« पिछला|मुख्य पोस्ट|अगला »

क्या मेज़बानों की किस्मत चमकेगी!

रेहान फ़ज़लरेहान फ़ज़ल|मंगलवार, 15 फरवरी 2011, 13:55 IST

अभी तक दुनिया का कोई भी ऐसा देश नहीं है जिसमे अपनी ज़मीन पर क्रिकेट का विश्व कप जीता हो.लेकिन शायद इस बार ऐसा हो जाए.हर जगह इस बात की चर्चा है कि चूँकि यह सचिन का आख़िरी विश्न कप है इसलिए भारतीय टीम के खिलाड़ियों को यह कप जीत कर उन्हें तोहफ़े में देना चाहिए.

मेरा मानना इसके ठीक विपरीत है. उल्टे सचिन को यह कप जीत कर भारतवासियों को 'पार्टिंग गिफ़्ट' के तौर पर दे देना चाहिए.

वीरेंदर सहवाग इस समय शायद दुनिया के सबसे ख़तरनाक बल्लेबाज़ हैं. उनकी दिली इच्छा है कि वह पूरे पचास ओवर तक खेलें. अगर ऐसा हो पाता है तो भारत के लिए सोने पर सुहागा होगा.

क्रिकेट पंडित यह कहते नहीं थकते कि इस बार का विश्व कप सबसे अच्छी फ़ील्डिंग करने वाली टीम को मिलेगा.

1975 का विश्व कप याद कीजिए.....विव रिचर्ड्स ने चैपल बंधुओं को रन आउट कर ऑस्ट्रेलिया की रीढ़ ही तोड़ दी थी.

विराट कोहली,युवराज सिंह और सुरेश रैना पर दारोमदार होगा कि वह कितनी चुस्ती से रन आउट करते हैं और 'हॉफ़ चांस' को कैच में बदलते हैं.

मुश्किल समय में भी अपना 'कूल' बनाए रखने के लिए मशहूर धोनी को आज दुनिया के सबसे चतुर कप्तानों में माना जाता है.लेकिन मैं धोनी को अच्छी कप्तानी के साथ साथ अच्छा खेलते हुए भी देखना चाहूँगा.

ऐसा न हो कि वह माइक ब्रियरली बन जाएं जिन्हें सिर्फ़ अच्छी कप्तानी के बल पर ही टीम में जगह मिलती थी.

जब धोनी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आए थे तो उन्होंने पॉवर हिटिंग से अपनी पहचान बनाई थी.आज उनकी बैटिंग से वह चीज़ नदारत है.

आज के धोनी पुश और डेफ़्लेक्शन से अपने ज़्यादातर रन बनाते हैं.

अगर भारत को यह कप जीतना है तो धोनी को अपनी पुरानी लय में एक बार फिर आना होगा.

ज़हीर ख़ाँ और मुनाफ़ पटेल अच्छी गेंदबाज़ी कर रहे हैं.ज़रूरत है उन्हें चोट से बचने की.

भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर के बल्लेबाज़ों के लिए लेग स्पिन हमेशा से एक अनबूझ पहेली रही है.ऐसे में पीयूष चावला तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के साथ अभ्यास मैच में उन्होंने यह दिखाया भी है.

फ़ेवरेट का तमग़ा भी अगर भारत अपने ऊपर न लगाए तो बेहतर होगा.

अभी तक सिर्फ़ दो बार ही फ़ेवरेट टीमें जीती हैं....वेस्ट इंडीज़ और ऑस्ट्रेलिया!

फ़ेवरेट होना आपके तनाव को बढ़ा देता है जब कि विश्व कप जीतने के लिए ये ज़रूरी है कि अच्छा खेलने के साथ साथ आप खेल का मज़ा भी लें.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 18:05 IST, 15 फरवरी 2011 vikas kushwaha :

    वर्ल्ड कप किसे समर्पित किया जाए इसकी चर्चा ज़ोर शोर से हो रही है, अरे भाई पहले जीतो तो सही.

  • 2. 19:33 IST, 15 फरवरी 2011 MOHDSHAMIMallahbad/saudia:

    अबकी बार इंडिया के लिए बहुत अच्छा चांस है, और सारे खिलाड़ी अपनी पूरी लय में हैं, इसके साथ अपनी ज़मीन पर वर्ल्ड कप जीतना एक रिकॉर्ड होगा. ऑल द बेस्ट.

  • 3. 19:38 IST, 15 फरवरी 2011 ब्रजकिशोर सिंह :

    रेहान भी विश्व कप में भविष्यवाणी करना खतरे से खाली नहीं होता.कौन-सा दिन किसका होगा कोइ नहीं जानता.फिर भी घासरहित पिच होने के कारण उपमहाद्वीप में भारत जरुर इस बार सबसे फेवरिट है.आपने सही कहा की धोनी कप्तानी के दबाव के चलते अपना खेल ही भूल गए हैं जो अच्छी प्रगति नहीं है, न तो उनके लिए और न ही भारतीय क्रिकेट के लिए.

  • 4. 19:50 IST, 15 फरवरी 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    रेहान साहब मेज़बानों की किस्मत चमके या न चमके बीबीसी हिंदी सेवा की किस्मत ज़रूर चमक जाएगी क्योंकि बीबीसी ने अपना ईमान,धर्म सब कुछ मेज़बानों के नाम कर दिया है.दिन रात बीबीसी पर मेज़बानों के ही क़सीदे पढ़े जा रहे हैं.थोड़ा सब्र तो करें.

  • 5. 20:11 IST, 15 फरवरी 2011 Farid Ahmad khan :

    रेहान साहब आपकी बातों से बिल्कुल सहमत हूँ कि धोनी को अच्छी कप्तानी के साथ अच्छा खेल भी दिखाना होगा. पूरी टीम को एकजुट होकर खेलना होगा. अगर अपनी धरती पर जीत हासिल की तो इतिहास बन जाएगा, जय हिंद.

  • 6. 22:53 IST, 15 फरवरी 2011 sHaHnNaWaZ aNwAr sintu , MUNGER (BIHAR):

    रेहान भाई,आपने सटीक टिप्पणी की है कि इंडिया को वर्ल्ड कप जीतना है तो सचिन और धोनी को न सिर्फ़ पुरानी लय में आना होगा बल्कि जुझारूपन से खेलना होगा.

  • 7. 23:20 IST, 15 फरवरी 2011 पवन कुमार पंकज:

    रेहान भैया,आपको उम्दा विश्लेषण व सटीक प्रस्तुति हेतु हार्दिक धन्यवाद कहता हूं.इस दफ़े भी भारत के विश्वकप जीतने की आस काफी बंध गई है.वर्तमान में जो विवाद चल रहे हैं उन सब से परे टीम इंडिया को बेहतरीन प्रदर्शन हेतु दबावरहित ध्यान केंद्रित करते रहना चाहिए.

  • 8. 23:44 IST, 15 फरवरी 2011 I. Hussain:

    रेहान साहब आपकी टिप्पणी पढ़ कर अच्छा लगा.सभी भारतीय यह ही चाहेंगे कि हमारा देश विश्व कप जीत कर हमारे महान खिलाड़ी तेंदुल्कर को समर्पित करे और धोनी को चाहिए कि तनाव को भूल कर अपनी पहली लय में मैदान पर उतरें.मुझे आशा है कि इस विश्व कप पर हमारा ही कब्ज़ा होगा.

  • 9. 14:42 IST, 16 फरवरी 2011 Suresh Kumar:

    मैं आपसे पूरी तरह सहमत हूँ रेहान.मैं भी चाहता हूँ कि धोनी अपना नैचुरल खेल खेलें लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वह हर गेंद पर चौके और छक्के ही लगाएं.हाँ ज़रूरत पड़ने पर उन्हें अपने स्वाभाविक शॉट खेलने चाहिए.

  • 10. 22:26 IST, 16 फरवरी 2011 jitendra pandey:

    आपके ब्लॉग से अच्छी लगती है रेडियो रिपोर्टिंग जिसमें आप जीवंत तसवीर खींच देते हैं.किंतु मार्च के बाद हम आपकी यह आवाज़ कहाँ सुनेंगे?

  • 11. 12:47 IST, 17 फरवरी 2011 ashish yadav:

    रेहान जी आपका तो अंदाज़ेबयाँ ही कुछ और है.चाहे ब्लॉग हो या फिर रेडियो पर गूँजती आपकी आवाज़.... लेकिन अफ़सोस कि कुछ दिनों बाद आपकी आवाज़ कम से कम रेडियो पर तो नहीं सुनने को मिलेगी.जहाँ तक टीम इंडिया का सवाल है हम सब चाहते हैं कि इंडिया चैंपियन बने लेकिन धोनी को पहले वाले रंग में लौटना होगा.इस बार टीम इंडिया पर दबाव है ही, कहीं ऐसा न हो कि इसके चलते टीम बिखर जाए और विश्व विजेता बनने का उसका सपना चूर चूर हे जाए.

  • 12. 13:52 IST, 17 फरवरी 2011 Ravi Yadav:

    रेहानजी धोनी को लेकर आपके सवाल का जवाब आपके कल के मैच में ही मिल गया होगा.मुबारक हो धोनी की वापसी.

  • 13. 14:35 IST, 17 फरवरी 2011 rakesh sharma:

    सुनना अच्छा लगता है पर पहले सेमी फ़ाइनल तो खेल लें.

  • 14. 20:42 IST, 17 फरवरी 2011 Pt.Pathak:

    पहली बार मैं किसी के विचारों से पूर्णतय: सहमत हो रहा हूँ.निश्चयत रूप से आप उत्तम कोटि के पत्रकार व क्रिकेट विचारक हैं.आपकी सेवाएं बीबीसी हिंदी के लिए अनुपम हैं.

  • 15. 21:24 IST, 17 फरवरी 2011 ACHINTYA KUMAR (KORBA):

    रेहानजी आपके मुँह में घी शक्कर.

  • 16. 10:21 IST, 18 फरवरी 2011 Jatin:

    रेहान फ़ज़ल जनाब लगता है आपको 1996 में हुए वर्ल्ड कप की जानकारी नहीं है जो श्रीलंका ने जीता था और वह उस वर्ल्ड कप में को होस्ट था.इसलिए मेरी सलाह तो यही है रेहान और बीबीसी को कि कोई भी ब्लॉग या लेख लिखने या छापने से पहले फ़ैक्ट्स देख लेने चाहिए.और रही बात वर्ल्ड कप जीतने की तो वर्ल्ड कप हिस्ट्री में पहली बार इतना ओपेन कॉन्टेस्ट है कि कोई भी टीम हॉट फ़ेवरेट नहीं है.भारत के अच्छे चाँसेज़ हैं पर हम दक्षिण अफ़रीका,ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को कम नहीं आँक सकते.न्यूज़ीलैंड और बाँगलादेश उलट फेर करने वाली टीमें बन सकती हैं और किसी भी टीम के अरमानों पर पानी फेर सकती हैं.

  • 17. 12:26 IST, 18 फरवरी 2011 Bhuwan Paneru:

    बहुत ही अच्छा लिखा है आपने.

  • 18. 19:55 IST, 18 फरवरी 2011 praveen singh :

    रेहान जी इस बार इतिहास बदलने वाला है और हमारी टीम वर्ल्ड कप ला रही है.

  • 19. 23:42 IST, 18 फरवरी 2011 Sheo shankar Pandey:

    क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें पहले से कुछ भी नहीं कहा जा सकता. वही टीम मैच जीतेगी जो सबसे अधिक पेशेवर तरीक़े से खेलेगी. भारत को जीतने के लिए अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन करना पड़ेगा. कोई भी टीम अपने दम और बेहतरीन प्रदर्शन से जीतती है, न कि लोगों के मन्नतों से.

  • 20. 07:42 IST, 19 फरवरी 2011 akash rai:

    क्रिकेट बाई चाँस खेल है.समय से पहले कुछ नहीं कहा जा सकता है.

  • 21. 02:12 IST, 21 फरवरी 2011 Anant singh, 1122 mukerjee nagar delhi-09:

    रेहान जी आपका ब्लॉग मैने दैनिक जागरण मे पहले पढा। आपने बेहतरीन विश्लेशण किया है। टीम को क्षेत्ररक्षण सुधारना होगा भारत को कप जीतने के लिए टीम भावना से एकजुट होकर खेलना होगा। टीम ने आग़ाज अच्छा किया है।
    धन्यवाद

  • 22. 17:26 IST, 22 फरवरी 2011 chinmay anand:

    मुझे लगता है भारत वर्ल्ड कप 2011 जीत लेगा. आप ही यह ख़ुशख़बरी देंगे.

  • 23. 01:13 IST, 28 फरवरी 2011 rohit:

    रेहान जी आप की बात ही दिल जीतने वाली है.

इस ब्लॉग में और पढ़ें

विषय

इस ब्लॉग में शामिल कुछ प्रमुख विषय.

BBC © 2014बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.