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सब भारत की ज़िम्मेदारी है!

रेणु अगालरेणु अगाल|बुधवार, 08 सितम्बर 2010, 17:33 IST

भारतीय उपमहाद्वीप में जो कुछ ख़राब हो रहा वो भारत की वजह से हो रहा है.

देखिए ना, पाकिस्तान में खिलाड़ी लालच में फंस गए, खेल खेल में मैच फ़िक्स कर गए. बेचारे क्या करते ..वे एसा करने को मजबूर हुए क्योंकि वो भारतीय खिलाड़ियों जैसे लकी नहीं है, उनके पास आईपीएल समान कमाऊ गाय नहीं है.

फिर उनकी भी तो ज़रुरतें हैं- उन्हें भी तो बड़ी कार, बंगला, मोटा बैंक अकाउंट चाहिए. शोहरत और फ़ैन्स से कोई ये ज़रुरतें पूरी होती हैं भला.

युवाओं की नज़र में भी वो हीरो हैं...पर भाई सबसे बड़ा तो है रुपैय्या. और रुपये के तार भारत से जुड़े हैं.

सबसे बड़े सटोरिए यहां हैं और उनको कोई कुछ नहीं कह रहा, पकड़ नहीं रहा. बड़ी नाइंसाफ़ी है.

और तो और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को निलंबित भी भारत के पावरफुल पवार के कहने पर किया गया!

सच, पाकिस्तान में इसकी चर्चा है. भारत में, हाल में बंग्लादेश को एक अरब डॉलर ऋण पर सहमति की तो विपक्षी नेता खालिदा ज़िया का कहना था कि शेख़ हसीना सरकार ने देश हित भारत को बेच दिया.

चुनाव के वक़्त भी उन का आरोप था कि खालिदा ज़िया भारत की कठपुतली हैं. नेपाल में भी चर्चा है कि भारत का हाथ हर ओर है.

प्रधानमंत्री नहीं चुना जा रहा क्योंकि भारत से जुड़ी ताक़तें मधेसी पार्टियों को वोट देने से रोक रही हैं.

अब श्रीलंका में देखिए तमिल टाइगरों ने भारत की मदद से कितने दिनो तक अस्थिरता बनाए रखी. और तो और मूलत: तमिल भारत के निवासी हैं. ये अलग बात है कि भारत ने एक पूर्व प्रधानमंत्री उनके हाथ खोया भी है.

तो कुल मिला कर बात ये कि भारत है सबसे बड़ा दोषी. शायद उसका सबसे बड़ा दोष ये है कि वो यहां है!

पर एक अच्छी बात इस सारी बहस में ये हो सकती है कि भारतीय ये सोच के संतुष्ट हो जाएँ कि वो कितने महत्वपूर्ण हैं, कि उनके इशारे पर उपमहाद्वीप की दुनिया घूम जाती है. अब भला अंधेरे में रोशनी खोजने में क्या बुराई है.

टिप्पणियाँटिप्पणी लिखें

  • 1. 18:14 IST, 08 सितम्बर 2010 gurpal singh:

    बहुत बढ़िया. शुक्रिया रेणु जी.

  • 2. 18:58 IST, 08 सितम्बर 2010 Dinesh DDN:

    ये सब वही लोग हैं जो अपने देश में अपनी नाकामयाबी से चिढ़कर सारा दोष भारत पर मढ़ देते हैं. जब उनका पोल दूसरे देश की मीडिया खोलती है तो उनके हाथ-पैर फूल जाते हैं. ऐसे में आश्चर्यजनक रूप से उनका स्वर बदल जाता है. जैसे ब्रिटेन में एक अखबार ने आईसीसी में पाकिस्तान को बुरी तरह से बेइज्जत किया, नेपाल में चीन ने भारत विरोधी पार्टी को पैसा दिया, इसे वहाँ के एक अख़बार ने उजागर किया. इससे वहाँ के लोग अपने ही नेताओं के खिलाफ़ हो गए. जबकि यह असफल नेता चुनाव में भारत विरोधी भाषण देकर वहाँ की सत्ता में बैठे हैं.

  • 3. 18:59 IST, 08 सितम्बर 2010 Dhananjay:

    अगर कल पाकिस्तान में भूकंप भी आ जाए तो पाकिस्तान की मीडिया इसके लिए भारतीय एजेंसी रॉ को ज़िम्मेदारी बताएगी.

  • 4. 19:09 IST, 08 सितम्बर 2010 uday:

    बहुत प्रभावशाली पोस्ट.

  • 5. 19:16 IST, 08 सितम्बर 2010 bal krishan kailey:

    रेणु जी मुझे और किसी का तो पता नहीं पर आपने मेरे मन की बात कह डाली है. मैंने आपके ही एस साथी पत्रकार के ब्लॉग पर कमेंट किया था जिसका जवाब आपने दे दिया. बहुत अच्छा भारत ही है जो सारे ग़लत काम कर रहा है.

  • 6. 20:56 IST, 08 सितम्बर 2010 muke:

    आपको यह जानना चाहिए कि भारत का एक भी पड़ोसी देश उससे ख़ुश नहीं है. यह तब है जब भारत उनको बहुत अधिक पैसा दे रहा है. हमारे पड़ोसियों के साथ चीन के अच्छे संबंध क्यों है? क्या किसी ने इसके बारे में सोचा है. मुझे लगता है कि अपने स्वाभिमान के लिए हमें शांति पर ध्यान देने की ज़रूरत है.

  • 7. 21:01 IST, 08 सितम्बर 2010 Nare:

    आप भारतीय लोगों के किसी के साथ अच्छे संबंध हैं क्या? अगर नेपाल का राजदूत आकर भारत की मीडिया को गाली दे तो आप क्या करेंगे? भारत अपने आपको बहुत ताक़तवर समझता है लेकिन चीन का नाम सुनते ही उसकी हालत खराब हो जाती है. किसी और के घर में आग लगाने से पहले आप अपना घर संभालो.श्रीलंका में आग लगाया था तो क्या हुआ था, पता है न. भारत को दक्षिण एशिया का अमरीका बनने का सपना छोड़ देना चाहिए.

  • 8. 21:24 IST, 08 सितम्बर 2010 Udai Raj Rajbhar:

    ये पाकिस्तान के कर्म हैं कि आज उसे ऐसे दिन देखने पड़ रहे हैं. भगवान आपको भी अक्ल दें.

  • 9. 21:46 IST, 08 सितम्बर 2010 dr.ratndeep nigam:

    रेणू जी नमस्ते, आपने सही लिखा है लेकिन हमारे देश पर पिछले 60 साल से राज कर रहे ठेकेदारों को यह बात समझ में आए तब तो.

  • 10. 21:51 IST, 08 सितम्बर 2010 Mukunda:

    तो क्या आपका आशय यह है कि भारत केवल अपने पड़ोसियों के लिए अच्छा कर रहा है? कृपया यह पता लगाएँ कि डाबर नेपाल में जूस के नाम पर क्या बेच रहा है और इसके लिए भारतीय राजदूत क्या कर रहे हैं.

  • 11. 23:18 IST, 08 सितम्बर 2010 Sugriv Mehla:

    मुझे यह बेहद बेकार लेख लगा.

  • 12. 23:57 IST, 08 सितम्बर 2010 Alam:

    हमें इसमें सुधार करने की ज़रूरत है कि भारत के बारे में केवल उसके पड़ोसी ही न बातें करें. अगर हमें सुपर पॉवर बनना है तो, पूरी दुनिया को हमारे बारे में बात करना चाहिए, जैसा कि हम अमरीका के बारे में करते हैं.

  • 13. 01:01 IST, 09 सितम्बर 2010 singh:

    चलो कोई तो है जो इलज़ाम लगाकर हमारा नाम कर रहा है, शुक्रिया रेणु जी

  • 14. 02:56 IST, 09 सितम्बर 2010 Akash:

    जी, बिल्कुल सही बात है. अपने अहम की तुष्टी के लिए भिखारी हमेशा अच्छी जगह ही थूकते हैं.

  • 15. 04:05 IST, 09 सितम्बर 2010 ALTAF HUSAIN, AMBEDKAR NAGAR, UP:

    वाह क्या बात है.

  • 16. 05:18 IST, 09 सितम्बर 2010 Neeraj Kumar Sharma:

    सही कहा रेणु जी आपने, अगर आप पाकिस्तान के टीवी चैनल में जायद हामिद और हमीद गुल की बातें सुनेंगी तो पता चलेगा कि आज वहाँ जो बाढ़ आई है उसमें भी भारत का ही हाथ है. ये लोग कहते हैं कि भारत पाकिस्तान को पानी के बिना और पानी से मारना चाहता है. लेकिन यह बात समझ से परे हैं कि नेता लोग अपनी कमियों को छुपाने के लिए क्यों सारा दोष दूसरे देश पर मढ़ देते हैं. यह बात भारत में भी होती है.

  • 17. 08:12 IST, 09 सितम्बर 2010 Devesh Kumar Pandey:

    हमारे देश की सरकार तो सुधरने वाली नहीं है, नहीं तो ऐसे मुद्दे क्यों उड़ाए जिसका कोई हल न हो.

  • 18. 10:14 IST, 09 सितम्बर 2010 sanjay suman:

    रेणु जी, आप ब्लॉग पर जो भी लिखती हैं, वह काफी प्रभावशाली होता है.

  • 19. 11:46 IST, 09 सितम्बर 2010 निखिल आनंद गिरि:

    लंदन से बीबीसी चल रहा है, इसमें भी भारत का ही हाथ है.

  • 20. 12:12 IST, 09 सितम्बर 2010 Bhaskar Karn:

    भारत के पड़ोसियों की समस्या यह है कि वे कभी भारत के ही हिस्से थे. वे अपनी पहचान के लिए जूझ रहे हैं. अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो एक बार फिर वे भारत का हिस्सा बन जाएँगे. इसका समाधान यह है कि इस क्षेत्र के देश एक बार फिर एक हो जाएँ. यह सबके हित में होगा.

  • 21. 12:59 IST, 09 सितम्बर 2010 susheel mishra:

    रेणु जी, आपने व्यंगात्मक शैली में ही सही विश्व पटल पर भारत के बढ़ते प्रभाव को दिखाने का प्रयास किया है. इसके लिए आपको साधुवाद.

  • 22. 14:31 IST, 09 सितम्बर 2010 Udai Raj Rajbhar:

    खिंसियानी बिल्ली खंभा नोचे.

  • 23. 16:07 IST, 09 सितम्बर 2010 Ankit Kumar Singh:

    आप लोग हर मामले में भारत को दोष देते हैं. आप जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद कर देते हैं.

  • 24. 18:44 IST, 09 सितम्बर 2010 RAHUL TRIPATHI S.EDITOR PRABAT:

    आईसीसी को दागी खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने चाहिए.

  • 25. 19:16 IST, 09 सितम्बर 2010 harsh kumar:

    मुल्क़ से नौकरी है दूर, चलो भारत को कोसा जाए. चलो, बेरोज़गार मीडिया को इसी बहाने रोज़गार तो मिल जाता है, वरना हमारे पड़ोसी देश आतंकवाद का इल्ज़ाम झेल झेलकर बोर हो चुके होते!

  • 26. 19:02 IST, 10 सितम्बर 2010 Vinay:

    शानदार ब्लॉग.

  • 27. 22:25 IST, 12 सितम्बर 2010 Rashmi singh:

    हमारे राजनेता और हम खुद देश की हालात के लिए जिम्मेदार हैं. राजनेता तो सत्ता पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं लेकिन हम भारतीय चुप रहना बेहतर समझते हैं.

  • 28. 19:10 IST, 15 सितम्बर 2010 Digesh kumar sharma:

    देश में बेईमानी बढ़ रही है. चोर नेता बन रहे हैं. देश का पैसा बाहर भेजा जा रहा है, हम कुछ कर नहीं सकते. पूरा तंत्र ही भ्रष्ट लगता है. एक चोर दूसरे को बचा लेता है.

  • 29. 01:50 IST, 22 सितम्बर 2010 Farid Ahmad khan , Saudi Arabia:

    वाह बहुत अच्छा. आपका ब्लॉग पसंद आया. धन्यवाद.

  • 30. 15:55 IST, 06 दिसम्बर 2010 उमेश यादव:

    रेणु जी, भारत की सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह बेहद शांत राष्ट्र है। गांधी बाबा के विचारों पर आज भी चल रहा है। अगर उसने बांग्लादेश को आजाद कश्मीर की अपने जूते की नोक पर रखा होता तो वहां से चूं की आवाज न आती। नेपाल को एक जमाने से पाल रहा है पर उसने कभी आंख नहीं दिखाई....यह हमारी कमजोरी है। पाकिस्तान तो ऐसा जूताखोर है जिसे अब नंगा कहा जा सकता है और नंगे से खुदा भी डरता है। श्रीलंका को अगर लगातार लतियाते रहते तो वह भी काबू में रहता। पर हम क्या करें......गांधी बाबा हमारी आत्मा में घुस चुके हैं......शांति के दूत के नाम पर हम सिर्फ कायरता दिखाते हैं। आपका लेख बहुत आकर्षक है।

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