You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ये नाव ईंधन से नहीं बल्कि समुद्र की तेज लहरों से चलेगी
- Author, रिन डयैन कैबलर
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
इस में कोई शक नहीं कि तकनीक ने हमारी ज़िंदगी को नई रफ़्तार दी. और इसमें भी दो राय नहीं कि जितने भी आविष्कार हुए हैं ,उनकी प्रेरणा कहीं ना कहीं पुरानी परंपराओं और रिवायतों से मिली.
इसकी एक मिसाल हमें फ़िलीपींस में देखने को मिलती है. जहां ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन कम करने के लिए पारंपरिक नाव बांगका को नए सिरे से डिज़ाइन किया गया है. ये नाव समुद्र की लहरों से अपने लिए ईंधन जुटाती है.
क्या है पूरा माजरा चलिए आपको भी बताते हैं.
फ़िलीपींस के समुद्र में आपको बड़ी-बड़ी नौकाएं देखने को मिलेंगी. इन्हें ट्राईमारन कहते हैं, जो कि पारंपरिक नौका बांगका का ही नया रूप है. इसे नए सिरे से बनाने के पीछे जोनाथन साल्वाडोर का हाथ है. वो पानी के जहाज़ बनाने वाली कंपनी के मालिक हैं. शुरू में ये विशाल नौकाएं बड़े युद्धपोत के तौर पर डिज़ाइन की गई थीं. लेकिन बाद में इनका प्रयोग पारंपरिक सेलबोट, मछली पकड़ने वाली नौकाओं और कार्गो शिप के तौर पर होने लगा.
फ़िलीपींस में सभी कारोबारी गतिविधियां समुद्र के रास्ते होती हैं. ट्राईमारन से पहले जितने जहाज़ और नौकाएं यहां चलती थीं, उन सभी में जीवाष्म ईंधन का इस्तेमाल होता था. ये ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन की बड़ी वजह था. 2012 की रिपोर्ट के मुताबिक़ देश के ऊर्जा क्षेत्र में हीटिंग और बिजली के बाद यही नौकाएं कार्बन उत्सर्जन का सबसे बड़ा स्रोत थीं.
कैसे मिलती है लहरों से ऊर्जा
2010 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले कार्बन उत्सर्जन का 9 फीसद हिस्सा समुद्र में चलने वाले जहाज़ों से ही आता है. एक अंदाज़े के मुताबिक़ 2023 तक इसमें हर साल 3.8 प्रतिशत की दर से इज़ाफ़ा होगा. लेकिन, अगर पारंपरिक तरीक़े अपना लिए जाएं तो इसे काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है. फ़िलीपींस में तरंग ऊर्जा से चलने वाली नौकाएं तैयार की गई हैं, जो इस मुश्किल से पार पाने में मददगार होंगी.
जोनाथन कहते हैं, ''फिलीपींस की पारंपरिक नौका बांगका में आउटरिगर का काम स्थिरता प्रदान करना था. लेकिन हमने देखा कि जब भी आउटरिगर लहर से टकराता है, तो उसके साथ नौका ऊपर और नीचे होती है. लिहाज़ा हमने सोचा क्यों ने इस गति ऊर्जा को बिजली में बदल दिया जाए. हमने लहरों की इसी गति को पकड़ा और उसे मशीनरी के माध्यम से और अधिक बल प्रदान करके जहाज़ के लिए बिजली पैदा कर ली. हाइब्रिड ट्राईमारन में ये तरंग ऊर्जा कन्वर्टर मशीन आउटरिगर में फिट की गई है. ट्राईमारन जितना ही लहरों से टकराता है, उसे उतनी ही ऊर्जा मिलती है.''
हाईब्रिड ट्राईमारन बनाने का काम 2018 में शुरू हुआ था. उम्मीद है कि 2020 के अंत तक ये बनकर तैयार हो जाएगा. अगर 2019 में टाइफून और 2020 के आरंभ में कोविड-19 ने आक्रमण ना किया होता तो ये प्रोजेक्ट बहुत पहले ही पूरा हो चुका होता. अब 2021 के आरंभ में इसका ट्रायल किया जाएगा. इस नाव में 100 मुसाफ़िर, चार कारें और 15 मोटरसाइकिल ले जाने की क्षमता है.
साल्वाडोर और उनकी टीम का लक्ष्य है जहाज़ों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को लगभग एक तिहाई कम करना.
जानकारों का कहना है कि समुद्र तट पर गहरे पानी वाले क्षेत्र में लहरें 60-70 किलोवॉट प्रति मीटर की शक्ति घनत्व तक पहुंच सकती हैं.
मिसाल के लिए ब्रिटेन और अमरीका में औसत तरंग बिजली का घनत्व 40 और 60 किलोवॉट प्रति मीटर है. अगर इस ऊर्जा को अन्य उपयोगी रूपों में बदल दिया जाए तो बहुत कम बिजली से बहुत कुछ किया जा सकता है.
एक शुरुआती कदम
वहीं, जानकारों का ये भी कहना है कि उच्च-बल और कम गति वाली तरंगों को ऊर्जा के किसी अन्य रूप में परिवर्तित करना आसान काम नहीं हैं. इसमें कई चुनौतियां हैं. विद्युत जेनरेटर में गर्मी के लिए हाइड्रोलिक सिस्टम में घर्षण से कई बार नुक़सान भी हो सकता है.
लेकिन, इंजीनियरिंग टीम की मदद से ये चुनौतियों भी ख़त्म हो जाएंगी.
ट्राईमारन पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित रखने के लिए एक अच्छा साधन है. लेकिन, इसे तैयार करने में मोटी रक़म की दरकार है.
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 1.5 मिलियन अमरीकी डॉलर की रक़म जमा की गई. लेकिन, इसे बनाने वाली कंपनी का कहना है कि कारोबारी स्तर पर इसकी लागत 5 मिलियन अमरीकी डॉलर तक हो सकती है. ख़र्च कम करने के लिए ही ट्राईमारन के 80 फ़ीसद पुर्ज़े स्थानीय स्तर पर बनाए गए हैं. इसके दो फ़ायदे होंगे. एक तो स्थानीय स्तर पर लोग नया हुनर सीख जाएंगे और दूसरे उन्हें रोज़गार भी मिलेगा.
समुंद्र की तरंग ऊर्जा से चलने वाले जहाज़ तकनीक के लिहाज़ से अभी बहुत नए हैं. इन्हें पानी से ज़्यादा से ज़्यादा ऊर्जा खींचने वाला बनाने के लिए अभी इनके डिज़ाइन में बहुत तरह के प्रयोग किए जाने की ज़रूरत है. उम्मीद है ये एक कामयाब प्रोजेक्ट होगा और पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा.
(बीबीसी फ़्यूचरपर इस स्टोरी को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. आप बीबीसी ट्रैवल को फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)