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सोचो मत कह दो 'यू आर सो ब्यूटीफ़ुल'
- Author, अमांडा प्रेंसा सैंटोस
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
फ़ोटो खींचना और खिंचवाना दोनों कला हैं. अगर फोटो खींचने वाला और खिंचवाने वाला दोनों एक दूसरे का साथ दें तो ज़िंदगी भर के लिए यादगार के तौर पर रखी जाने वाली तस्वीरें उतारी जा सकती है.
लेकिन अक्सर लोग कैमरे के सामने बहुत सतर्क होकर खड़े होते हैं. ऐसे में ली गई तस्वीरें बहुत बनावटी लगती हैं.
वहीं अगर थोड़ा सा मुस्कुरा दिया जाए तो तस्वीर का पूरा रूप ही बदल जाता है. ये फ़ोटोग्राफर का ही कमाल है कि वो फ़ोटो खिंचवाने वाले की क़ुदरती ख़ूबसूरती को उभारने में कामयाब होता है. इसके लिए आम तौर पर फ़ोटोग्राफर कहते हैं 'स्माइल प्लीज़'. बहुत बार ये जुमला कुछ ख़ास कारगर नहीं होता.
अच्छी तस्वीर लेने के लिए फ़ोटोग्राफ़र को फिर और मेहनत करनी पड़ती है. कई बार वो फोटो खिंचवाने वाले की ख़ूब तारीफ़ करता है और अपनी तारीफ़ सुनकर तो मुस्कुराना स्वाभाविक है ही. फिर जो तस्वीर निकलकर आती है वो होती है असली फोटो.
अपनी तारीफ़ सुनने के बाद महिलाओं की क्या प्रतिक्रिया होती है, उसे अपने कैमरे में क़ैद किया है तुर्की के फ़ोटोग्राफ़र मेहमत जेंक ने. दो साल पहले मेहमत लैटिन अमरीका के मूल निवासियों की कुछ तस्वीरें लेने गए थे. उनके प्रोजेक्ट का नाम था 'यू आर सो ब्यूटीफ़ुल'.
कैमरे की नज़र इंसानी आंख से कहीं ज़्यादा तेज़ होती है. जो चीज़ हमारी आंख नहीं देख पाती उसकी पोल कैमरा खोल देता है. मेक्सिको में मेहमत जब वहां महिलाओं की तस्वीरें ले रहे थे तो उन्हें मनचाही तस्वीर नहीं मिल पा रही थी. कैमरा देखते ही वो महिलाएं थोड़ी घबरा सी जाती थीं.
कैमरे के सामने उन्हें सहज बनाने के लिए मेहमत ने बहुत जतन किए. उनसे मुस्कुराने को कहा, तो वही बनावटी मुस्कान नज़र आई. उन्हें तलाश थी ऐसे जुमले की जिसे सुनते ही महिलाएं एकदम रिलैक्स हो जाएं. उनके असल हाव- भाव कैमरे में क़ैद हो जाए.
इसके लिए उन्होंने सभी से फोटो खिंचवाते समय एक ही जुमला कहा. 'यू आर सो ब्यूटीफ़ुल'. इस जुमले को सुनने के बाद महिलाओं के चेहरे पर जैसे भाव आए, उसी की बुनियाद पर मेहमत ने अपने प्रोजेक्ट नामकरण भी कर डाला.
मेहमत अभी भी इसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. वो इस साल अक्टूबर तक इसे पूरा करने का इरादा रखते हैं. वो अभी दुनिया के और कई देशों में जाकर इस जुमले से लोगों के चेहरे पर आने वाले भाव को कैमरे में क़ैद करना चाहते हैं.
मेहमत जब ग्वाटेमाला में एक बुज़ुर्ग महिला की तस्वीर ले रहे थे, तो उसे हंसाने की कोशिश भी कर रहे थे. लेकिन इस महिला ने कहा कि उसके दांत नहीं हैं, लिहाज़ा उसे हंसाने की कोशिश ना की जाए. मेहमत ने जब उस महिला से कहा कि आप बहुत ख़ूबसूरत हैं, तो ये सुनते ही बुज़ुर्ग बेसाख़्ता हंसने लगीं. मेहमत कहते हैं कि इस के बाद उनके कैमरे को जो शॉट मिला वो उनके बेहतरीन शॉट में से एक था.
इसी तरह मार्गरिटा इक्वेडोर में रहती हैं. मेहमत ने जब उसे फोटो खिंचवाने को कहा तो वो राज़ी नहीं हुईं. जब मेहमत ने उनसे कुछ फल ख़रीदे तब जाकर वो कैमरे के सामने पोज़ देने को तैयार हुई. लेकिन वही सावधान की मुद्रा में.
मेहमत के बहुत कहने के बाद भी वो मुस्कुराई नहीं. लेकिन, जैसे ही मेहमत ने कहा मार्गरिटा आप बहुत ख़ूबसूरत हैं वो खिलखिलाकर हंस पड़ी. और शायद यही मार्गरिटा की असल ख़ूबसूरती थी, जिसे मेहमत ने अपने कैमरे में क़ैद कर लिया.
दुनिया के अलग अलग देशों में जाकर वहां के लोगों से बात करना आसान नहीं होता. कुछ लोग तो ऐसे मिल सकते हैं जिनसे आप अंग्रेज़ी में बात कर सकते हैं. लेकिन सभी अंग्रेज़ी भाषा जानते हों ऐसा कम ही होता है.
मेहमत जब कोलंबिया पहुंचे तो उन्हें इस परेशानी से जूझना पड़ा. वो यहां एक ऐसे गांव में गए जहां के लोग सिर्फ़ अपनी स्थानीय बोली ही बोलते थे.
मेहमत ने यहां आकर उन्हीं की ज़बान में 'यू आर सो ब्यूटीफ़ुल' कहना सीखा और फिर कैमरे में वही तस्वीरें क़ैद की जिनकी उन्हें तलाश थी.
कोलंबिया के ही साहिली इलाक़े से सटे एक गांव में मेहमत की मुलाक़ात जूलियाना से हुई. ये इलाक़ा बेहद सूखा है. महीनों तक यहां बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरती. सूरज की तपिश से ख़ुद को बचाने के लिए जूलियाना ने चेहरे पर एक ख़ास तरह का लेप लगा रखा था.
अच्छी बात ये थी कि जूलियाना को कैमरे के सामने हंसाना बहुत मुश्किल नहीं था. अपनी तारीफ़ सुनते ही वो दिल खोलकर हंस दी और बस ये लम्हा मेहमत ने कैमरे में बंद कर लिया.
ब्राज़ील के अमेज़न में रहने वाली मीतो भी अपनी स्थानीय भाषा ही बोलती और समझती है. यहां भी मेहमत को मीतो की ज़बान सीखनी पड़ी ताकि उससे बात करके, उसे कैमरे के सामने हंसाकर उसके वास्तविक रूप की तस्वीर ले सके.
वहीं, ब्राज़ील की ही अलतेना बहुत कैमरा फ़्रैंडली थी. उसने बड़े चाव से कैमरे के सामने कई पोज़ दिए. लेकिन उसकी असल ख़ूबसूरती भी ये जुमला सुनने के बाद ही सामने आई कि 'यू आर सो ब्यूटीफ़ुल'.
यही जुमला सुनकर कोसमिता ने जो लुक दिया, मेहमत कहते हैं उस भाव ने उन्हें सबसे ज़्यादा प्रभावित किया.
इस पूरी चर्चा से एक बात तो साफ़ है कि अपनी तारीफ़ सुनना इंसान की फ़ितरत है. अपनी सुंदरता का बखान सुनकर किसी के भी चेहरे पर मुस्कान आ ही जाती है.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)
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