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12 साल चकमा देने के बाद पकड़ा गया ये लुटेरा जहाज
- Author, रिचर्ड ग्रे
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
ये बात अप्रैल की है. सांझ ढल रही थी. आसमान में धुंध थी. इस धुंधलके का फ़ायदा उठाकर, आंद्रे डोलगोव ने भागने की आख़िरी कोशिश की. उफ़नते समंदर की लहरों से मुक़ाबला करते हुए इस ज़ंग खाए जहाज़ ने लंबी छलांग लगाई.
लेकिन, उसके पीछे बेहद फ़ुर्तीली नौसैनिक नाव लगी हुई थी. ऐसे में मछली मारने वाले पुराने जहाज़ आंद्रे डोलगोव के लिए भागना बहुत मुश्किल था. नौसैनिक नाव के अलावा आंद्रे डोलगोव के ऊपर एक ड्रोन मंडरा रहा था.
साथ ही, उसके पीछे था एक निगरानी करने वाला जहाज़. इन सब ने मिलकर आंद्रे डोलगोव पर सवार लोगों ने देखा कि फंदा कस रहा है, तो उन्होंने सरेंडर करने में ही भलाई समझी.
ऊपर से देखने पर शायद ही कोई यक़ीन करे कि ये ज़ंग खाया, शोर मचाने वाला जहाज़, समंदर का मोस्ट वांटेड जहाज़ था. पिछले कई साल से इसकी तलाश हो रही थी. कई बार ये अधिकारियों की गिरफ़्त में आया, पर बच निकला.
समंदर में लुका-छिपी खेलने वाले इस जहाज़ की कई देशों को तलाश थी. इसके कई नाम थे. आंद्रे डोलगोव, एसटीएस-50, सी ब्रीज़-1. ये जहाज़ पिछले क़रीब एक दशक से दुनिया के तमाम समुद्री इलाक़ों में अवैध रूप से मछलियां पकड़ रहा था.
आंद्रे डोलगोव को पकड़ने का मिशन कई महीनों की योजना के बाद अंजाम दिया गया. इसमें कई देशों की पुलिस, समुद्री सुरक्षा के अधिकारी, जासूस और सैटेलाइट से निगरानी करने वाली एजेंसियां शामिल थीं.
आख़िरकार, जब आंद्रे डोलगोव को पकड़ा गया, तो वो इंडोनेशिया की समुद्री सीमा में था. इसलिए इंडोनेशिया की नौसेना और समुद्री सुरक्षा के अधिकारी इस आपराधिक जहाज़ को पकड़ने के मिशन की अगुवाई कर रहे थे.
एक ही बार में 60 लाख डॉलर की मछलियां
इंडोनेशिया ने समुद्र में अवैध रूप से मछली मारने वालों के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ रखी है. राष्ट्रपति ने इसके लिए टास्क फ़ोर्स बना दी है. इसके अगुवा एंड्रियास आदित्य सलीम कहते हैं, 'आंद्रे डोलगोव जहाज़ का कप्तान और उस में सवार दूसरे लोग इस बात से सदमे में थे कि वो पकड़े गए हैं. उन्होंने ये कह कर बरगलाने की कोशिश की कि वो मछली नहीं पकड़ते थे, क्योंकि जहाज़ का फ्रिज और दूसरे हिस्से टूटे हुए थे.'
इंडोनेशिया के अधिकारियों ने आंद्रे डोलगोव को मलक्का जलसंधि के पास पकड़ा. उन्हें जहाज़ में 600 जाल मिले, जिन्हें अगर फैलाया जाए, तो वो समंदर में 29 किलोमीटर का दायरा अपनी ज़द में ले सकते थे.
एक ही बार में इस जहाज़ के लोग क़रीब 60 लाख डॉलर की मछलियां समंदर से पकड़ सकते थे.
फिर, इन मछलियों को या तो ब्लैक मार्केट में या फिर क़ानूनी तरीक़े से पकड़ी गई मछलियों के साथ मिलाकर बेचा जाता था. समंदर से आंद्रे डोलगोव के सहारे ये मछलियां सुपरमार्केट और लोगों की खाने की टेबल तक पहुंच जाती थीं.
ब्रिटेन की समुद्री जीव वैज्ञानिक केटी सेंट जॉन ग्ल्यू कहती हैं, 'दुनिया भर में पकड़ी जाने वाली कुल मछलियों का 20 प्रतिशत हिस्सा अवैध होता है. अगर, इनकी वजह से मछलियों के कारोबार पर असर पड़ा, तो दुनिया भर के मछुआरे ही नहीं, बहुत से परिवार भी इससे प्रभावित होंगे.'
आंद्रे डोलगोव पिछले दस साल से अवैध ढंग से मछलियां मारने के काम में लाया जा रहा था. इस दौरान इसके क़रीब 5 करोड़ डॉलर की मछलियां खुले समुद्र से लूटने का अंदाज़ा लगाया जा रहा है. जब इस ग़ैरक़ानूनी धंधे में इतना पैसा हो, तो किसे लालच नहीं आएगा?
इंटरपोल की अवैध मछली मारने के ख़िलाफ़ बनी क्राइम टीम के सदस्य एलिस्टेयर मैक्डॉनेल कहते हैं, 'ऐसे जहाज़ किसी देश की समुद्री सीमा के दायरे से बाहर मछलियां पकड़ते हैं. कई बार समुद्र में सीमाएं गुम हो जाती हैं. ऐसे अवैध कारोबार करने वाले जहाज़ इसी का फ़ायदा उठाते हैं.'
अवैध मछलियां पकड़ने के इस धंधे में सिर्फ़ ये जहाज़ और कुछ लोग ही नहीं होते बल्कि इसमें पुलिसवालों, सरकारी अधिकारियों, हवाला कारोबारियों और ग़ुलामी कराने वालों का पूरा नेटवर्क शामिल होता है.
ऐसे अवैध जहाज़ों में अक्सर लोगों को ज़बरदस्ती लाकर काम कराया जाता है. अपने घरों से हज़ारों मील दूर समंदर में फंसे लोगों के पास शोषण और ज़ुल्म-ओ-सितम सहने के सिवा कोई चारा नहीं होता.
अवैध रूप से मछली पकड़ने का असर पर्यावरण पर भी होता है.
विश्व खाद्य संगठन के मैथ्यू कैमिलेरी कहते हैं कि, 'अवैध मछली पकड़ने से सबसे ज़्यादा ख़तरा मछली पकड़ने के कारोबार में लगे लोगों के लिए है. ये अपराधी जिस तरह के जाल और दूसरी चीज़ों से मछलियां पकड़ते हैं, उससे समुद्री पर्यावरण जैसे मूंगे की चट्टानों को बहुत नुक़सान होता है.'
आंद्रे डोलगोव जहाज़ का इतिहास
आंद्रे डोलगोव जहाज़ का इतिहास बेहद दिलचस्प है. ये जहाज़ अवैध धंधे में आने से पहले कई पायदानों से गुज़र चुका था. जहाज़ को 1985 में जापान के ज़ोसेन शिपयार्ड में बनाया गया था. तब ये टूना मछली पकड़ने के क़ानूनी कारोबार में इस्तेमाल किया जाता था. उस वक़्त इसका नाम शिनसेई मारू नंबर 2 था.
ये जहाज़ प्रशांत और हिंद महासागरों में मछलियां पकड़ने का काम करता था. इसकी मालिक कंपनी थी मारुहा निचिरो कॉर्पोरेशन.
1995 के बाद इस जहाज़ के कई मालिकान बदले. 2008 में ये जहाज़ फिलीपींस में सुन ताई 2 के नाम से रजिस्टर हुआ. इसे दक्षिण कोरिया की कंपनी एसटीडी फिशरीज़ कॉरपोरेशन ने आंद्रे डोलगोव को मछली पकड़ने के काम में लगाया. इसके बाद भी जहाज़ चार मालिकों के हाथों से गुज़रा.
2008 से 2015 के बीच इसमें अंटार्कटिक महासागर में टूथफ़िश पकड़ने के औज़ारों से लैस किया गया. ये तूफ़ानी और भयंकर लहरों वाले दक्षिणी सागर में मछलियां पकड़ने जाने लगा.
टूथफ़िश की दुनिया भर के रेस्टोरेंट में भारी मांग है. इसकी इतनी क़ीमत मिलती है, कि, टूथफ़िश को व्हाइट गोल्ड कहा जाता है. लेकिन, टूथफ़िश पकड़ने के लिए ख़ास लाइसेंस की ज़रूरत होती है.
माना जाता है कि पिछले दस साल से आंद्रे डोलगोव अवैध रूप से मछली पकड़ने के धंधे में लगा हुआ था. पहली बार ये जहाज़ अधिकारियों की नज़र में अक्टूबर 2016 में आया.
चीन के अधिकारियों ने इसे अवैध रूप से पकड़ी गई टूथफ़िश मछलियां उतारते हुए धर दबोचा. उस वक़्त जहाज़ पर कम्बोडिया का झंडा लगा था. इसकी मालिक कंपनी लैटिन अमरीकी देश बेलिज़ में रजिस्टर्ड थी. एक साल पहले ही जहाज़ को चिली के दक्षिणी तट के क़रीब देखा गया था.
चीन के अधिकारी कोई एक्शन ले पाते, उससे पहले ही आंद्रे डोलगोव के नाविक भाग निकले. इस जहाज़ को अवैध घोषित कर दिया गया. यही वजह है कि जब जहाज़ का कैप्टन इसे लेकर मॉरीशस के बंदरगाह में घुसने लगा, तो उसे रोक दिया गया.
नाम बदलकर धोखा
जनवरी 2017 आते-आते आंद्रे डोलगोव का नाम बदलकर सी ब्रीज़ 1 कर दिया गया था. इस पर टोगो का झंडा लगा दिया गया. बाद में टोगो ने इसे अपने यहां दर्ज जहाज़ों में से हटा दिया.
अब इस जहाज़ का नाम आयडा रख दिया गया. जब भी ये किसी बंदरगाह पर पहुंचता, तो इसके कैप्टन और दूसरे नाविक फ़र्ज़ी दस्तावेज़ दिखाकर नई पहचान बताते. ये जहाज़ टोगो, नाइजीरिया और बोलीविया जैसे क़रीब 8 देशों के नाम का दुरुपयोग कर रहा था.
मैक्डॉनेल कहते हैं कि, 'अवैध जहाज़ अक्सर यही करते हैं. वो पहचान का फ़र्ज़ीवाड़ा कर के ख़ुद को पकड़े जाने से बचाते हैं. किसी भी जहाज़ को किसी देश की समुद्री सीमा में घुसने पर झंडा लगाकर बताना पड़ता है कि वो किस देश का है. झंडा लगे होने पर इनसे पूछताछ नहीं होती.'
अवैध रूप से मछलियां पकड़ने वाले जहाज़ भी यही करते हैं.
आख़िरकार, फरवरी 2018 में अफ्रीका के मैडागास्कर में आंद्रे डोलगोव को फिर देखा गया. इस जहाज़ के कैप्टन ने इसका नाम एसटीएस-50 बताया. और इसका नंबर भी ग़लत बताया. एक ख़ास आकार से बड़े हर जहाज़ के पास इंटरनेशनल मैरीटाइम नंबर होता है, जिससे उसकी शिनाख़्त होती है. ख़ास तौर से दक्षिणी समुद्र में मछलियां पकड़ने के लिए इस नंबर का होना अनिवार्य है.
जब मैडागास्कर के अधिकारियों ने आंद्रे डोलगोव के अपने यहां आने की ख़बर अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को की, तो ये जहाज़ फिर भाग खड़ा हुआ.
जहाज़ में लगा ऑटोमैटिक आइडेंटिफ़िकेशन सिस्टम इसकी लोकेशन सैटेलाइट को बता रहा था. जहाज़ ने इस में भी अधिकारियों को चकमा देने की कोशिश की. सिस्टम मे छेड़खानी की वजह से एक ही वक़्त में ये जहाज़ फिजी, फाकलैंड और नॉर्वे के समद्र में देखा जा रहा था. जबकि ये तीनों ठिकाने एक दूसरे से हज़ारों मील दूर हैं.
समुद्र की निगरानी का काम करने वाली संस्था ओशनमाइंड के चार्ल्स किलगोर ने एआईएस से मिल रहे डेटा की पड़ताल की. पता चला कि सिस्टम में ऐसी छेड़खानी की गई है कि ये जहाज़ एक साथ 100 जगहों पर दिख रहा था.
मैडागास्कर के बाद आंद्रे डोलगोव मोज़ाम्बीक़ के बंदरगाह में घुसा. अधिकारियों ने इस जहाज़ की तलाशी में फ़र्ज़ी दस्तावेज़ और मछली पकड़ने के औज़ार पाए. उन्होंने जहाज़ को हिरासत में ले लिया.
पर, आगे की जांच से पहले जहाज़ फिर भाग निकला. हालांकि, इस बार जहाज़ की असल पहचान पकड़ में आ गई थी. अब सैटेलाइट की मदद से इस पर निगाह रखी जा रही थी.
गूगल की मदद से चलने वाली संस्था ग्लोबल फ़िशिंग वॉच के कैमरे, ऐसे भारी जहाज़ों की सैटेलाइट से निगरानी करते हैं. उनका पीछा करते हैं.
वहीं, ओशनमाइंड की टीम इन्फ्रारेड सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से इस जहाज़ पर निगाह रखे हुए थी.
इस तरह पकड़ा गया आंद्रे डोलगोव
इसी दौरान अफ्रीकी देश तंज़ानिया के एक जहाज़ ने आंद्रे डोलगोव का पीछा करना शुरू कर दिया. तंज़ानिया के अधिकारियों ने आंद्रे डोलगोव का हिंद महासागर में सेशेल्स तक पीछा किया. ड्रोन से ली गई इसकी तस्वीरें अधिकारियों को भेजी गईं, जिससे इस जहाज़ को पकड़ना और भी आसान हुआ.
वहीं, ओशनमाइंड के किलगोर और उनकी टीम इंटरपोल को लगातार जहाज़ की लोकेशन की जानकारी दे रहे थे.
खुले समुद्र में जहाज़ों का पीछा करना बहुत महंगा पड़ता है. अमीर देश भी ऐसा करने से बचते हैं. ये पर्यावरण के लिए भी नुक़सानदेह होता है.
चोरी से मछलियां पकड़ने वाले जहाज़ों का रख-रखाव ठीक नहीं होता. ये बुरी हालत में होते हैं. फिर जहाज़ में सवार लोगों को उनके देश भेजना पड़ता है.
अधिकारियों की क़िस्मत अच्छी थी कि अब आंद्रे डोलगोव एक ऐसे देश की तरफ़ बढ़ रहा था, जिसने अवैध मछली मारने के धंधे के ख़िलाफ़ अभियान छेड़ रखा है. इंडोनेशिया की मंत्री सुसी पुडजिआस्तुति की अगुवाई में अब तक 488 ऐसे जहाज़ 2014 से अब तक पकड़े और नष्ट किए जा चुके हैं, जो अवैध रूप से मछली पकड़ने के धंधे में लगे थे.
ऐसे ही एक जहाज़ एफ/वी वाइकिंग को तो धमाके से उड़ा दिया गया था, ताकि समंदर में लूट मचाने वालों को संदेश दिया जा सके.
पर, जैसे ही आंद्रे डोलगोव मलक्का जलसंधि में घुसा, इसका सैटेलाइट सिग्नल टूट गया. असल में इलाक़े में मौजूद तमाम अन्य जहाज़ों के संकेतों में आंद्रे डोलगोव का सिग्नल गुम हो गया था.
इंडोनेशिया की नौसेना के अधिकारियों को अब किलगोर की टीम से मिल रहे संकेतों का ही सहारा था. उन्होंने समुद्री तटरक्षक सेना के एक जहाज़ को आंद्रे डोलगोव का पीछा करने के लिए भेजा.
जहाज़ के पकड़े जाने से पहले के 72 घंटे सबकी नींद उड़ी हुई थी. मिशन में शामिल लोग आंद्रे डोलगोव को इस बार भागने नहीं देना चाहते थे.
आख़िरकार आंद्रे डोलगोव को इंडोनेशिया के वेह द्वीप के पास घेर कर पकड़ लिया गया. जब इंडोनेशिया के अधिकारी जहाज़ पर सवाल हुए, तो, इसके कैप्टेन और नाविक रूसी और यूक्रेन के नागरिक निकले. इसके अलावा जहाज़ में 20 इंडोनेशियाई नागरिक भी सवार थे. उन्हें पता ही नहीं था कि जहाज़ अवैध रूप से मछलियां पकड़ रहा था. अधिकारियों ने इन्हें मानव तस्करी के शिकार के तौर पर दर्ज किया.
आंद्रे डोलगोव का कप्तान अल्केजेंडर मैटवीव चार महीने के लिए जेल भेज दिया गया. उस पर 11 हज़ार पाउंड का जुर्माना भी लगाया गया. बाक़ी रूसी और यूक्रेनी नागरिकों को उनके देश के अधिकारियों के हवाले कर दिया गया.
पर, अभी काम ख़त्म नहीं हुआ था. अधिकारी अब आंद्रे डोलगोव के कंप्यूटर और नेविगेशन सिस्टम को खंगाल रहे हैं.
इससे मिलने वाले आंकड़ों की मदद से मछली पकड़ने के आपराधिक नेटवर्क का पर्दाफ़ाश करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
आंद्रे डोलगोव का मालिक एक रूसी कारोबारी है, जिसका ताल्लुक़ रूसी माफ़िया से बताया जा रहा है.
अब इंडोनेशिया की सरकार ने तय किया है कि आंद्रे डोलगोव की मरम्मत करके इसे अवैध जहाज़ पकड़ने के मिशन में लगाया जाएगा.
(यह लेख बीबीसी फ़्यूचर की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी फ़्यूचर के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं.)
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