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चीन की हवा से बात करती ट्रेनें
- Author, लैरी ब्लीबर्ग
- पदनाम, बीबीसी ट्रैवल
चीन ने पिछले तीन दशकों में ज़बरदस्त तरक़्क़ी की है. आज वो दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक देश है. चीन की तरक़्क़ी की सबसे बड़ी मिसाल, इसकी रेल है.
जो रफ़्तार और तकनीक के मामले में भारत जैसे देशों से बहुत आगे है. इन हाई स्पीड ट्रेनों ने चीन के लोगों का सफ़र ना सिर्फ़ आसान बनाया है बल्कि यहां की अर्थव्यवस्था को भी रफ़्तार की पटरी पर ला खड़ा किया है.
अगर आप चीन की हाई स्पीड ट्रेनों में सफ़र करेंगे तो लगेगा कि आप हवा से बातें कर रहे हैं. शंघाई की मैग्नेटिक ट्रेन, इन्हीं में से एक है. इसकी रफ़्तार 430 किलोमीटर घंटा है जो कि आवाज़ की रफ़्तार से भी ज़्यादा तेज़ है.
जब आप इस ट्रेन में सफ़र करते हैं, तो, लगता है कि आप हवा से बातें कर रहे हैं. ये ट्रेन पुडोंग इंटरनेशनल को शहर के मेट्रो स्टेशन से जोड़ती है.
यात्रियों की सहूलत के लिए एक स्टेशन हवाई अड्डे के बीचों बीच बनाया गया है. सभी साइन बोर्ड चीनी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में लिखे गए हैं.
ये रेल पहियों पर दौड़ने के बजाय थोड़ा सा ऊपर उठकर यानी चुंबकीय ताक़त से चलती है. तेज़ रफ़्तार होने के साथ साथ इस रेल की एक और ख़ासियत है. वो है इसका बेहद कम किराया.
पहले स्टेशन से आख़िरी स्टेशन, यानी पूरी एक यात्रा के लिए आपको महज़ 80 युआन ख़र्च करने होंगे. ये क़ीमत शंघाई डिज़्नी लैंड के टिकट की क़ीमत से भी कम है. टिकट ख़रीदने में भी ज़्यादा मुश्किल नहीं है, बहुत सी टिकट वेंडिंग मशीनें लगी हुई हैं, जिससे आप टिकट ख़रीद सकते हैं.
घड़ी और ट्रेन का नाता
सफ़र के दौरान रासते में बहुत से ख़ूबसूरत मंज़र आपको नज़र आएंगे. लेकिन इनका नज़ारा ज़रा चौकन्ने होकर कीजिएगा. क्योंकि अगर अपने बोर्डिंग गेट से एक स्टेशन भी आप आगे निकल गए, तो, चंद मिनटों में आप तीस किलोमीटर आगे निकल जाएंगे.
अगर ट्रेन अपनी रफ़्तार से ठीक-ठाक चलती रहे तो 60 किलोमीटर का सफ़र महज़ 20 मिनट में पूरा हो सकता है. इस ट्रेन के सभी स्टेशनों की सबसे दिलचस्प बात है यहां की घड़ी जोकि ट्रेन की स्पीड के हिसाब से सेट की गई है. जैसे ही इस घड़ी में ज़ीरो होता है ट्रेन चल पड़ती है. एक ट्रेन के गुज़र जाने के बाद घड़ी दूसरी ट्रेन का काउंटडाउन शुरू कर देती है.
ट्रेन जब रफ़्तार पकड़ना शुरू करती है तो रेल के अंदर लगा स्पीडोमीटर पहले सौ किलो मीटर प्रति घंटा की रफ़्तार दिखाता है. कुछ सेकेंड बाद 200 और कुछ सेकेंड बाद 300. देखते ही देखते है ये स्पीडोमीटर ट्रेन की रफ़्तार 431 किलो मीटर प्रति घंटा बताने लगता है.
ट्रेन जैसे ही अपने स्टेशन पर पहुंचने वाली होती है, इसकी रफ़्तार घटनी शुरू हो जाती है. बिना किसी झटके के रेल प्लेटफोर्म पर रूकती है, दरवाज़े खुलते हैं और चंद सेकेंड में यात्री रेल से बाहर आ भी जाते हैं और चढ़ भी जाते हैं.
इन हाई स्पीड रेलगाड़ियों ने चीन के लोगों के सफ़र को ना सिर्फ़ आसान बनाया है, बल्कि मीलों के फ़ासले को चंद क़दमों की दूरी वाला बना दिया है.
अगर कभी आपको चीन जाने का मौक़ा मिले तो इस हाई स्पीड ट्रेन में सफ़र का मज़ा ज़रूर लीजिएगा. यक़ीनन आप इसमें सफ़र करके हवा से बातें करने का तजुर्बा तो कर ही लेंगे.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)
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