क्रिकेट का सबसे काला दिन?
जबसे कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर स्पॉट फ़िक्सिंग के आरोप सामने आए हैं, कहा जा रहा है कि यह क्रिकेट के इतिहास का सबसे काला दिन है.
मीडिया का कवरेज हो, राजनेताओं के बयान हों क्रिकेट से प्यार करने वालों का गुस्सा, ऐसा लगता है जैसे कोई अनहोनी हो गई हो. कुछ ऐसा हो गया है जो पहले कभी नहीं हुआ या जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
पाकिस्तानी खिलाड़ी 90 के दशक से मैच फ़िक्सिंग के आरोपों से घिरे रहे हैं. साल 2000 में दक्षिण अफ़्रीका और भारत के कुछ खिलाड़ियों की भूमिका भी बेनकाब हुई और ऑस्ट्रेलिया जैसी दूसरी टीमों के कुछ खिलाड़ियों के नाम भी समय-समय पर बुकीज़ से संबंधों के सिलसिले में लिए गए हैं.
ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतना हंगामा क्यों हो रहा है? बुनियादी बात यह है कि क्रिकेटर्स भी उसी समाज का हिस्सा हैं जिसमें हम और आप सांस लेते हैं और उसकी अच्छाइयों और बुराइयों से वे उसी तरह प्रभावित होते हैं, जैसे बाकी लोग.
इन बाकी लोगों में कौन आता है? राजनेता? सरकारी कर्मचारी? खिलाड़ी? जिन लोगों पर भ्रष्टाचार की वजह से पाकिस्तान से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा था, उनकी सूची कितनी लंबी थी? कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई?
भारतीय उपमहाद्वीप में कितने नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुक़दमे दर्ज हैं? कितने लोगों को सज़ा दी गई? और सेना के अधिकारियों का क्या? उन्होंने तो पाकिस्तान में लंबे समय तक देश और क्रिकेट दोनों की बागडोर संभाली है.उनकी कारस्तानियों से क्यों किसी का सिर शर्म से नहीं झुकता है?
क्रिकेट खिलाड़ियों को भी इसी पैमाने पर तौला जाना चाहिए. सिर्फ उनसे ही पाक-साफ़ होने की उम्मीद करना कहाँ तक उचित है?
मेरा मानना यह है कि इस मामले को समग्र रूप से देखा जाना चाहिए, क्योंकि हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ भ्रष्टाचार को अब उस घृणित निगाह से नहीं देखा जाता, जैसे शायद चालीस-पचास साल पहले देखा जाता था.
अगर खिलाड़ी कसूरवार साबित हों तो सख्त सज़ा मिले. लेकिन इसके साथ ही यह पैगाम भी दिया जाए कि निजी प्रतिष्ठा और दौलत के लिए खेलने वाले कुछ खिलाड़ियों को राष्ट्रीय सम्मान का ध्वजवाहक नहीं माना जा सकता है.
उनके एक छक्का लगाने से देश का सिर गर्व से ऊँचा नहीं हो जाता और उनकी बेईमानी से शर्म से झुकना नहीं चाहिए. मेरे लिए यह क्रिकेट के इतिहास का सबसे काला दिन नहीं था. ऐसा पहले भी कई बार हुआ है और अगर ये आरोप दुरुस्त हैं कि बात खिलाड़ियों से आगे तक जाती है तो, यह भविष्य में भी होता रहेगा.

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क्रिकेट को राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाना चाहिए. खिलाड़ी तो प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी हैं, कोई सेना के जवान नहीं हैं कि जिनके हारने से देश हर जाए. पाकिस्तान का विरोध करने वालों को अपनी भी गिरेबान में झांकना चाहिए. लोग बेवजह भी पाकिस्तान का विरोध करते हैं.
अब तो भ्रष्टाचार, बेशर्मी, जालसाज़ी, इत्यादि करना सर उठाकर जीने की बात हो गई है. शर्म तो उनको आनी चाहिए जो यह सब नहीं कर सकते हैं.
बहुत अच्छा लिखा है सर आपने.
श्रीमान जी, मैं आपकी इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखता कि राजनेता और कर्मचारियों के समान ही खिलाड़ी भी होते हैं. मेरा मानना है कि आज के समय में किसी भी अच्छे नागरिक का आदर्श को कोई राजनेता या कर्मचारी नहीं होता है लेकिन खिलाड़ी ज़रूर होते हैं.
मैं आपसे सहमत हूँ.
श्रीमान जी, लगता है कि आपका ज्ञान कम है, जितने भी लोग मैच फ़िक्सिंग में शामिल पाए गए हैं उन पर कार्रवाई हुई है. जड़ेजा, अजहर, प्रभाकर और क्रोनिए इसके उदाहरण हैं. लेकिन अगर आप जैसे लोग रहेंगे तो आपको सभी चीजें जायज दिखेंगी.
आपने सही लिखा है. लोग बेवजह क्रिकेट के पीछे पागल हैं. कुछ रचनात्मक तो करना नहीं है, तो क्रिकेट-क्रिकेट करते रहते हैं.
सुहैल साहब, आपके विचार अलग ज़रूर हैं लेकिन सच्चाई के करीब हैं.
सुहैल साहब आपकी चिंता वाजिब है! ये खेल ही गड़बड़ झाला बनकर रह गया है?
जब तक सरकार नहीं सुधरेगी, तब तक समाज नहीं सुधरेगा. क्रिकेट बोर्ड में फैले भ्रष्टाचार को दूर करना होगा.
सुहैल साहब, मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं.
क्रिकेट में सट्टेबाज़ी देशद्रोही से कम नहीं है, लेकिन आज तक किसी को सज़ा नहीं मिली. भारत की बात करें तो अज़हरुद्दीन का नाम भी सट्टेबाज़ी में सामने आया था लेकिन आज वो सदन की शोभा बढ़ा रहे हैं और अजय जडेजा मीडिया की.
एक सबक के रूप में इसे लेते हुए हमें क्रिकेट से माफिया को खत्म करना चाहिए. हमें ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई खिलाड़ी देश की प्रतिष्ठा को दांव पर नहीं लगाए.
मैं आपकी बातों से सहमत हूँ. सब आँखें बंद करके क्रिकेट का समर्थन करते हैं, ये ग़लत है.
जनाब मैं आपसे बिलकुल इतेफ़ाक रखता हूँ. आखिर खेल से देश की शान को क्यों जोड़ा जाता है. ये खेल भी एक धंधा है. सब खिलाड़ी अपना भला सोचते हैं. इसे देश और धर्म से जोड़ कर नहीं देखना चाहिए.
सुहैल साहब, आप खिलाड़ियों के गलत काम को समर्थन दे रहे हैं. यह कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता. कृपया खिलाड़ियों के इस कृत्य को राजनेताओं से जोड़ कर मत देखिए. खेल को भ्रष्टाचार से मुक्त होना चाहिए.
मै आपकी बात से सहमत नहीं हूँ. श्रीमान जी क्योंकि अपराध अपराध होता है, उसे चाहे कोई भी करे. सज़ा तो उसे मिलनी ही चाहिए. हम कभी खिलाडी से ऐसी अपेक्षा नहीं करते, भले ही यह काम किसी खिलाडी ने किया हो पर नाम तो देश का ही आ रहा है.
पहली बात तो यह कि आपको यह स्वीकार करना चाहिए कि पाकिस्तान की टीम मैच फ़िक्सिंग की दोषी पाई गई है. मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि आप उसकी वकालत क्यों कर रहे हैं? पाकिस्तान के खिलाड़ी पैसे के भूखे हैं और उनके अंदर शर्म नाम की कोई चीज नहीं बची है. लेकिन अगर आपके अंदर भी थोड़ी शर्म हो तो उनका समर्थन नहीं करना चाहिए. आईसीसी ने उनपर प्रतिबंध लगाकर अच्छा काम किया है. आईसीसी को आजीवन उनके खेलने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए.
किसने जुर्म किया ये बात अहम नहीं है. महत्वपूर्ण है कि जुर्म करने वालों तो समाज और देश का कानून सजा देता है या नहीं. उसको मिला सम्मान वापस लेता है या नहीं.
मुझे ये ब्लॉग पढ़ कर दुख हुआ. कुछ ऐसा कीजिए की भ्रष्ट्राचार में कमी आए.
मैं बहुत ख़ुश हूँ.