की असली परख करने के लिए मुकेश शर्मा को साधुवाद.
मुकेश जी आप पंकज जी से ज़्यादा अच्छा लिखते हैं.
वाकई द्रविड़ सर्वश्रेष्ठ हैं.