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दुनिया का कल्चर तय करने वाले पाँच देश
- Author, लिंड्से गालोवे
- पदनाम, बीबीसी ट्रेवल
आमतौर पर किसी भी देश का वैश्विक प्रभाव उसका सैन्य बल, राजनैतिक दबदबा और आर्थिक सामर्थ्य देखकर आंका जाता है.
लेकिन कुछ देशों के लिए उनकी संस्कृति ही उनका सबसे मज़बूत पक्ष है. उनके खान-पान, फ़ैशन और मनोरंजन ने पूरी दुनिया पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है.
इन सांस्कृतिक रूप से प्रभावशाली देशों को हाल ही में 'यूएस न्यूज़ एंड वर्ल्ड रिपोर्ट' ने अपने कुछ मापदंड़ों के अनुसार रैंकिंग दी है.
ये मापदंड हैं उन देशों की प्रतिष्ठा, फ़ैशन, खुशहाली, आधुनिकता और मनोरंजन के बेहतरीन साधन.
इस सूची में इटली, स्पेन, फ़्रांस, ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों ने शीर्ष दस में जगह बनाई.
इसमें एशियाई देश जापान भी है. सूची में ब्राज़ील (खुशहाली और आधुनिक जीवनशैली) और अमरीका (आधुनिकता और प्रभावशाली संस्कृति) भी शामिल हैं.
हमने इस श्रेणी के पाँच शीर्ष देशों के लोगों से बातचीत की और ये जानने की कोशिश की कि उनके देश ने किस तरह विश्वस्तर पर अपनी छाप छोड़ी है.
इटली
वैलेंटीनो, अरमानी, वरसाचे और गूची जैसे अपने सुप्रसिद्ध डिज़ाइनर ब्रैंड के कारण इटली ने फ़ैशनेबल और ट्रेंडी होने में पूरे 10 नंबर हासिल किये हैं.
ये बात लूसियो बूफ़ाल्मनों जैसे लोगों को बहुत ज़्यादा हैरान नहीं करती.
वे ख़ुद 'द पावर मूव्ज़ डॉट कॉम' ब्लॉग के संस्थापक हैं और रोम में अब्रूज़ों से ताल्लुक रखते हैं. उनका मानना है, "ये बात आमतौर पर कही जाती है कि इटली के लोग इस बात पर बहुत ध्यान देते हैं कि उन पर क्या अच्छा लगेगा और क्या नहीं. वे लोग कोशिश करते हैं कि ये तय करें कि फ़ैशनेबल क्या है."
शार्डीनिया की एंजिला कोरियास रोम में रहती हैं. वो 'रोम एक्चुअली' नाम का ब्लॉग लिखती हैं. उनका कहना है, "खाने से लेकर फ़र्नीचर तक, स्टाइल से जुड़ी हर चीज़ इटली से काफ़ी हद तक प्रभावित है."
ज़ाहिर है कि इस देश के खाने का भी अपना एक अलग प्रभाव है.
कोरियास कहती हैं कि ये प्रभाव देखने के लिए आपको इटली की राजधानी रोम की तरफ रुख करना होगा.
कोरियास कहती हैं, "यहाँ आर्थिक संकट काफ़ी गहरा है. बावजूद इसके रोमन लोग बाहर का खाना खाने से कभी नहीं चूकते. यहाँ आप पारंपरिक ज़ायका और उनमें लगा आधुनिकता छोंक, दोनों चख सकते हैं. उदाहरण के लिए, प्रांतीय इलाक़े का पोरतो रेस्त्रां पारंपरिक कासिओ पेपे (पास्ता, जिस पर रोमन पैकोरीनो और काली मिर्च की सीज़निंग हो) को समुद्री भोजन के रूप में परोसता है. और शायद ये सुनने में अजीब लगे, लेकिन चीज़ और समुद्री खाने का मेल काफ़ी स्वादिष्ट होता है."
इटली में एक और दिलचस्प सांस्कृतिक जगह है बोलोग्ना जो अपने पौष्टिक खानपान के लिए काफ़ी प्रसिद्ध है. मिलान भी एक पसंदीदा शहर है और ये व्यापार और फ़ैशन की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा गढ़ है. यहाँ भी कई बड़े-बड़े अच्छे रेस्त्रां हैं.
फ़्रांस
आधुनिकता, प्रतिष्ठा और फ़ैशन के मापदण्डों पर सबसे अधिक ख़रा उतरने वाला देश है फ़्रांस.
फ़्रांस की इन ख़ासियतों की नकल करने की कोशिश हर कोई करता है. हमें पेरिस निवासी रूबेन फ़िल्स ने बताया कि उन्होंने जब तक मध्य पूर्व और एशिया नहीं घूमा था तब तक उनको इस बात का अंदाज़ा ही नहीं था कि उनकी संस्कृति कितनी मशहूर है.
'बीन अराउंड द ग्लोब' नाम के ब्लॉग पर अपने सफ़र के बारे में फ़िल्स ने लिखा था, "पिछड़े इलाक़ों में रहने वाले लोग भी फ़्रेंच खाने, फ़्रेंच कला, फ़्रेंच फ़ैशन से काफ़ी प्रेरित हैं. मैं ईरान में कई लोगों से मिला जिन्होंने मुझे बताया कि वो 'मोलिएर' को कितना पसंद करते हैं. मैं ये जानकार हैरान रह गया कि ईरान में भी लोग 'मोलिएर' को जनते हैं."
हालांकि पेरिस ही वो जगह है जहाँ फ़ैशन से लेकर खाने तक हर तरफ फ़्रेंच संस्कृति को अनुभव किया जा सकता है.
इसकी बानगी आप बोर्डाक्स, ल्यॉन और टॉलूज़ में देख सकते हैं. बोर्डाक्स एक प्रतिष्ठित शहर है. इस इलाक़े में बहुत अच्छी वाइन बनाई जाती है.
पेरिस के बाद इसी शहर में सबसे अधिक ऐतिहासिक इमारतें हैं. ल्यॉन, फ़्रांस का तीसरा सबसे भीड़ वाला शहर है. ये अपनी पाक कला के लिए मशहूर है. इस शहर ने कई थ्री-स्टार मिशलिन शेफ़ भी दिए हैं.
वहीं टॉलूज़ एक ऐसा दिलचस्प शहर है जिसका 2,000 साल से भी ज़्यादा प्राचीन गौरवशाली इतिहास रहा है. इसे 'ला विले रोज़' के नाम से भी जाना जाता है.
फ्रेंच अपनी पहचान पर बहुत फ़ख्र करते हैं. उनकी इस पहचान ने विश्व को एक नई शक्ल दी है. इसमें उनकी फ़्रेंच भाषा भी शामिल है जो बाहर से आए लोगों के लिए काफ़ी मुश्किल है.
उस बारे में फ़िल्स का कहना है, "फ्रांस में ज्यादातर लोग टूटी-फूटी अंग्रेजी भी नहीं बोलते. इसलिए किसी भी बाहर के व्यक्ति के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि फ्रांस में आकर वह ख़ुद को वहाँ के मुताबिक़ ढाल ले."
अमरीका
अमरीका, आधुनिकता और मनोरंजन के मामले में काफ़ी भावशाली है. यहाँ की फ़िल्में, संगीत और टीवी कार्यक्रम पूरे विश्व में सराहे जाते हैं.
दुनिया के कई अन्य देशों ने भी इन क्षेत्रों में काम किया है, लेकिन अमरीका ने इन्हें नई ऊंचाइयाँ दी हैं.
जैसे रिएलिटी टीवी की शुरुआत इंग्लैंड में हुई. फिर भी दुनिया भर में उसे बड़े पैमाने पर लोकप्रिय बनाने का काम अमरीका ने किया.
ये विकसित तकनीकों का देश है. अमरीका ने दुनिया को फ़ेसबुक, ट्विटर, गूगल और एमेज़ॉन जैसी बड़ी नामी साइट्स दी हैं. आज इनका करोड़ों लोग रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं.
अमरीका इतनी प्रभावशाली पहचान इसलिए बना पाया है क्योंकि वहाँ के लोग 'संभावना की ताक़त' और बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने में खुद को झोंक देने में विश्वास रखते हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़्लोरिडा के टेलीकम्यूनिकेशन विभाग के प्रोफ़ेसर और ग्रेजुएट सोशल मीडिया प्रोग्राम के निदेशक एन्ड्रयू सलेपक का कहना है, "हम अभी भी 'अमरीकी ड्रीम' में विश्वास रखते हैं. इस ख़्वाब को पूरा करना अमरीका जैसे देश के लिए ही संभव है जो कभी कर्ज़ तले दबे लोगों, गुलामों और धर्मिक रूप से सताये हुए लोगों की ब्रिटिश कॉलोनी हुआ करती थी."
न्यूयॉर्क सिटी इस देश का सबसे बड़ा शहर है जो इन मूल्यों का जीता-जागता उदाहारण है.
फ़्रैंक सिनेट्रा के मुताबिक़, "अगर मैंने इस शहर में जगह बना ली, तो मैं कहीं भी अपनी छाप छोड़ सकता हूँ."
इस शहर को कभी भी न सोने वाला शहर कहा जाता है. इसके दूसरे छोर पर है, लॉस एंजेलेस में बसा हॉलीवुड जिसने अमरीका की संस्कृति को एक आकार दिया है.
सलेपक का कहना है, "अमरीकी टीवी शो और फ़िल्में हमारे बोलचाल के तरीक़े और पहनावे पर भी अपनी छाप छोड़ते हैं."
हालांकि इन दो शहरों के बीच समुद्र, रेगिस्तान, खेत और पहाड़ों की बहुत बड़ी भौगोलिक दूरी है.
एक बड़े सर्वे के अनुसार, 300 मिलियन अमरीकियों को अपने देश की विविधता पर गर्व है.
बॉस्टन में रहने वाले और 'द रनिंग पब्लिसिस्ट' में ब्लॉग लिखने वाले जॉन सालास का कहना है, "हमारी पारंपरिक पृष्ठभूमि की तरह, हम सबके अलग-अलग सांस्कृतिक मूल्य हैं."
वो कहते हैं, "आप किस तरह के व्यक्ति हैं और आपकी पसंद-नापसंद क्या है, उसके आधार पर आपको अमरीका के अलग-अलग शहरों में अलग-अलग तरह के अनुभव होंगे. ना मियामी शिकागो की तरह है और ना ही न्यू ऑर्लियंस, न्यूयॉर्क की तरह. हर शहर का अपना अलग इतिहास और वहाँ के लोगों की अलग ख़ासियत है. अगर आपको एक शहर पसंद नहीं आया तो आप दूसरे शहर को आज़मा सकते हैं."
स्पेन
एक ज़माने में विश्व के सबसे बड़े विजेता का साम्राज्य रहे स्पेन ने दक्षिणी अमरीका से लेकर दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी अमिट छाप छोड़ी है.
चीनी भाषा के बाद दुनिया में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा स्पैनिश ही है. इसमें स्पेन के मूल भाषियों, उनकी फ़िल्मों, टीवी, संगीत आदि का बड़ा योगदान है.
गैलेशिया की इन्मा ग्रिगोरियो 'ए वर्ल्ड टू ट्रेवल' नाम का एक ब्लॉग लिखती हैं. उनका कहना है, "मैं जहाँ भी जाती हूँ वहाँ मुझे अपने देश की कुछ न कुछ छाप देखने को ज़रूर मिल जाती है और इसमें स्पैनिश भाषा से लेकर धर्म, खान-पान, त्यौहार और बहुत सी अन्य बातें भी हैं."
स्पेन का खान-पान दुनिया भर में मशहूर है. बार्सिलोना में रहने वाली और 'बार्सिलोना ईट लोकल कुलिनरी एक्सपीरियंस' नाम की वेबसाइट के संस्थापक एन्ड्रे एरियाज़ का कहना है, "स्पैनिश लोग खान-पान के शौक़ीन हैं. उनके लिए खाने का मतलब है मिलजुल कर खाना-पीना. फिर चाहे वे दोस्त हों या अजनबी."
हर किसी से घुलना-मिलना इस देश की ख़ासियत है. यहाँ लोग परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने को काम से अधिक तवज्जो देते हैं.
ग्रेगोरियो का कहना है, "हम बस ज़िंदा रहने के लिए काम करते हैं, ना कि काम के लिए जीते हैं. अन्य देशों से आए लोगों के लिए ये इतना आसान भी नहीं है. उन्हें बेहद आरामदेह दिनचर्या और रात में देर से खाना खाने की आदत डालनी पड़ती है. लेकिन इसमें कोई परेशानी की बात नहीं है क्योंकि स्पेन के लोग बाहर से आने वाले लोगों की हर संभव मदद करते हैं."
ब्रिटेन
अपनी प्रतिष्ठा के चलते ब्रिटेन को इस रैंकिंग में काफ़ी ऊंचा स्थान मिला है.
ब्रिटेन के नागरिकों को अपनी कार्य संस्कृति, रचनात्मकता और नए आविष्कार करने के सामर्थ्य पर बहुत गर्व है.
लंदन में रहने वाले लेखक अयान हॉकिन्स का कहना है, "हमारे विश्वविद्यालय दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में शुमार हैं. हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि मशीन कोड, कंप्यूटर और वर्ल्ड वाइड वेब जैसे आविष्कार ब्रिटेन के लोगों की ही देन हैं."
अंग्रेजी भाषा के प्रभाव और लचीलेपन ने ब्रिटेन को एक ऐसा देश बनाया है जहाँ लोग अपना भविष्य बनाने आते हैं.
हॉकिन्स का कहना है, "हमारी भाषा दूसरी भाषाओं के शब्दों को अपनाकर काफ़ी समृद्ध हो गई है. इस वजह से लोग अंग्रेजी भाषा आसानी से सीख लेते हैं. 11 साल पहले मेरा दोस्त केवल 700 पाउंड लेकर वेनेजुएला से लंदन आया था. उसे अंग्रेज़ी भी नहीं आती थी. आज वो एक जाना-माना बिज़नेस कंसल्टेंट है और 30 से ज़्यादा दुकानें और रेस्त्रां चलाता है. कोई भी ब्रिटेन आकर इसे अपना कर जितना चाहे उतना ब्रिटिश बन सकता है."
लेकिन बाहर से आए हुए लोगों को ये ज़रूर समझना होगा कि अंग्रेज़ हमेशा वही नहीं कहते जो उनका असली मतलब होता है. इसलिए आपको उनकी बातों की तह तक जाना होगा.
'द बुटीक एडवेंचरर' नाम का ब्लॉग लिखने वाली ऑस्ट्रेलियाई मूल की अमैंडा ओ ब्राइन कहती हैं, "भाषा और भाव-भंगिमा की बारीकी पकड़ना बेहद ज़रूरी है. मुझे नहीं पता था कि "I am not sure" कहने का मतलब अक्सर 'मुझे नहीं पता' होता है."
हॉकिन्स का भी कहना है, "ब्रिटिश लोग आमतौर पर जो कहते हैं, उनका मतलब उससे उलट होता है. ये भाषा काफ़ी सारे तक़ियाक़लामों, दोहरे मतलब के शब्दों और संकेतों से भरी है."
व्यापार और आर्थिक केंद्र होने के कारण बाहर से आने वाले कामगारों के लिए लंदन पहले नंबर पर आता है. लेकिन इस शहर में घर ख़रीदना आसान नहीं है.
यहाँ पर म्यूज़ियम, कॉन्सर्ट की जगहों और थिएटरों की भरमार है.
मूल रूप से पेरिस से वास्ता रखने वाली ग्रिगोरी गोलिंस्की अब लंदन में रहती हैं.
उनका कहना है, "सैमुअल जॉन्सन ने एक बार कहा था कि 'अगर आपका मन लंदन से ऊब जाए तो इसका मतलब ये है कि आप जीवन से ही ऊब गए हैं.' मैं इससे पूरी तरह सहमत हूँ क्योंकि लंदन में इतने सारे आकर्षण हैं कि आप हर शनिवार, रविवार को कुछ अलग कर सकते हैं और आपको कोई भी चीज़ दोबारा करने की ज़रूरत नहीं है."
लंदन मनोरंजन से भरा एक बड़ा सांस्कृतिक शहर तो है ही. लेकिन सांस्कृतिक प्रभाव की दृष्टि से एडिनबरा भी इससे किसी तरह कम नहीं.
ये शहर 'फ्रिंज फेस्टिवल' का मेज़बान है जो कला के लिए दुनिया का सबसे बड़ा फेस्टिवल है. एडिनबरा 'हैरी पॉटर' की जन्मभूमि भी है. ब्रिटेन का बर्मिंघम शहर भी किसी मायने में पीछे नहीं है.
हॉकिन्स का कहना है, "बर्मिंघम में सब कुछ शानदार है. क्लब से लेकर ऑर्केस्ट्रा तक. ख़ासतौर पर यहाँ वेनिस से ज़्यादा नहरें हैं और ज्वैलरी क्वार्टर वो जगह है जहाँ अत्याधुनिक फ़ैशन और पारंपरिकता का अद्भुत मेल देखने को मिलता है."
(नोटः ये बीबीसी ट्रेवल की मूल कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रेवल पर उपलब्ध है.)
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