शरद पवार जी के नाम पत्र!
ट्वेन्टी-20 विश्व कप में भारत की हार पर हो रही हाय-तौबा को देखते हुए मैंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के उपाध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई में प्रभाव रखने वाले माननीय शरद पवार जी को एक खुला पत्र लिखने का फ़ैसला किया है.
आदरणीय शरद पवार जी,
आप जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की कमान सँभालने वाले हैं और क्रिकेट में.... नहीं-नहीं क्रिकेट के प्रशासन में जिस तरह का भारत का रुतबा है उसे देखते हुए मैं खेल में कुछ बदलाव की ज़रूरतों की ओर आपका ध्यान खींचना चाहूँगा.
भारत की एक अरब से अधिक की आबादी क्रिकेट के प्रति दीवानी है और अपना सब काम-धाम छोड़कर क्रिकेट में लगी रहती है, ऐसे में उसकी भावनाओं का ध्यान तो रखा ही जाना चाहिए.
- भारत के खिलाड़ियों को आईपीएल के तुरंत बाद हो रही प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पिछले साल इंग्लैंड और इस साल वेस्टइंडीज़ जाना पड़ा. इस तरह की यात्राओं से टीम थक जाती है. इसके अलावा इन देशों से कहीं ज़्यादा दर्शक स्टेडियम में भारत में पहुँचते हैं इसलिए विश्व कप जैसी प्रतियोगिताएँ अब से सिर्फ़ भारत में ही कराई जाएँ तो अच्छा रहेगा.
- उन देशों में जाने में एक और परेशानी है कि वहाँ कि कई पिचें उछाल वाली होती हैं इसलिए भारत हार जाता है और टूर्नामेंट से रुचि लोगों की ख़त्म हो जाती है.
- इसके अलावा उन देशों के मैचों के टाइम भारतीय टाइम से बिल्कुल मेल नहीं खाते और लोगों को देर रात तक जगकर मैच देखना पड़ता है.
- भारत के मैचों में बाउंड्री आईपीएल की ही तरह छोटी रखी जाए क्योंकि भारतीय खिलाड़ी उस तरह के मैदानों पर लोगों का अच्छा मनोरंजन कर सकते हैं.
- अन्य देशों के खिलाड़ियों को भारतीय खिलाड़ियों को शॉर्ट पिच गेंद डालने पर रोक लगा दी जानी चाहिए.
- आईपीएल के मालिकों को एक दिशानिर्देश जारी किया जाए. उन्हें अपनी टीमों में खेलने वाले खिलाड़ियों से एक और कॉन्ट्रैक्ट साइन कराना होगा. इसके तहत उनकी टीमों में खेलने वाले विदेशी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत के विरुद्ध नहीं खेलेंगे. इससे लसिथ मलिंगा, शेन वॉटसन, क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों से भारत को कुछ राहत मिल सकती है.
- फ़ील्डिंग में भारत पर शुरुआती ओवरों के जो नियम-क़ानून हैं वो लागू नहीं होने चाहिए.
भारत की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को और भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड को जितना आर्थिक फ़ायदा हुआ है उसके बाद कम से कम इतना तो भारत के लिए किया ही जा सकता है.
इसके बाद आप भी निश्चिंत होकर अपने मंत्रालय पर ध्यान लगा सकेंगे क्योंकि शायद तब भारत में हार जैसे विषय पर कोई हंगामा नहीं होगा और न ही आपको इस बारे में चिंता करनी पड़ेगी.
धन्यवाद-
मुकेश

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मुकेश जी आपने बहुत ही अच्छा लिखा है. आपका ये ब्लॉग पूरी तरह से हास्य से भी भरा हुआ है. अगर आप को इसपर शरद जी की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है तो उसे भी पाठकों से बांटें.
बहुत ही बढिया सुझाव है. इसकी वजह से दूसरे खेल की तरफ़ भी लोगों की रुचि बढ़ेगी. क्योंकि लोगों को पहले ही मालूम रहेगा कि जीत भारत की होगी. क्रिकेट के प्रति दीवानगी का ख़ामियाज़ा दूसरे खेलों को भुगतना पड़ता है. साथ ही शरद पवार महंगाई पर भी नियंतत्रण नहीं कर पाते. देश के ग़रीबों को भूखे सोना पड़ता है. देश में यदि क्रिकेट के प्रति लोगों की ऐसी दीवानगी है तो मंत्री होने और क्रिकेट में अपने रसूख़ का इस्तेमाल करते हुए शरद पवार को इतना करना चाहिए कि क्रिकेट से जुड़े प्रत्येक लोग को विज्ञापन दिलाया जा सके.
मुकेश जी आपने बहुत ही शानदार और सच्चा पत्र लिखा है. लेकिन मेरा सवाल यह है कि बीबीसी क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों पर कितना ध्यान देती हैं?
बहुत ही अच्छा लिखा है. शर्म आती है इतना बड़ा देश, क्रिकेट की दीवानी जनता और फिर ये है हाल. लेकिन इसका कारण है कि हार जाने पर कोई पूछने वाला तो है नहीं, फिर डर किस बात का. धोनी को देश के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए. इस मामले में हमसे अचछा पाकिस्तान है जो हार जाने के बाद टीम की खींचाई करता है. काश धोनी इस लेख को पढ़ें ताकि अक़लमंदी से काम लें और विश्व कप में भारत को शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़े और कप अपनी सरज़मीन पर आ सके.
मुकेश जी आपने तो धोनी के हां में हां मिला दिया है. धोनी को यह स्वीकार करना चाहिए कि आईपीएल के कारण हार हुई है, लेकिन इस बात का उन्होंने ज़िक्र तक नहीं किया. खिलाड़ियों को अपने फ़िटनेस पर ध्यान देना चाहिए. हमारा देश बहुत बड़ा है और जो खिलाड़ी अच्छा नहीं खेल रहे हैं उन्हें मौका नहीं दिया जाना चाहिए.
क्या भाई, आप भी लग गए उन लोगो के लाइन में जो एक मैच में जीत के बाद तारीफों के पूल बांध देते हैं, और कुछ मैच हारने के बाद ..... अरे वही जो आप कर रहे हैं :), प्रदीप मैगज़ीन साहब से कुछ सीखिए जिनका एक ही काम है बस आईपीएल की खिचाई करते रहो. अब सौ बात में एक बात तो लग ही जाएगी...आप देखना जल्दी ही वो अपनी बात समझाते हुए कहेंगे कि ये तो उन्होंने पहले ही कहा था ...कहाँ से कहाँ चला आया, चलिए वापस आता हूँ पुर्णतः आदर्श विचारधारा के साथ खेल को खेल ही रहने दो ...और इसमें तो हार जीत लगी ही रहती है..
मुकेश जी, यह बहुत शर्मनाक है कि भारतीय टीम लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप से बाहर हो गई है. आईपीएल को कभी भी टी20 विश्व कप से पहले नहीं खेला जाना चाहिए.क्योंकि इससे खिलाड़ी काफ़ी थक जाते हैं. हमारे खिलाड़ी विश्वस्तरीय है लेकिन पता नहीं क्यों विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में अच्छा नहीं खेल पाते हैं? अगर वे आईपीएल में जीतने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा देते हैं तो ऐसा विश्व कप में क्यों नहीं कर पाते हैं? मैं भारतीय टीम के प्रदर्शन से बहुत दुखी हूँ. क्या वे सुधार कर पाएंगे?
मैं आपकी माँगों का बिना शर्त समर्थन करता हूँ.
टीम के खिलाड़ियों को बदलकर नए लड़कों को मौका देना चाहिए.
बढ़िया है मुकेश जी, किसी को तो शुरुआत करनी ही चाहिए. एक पत्रकार करे तो सोने पर सुहागा. तो क्यों न नाम भी बदला जाए? क्रिकेट की जगह डब्ल्यूडब्ल्यूई कर दिया जाए, सब कुछ दिखावा बस दर्शक ही असली हों.
मुकेश जी,अब तक लिखे ब्लॉग में मुझे यह सबसे ज्यादा मजेदार और पूर्णरूप से सही तरह से किया गया व्यंग लगा. इसमें साफ तौर पर भारतीय क्रिकेट के गिरते स्तर का और क्रिकेट प्रेमियों की निराशा और गुस्से का सही तरह आकलन किया गया है. पर मुझे उम्मीद थी कि अगर आप पवार साहब और बीसीसीआई को जगाना या समझाना या फिर कुछ पूछना चाहते है, तो आपको ट्वीटर का इस्तेमाल करना था. क्योंकि आजकल वे इसे बहुत ध्यान से पढ़ते हैं,
अरे आपने तो कमाल ही कर दिया. शरद पवार जी को लिखे खुले पत्र में भारतीय टीम की पीठ खुजाकर, अभी तक मैंने भाजपा, कांग्रेस, मायावती और अन्य राजनेताओं को लाभ पाने के चक्कर में एक दूसरे की पीठ खुजाते देखे हैं. लेकिन आप इस लाइन में कब से? क्या मिलेगा आपको भारतीय टीम से. या सिर्फ़ हमें हसाने के लिए कुछ मजेदार पेश कर रहे हैं. लेकिन इसके लिए क्रिकेट ही क्यों अन्य खेल क्यों नहीं.
मुकेश जी बहुत ही उम्दा और सटीक व्यंग है. लेकिन जब हमारे खिलाड़ी और बोर्ड के सदस्य चिकने घड़े की तरह हो जाएँगे तो कुछ असर तो पड़ने वाला नहीं है. आपकी ओर से शरद पवार को लिखा पत्र काफी अच्छा लगा. आज क्रिकेट की जो दुर्गती हो रही है उसमें सिर्फ़ खिलाड़ियों का दोष नहीं है. इसके लिए बोर्ड के सदस्य और सरकार बराबर रूप से ज़िम्मेदार है. क्योंकि सरकार को भी खिलाड़ियों से बहुत अधिक राजस्व मिलता है. इसलिए खिलाड़ियों का कार्यक्रम कितना भी टाइट क्यों न हो सरकार भी उधर से आँखें बंद रखती है. आज अगर हम सब भारत में क्रिकेट को सही मायने में बचाना चाहते हैं तो इसके लिए पूर्व क्रिकेट खिलाड़ियों को आगे आना होगा. बोर्ड को भी अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरी तरह निभाना होगा. तब जाकर क्रिकेट का भला होगा. आज क्रिकेट से दुनिया का भला हो रहा है लेकिन हम क्रिकेट का ही गला काट रहे हैं. यह तो वही कहावत हो गई कि जिस पेड़ पर बैठे हैं उसी का डाल काट रहे हैं.जब भारत में क्रिकेट का भला नहीं होगा तो क्रिकेटर और इससे जुड़े लोगों का किस तरह से भला होगा.
मुकेश जी आपने पवार पर जो कटाक्ष किया है वह काबिलेतारीफ है. आपका यह लेख बताता है कि किस तरह भारतीय क्रिकेट केवल पैसे का खेल बनकर रह गया है.
मुकेश, अगर मैं शरद पवार होता तो आप को इस पत्र का उत्तर भी इसी रुप में देता जिस भावुक रुप में आपने पत्र लिखा है, क्रिकेट एक खेल है और आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि हर मैच मैं भारत की जीत हो, हारना और जीतना क्रिकेट का हिस्सा समझा जाता आप पता नहीं किस युग की बात कर रहे हैं जिसमें आप चाहते हैं कि बस जीते तो भारत जीते और वो भी वार्मअप मैच से लेकर सब मैचों में बाकी कोई आगे ना हो सिर्फ़ भारत हो सोच तो आपकी सही है, हमारे यहां पाकिस्तान में टीम का प्रदर्शन हो न हो दुआ ये ही मांगी जाती है कि जीते पाकिस्तान. कोई उनको समझाए कि जीते कोई भी लेकिन कुछ मेहनत तो करनी पड़े गी, बिना मेहनत के विश्व कप कैसे जीता जा सकता है ये हमें मालूम नहीं. अब तो वो युग भी चला गया जब सामने वाली टीम से दे दिला कर मैच फ़िक्स किया जाता था. आपकी तो ख़ुशनसीबी ये भी है कि आपकी टीम में मेहनत करने वाले लड़के हैं और आपस में लड़ते भी नहीं बाकी हार-जीत होती रहती है. नो टेनशन.
बहुत बेहतर मुकेश जी, अगर ऐसा हो तो कितना अच्छा होगा. हर विश्व-कप हर सीरीज़ हमारी ही होगी. हमारे खिलाड़ियों को मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. लेकिन इतनी ट्रॉफ़ी हम रखेंगे कहां पर, हमें अलग से हॉल बनाना पड़ेगा. हमारे खिलाड़ी जब इतना गोल्ड जीतेंगे तो हर जगह सोना ही सोना हो जाएगा. लेकिन मुकेश जी शरद जी के पास 16 चीनी मिलें हैं और वह कृषि मंत्री भी हैं और आईसीसी की व्यस्तता के कारण उनके पास समय न हो आपके पत्र का जवाब देने के लिए.
शरद पवार जी को चाहिए कि वह राजनीतिक पहुंच वाले खिलाड़ियों का चयन बंद करें और उनकी जगह क्षमता वाले खिलाड़ियों का चयन करें.
मुकेश जी, आपने अच्छा लिखा है. मुझे आपका ब्लाग पंसद है. क्या आप हमारे खिलाड़ियों को भी कुछ पत्र लिखेंगे? सही बात है कि जिस तरह वे आईपीएल में खेलते हैं, वैसे वे यहां नहीं खेलते. धोनी का कहना है कि खिलाड़ी थक गए थे. करोड़ों रूपयों के कांन्ट्रैक्ट साइन करते वक्त उन्होंने ऐसा क्यों नहीं सोचा?
काफी अच्छा है.
आपका पत्र पढ़ा. भारत में हरित क्रांति के बाद क्रिकेट क्रांति आ गयी है. अब हमें खेती छोड़ कर क्रिकेट की फसल निकालनी चाहिए. इसका फायदा बेटिंग,मनोरंजन,ठेका,दलाली आदि व्यापारियों का होगा. इससे कुछ रोजगार भी मिलेगा लेकिन जिनका कनेक्शन राजनेता और दलालों से है उन्हीं का फायदा होगा. महाराष्ट्र में आईपीएल के टिकट पहले प्रिंट हो गए थे इसलिए टैक्स नहीं लगाया गया था. अगली बार पहले से ही टिकट प्रिंट करके रखे जाएं ताकि टैक्स से बचा जा सके. आम आदमी सभी तरह के टैक्स भर के पहले ही परेशान है. इस क्रिकेट महिमा की क्या कहना सभी को पागल बनाके रखा है.
काफी अच्छा है. आपने सीधे शब्दों में क्रिकेट की सारी समस्याएं लिख दी हैं. धन्यवाद.