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जेपीसी: किस के लिए राहत, किस के लिए आफ़त?

सलमा ज़ैदीसलमा ज़ैदी|मंगलवार, 22 फरवरी 2011, 17:23 IST

यह हफ़्ता भारत के लोगों के लिए तीन बड़े फ़ैसले ले कर आया. हालाँकि इन तीनों मामलों का आपस में कोई संबंध नहीं है लेकिन पहले दो में एक बात समान है.

यानी कुछ को राहत और कुछ अन्य के लिए आफ़त.

मुंबई हमलों के दोषी पाए गए अजमल क़साब की मौत की सज़ा बरक़रार रही तो दो अन्य अभियुक्तों फ़हीम अंसारी और सबाउद्दीन शेख़ को अदालत ने दोषमुक्त क़रार दिया.

गोधरा मामले में अदालत ने 31 लोगों को दोषी माना और अन्य 63 को बरी किया.

ये फ़ैसले कुछ लोगों के लिए आँसू ले कर आए तो कुछ के लिए मुस्कान.

अब तीसरा बड़ा फ़ैसला-प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का 2जी स्पैक्ट्रम मामले की जाँच के लिए जेपीसी का गठन.

संयुक्त जाँच समिति के गठन के इस फ़ैसले का कुछ हलक़ों में स्वागत किया गया तो कुछ ने उदासीनता बरती.

वामदलों का कहना है, इसमें प्रधानमंत्री को धन्यवाद देने वाली कौन सी बात है. यह तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था.

इस फ़ैसले का एक सकारात्मक पहलू यह है कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी और बजट सत्र में व्यवधान नहीं पड़ेगा.

विपक्ष को संतोष है कि जेपीसी अपना काम करेगी और समय आने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

अब यह तो समय ही बताएगा कि फ़ैसला आने के बाद कितनी आँखों में आँसू होंगे और कितने होठों पर मुस्कान.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 18:31 IST, 22 फरवरी 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    सलमा जी सच पूछिए तो कुछ भी नहीं होने वाला है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने देश का बंटाधार कर दिया है. इसका कोई भी इलाज नहीं है.

  • 2. 20:10 IST, 22 फरवरी 2011 प्रांशु प्रियदर्शी :

    मुझे नहीं लगता की जेपीसी से कोई फायदा होने वाला है. ये बिलकुल राजीनीति से प्रेरित है.
    ये बहुत पहले होना चाहिए था लेकिन अब हुआ क्यूंकि अब इसके सभी जरूरी सबूत हटाये जा चुके हैं. वैसे भी भारत में आजतक किस पोलीटीशियन को सजा हुई है. सरकार ने इसे इसलिए मान लिया क्यूँकि इसरो में प्रधानमंत्रीजी का नाम आ चुका है. सरकार विरोधी पार्टी के खुश करने के लिए अब जेपीसी को मंजूर किया है ताकि ये लोग मामले को ज़्यादा नहीं उछाले. किसी पोलीटीशियन को कुछ नहीं होगा. इंडिया में सबकी मिलीभगत है. भोपाल गैस त्रासदी में ही किसका क्या गया. पोलीटीशियन अपनी रोटी तो आराम से सेक लेते हें,भुगतना तो आम आदमी को पड़ता है. बहुत से घोटालेदार नेता मस्ती कर रहे हैं. अगली बार जब सरकार बनाने के लिए डीएमके से जब समर्थन लेना होगा तो पहली शर्त होगी रजा की रिहाई और सरकार इसे हंसी खुशी मान भी लेगी.

  • 3. 20:14 IST, 22 फरवरी 2011 Dr.Lal Ratnakar:

    सलमा जी की चिंता वाजिब भी हो सकती है जेपीसी हो सकता है अपना हिस्सा वसूले और चुप हो जाये. वैसे भी इस देश में भ्रष्टाचार पर बात तो होती है, पर अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग, धर्म के आधार पर, वर्ग के आधार और जाती के आधार पर, सदियों के मानसिक सोच और अपराधिक उभर के आधार पर इन सबके आधार पर, हो सकता है कसाब भी बच जाये, फांसी की सजा से वह मर जायेगा मगर आतंकवाद को 'फांसी' कैसे दी जा सकती है, विचारनीय तो यह है.

  • 4. 20:52 IST, 22 फरवरी 2011 SHABBIR KHANNA,RIYADH,SAUDIA ARABIA:

    सलमाजी सत्ता पक्ष के नेता हों या विपक्ष के सभी चोर चोर मौसेरे भाई हैं और जेपीसी के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहे हैं. जहाँ तक गोधरा का सवाल है, भारत में पुलिस और व्यवस्था पर लोगों का भरोसा नहीं रह गया है. सच्चाई तो मालिक जानता है या फिर करनेवाले. कसाब के मामले में मुझे शक है कि उसे कभी फांसी हो पाएगी.

  • 5. 22:24 IST, 22 फरवरी 2011 SHAHNAWAZ ANWAR sintu, MUNGER (BIHAR):

    विपक्ष की जेपीसी की माँग से भले ही मामले की सच्चाई उजागर होने की उम्मीद हो, लेकिन इस बेतुकी माँग की न ज़रूरत थी और न ही उपयोगिता.जेपीसी की माँग से विपक्ष ने सीबीआई सहित अन्य दूसरी जाँच एजेंसियों की अहमियत ज़रूर कम कर दी है. कसाब के मामले में भले ही फैसला मौत का बरकरार रहा हो, लेकिन दुनिया को समझना होगा कि आख़िर क्यों लोग जान हथेली पर लेकर चलने को तैयार रहते हैं. जब जब हक़ और हकूक को दबाया जाएगा, लोगों में असमानता रहेगी, इंसाफ़ के नाम पर गालियाँ मिलेंगी तब तक ऐसी घटनाएँ होती रहेंगी.

  • 6. 00:49 IST, 23 फरवरी 2011 vikas kushwaha:

    जब जेपीसी का गठन करना ही था तो पहले क्यों नहीं किया. इससे पिछला सत्र सुचारू रूप से चलता, इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना चाहिए.

  • 7. 09:48 IST, 23 फरवरी 2011 ब्रजकिशोर सिंह :

    सलमाजी क्या किया जाए दुनिया जब ज्यादा दुनियावी होने लगती है तो मानवता के प्रति अपराध भी बढ़ जाते हैं.ऐसे में अपराधी को सजा तो मिलेगी ही लेकिन वह सजा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं भुगतता बल्कि उसके सगे-सम्बन्धी भी भुगतते हैं.अपराधी को अपराध करने से पहले ही इस पर सोचना चाहिए.जहाँ तक जेपीसी का प्रश्न है तो यह कांग्रेस-भाजपा का फिक्स मैच है क्योंकि दोनों ही दल के लोग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कोइ इसका पूरी तरह से खात्मा नहीं चाहता.

  • 8. 12:51 IST, 23 फरवरी 2011 BHEEM SINGH:

    सलमा जी, आप की लेखनी कुछ हद तक निष्पक्ष कही जा सकती है. सार संक्षेप यह कि मिल कर खाना, बैकुंठ में जाना. समझने वाले समझ गए और न समझे वो अनाड़ी है...

  • 9. 19:19 IST, 23 फरवरी 2011 himmat singh bhati:

    सलमा जी, किसी भी घोटाले या किसी बात को लेकर हंगामा खड़ा होता है तो उसकी जाँच सीबीआई से कराने की बात उठती है. पर भारत में सीबीआई के कारण किसी नेता को आज तक सज़ा नहीं मिली है. जाँच आयोग, कमीशन और कई कमेटियों की जाँच भी देख चुके हैं कोई नतीजा निकलता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है. शायद पहली बार जेपीसी का गठन किया गया है. लेकिन हमारे नेता सब हमाम में नंगे हैं.

  • 10. 11:22 IST, 24 फरवरी 2011 PRAVEEN SINGH:

    यह एक विडंबना है कि हमारा समाज सात ख़ून को या सत्तर हज़ार ख़ून को माफ़ भी करता है और जय जयकार भी करता है. मैं ऐसे लोगों को जानता हूँ, आप भी जानते होंगे. बड़ी शान से ये क़ातिल साफ़ धोती-कुर्ता पहन कर पान चबाते हुए फिरते हैं. समाज के लोग, पुलिस, जज, सब उनकी पूजा करते हैं. ये लोग भविष्य के चाचा, बापू, क़ायदे आज़म हैं. सीधी, सच्ची बात यह है कि ऐसे टाइप के लोगों की ही समाज में शोहरत, मान-सम्मान है.

  • 11. 14:55 IST, 24 फरवरी 2011 Sarfaraz Hajipur:

    जो लोग ज़्यादा बढ़-चढ़ कर जेपीसी की मांग कर रहे हैं वो लोग ख़ुद बहुत खा चुके हैं और जहाँ भी मौक़ा मिलता है छोड़ते नहीं हैं. इसका जीता जागता उदाहरण कर्नाटक की सरकार और रेड्डी बंधु हैं. मैं यह नहीं कहता कि सत्ता पक्ष चोर है. इन नेताओं और अधिकारियों के कुकर्म ने ही तो नक्सलवाद को जन्म दिया है.

  • 12. 20:26 IST, 24 फरवरी 2011 shyam kumar, Jamshedpur:

    पाँच सौ बयालीस लोगों को समझना मुश्किल होता लेकिन अब 2जी स्पैक्ट्रम स जुड़े लोगों के लिए 30 लोगों को समझना आसान हो जाएगा और शायद इसकी भी ज़रूरत न पड़े क्योंकि अगर 16-17 बी मान गए तो उनका काम निकल जाएगा. क्योंकि बहुमत तो उनके साथ होगा. आगे आप बातों को समझ ही रहे होंगे.

  • 13. 21:48 IST, 24 फरवरी 2011 Sheo shankar Pandey:

    जहाँ सीबीआई जैसी संस्था नकारा हो चुकी है वहाँ जेपीसी पर कैसे भरोसा करें?

  • 14. 15:04 IST, 25 फरवरी 2011 Niraj Kumar Dwivedi:

    अपराध और भ्रष्टाचार जो व्यक्ति पकड़ा जाता है उसे ही दोषी माना जाता है जबकि उसका परिवार और रिश्ते भी उससे फ़ायदा उठाते हैं. इसलिए उन्हें भी मुख्य अभियुक्त के साथ ही सज़ा दी जानी चाहिए.

  • 15. 21:57 IST, 27 फरवरी 2011 sunil lakhera:

    धन की बर्बादी कर रहे सांसद और मंत्री जनता की कमाई से उड़ा रहे हैं गुलछर्रे. इनको तो अंग्रेज़ों की तरह भगा दिया जाना चाहिए.

  • 16. 11:41 IST, 01 मार्च 2011 Zaik:

    सलमा जी जेपीसी और कसाब के मामले से आम जनता का कुछ भी लेना देना नहीं है। उसे तो अपने परिवार के लिए किसी भी तरीके से दो वक्त की रोटी चाहिए। जहां तक कसाब को फांसी का सवाल है यह तो बात तय है कि उसे फांसी नहीं लगने वाली है। क्योंकि अभी तो सुप्रीम कोर्ट में है, और वहां यह फैसला इतनी आसानी से हल नहीं होने वाला है। इसके बाद पाकिस्तान में भी उसपर मुकदमा चल रहा है, और वहां वह मतलूब है। और पाकिस्तान इस मामले को सुलझाने की मूड में भी नहीं है। वह तो चाहेगा की कसाव को फांसी हो जाए। इसको फांसी दी जाए कि नहीं, इसके लिए भी जेपीसी का गठन करना पड़ेगा। 2जी स्पैक्ट्रम की जांच के लिए जेपीसी का गठन विपक्ष की ऐसी मांग थी जिसको सरकार ने मान लिया। क्या इससे घोटाले का पर्दाफास हो सकेगा। हमें तो उम्मीद नहीं है। इस बार कांग्रेस सत्ता में है फिर कांग्रेस की सत्ता जाएगी तो किसी भी घोटाले के बाद विपक्ष की मांग इतनी ज़ोरदार होगी कि जेपीसी का गठन करना पड़ेगा। क्या इसी तरह यह नेता लोग बंदरबांट करते रहैंगे। और जनता का कुछ भी भला होने वाला नहीं है। जेपीसी के गठन ने इस बात के साबित कर दिया कि भारत की सभी इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसियां सत्ता पक्ष का फेवर करती है। और उसी के इशारे पर काम करती है।

  • 17. 00:35 IST, 06 मार्च 2011 Farid Ahmad khan :

    सलमा जी, देखना कुछ भी नहीं होगा. चोर-चोर मौसेरे भाई.

  • 18. 15:53 IST, 23 मार्च 2011 krishna kumar:

    सलमा जी नमस्कार. मैं 1997 से बीबीसी का श्रोता हूँ लेकिन पहली बार ईमेल भेज रहा हूँ. जिस तरह लाश को घर में नहीं रखा जाता उसी तरह जो आदमी अपना जीवन ख़ुद जी नहीं सके उन्हें ज़िंदा रखने का कोई फ़ायदा नहीं.

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